: कई और दूसरे संस्थानों के संपर्क में : आई नेक्स्ट, कानपुर को करारा झटका लगा है. यहां डेस्क, रिपोर्टिंग और फोटो सेक्शन से चार लोगों के इस्तीफे की खबर है. चारों लोग नोटिस पीरियड पर चल रहे हैं. सभी बेहतर सेलरी स्ट्रक्चर के साथ दूसरे संस्थानों से अपनी नई पारी शुरू करने जा रहे हैं. बताया जा रहा है कि कानपुर की मीडिया में अगले कुछ दिनों में और हलचल देखने को मिल सकती है.
आई नेक्स्ट में एजुकेशन बीट देखने वाले सीनियर रिपोर्टर अभिषेक त्रिपाठी ने इस्तीफा दे दिया है. ये आई नेक्स्ट की लांचिंग टीम के सदस्य थे. पिछले चार वर्षों से अखबार से जुड़े हुए थे. इन्होंने अपनी नई पारी जनसंदेश टाइम्स, कानपुर के साथ शुरू की है. इन्हें यहां भी सीनियर रिपोर्टर बनाया गया है. यहां ये एजुकेशन बीट के हेड के रूप में काम करेंगे. अभिषेक ने आई नेक्स्ट के लिए शिक्षा जगत की कई खबरें ब्रेक की हैं.
अचलेंद्र कटियार ने भी आई नेक्स्ट से इस्तीफा दे दिया है. वे यहां पर सब एडिटर थे तथा लोकल डेस्क पर कार्यरत थे. जामिया पास आउट अचलेंद्र हिंदुस्तान से इस्तीफा देकर आई नेक्स्ट ज्वाइन किया था. वे यहां पन्द्रह महीने तक रहे. उनके बारे में खबर है कि वे अपनी नई पारी आज समाज के साथ शुरू करने जा रहे हैं. उनकी ज्वाइनिंग फरीदाबाद ब्यूरो में रिपोर्टर के रूप में होने की संभावना है. इन्होंने अपने करियर की शुरुआत रिपोर्टर के रूप में ही डीएलए, मेरठ से की थी.
शशि पांडेय भी आई नेक्स्ट को बॉय बोल दिया है. ये यहां पर रिपोर्टर थीं. इनके बारे में सूचना है कि ये अपनी नई पारी अमर उजाला, बरेली के साथ करने जा रही हैं. शशि की गिनती तेजतर्रार रिपोर्टरों में की जाती है. दिव्या कांड से जुड़ी कई बेहतरीन स्टोरी इन्होंने लिखी. ये दैनिक जागरण से आई नेक्स्ट आईं थीं. इन्होंने अमर उजाला के साथ अपना करियर शुरू किया था. उजाला संग यह इनकी दूसरी पारी होगी.
मनीष कुमार भी आई नेक्स्ट को नमस्ते कर दिया है. ये यहां पर सीनियर फोटोग्राफर थे. मूल रूप से पटना के रहने वाले मनीष के बारे में खबर है कि वे अपनी नई पारी बिहार में एक न्यूज चैनल के साथ शुरू करने जा रहे हैं. ये इसके पहले भी कई चैनलों में कैमरामैन के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं.
माना जा रहा है संपादकीय की उपेक्षा तथा बेहतर सेलरी पैकेज नहीं होने के चलते इनलोगों ने दूसरे संस्थानों का रूख किया है. चर्चा है कि अभी कई और लोग दूसरे संस्थानों के संपर्क में हैं, बात बनते ही यहां से इस्तीफा दे देंगे. जनसंदेश टाइम्स तथा हिंदुस्तान की यूनिटों में लोगों की जरूरत को देखते हुए यहां के सभी अखबारों में हलचल की संभावनाएं बनी हुई है.












