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‘हिंदी को ऐसे कई केशव राय चाहिए’

: विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाले कई युवा व प्रतिभाशाली हस्तियों को विश्व हिंदी सेवा सम्मान से विभूषित किया गया : अंतरराष्ट्रीय परिसंवाद और विश्व हिंदी सेवा सम्मान अलंकरण समारोह उज्जैन में सम्पन्न :

: विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाले कई युवा व प्रतिभाशाली हस्तियों को विश्व हिंदी सेवा सम्मान से विभूषित किया गया : अंतरराष्ट्रीय परिसंवाद और विश्व हिंदी सेवा सम्मान अलंकरण समारोह उज्जैन में सम्पन्न :

हिन्दी दिवस के अवसर पर उज्जैन में अंतरराष्ट्रीय परिसंवाद और विश्व हिंदी सेवा सम्मान अलंकरण समारोह का आयोजन किया गया. परिसंवाद ‘विश्व पटल पर हिन्दी का बदलता स्वरूप’ पर एकाग्र था. इस मौके पर उत्कृष्ट हिंदी सेवा के लिए देश-दुनिया के अनेक साहित्यकार, संस्कृतिकर्मी और हिंदीसेवियों को विश्व हिंदी सेवा सम्मान से विभूषित किया गया. समारोह उज्जैन स्थित कालिदास संस्कृत अकादमी में दो सत्रों में संपन्न हुआ. विविध गद्य-पद्य और अन्य विधाओं जैसे कविता, गीत, उपन्यास, कहानी, आलोचना, संचार माध्यम, ब्लागिंग, सिनेगीत वर्गों के अंतर्गत ये अलंकरण अर्पित किए गए.

कार्यक्रम के आयोजक मालवा रंगमंच समिति, उज्जैन और कृतिका कम्यूनिकेशन, मुंबई के संस्थापक अध्यक्ष केशव राय थे. वक्ताओं ने केशव राय की इसलिए जमकर तारीफ की कि उन्होंने निजी प्रयासों से अंतरराष्ट्रीय स्तर का आयोजन किया और हिंदी क्षेत्र के प्रतिभाशाली लोगों को एक मंच पर बिठाकर बहुत कुछ रचने-कहने-जानने का मौका प्रदान किया. हिंदी दिवस के अवसर पर पूरे देश में हुए आयोजनों में उज्जैन में हुआ यह आयोजन कई मामलों में अदभुत और ऐतिहासिक था. अमेरिका से लेकर रांची, शिमला, मुंबई समेत कई जगहों के ऐसे लोगों को बुलाया गया जो चुपचाप, शोर व प्रचार से दूर रहकर हिंदी को जीते हुए अलग-अलग क्षेत्रों में बेहद नया कुछ कर रहे हैं.

केशव राय ने आयोजन के बारे में बताया कि इस कार्यक्रम का स्थान बहुत सोच-विचार के साथ उज्जयिनी को चुना गया. यहाँ से सदैव ही परिवर्तन की हवा चलती आई है. अब आगे की हमारी भाषा, हमारी संस्कृति की दिशा का निर्धारण भी यहीं से हो, यह जरूरी है. इस अवसर पर उत्कृष्ट हिंदी सेवा के लिए दुनिया के अनेक देशों के साहित्यकार और हिंदीसेवियों को विश्व हिंदी सम्मान से विभूषित किया गया.

यहां सम्मानित हुये लोगों में अपने पहले ही उपन्यास से चर्चा में आयीं महुआ मांझी (रांची), विदेश में हिन्दी की ध्वजा फहराने वाली लेखिका डॉ. अन्जना संधीर (यूएसए), नवनीत के सम्पादक श्री विश्वनाथ सचदेव (मुंबई), थ्री इडियट के गीतकार स्वानंद किरकिरे, सिनेजगत की मशहूर गायिका कविता सेठ, कवि देवमणि पाण्डे, डॉ. त्रिभुवन नाथ शुक्ल (भोपाल), ऐतिहासिक उपन्यासकार डॉ.शरद पगारे, गीतकार चंद्रसेन विराट (इंदौर), भड़ास4मीडिया के संस्थापक यशवंत सिंह (दिल्ली), आचार्य एवं समीक्षक डॉ. शैलेन्द्र कुमार शर्मा (उज्जैन), कथाकार एचआर हरनोट (शिमला), डॉ करुणाशंकर उपाध्याय (मुंबई), गायत्री शर्मा, भीका शर्मा (इंदौर) आदि शामिल हैं. इस मौके पर प्रकाशित स्मारिका ‘हिन्दी विश्व’का लोकार्पण अतिथियों द्वारा किया गया.

