दैनिक जागरण की प्रिंटलाइन से भी जाहिर होने लगा एमएमजी का दबदबा

दैनिक जागरण ने चुपके-चुपके प्रिंटलाइन में बदलाव कर दिया है. संस्थापक स्व. पूर्णचंद्र गुप्त और पूर्व प्रधान संपादक स्व. नरेंद्र मोहन को मुख्य प्रिंटलाइन से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है और इन दोनों स्वर्गीयों को एक छोटे से बाक्स में समेटकर मुख्य प्रिंटलाइन के ठीक उपर सिरमौर की तरह सजा दिया गया है. मतलब, दोनों ही बातें आ गईं. प्रिंट लाइन से बाहर भी ये लोग हो गए और प्रिंटलाइन के सिरमौर भी बन गए.

फोर्ब्‍स की प्रभावी सेलिब्रिटी में संजय गुप्‍ता भी शामिल

अमेरिका में भारतीय मूल के डॉक्टर और सीएनएन टीवी के एंकर रहे संजय गुप्ता फोर्ब्स द्वारा जारी की गई 10 सबसे ज्यादा प्रभावी सेलिब्रिटी की सूची में शामिल किए गए हैं। गुप्ता को आठवें नंबर पर स्थान दिया गया है। इस सूची में पहले स्थान पर हॉलीवुड डायरेक्टर स्टीवन स्पीलबर्ग हैं।2009 में उन्हें अमेरिका का सर्जन जनरल नियुक्त करने का प्रयास भी किया गया, लेकिन जब उन्हें लगा कि कांग्रेस के सदस्य उनका विरोध कर सकते हैं तो उन्होंने खुद ही अपना नाम वापस ले लिया।

पता नहीं इन्हें शर्म आई या नहीं

दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर और दैनिक हिंदुस्तान। संजय गुप्ता, सुधीर अग्रवाल और शोभना भरतिया। तीन बड़े अखबार, तीन बड़े मीडिया ब्रांड और इनके तीन मालिक। तीनों ऐसे मालिक जिन्हें अपने-अपने ब्रांडों के प्रतीक के रूप में जाना जाता है। तीनों में काबिलियत है। तीनों सिंसीयर हैं। तीनों डायनमिक हैं। तीनों देश व समाज के हित की चिंता करते हुए दिखते हैं। तीनों कभी न कभी किसी न किसी रूप में ताकतवर व्यक्ति, प्रतिष्ठित आदमी, सूझबूझ वाले उद्यमी, सोच-समझ वाले युवा आदि के रूप में अखबारों-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। तीनों का व्यक्तित्व इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि तीनों के जीवन का एक नैतिक पक्ष है, जिसे उनके अधीन काम करने वाले लोग उद्धृत करते हैं, फालो करते हैं, बताते रहते हैं। पर इन तीनों ब्रांडों के तीनों मालिकों के दामन पर धब्बा है। बहुत गहरा धब्बा है। पेड न्यूज का धब्बा। पेड न्यूज को भ्रष्टाचार का दूसरा नाम बताया गया है। इन तीनों मालिकों ने कभी न कभी भ्रष्टाचार को देश के विकास में बाधक जरूर बताया है। पर इन्हीं मालिकों ने बदले हुए समय में भ्रष्टाचार को अंगीकार किया।