पत्रकारिता में संवेदना जरूरी : रमेश शर्मा

: राष्‍ट्रीय पत्रकारिता दिवस पर गोष्‍ठी आयोजित : माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के अध्यक्ष कैलाशचंद्र पंत तथा मुख्यवक्ता वरिष्ठ पत्रकार रमेश शर्मा रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. बृजकिशोर कुठियाला ने की।

पीपी सिंह हटाए गए, संजय को प्रभार

माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय में एक बड़ा उलटफेर होने की सूचना है. कुलपति बीके कुठियाला ने विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष पी. पी. सिंह उर्फ पुष्पेंद्र पाल सिंह को उनके पद से हटा दिया गया है. उनके स्थान पर जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष संजय द्विवेदी को प्रभार सौंपा गया है. सूत्रों के मुताबिक पीपी सिंह के खिलाफ महिला आयोग से एक नोटिस आई है.  विश्वविद्यालय की एक महिला ने पीपी सिंह पर आरोप लगाते हुए महिला आयोग में शिकायत की थी. इसीलिए पीपी सिंह को अल्प समय के लिए पद से बर्खास्त किया गया है.

माखनलाल विवि में छात्रों ने तोड़फोड़ शुरू की

भोपाल से खबर है कि माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय के छात्र आज सड़कों पर उतर आए हैं और नारेबाजी करते हुए विवि में तोड़फोड़ कर रहे हैं. प्राथमिक सूचना के मुताबिक छात्र अपने कुलपति से खफा हैं और उनके विरोध में नारे लगा रहे हैं.

योग के कोर्स को आप संघ का एजेंडा कहेंगे?

: संघ का एजेंडा लागू करने के सवाल पर बोले प्रो. बीके कुठियाला : माखनलाल पत्रकारिता विवि के ‘कुल’ में कलह : माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय की इन दिनों विवादों के कारण पूरे देश में थू-थू हो रही है। कुलपति बीके कुठियाला के खिलाफ अपनों ने ही मोर्चा खोल दिया है। उन पर न सिर्फ अनियमिताओं का आरोप लग रहा है बल्कि भष्ट्राचार के आरोपों से भी वे घिर चुके हैं। जिस दिन से कुठियाला पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति की कुर्सी पर बैठे हैं, उसी दिन से विवाद शुरु हुआ है। कुलपति के हर निर्णय के खिलाफ आवाज उठ रही है।

कुलपति कुठियाला के फर्जीवाड़े पर पत्रिका में खबर

”माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के विवादों में घिरे कुलपति प्रो. बीके कुठियाला पर उनके चयन के समय से ही उंगलियां उठती रही हैं. ‘पत्रिका’ अखबार ने उनके कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में रीडर से लेकर पत्रकारिता विश्वविद्यालय का कुलपति बनने तक के सफर का स्कैन किया तो सनसनीखेज खुलासा हुआ. उन्होंने करियर की शुरुआत में ही कुरुक्षेत्र विवि में रीडर बनने के लिए फर्जीवाड़ा किया था.” यह सब भड़ास4मीडिया का नहीं कहना है. यह सब छपा है पत्रिका, भोपाल में, पहले पन्ने पर. पूरी खबर यहां हैं. पढ़ें.

‘संघी’ होना पाप तो नहीं!

अभी कुछ दिन पहले भड़ास4मीडिया पर माखनलाल के ‘संघी कुलपति’ की पोल खुली खबर पढ़ी. आरोप है कि विश्वविद्यालय की भर्ती परीक्षा में संघ से जुड़े सवाल पूछे गए. आरोप लगाने वाले हैं कांग्रेसी. मेरा पूछना है कि क्या संघी होना पाप है. प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी विचारधारा से प्रभावित है. देश का बड़ा वर्ग संघ की विचारधारा से परोक्ष-अपरोक्ष रूप से इत्तेफाक रखता है.

माखनलाल में बिना प्रवेश परीक्षा प्रवेश!

कुलपति का तुगलकी फरमान : भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय इस मायने में अनूठा संस्थान रहा है कि एक तो ये अकेला पत्रकारिता को समर्पित विश्वविद्यालय है, और दूसरा कि यहां से निकले पत्रकार देसी खुशबू लिए होते हैं. उन्हें भाषा के साथ साथ आम आदमी के मुद्दों और सरोकारों की समझ होती है। वर्तिका नंदा के शब्दों में कहें तो यहां परीकथा के किरदार…गुड्डे और गुड़िया पढ़ने नहीं आते हैं जैसा कि दिल्ली स्थित संस्थानों में आपको मिलेगा।