‘विश्व पटल पर हिन्दी का बदलता स्वरूप’पर एकाग्र परिसंवाद वरिष्ठ पत्रकार श्री विश्वनाथ सचदेव (मुंबई) की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ. परिसंवाद का विषय प्रवर्तन विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के आचार्य एवं समीक्षक डॉ. शैलेन्द्र कुमार शर्मा ने किया। परिसंवाद में शामिल होने वाले विद्वानों में डॉ त्रिभुवन नाथ शुक्ल (भोपाल), प्रसिद्ध सिने गीतकार श्री स्वानन्द किरकिरे, कविता सेठ, नन्दलाल पाठक (मुंबई), यशवंत सिंह (दिल्ली), डॉ. अंजना संधीर, महुआ मांझी , जवाहर कर्नावट (अहमदाबाद) आदि प्रमुख  थे. काव्य संध्या में श्री स्वानन्द किरकिरे (मुंबई), यशवंत सिंह (दिल्ली), नेहा शरद, डॉ.शिव चौरसिया, श्री पवन जैन, श्री देवमणि पाण्डे (मुंबई), डॉ पिलकेन्द्र अरोरा आदि ने अपनी रचनाओं से मंत्र मुग्ध किया.

आयोजन की सबसे खास बात यह रही कि बिना किसी सरकारी मदद के लिए हिंदी दिवस के मौके पर केशव राय ने अंतरराष्ट्रीय परिसंवाद व गीत संध्या का आयोजन किया. पूरे उज्जैन व इंदौर में आयोजन की चर्चा रही. केशव राय का कहना है कि हिंदी के प्रति अपने प्रेम को विस्तार देने के लिए वे ऐसे आयोजनों को जारी रखेंगे, भले ही इसके लिए उन्हें निजी तौर पर लाखों रुपये होम करने पड़े. देश के विभिन्न कोनों से आए विद्वानों ने इस आयोजन के जरिए एक दूसरे से मिलने व एक दूसरे को समझने का मौका हासिल किया. अमेरिका की डा. अंजना संधीर ने अपने देश प्रेम व हिंदी प्रेम के जिस जज्बे की जानकारी दी, उसे सुनकर हर एक शख्स का दिल उनके प्रति सम्मान से भर उठा. डा. अंजना ने अमेरिका में हिंदी के लिए अपने संघर्ष की गाथा सुनाई. देश प्रेम का यह जज्बा ही उन्हें दुबारा अमेरिका से भारत खींच लाया है और वे बच्चों सहित फिर से अहमदाबाद में रहने लगी हैं.

डा. अंजना संधीर के बहुआयामी व्यक्तित्व की झलक इस आयोजन के जरिए मिली. बतौर टीचर, बतौर गायिका, बतौर कवियत्री, बतौर एक ह्यूमन बीइंग, बतौर महिला… वे हर मोर्चे पर श्रेष्ठ दिखीं. उधर, युवा लेखिका महुआ मांझी, जो रांची से चलकर आईं थीं, ने अपनी रचना यात्रा के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी. बेहद कम उम्र में उत्कृष्ट उपन्यास की रचना कर वे न सिर्फ लोकप्रिय हुई हैं बल्कि लाखों लोगों की पसंदीदा लेखिका भी बन चुकी हैं. मुंबई से पधारे कविता सेठ, स्वान्नद किरकिरे, देवमणि पांडेय आदि ने अपने अपने फन का इजहार किया. स्वानंद के मौलिक विचार, मीठी आवाज, सहज-सरल व्यक्तित्व बहुतों को भाया. वे लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बने रहे. आल इज वेल का इजहार लोगों ने कई बार उनके सामने किया. थ्री इडियट के गीतकार होने के कारण बुलंदी पर पहुंचने वाले किरकिरे साहब के व्यक्तित्व में सहजता का जो जादू दिखा, उसने सबके दिल को जीता. शरद जोशी की पुत्री व अभिनेत्री नेहा शरद ने शरदजी की याद ताजा करा दी.

