Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

हलचल

मर्सिया पढ़ना हो तो उत्तराखंड चले आइये

दीपकझूठ के पांव नहीं होते, यह अतीत का फलसफा सा लगता है। पर झूठ के पांव तलाशने हों तो देव-प्रेतात्माओं की ‘मरू-भूमि’ उत्तराखंड में इसके दर्शन किए जा सकते हैं, वह भी बिना किसी लागलपेट के। तहलका को दिए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के इंटरव्यू के कुछ अंश सच-झूठ की सियासत का मर्सिया पढ़ने जैसे किसी दर्शन पर सिर खुजाने जैसा है।

दीपकझूठ के पांव नहीं होते, यह अतीत का फलसफा सा लगता है। पर झूठ के पांव तलाशने हों तो देव-प्रेतात्माओं की ‘मरू-भूमि’ उत्तराखंड में इसके दर्शन किए जा सकते हैं, वह भी बिना किसी लागलपेट के। तहलका को दिए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के इंटरव्यू के कुछ अंश सच-झूठ की सियासत का मर्सिया पढ़ने जैसे किसी दर्शन पर सिर खुजाने जैसा है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने तहलका को राज्य के दस साला सफर पर एक इंटरव्यू दिया है। तहलका ने कुछ सवाल ऐसे किए हैं जिनके जवाब खुद सवालों की एक श्रृंखला बुनते हैं। मसलन, ‘उत्तराखंड का अपना पंचायत एक्ट अभी तक नहीं बन पाया है?’ जवाब में मुख्यमंत्री फरमाते हैं, ‘नहीं, राज्य का पंचायत एक्ट तो बना है।’ अब कोई यह तो पूछे कि भाई अगर उत्तराखंड ने उत्तर प्रदेश की कार्बन कॉपी को हटाकर अपना एक्ट बना लिया है तो उन ग्राम प्रधानों को क्यों नहीं कालापानी भेजे देते, जो गला फाड़-फाड़कर सरकार की छिछालेदारी करते फिर रहे हैं।

अब निशंक सरकार में पंचायती राज्‍यमंत्री राजेंद्र भंडारी के एक पत्रिका में छपे बयान पर गौर किया जाय तो तस्वीर कुछ साफ होती है। भंडारी कहते हैं, ‘कुछ राज्यों के पंचायती राज अधिनियन का अध्ययन  किया जा रहा है। इसके आधार पर ही पंचायती राज एक्ट लागू किया जाएगा।’ अब एक और सवाल की बानगी देखिये-‘प्रशासनिक सुधार पर क्या कुछ हुआ? पंत कमेटी की रिपोर्ट का क्या हुआ?’ जितना अहम यह सवाल है, जवाब भी उतना ही नक्काशीदार। निशंक फरमाते हैं, ‘मैं सोचता हूं कि पंत कमेटी तो दूसरे उददेश्यों के लिए थी, लेकिन प्रशासनिक सुधार काफी हुआ है।

अगर कोई स्मृति दोष न हो तो बता दें कि यहां पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी द्वारा गठित राज्य प्रशासनिक सुधार आयोग के चेयरमैन जीसी पंत की उस रिपोर्ट का हवाला दिया जा रहा है, जिसकी सिफारिशें धूल फांक रही हैं। इन दो अहम सवालों पर कौन सच बोल रहा है, यह कोई बताए तो सही। लेकिन जनता जानती है कि इन दस वर्षों में उत्तराखंड में बहुत सारी विद्रुपताओं के संग मक्कारी का एक पूरा तंत्र खड़ा हो चुका है। झूठ-फरेब से लबालब यह तंत्र आपदा के नाम पर 21000 करोड़ रूपये की ऐसी हांडी चढ़ता है कि वह एक झटके में बेस्वाद हो जाती है। अब इससे हुई किरकिरी से बचने के लिए आपदा को लेकर बहुदलीय मंथन जैसे किसी कर्मकांड का खाका खींचा जा रहा है, ताकि बताया जा सके कि कोई सरकार है जो अपने लोगों के जख्मों पर मरहम लगाने के लिए हद दर्जे का मंत्रोजाप कर सकती है।

इसका एक और एपीसोड है, जिसका प्रसारण देहरादून से लेकर दिल्ली तक की मीडिया मंडी में करोड़ों फूंककर विज्ञापनों से पाटकर किया जा रहा है, वह भी प्राइम टाइम में। यह एक ऐसे सूबे की बेरंगीन तस्वीरें हैं जो हर पखवाड़े दिल्ली के सामने कटोरा लेकर ‘दे-दे बाबा’ का राग अलापता फिरता है। अगर इसका कोई सीक्वेल फिल्माना हो तो यहां पटकथाओं की भी भरमार है। जैसे यह राज्य 18 हजार करोड़ के आसपास यानी 180 अरब रूपये का कर्ज बोझ ढो रहा है और पता नहीं कब यह पसीना छोड़ना शुरू कर दे। इसलिए किसी को मर्सिया पढ़ना हो तो चले आइये।

लेखक दीपक आजाद हाल-फिलहाल तक दैनिक जागरण, देहरादून में कार्यरत थे. इन दिनों स्वतंत्र पत्रकार के रूप में सक्रिय हैं.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

0 Comments

  1. Rizwan Mustafa

    November 14, 2010 at 5:34 pm

    Deepak azad ji aapko shayad jagran ne isliye alvida kar liya hoo ki aap jab Qawwali ko Marsiya likh sakte hai, bhai is par gaur kijiye aur apne me sudhar kijiye

  2. kumar kalpit

    November 27, 2010 at 9:41 pm

    deepk je,rizwan mustafa jaise logon ke kament se hatotshahit mat ho.ve ball ki khal nikal rahen hai. aap jagran me hote to kaya sab likh sate the.yah to nishank jee ko shochna chahivi ki jab bharat uday aur india shaining atal jee ko doobara shatta me nahi la paya to nishank jee kish keht kee mooli hai. koshiyari jee ne khichri pakai kishamat ke dhanee nishank jee kha rahen hain

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास तक खबर सूचनाएं जानकारियां मेल करें : [email protected]

भड़ास के वाट्सअप चैनल से जुड़ें और नवीनतम खबरें पाएं : Bhadas Whatsapp

भड़ास लीगल टीम : किसी किस्म की लीगल हेल्प के लिए संपर्क करें- Bhadas Legal Team

You May Also Like

Uncategorized

भड़ास4मीडिया डॉट कॉम तक अगर मीडिया जगत की कोई हलचल, सूचना, जानकारी पहुंचाना चाहते हैं तो आपका स्वागत है. इस पोर्टल के लिए भेजी...

Uncategorized

भड़ास4मीडिया का मकसद किसी भी मीडियाकर्मी या मीडिया संस्थान को नुकसान पहुंचाना कतई नहीं है। हम मीडिया के अंदर की गतिविधियों और हलचल-हालचाल को...

हलचल

[caption id="attachment_15260" align="alignleft"]बी4एम की मोबाइल सेवा की शुरुआत करते पत्रकार जरनैल सिंह.[/caption]मीडिया की खबरों का पर्याय बन चुका भड़ास4मीडिया (बी4एम) अब नए चरण में...

Uncategorized

मीडिया से जुड़ी सूचनाओं, खबरों, विश्लेषण, बहस के लिए मीडिया जगत में सबसे विश्वसनीय और चर्चित नाम है भड़ास4मीडिया. कम अवधि में इस पोर्टल...