भोपाल से सूचना है कि माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीयय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में अब पूरी तरह शांति बहाल हो गई है. छात्रों का आंदोलन आखिर रंग लाया. कुलपति प्रो बीके कुठियाला ने बुधवार शाम विभागाध्यक्ष पुष्पेंद्र पाल सिंह को फिर से पत्रकारिता विभाग का विभागाध्यक्ष बहाल कर दिया. कुलपति की ओर से रजिस्ट्रार एसके त्रिवेदी ने विवि परिसर में चल रहे धरनास्थल पर पहुंचकर इस बात की घोषणा की. रजिस्ट्रार ने कहा कि श्री सिंह को सम्मान सहित उनके पद पर बहाल किया जाता है. इसके साथ ही छात्रों के खिलाफ दर्ज कराए गए मुकदमे भी विवि प्रशासन वापस ले लेगा. यह प्रक्रिया गु़रुवार सुबह से शुरू हो जाएगी. कुलपति के ताजा रुख के बाद छात्रों का कामयाब आंदोलन अपनी पूर्णता को पहुंच गया. यह सारा घटनाक्रम रात 8 बजे के बाद विवि परिसर में मीडिया की मौजूदगी में हुआ.
गौरतलब है कि राज्य महिला आयोग ने मंगलवार को इस पूरे मामले में विवि प्रशासन को मनमाने व्यवहार के लिए लताड़ भी लगाई थी. आयोग का निर्देश था कि श्री सिंह को मंगलवार शाम तक ही पद पर बहाल कर दिया जाए। उसी समय रजिस्ट्रार ने आयोग को लिखित में दिया था कि श्री सिंह को तत्काल बहाल करने की प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं. लेकिन प्रो कुठियाला इसे भी अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाए रहे. सूत्रों के मुताबिक इस दौरान कुलपति दफ्तर ने तमाम कानूनी अड़ंगों की तलाश की लेकिन कोई मंतर काम नहीं करने के बाद श्री सिंह को बहाल करने का लिखित आदेश जारी करना पड़ा.
कुलपति की नीतियों से छात्र लंबे समय से नाराज थे और पिछले महीने भी उनके खिलाफ आंदोलन हुआ था. लेकिन तब वरिष्ठ शिक्षकों के समझाने से मामला शांत हो गया. लेकिन जब 23 सितंबर को श्री सिंह को महिला आयोग के नोटिस का हवाला देकर एकदम से हटा दिया गया तो छात्र सन्न रह गए. इसके तुरंत बाद छात्रों का जोरदार आंदोलन शुरू हो गया और विवि के पूर्व छात्र भी उनके समर्थन में उतर आए. हफ्ते भर चले आंदोलन को भोपाल और देश के विभिन्न मीडिया संस्थानों में कार्यरत प्रतिष्ठित पत्रकारों से भी खुला समर्थन मिलने के बाद विवि प्रशासन पर दबाव ज्यादा बढ़ गया था. इसके अलावा महिला आयोग में हुई सुनवाई के दौरान आरोप लगाने वाली शिक्षिका के आयोग के सामने उपस्थित ही ना होने से यह साफ हो गया कि आरोपों में कितना दम है. बहरहाल अब उम्मीद की जा सकती है कि विवि में एक बार फिर से शिक्षा का खुला माहौल बनेगा और शांति स्थायी साबित होगी.












Ashok chaturvedi
September 29, 2010 at 6:26 pm
ye to hona hi tha.satyamev jayte.such ka sath de rahe sabhi sathiyon ko badhai.
Ashok chaturvedi
September 29, 2010 at 6:36 pm
satyamev jayte. kutiyala ji ko bhagwan ne sadbudhi de hi de.patrakarita vibhag ke or such ka sath de rahe sabhi sathiyon ko hardik badhai. pp sir ke hum sabhi student aage bhi isi tarah patrkarita ke adarsho per kutharghat nahi hone denge.
bhadasi
September 29, 2010 at 6:59 pm
bahut dino bad nishpaksh soochana ke liye bhadas4media ko badhai
rk
September 29, 2010 at 7:50 pm
dekha na
Hindu Hindi Hindustani
September 30, 2010 at 7:40 am
अब अगली मुहिम भ्रष्ट, तंगदिल और तंगदिमाग कुलपति कुठियाला को विश्व विद्यालय से बाहर करने की होनी चाहिए। यह नहीं भूलना चाहिए कि जख्मी साँप कहीं ज्यादा khatarnaak होता है।
mukesh tiwari
September 30, 2010 at 9:52 am
satya parajit nahi hota,,, yah bat sidha ho gaye hai. kulpati ko hatakar ab mahol sudharne ki jarurat hai
DR.VIMLENDRA SINGH RATHORE
September 30, 2010 at 1:07 pm
shree singh ko badhai , yah sachai ki jeet hi.
Rajesh Ranjan
October 7, 2010 at 8:37 pm
P P singh sir ki sachhai ki jeet hai …ab rajistar aur kulpati ko apne pad se jana hoga…
Rajesh ranjan