शरद जी की एक रचना का अपने अंदाज में पाठ कर उन्होंने बहुतों को अतीत की दुनिया में पहुंचा दिया. नेहा की प्रतिभा, समझ व अभिनय ने सबको कायल बनाया. देवमणि पांडेय ने जब अपनी गज़लों, शेरों को सुनाना शुरू किया तो लोग वाह वाह कर उठे. देवमणि के शेर सीधे लोगों के दिल में उतरे. कम समय में उन्होंने जितना कुछ सुनाया, उसे सुनकर लोगों को तात्कालिक तृप्ति तो मिली लेकिन उनकी भूख शांत नहीं हुई. देवमणि पांडेय के गीत फिल्मों में लिए जा चुके हैं. वे मंचों पर छा जाने के लिए जाने जाते हैं. कार्यक्रम के बीच में सभी अतिथियों ने उज्जैन शहर से करीब 15 किमी दूर विकलांग व बेसहारा लोगों के लिए बने आश्रम में जाकर पंगत में बैठकर भोजन किया और आश्रम की गतिविधियों के बारे में स्वामी जी से जानकारी हासिल की. सभी ने स्वामीजी के प्रयासों की भूरि-भूरि प्रशंसा की. हालांकि भोजन के लिए इतनी लंबी यात्रा होने के कारण कई लोग थोड़े असहज भी दिखे.

डीआईजी पवन जैन ने काव्य संध्या के दौरान थोड़ा बोर किया लेकिन लोगों को यह अच्छा लगा कि पुलिस वाला होते हुए भी पवन जैन बेहद संवेदनशील, सरल व साहित्यिक व्यक्तित्व से लैस हैं. कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने बार-बार हिंदी पुत्र केशव राय के प्रयासों की भूरि भूरि प्रशंसा की. सरकारी फंड के जरिए हिंदी दिवस पर औपचारिकता पूरी करने वाले सरकारी विभागों व सरकारों को केशव राय से प्रेरणा लेनी चाहिए कि आखिर किस तरह एक व्यक्ति अपने दम पर एक सफल आयोजन कर हिंदी के उत्थान में अभूतपूर्व योगदान दे रहा है.

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0 Comments

  1. dhirendra pratap singh

    September 27, 2010 at 11:19 am

    yashwant bhai ko badhai

  2. akash rai

    September 27, 2010 at 12:33 pm

    केशव राय ji को badhai

  3. Bhika Sharma

    September 27, 2010 at 1:08 pm

    “केशव राय जी ने हिन्दी के लिए इतना बड़ा और सफल आयोजन कर वाकई दिखा दिया कि हिन्दी की प्रगति किसी सरकारी कृपा की मोहताज नहीं है। मैने अपने उद्दबोधन में बिल्कुल सही कहा था कि केशव राय जी वो जामवंत है जो हम जैसे हनुमानों को अपनी शक्ति का बोध कराते है। केशव राय जी नि: संदेह एक साहसी और दूरदर्शी व्यक्ति है।”

  4. Shravan Kumar Shukla

    September 27, 2010 at 1:26 pm

    “केशव जी का प्रयास अद्वितीय है”
    “नमन”

  5. seema azmi

    September 28, 2010 at 6:43 am

    Keshav ji badhayi ke patr hain..hamare desh ke so called pratinidhiyon ko inase seekh leni chahiye jo arbon rupaye dakar kar desh ki badnaami karne mein sharm mahasos nahi kar rahe hain..aur ek vyakti bina kisi madat ke apna kaam kar raha hai…..aur unn sabhi logo ko badhayi jo iss tarah ka kaam kar rahen hain.. yaa sahyog kar rahe hain..

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