प्रभात खबर ने गया से शुरू किया अपना 10वां संस्‍करण

महातीर्थ गया से प्रभात खबर आज (21 अक्तूबर, 2011) से प्रकाशित होने लगा है. महात्मा बुद्ध की इस धरती, जहां से दुनिया को ज्ञान की रोशनी मिली, यहां से प्रकाशन शुरू करने वाला प्रभात खबर पहला दैनिक अखबार है. इसी के साथ प्रभात खबर बिहार का भी पहला ऐसा दैनिक अखबार हो गया है जो राज्‍य के चार शहरों, पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और गया से प्रकाशित हो रहा है.

झारखंड के चार शहरों (रांची, जमशेदपुर, धनबाद व देवघर) से प्रकाशित होने वाला प्रभात खबर अकेला अखबार पहले से है. प्रभात खबर को पूर्वी भारत (बिहार, झारखंड व बंगाल) के सबसे ज्‍यादा 10 शहरों (रांची, पटना, जमशेदपुर, धनबाद, देवघर, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, गया, कोलकाता और सिलीगुड़ी) से प्रकाशित होने का भी गौरव प्राप्त है. इन तीन पूर्वी राज्‍यों के इतने शहरों से कोई दूसरा अखबार प्रकाशित नहीं होता है. इतना ही नहीं, बड़ी पूंजी वाले देश के बड़े घराने अपने प्रसार अभियान के तहत जहां देश के दूसरे हिस्सों में कम पूंजी वाले अखबारों की जमीन हड़प कर उन्हें बंद होने पर मजबूर कर रहे हों या कमजोर कर रहे हों, वहां छोटी पूंजी (अपने प्रतिस्पर्धियों की पूंजी के मुकाबले) के बल फैलने-ब़ढने का श्रेय भी अकेले प्रभात खबर को जाता है. 5000 करोड़ टर्न-ओवर या इससे भी ज्‍यादा बड़ी अखबार कंपनियों, देश के तीन सबसे बड़े अखबारों के मुकाबले देश में सिर्फ प्रभात खबर ही मजबूती से टक्कर ले रहा है. इस प्रतिस्पर्धा के बीच प्रभात खबर के बढ़ने की गति भी तेज हुई और आज वह देश के 10 बड़े हिंदी अखबारों के मुकाबले पाठक संख्या में सबसे तेज वृद्धि दर दर्ज कर रहा है.

पाठक सर्वेक्षण करनेवाली स्वतंत्र संस्था आइआरएस के 2011 की दूसरी तिमाही के सर्वे आंकड़ों के मुताबिक प्रभात खबर ने 2010 की दूसरी तिमाही के मुकाबले 41 फीसदी औसत पाठक जोड़े हैं और कुल पाठक संख्या के लिहाज से प्रभात खबर देश के शीर्ष 10 अखबारों में सातवें पायदान पर पहुंच गया है. आइआरएस के मुताबिक 2011 की दूसरी तिमाही में बिहार में प्रभात खबर की औसत पाठक संख्या में 27 फीसदी और अकेले पटना में 39 फीसदी की वृद्धि पहली तिमाही की तुलना में हुई है. यहां ध्यान देने की बात यह है कि इस आंकड़े में मुजफ्फरपुर और भागलपुर संस्करणों की पाठक संख्या शामिल नहीं है. प्रभात खबर की झारखंड में रोजाना लगभग चार लाख प्रतियां बिक रही हैं. तीनों राज्‍यों में कुल मिला कर प्रभात खबर की इस समय 7.35 लाख से ज्‍यादा प्रतियां रोजाना बिक (स्नेत- ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशन जनवरी-जून, 2011 और सीए प्रमाणपत्र) रही हैं. बड़े अखबार, बड़े महानगरों या धनी राज्‍यों से बिहार-झारखंड में आये हैं या आ रहे हैं, लेकिन अविभाजित बिहार के रांची में लगभग 27 साल पहले (14 अगस्त 1984) जन्म लेने वाला प्रप्रभात खबर यहीं की मिट्टी से निकलकर अपने बलबूते तेजी से ब़ढ-फैल रहा है.

