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संघियों-भाजपाइयों का बड़ा खेल, फर्जी लिस्ट जारी कर कांग्रेसियों को स्विस बैंक में काला धन रखने वाला बताया!

पिछले तीन चार दिनों से नेट की दुनिया में गजब की हलचल है. विकीलीक्स की तरफ से कथित रूप से जारी एक लिस्ट इधर से उधर फारवर्ड, सेंड, पब्लिश हो रही है. इस लिस्ट को विकीलीक्स द्वारा जारी बताया गया है और इसमें दर्जन भर से ज्यादा गैर-भाजपाई नेताओं के नाम और स्विटजरलैंड के बैंक में जमा उनकी धनराशि के बारे में उल्लेख किया गया है. कल इससे संबंधित एक खबर भड़ास4मीडिया पर भी प्रकाशित हुई.

पिछले तीन चार दिनों से नेट की दुनिया में गजब की हलचल है. विकीलीक्स की तरफ से कथित रूप से जारी एक लिस्ट इधर से उधर फारवर्ड, सेंड, पब्लिश हो रही है. इस लिस्ट को विकीलीक्स द्वारा जारी बताया गया है और इसमें दर्जन भर से ज्यादा गैर-भाजपाई नेताओं के नाम और स्विटजरलैंड के बैंक में जमा उनकी धनराशि के बारे में उल्लेख किया गया है. कल इससे संबंधित एक खबर भड़ास4मीडिया पर भी प्रकाशित हुई.

क्या स्विस बैंक में सबसे ज्यादा धन नीरा राडिया ने जमा कर रखा है?” शीर्षक से. फेसबुक पर एक पत्रकार अमित मोदी द्वारा जारी की गई सूचना के हवाले से. इस खबर में भी हमने संदेह व्यक्त किया था कि फेसबुक पर जो सूचना अमित मोदी ने दी है, उसका कोई स्रोत नहीं लिखा है, किस हवाले से वे ये सूचना दे रहे हैं, इसका कोई जिक्र नहीं किया. बाद में इस पूरे मामले की पड़ताल की गई तो पता चला कि कुछ भाई लोगों ने विकीलीक्स की साइट के उपरी हिस्से के साथ एक फर्जी लिस्ट जोड़कर उसे प्रामाणिक बनाकर इधर-उधर भेजने में लगे हैं. इसे विकीलीक्स द्वारा जारी बताया गया है. पर पता चला है कि विकीलीक्स ने ऐसी कोई लिस्ट जारी नहीं की है.

जिस रैपिडशेयर पर जारी किए जाने की बात की जा रही है, वहां कोई भी किसी तरह का नकली-असली डाक्यूमेंट होस्ट कर सकता है, अपलोड कर सकता है. कुछ एक ब्लागों में इसी फर्जी लिस्ट को सही मानकर लंबी चौड़ी कथा प्रकाशित कर दी गई है. जबकि सच्चाई इससे अलग है. सूत्रों के मुताबिक संघ और भाजपा के लोग देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ बने जनमानस का अपने तरीके से और अपने पक्ष में इस्तेमाल करने के लिए जल्दबाजी में कई कई साजिशें रच रहे हैं. इसीलिए ये लोग न्यू मीडिया का सहारा ले रहे हैं जहां सूचनाएं ज्यादा जल्दी और बिना किसी छानबीन के प्रकाशित-प्रकट हो जाया करती हैं.

न्यू मीडिया के भेड़चाल का इस्तेमाल अफवाहबाज अपने हिसाब से करने की रणनीतियां बना रहे हैं और अमल भी कर रहे हैं. फर्जी विकीलीक्स लिस्ट इसी का नमूना है. भारत में विकीलीक्स का द हिंदू ग्रुप से टाइअप है. अगर कोई सूचना विकीलीक्स की तरफ से प्रामाणिक तौर पर जारी किया जाता है तो अगले दिन भारत में उसे द हिंदू तुरंत प्रकाशित कर देगा और दूसरे मीडिया हाउस भी उसे उठाने, दिखाने, प्रकाशित करने में देर न लगाएंगे क्योंकि विकीलीक्स द्वारा जारी कंटेंट को उनके हवाले से अपने देश में दिखाए जाने की परंपरा रही है. पिछले दिनों राहुल, सोनिया आदि से संबंधित जो खुलासे विकीलीक्स द्वारा किए गए, उसे भारतीय मीडिया ने प्रमुखता से दिखाया. पर इस बार विकीलीक्स के नाम का इस्तेमाल कुछ फर्जी लोग कांग्रेस के खिलाफ कर रहे हैं.

…एक फर्जी डाक्यूमेंट, जो इंटरनेट की दुनिया में यहां वहां प्रसारित प्रकाशित हो रहा है…

माना कि कांग्रेस करप्ट है, करप्शन को बढ़ावा दे रही है, इसके कई नेता करप्शन शिरोमणि हैं, पर कट पेस्ट के जरिए फर्जी व सनसनीखेज खबरें तैयार कर किसी का मानहानि करना अपराध है. नीचे हम वो फर्जी दस्तावेज दे रहे हैं जिसे लोग एक दूसरे को मेल कर रहे हैं और इस अंदाज में मेल कर रहे हैं कि देखिए, कितना बड़ा धमाका उनके हाथ लगा है. पर भाइयों, इस फर्जीवाड़े को समझ जाइए. अगर स्विस बैंक में धन जमा करने वाले भारतीयों का नाम खुलेगा तो उसमें कई भाजपाई भी मिलेंगे क्योंकि करप्शन के मामले में कांग्रेस से कम नहीं है भाजपा.

