शेष नारायण सिंह भले 60 पार के हैं लेकिन उनके तेवर नौजवानों से कम नहीं. हरदम ताल ठोंककर ललकारने और लिखने को तैयार. प्रिंट और इलेक्ट्रानिक वालों ने जिन दिनों शेष नारायण सिंह को उनके तेवर के कारण किनारे कर दिया था, उन मुश्किल दिनों में न्यू मीडिया के लोगों ने उन्हें राष्ट्रीय फलक में स्थापित किया. और, उन्हीं दिनों की ट्रेनिंग में शेषजी ने अपना एक ब्लाग भी बना लिया.
नौकरियां करते रहने के बावजूद हमेशा आजाद पत्रकार की माफिक चहलकदमी करने वाले शेषजी अपना लिखा यहां वहां जहां तहां भेजने के साथ साथ अपने ब्लाग पर भी डाल दिया करते हैं. अगर कहीं छप छपा गया तो अच्छी बात, नहीं तो ब्लाग है ही. शेषजी के ब्लाग की मीमांसा आज एनडीटीवी के प्रखर जर्नलिस्ट रवीश कुमार ने हिंदुस्तान अखबार के अपने ब्लाग वार्ता कालम में की है. पढ़ने के लिए क्लिक करें- ब्लाग वार्ता में शेषजी












मदन कुमार तिवरी
March 4, 2011 at 10:26 am
सर जी आपके ब्लाग पर मैं भी गया और वहां आपसे सही रुप में परिचय हुआ । धीरे-धीरे लगता है मैं आपका फ़ैन हो जाउंगा ।