ऐसा इसलिए हो रहा है, क्योंकि प्रभात खबर की पत्रकारिता बाजार और भीड़ की पत्रकारिता नहीं है. प्रप्रभात खबर को अपनी मिट्टी यानी अपनी जन्मभूमि से रागात्मक लगाव है. हमारी पत्रकारिता का उद्देश्य व ध्येय साफ है, हम पारदर्शी तरीके से काम करते हैं. हमारी पत्रकारिता की मूल कसौटी है कि हमारे पाठक या हमारा समाज या राजनीति या राज्‍य, आज ज्ञान और विकास के जिस पायदान या स्तर पर खड़े हैं, वहां से हर दिन आगे ब़ढें. हम लोग विकास की दौड़ में पीछे छूट गये राज्‍य हैं. हम बीमार राज्‍यों में गिने जाते हैं. ये चुनौतियां बड़ी हैं लेकिन यह भी तय है कि हम-आप यानी यहां के नागरिक ही सार्थक पहल और कर्म से अपने समाज, अपने राज्‍य और अपनी दुनिया को बेहतर बना सकते हैं. हम जिस क्षेत्र में (गया-बोधगया और सामान्य तौर पर मगध) रहते हैं, उस जमीन में बिहार का सिरमौर बनने की सभी संभावनाएं मौजूद हैं. दुनिया के मानचित्र पर हमारी जमीन की एक अंतरराष्‍ट्रीय पहचान है. यानी हम खुद को सजग, जिम्मेदार व जवाबदेह बना कर सभी राज्‍यों के बीच बिहार को सिरमौर और बिहार में अपनी धरती, अपने क्षेत्र, अपने शहर को अव्वल बना सकते हैं. कर्म और व्यवहार के स्तर पर हम सब, यहां के हर नागरिक के लिए यह चुनौती है. इसमें हर कदम पर प्रभात खबर आपका सहयात्री और सहभागी है.

हम विद्यार्थी हों, नौकरी-पेशा हों, प्राध्यापक-शिक्षक हों, डॉक्टर हों, राजनीतिक हों, किसान हों, मजदूर हों, व्यापारी हों, गृहिणी हों, उद्यमी हों, सरकारी कर्मचारी हों, पुजारी हों या कुछ और हों, हम हर तबके, हर वर्ग के लोग यानी हर व्यक्ति आज जहां खड़ा है, वहां से आगे ब़ढे – चेतना के स्तर पर, भौतिक स्तर पर और ज्ञान के स्तर पर. इस यात्रा में प्रभात खबर सीढ़ी और सहयोगी का काम करे, हमारी पत्रकारिता का कर्म व धर्म यही है. आज का समय ज्ञान का युग कहा जाता है. यदि आपके पास ज्ञान है, कौशल है और लगन है तो आप दुनिया में कहीं भी जाकर अपनी जगह बना सकते हैं. ज्ञान और कौशल आप तक पहुंचे और इसका माध्यम प्रभात खबर बने, यही हमारी पत्रकारिता का लक्ष्य है. देश और दुनिया का परिवेश तेजी से बदल रहा है और ऐसे में सब कुछ सरकारों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता और सब कुछ सरकारों के भरोसे संभव भी नहीं. हमें खुद अपने क्षेत्र और राजय में नवोन्मेष (इनोवेशन) व उद्यमिता (एंटरप्रेन्योरशिप) की नयी लहर पैदा करनी होगी. ऐसा परिवेश आपके सहयोग और सुझावों से ही संभव है.

अब तक प्रभात खबर गया में पटना से छप कर आता था. इसमें और गया में छपने पर क्या कोई अंतर पड़ेगा? अंतर होगा. अब प्रभात खबर आपको गया की ही नहीं देश-विदेश की देर रात की खबरों, घटनाक्रमों की जानकारी देगा. अब गया संस्करण की रचना गया की ही आबो-हवा में होनी शुरू हो गयी है. परिलक्षित होगा आपकी खबरों, आपके आसपास की खबरों, घटनाक्रमों की रिपोर्टिग में और ज्‍यादा गहराई, और ज्‍यादा पैनेपन के साथ. यानी प्रभात खबर अब आपके बीच रहकर आपकी बात करेगा और आपकी बुलंद आवाज बनेगा. आज गया से प्रकाशित प्रभात खबर का 10वां संस्करण आपके हाथों में सौंपते हुए हम आपसे उम्मीद कर रहे हैं कि हमारी जिस भिन्‍न और सोद्देश्य पत्रकारिता को आप पाठकों ने मान्यता दी है, उस पर पैनी निगाह रखने का काम भी आप करें, जिससे हम अनजाने में भी अपनी पत्रकारिता से डिगने न पायें. आपसे सुझाव और मार्गदर्शन की अपेक्षा है. साभार : प्रभात खबर

Comments on “प्रभात खबर ने गया से शुरू किया अपना 10वां संस्‍करण

  • gaya ,jo maha tirth hai, wah hamesa itihaas racha hai…fir ek itihaas racha gaya hai. aapko badhayee… mayank raj

