युवा और प्रतिभाशाली पत्रकार मयंक सक्सेना ने थाने में कैद मां के बारे में सोचते हुए एक कविता लिखी है. इन दिनों यूएनआई टीवी, दिल्ली में कार्यरत मयंक ने ‘justice for मां’ कंपेन से खुद को जोड़ते हुए इस मामले से संबंधित सभी खबरों, तस्वीरों, वीडियो को अपने सभी परिचितों के पास मेल से भेजा है और ‘justice for मां’ कंपेन से जुड़ने का आग्रह किया है. मयंक की कविता इस प्रकार है-
मां थी थाने में रात भर
घर की दहलीज
के अंदर
स्वर्ग था जिसका
मेरी वो मां
बैठी रही
पुलिसिया गुंडों के बीच
रात भर
जिसने कभी
किसी से बात नहीं की
ऊंचे स्वर में भी
वो सुनती रही
अपशब्द
जो दिए जाते रहे
उसी के नाम पर
मेरी मां
ने मुझे बताया था
बचपन में
कि
गलत काम करोगे
तो पुलिस पकड़ के
ले जाएगी
पर मेरी मां ने
तो कभी कुछ गलत न किया
पर फिर भी
वो झेलती रही
अपने बेटों की उम्र के
सिपाहियों का
पुलिसिया कहर
मेरी मां बैठी रही
थाने में
रात भर
मैं कैसे समझाऊं
उसको
कि उसका बेटा
पढ़ लिख कर
बड़ा आदमी हुआ है
उसका नाम है बहुत
क़ाबिल बनाया था
उसने मुझे
और मैं
चाह कर भी
पाया न कुछ कर….
मेरी मां
बैठी रही
थाने में
रात भर.
-मयंक सक्सेना












awanish yadav
October 19, 2010 at 2:56 am
mayank bhaiya iss sab ka reason kewal apnay beech aa gayi gandgi hi hai aur kuch nahi, hum sabko isko door karne ki kosish karni padegi.
saba
October 19, 2010 at 7:49 pm
jabardast Mayank Saxena jee
bahut he khoobsurat kavita likhi hai apne jo darshati hai ke maa ke saath jo hua wo bahut he jyada nirmam tha. good very good
jagdish tiwari
October 19, 2010 at 8:31 pm
bahut achhi kavita ke liye sadhubad
rajeev kumar
October 28, 2010 at 2:19 am
ies kavita ko padhaka maa ki kasam ro diya.