ये जरूर है कि कांग्रेस ने सत्ता की मलाई बहुत दिनों तक खाई है और खा रही है, इस कारण वहां करप्शन संस्थाबद्ध हो गया है जबकि भाजपा को सत्ता की मलाई खाने का मौका कम मिला है इसलिए वहां भूख-प्यास ज्यादा है. और, जिन राज्यों में भाजपा सत्ता में है, वहां का हाल कांग्रेसी राज्यों से अलग नहीं है. येदुरप्पा, निशंक आदि का उदाहरण लिया जा सकता है. इसलिए, न्यू मीडिया के साथियों से अपील है कि किसी दस्तावेज को सच मानने की जगह उसकी पड़ताल जरूर करें क्योंकि हो सकता है कि हमारी आपकी ताकत का कोई बेजा इस्तेमाल करने की फिराक में हो.

संभव है, मेरी बात आंशिक सच हो, या पूरी तरह गलत हो. लेकिन अब तक जो मुझे समझ में आया उसे आपके सामने पेश किया. अगर आपके पास कोई और तथ्य हों तो कृपया नीचे के कमेंट बाक्स का इस्तेमाल करते हुए बताएं, सूचित करें.

यशवंत

एडिटर

भड़ास4मीडिया

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
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0 Comments

  1. narayan pargain

    August 6, 2011 at 8:24 am

    नीचे हम वो फर्जी दस्तावेज दे रहे हैं जिसे लोग एक दूसरे को मेल कर रहे हैं और इस अंदाज में मेल कर रहे हैं कि देखिए, कितना बड़ा धमाका उनके हाथ लगा है. पर भाइयों, इस फर्जीवाड़े को समझ जाइए plz send me ho ager dam do send jaroo jo uper likha hai bhai yaswant ji 09837261570

  2. vimlesh

    August 6, 2011 at 10:32 am

    यसवंत जी बहुत बहुत धन्यवाद बेचारे कांग्रेसियों को बेवजह बदनाम होने से बचा लिया ये भ ज पा वाले है ही ऐसे .
    लेकिन जरा एक नजर ६/८/११ के दैनिक जागरण पर दाल लेते
    देश में होने वाले अन्याय के खिलाफ विदेश की संसद दुखी है लेकिन यहाँ की सरकार कही है यहा पे सब शांति शांति है

    वाशिंगटन, एजेंसी : अमेरिका में सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद फ्रैंक पैलोन ने प्रतिनिधिसभा में प्रस्ताव पेश कर कहा कि कश्मीरी पंडितों की धार्मिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों का वर्ष 1989 से ही हनन हो रहा है। प्रस्ताव कश्मीरी पंडितों के खिलाफ आतंकवादी हिंसा, धार्मिक स्वतंत्रता में आई कमी तथा मानवाधिकार हनन की निंदा करता है। प्रस्ताव में कहा गया कि इस समस्या को कश्मीरी पंडित दो दशक से अधिक समय से झेल रहे हैं। प्रस्ताव में इस बात का भी विशेष उल्लेख किया गया कि क्षेत्र में आतंकवादी ढांचे को तहस-नहस किया जाए और आतंकवादियों को उनके कार्यो के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। प्रस्ताव में इस बात का जिक्र किया गया कि कश्मीरी पंडित कश्मीर के मूल निवासी हैं और वे अपनी धरोहर और संस्कृति को हजारों साल से सहेजे हुए हैं। इसमें कहा गया कि कश्मीरी पंडितों के मानवाधिकार का हनन हो रहा है जिसके चलते दो दशक से भी अधिक समय के दौरान उनकी धार्मिक स्वतंत्रता कम हो गई है। प्रस्ताव में कहा गया कि कश्मीर घाटी में कश्मीरी पंडितों की आबादी 1989 में चार लाख थी जो अब घटकर 4,000 से भी कम हो गई है और सैकड़ों कश्मीरी पंडित शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं। प्रस्ताव के अनुसार अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने कश्मीरी पंडितों के खिलाफ विदेशी आतंकवादियों और विदेश आतंकवादी संगठनों द्वारा फैलाए जा रहे भय और हिंसा का उल्लेख किया है। दूसरी ओर इस प्रस्ताव का हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने स्वागत किया है। फाउंडेशन के निदेशक समीर कालरा ने कहा, वाशिंगटन डीसी में कई नीति निर्माता कश्मीरी पंडितों की दुदर्शा उजागर करने की बहुम कम कोशिश करते हैं, लेकिन कांग्रेस सदस्य पैलोन ने इस गंभीर मुद्दे के बारे में आवाज उठाई है।

    वाह रे पत्रकार

  3. patrakar

    August 6, 2011 at 5:44 pm

    ‘संघियों-भाजपाइयों का बड़ा खेल’ can u prove…dont become party

  4. kunal

    August 7, 2011 at 9:55 am

    yaswantji, aapne kis aadhar per is list ko rss-bhajpawalon ka prayas bata diya. Jis prakar se aap duniya bhar ke logo ko sahi khabar aur sachchi khabar ka updes dete hain, kya wahi manak aap per nahi fit hota? Achach hota ki aap is bare me likhne se pehle khabar ki satyta zaanch lete. Nispach banne ya dikhne ke liye satya ki bali chadana zaroori nahi hai.

  5. p negi

    August 8, 2011 at 4:54 am

    ऐसा लग रहा है की ये लेख “यशवंत” के नाम से “दिग्विजय सिंह” ने लिखा हो…

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