ashish kumar
March 8, 2011 at 11:42 am
अचलेन्द्र भैया बधाई हो ! दिल्ली आइये हम सब वेट कर रहे हैं …. अब आई नेक्स्ट का क्या होगा ????
indu
March 8, 2011 at 11:42 am
yha ke haalt jaise hai usse to ek din sabhi acche log yha se chale jaayenge,
ashish kumar
March 8, 2011 at 11:45 am
अचलेन्द्र भैया बधाई हो ! दिल्ली आइये हम सब वेट कर रहे हैं …. अब आई नेक्स्ट का क्या होगा ????
शशिकान्त अवस्थी
March 8, 2011 at 11:49 am
अभिषेक त्रिपाठी इससे पहले अमर ऊजाला कानपुर में बतौर एजुकेशन रिपोर्टर अपने कार्य की छाप छोड चुके है । जिसके चलते इनको आई नेक्सट में भी सीनियर श्रेणी में रखा गया । इससे पूर्व भी आई नेक्सट के मैनेजमेन्ट से परेशान होकर अभिषेक ने आई नेक्सट को बॉय बोल दिया था लेकिन आई नेक्सट के मैनेजमेन्ट अभिषेक की प्रतिभा को देखते हुये उन्हे रोक लिया था । इस बार अभिषेक ने बिना आई नेक्सट के मैनेजमेन्ट को भनक लगाये नये अखबार के संग पारी शुरू कर दी । अभिषेक त्रिपाठी के जाने से आई नेक्सट के मैनेजमेन्ट को करारा झटका लगा है ।
shaiendra
March 8, 2011 at 11:55 am
अचलेंद्र.आपको ढेर सारी शुभकामनाएं.
Anil Rajbhar
March 8, 2011 at 2:03 pm
I Next ek aisa product hai jo aj tak ye decide nahi kar paya hai ke usko dena kya hai. Bilingual ban jana hai ya Hindi ya phir English. Content ko lekar aur jyada kheench tan hai aur yahi vazah hai ke na to reporters kush rehte hai aur na he product apne jagah bana paya hai
अरविन्द त्रिपाठी
March 9, 2011 at 3:26 am
जागरण समूह के दो अखबारों में से एक आई-नेक्स्ट , जिसे खासकर देखने के लिए जाना जाता था, को कानपुर में पढ़ने के काबिल बनाने वाली टीम का छोड़ना एक बड़ा गहरा आघात है.अखबार खतम नहीं होता , परंतो गाडी के ताल-मेल में एक नयी गडबडी पैदा हो ही जाती है और इस नयी गडबडी को दूर करने में जो हड़बड़ी होती है.उससे बहुत हास्यास्पद स्थिति पैदा होती है. आशा करता हूँ कि इस अखबार का तेवर और कलेवर बरकरार रहे. वैसे मेरा मानना है कि कभी भी ये अखबार अपने नियम-कानूनों और शहर की जरूरतों को पूरा नहीं कर पाया. शहर में ऐसे एक अखबार का पाठक है. जरूरी ये था कि कुछ ख़बरें हिंदी में और कुछ ख़बरें आसान अंग्रेजी में होती. परन्तु हिन्दी को बिगाड़ कर लिखी जाने वाली ख़बरों से इन सभी साथी पत्रकारों कि हिन्दी खराब कर दी गयी. मैनेजमेंट इस का सदैव दोषी रहेगा.
मेरी शुभ-कामनाएं सदैव इन चारों साथिओं के साथ रहेंगी. उनका उज्जवल भविष्य उनकी राहों को स्वर्णिम बनाने के लिए प्रतीक्षा में है.मुझे विशवास है कि ये सभी दिनों-दिन उन्नति करेंगे. मेरा शुभाशीष सदा उनके साथ है और रहेगा.
anand
March 9, 2011 at 1:22 pm
I Next ki sell down ho gayi hai. Content bhi bahut kharab hai. Yahi hall raha to Alok Sawal ka patta saaf jald saaf ho jayega.