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  • खबरों को पंख लगाएगा दैनिक प्रभात
    सुभारती मीडिया लिमिटेड मेरठ खबरों को पंख लगाएगा। खबरे 30 से 35 किलोमीटर क¢ दायरे में दम नहीं तोड़ेंगी। खबरे आजाद होंगी। सुभारती मीडिया लि. का दैनिक प्रभात इसकी शुरूआत करने जा रहा है। अमरोहा जिले में कछुआ चाल से अपनी जगह बनाने में सफलता हासिल कर रहे दैनिक प्रभात का मुरादाबाद मंडल संस्करण शीघ्र ही शुरू होने जा रहा है। इस संस्करण की खासियत यह होगी कि मुरादाबाद मंडल क¢ बिजनौर, रामपुर, संभल, अमरोहा और मुरादाबाद की खबरे एक साथ मिलेंगी। दैनिक प्रभात पहला अखबार होगा जो पाठकों की जरूरतों को पूरा करेगा। पंख लगाकर खबर सवेरे ही उनक¢ आंगन में दैनिक प्रभात क¢ रूप में पहंुचेंगी। मंडल स्तर की खबरें जो जिलों में दम तोड़ रही हैं उन्हें मुकाम तक पहंुचाने का काम दैनिक प्रभात करेगा। दैनिक प्रभात क¢ समूह संपादक सुनिल छइया ने विस्तार की जो योजना बनाई है वह अनोखी है। एक ही संस्करण में पाठकों को पांच जिलों की खबर परोसने का प्लान सुनिल छइया का ही है। इसमें सहयोगी क¢ रूप में अमर उजाला और हिंदुस्तान में काम कर चुक¢ पारस अमरोही को लखनऊ की जिम्मेदारी दी है तो मुरादाबाद मंडल में अमर उजाला और दैनिक जागरण में काम कर चुक¢ क¢क¢ चैहान सहयोग करेंगे। अमरोहा जिले में भी अमर उजाला क¢ ही मजूबत स्तंभ रहे बसंत सारस्वत सफलता का रास्ता तय कर रहे हैं। दैनिक प्रभात क¢ समूह संपादक सुनिल छइया ने अमर उजाला क¢ उन लोगों को साथ लिया है जो दिल से अमर उजाला में काम कर चुक¢ हैं, लेकिन अमर उजाला के मैनेजरों और संपादकों क¢ मानसिक व आर्थिक उत्पीड़न का शिकार होकर खुद को उस संस्थान से अलग किया जिसक¢ लिए खून पसीना बहाया था।

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  • खबरों को पंख लगाएगा दैनिक प्रभात
    सुभारती मीडिया लिमिटेड मेरठ खबरों को पंख लगाएगा। खबरे 30 से 35 किलोमीटर क¢ दायरे में दम नहीं तोड़ेंगी। खबरे आजाद होंगी। सुभारती मीडिया लि. का दैनिक प्रभात इसकी शुरूआत करने जा रहा है। अमरोहा जिले में कछुआ चाल से अपनी जगह बनाने में सफलता हासिल कर रहे दैनिक प्रभात का मुरादाबाद मंडल संस्करण शीघ्र ही शुरू होने जा रहा है। इस संस्करण की खासियत यह होगी कि मुरादाबाद मंडल क¢ बिजनौर, रामपुर, संभल, अमरोहा और मुरादाबाद की खबरे एक साथ मिलेंगी। दैनिक प्रभात पहला अखबार होगा जो पाठकों की जरूरतों को पूरा करेगा। पंख लगाकर खबर सवेरे ही उनक¢ आंगन में दैनिक प्रभात क¢ रूप में पहंुचेंगी। मंडल स्तर की खबरें जो जिलों में दम तोड़ रही हैं उन्हें मुकाम तक पहंुचाने का काम दैनिक प्रभात करेगा। दैनिक प्रभात क¢ समूह संपादक सुनिल छइया ने विस्तार की जो योजना बनाई है वह अनोखी है। एक ही संस्करण में पाठकों को पांच जिलों की खबर परोसने का प्लान सुनिल छइया का ही है। इसमें सहयोगी क¢ रूप में अमर उजाला और हिंदुस्तान में काम कर चुक¢ पारस अमरोही को लखनऊ की जिम्मेदारी दी है तो मुरादाबाद मंडल में अमर उजाला और दैनिक जागरण में काम कर चुक¢ क¢क¢ चैहान सहयोग करेंगे। अमरोहा जिले में भी अमर उजाला क¢ ही मजूबत स्तंभ रहे बसंत सारस्वत सफलता का रास्ता तय कर रहे हैं। दैनिक प्रभात क¢ समूह संपादक सुनिल छइया ने अमर उजाला क¢ उन लोगों को साथ लिया है जो दिल से अमर उजाला में काम कर चुक¢ हैं, लेकिन अमर उजाला के मैनेजरों और संपादकों क¢ मानसिक व आर्थिक उत्पीड़न का शिकार होकर खुद को उस संस्थान से अलग किया जिसक¢ लिए खून पसीना बहाया था।

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