रंडीबाज पत्रकार-संपादक!

सेक्स एक ऐसा विषय है जिस पर हिंदी समाज कभी भी सहज नहीं रहा. किसी भी पेशे में कार्यरत लोगों में से कुछ लोग अक्सर सेक्स के कारण विवादों, चर्चाओं, आरोपों से घिर जाते हैं. मीडिया भी इससे अछूता नहीं है. बाजारवाद के इस दौर में नैतिकता नाम की चीज ज्यादातर दुकानों से गायब हो चुकी है, या, कह सकते हैं कि इसके खरीदार बेहद कम हो गए हैं. इंद्रियजन्य सुख, भौतिक सुख, भोग-विलास सबसे बड़ी लालसा-कामना-तमन्ना है. शहरी जनता इसी ओर उन्मुख है. बाजार ने सुखों-लालसाओं को हासिल कर लेने, जी लेने, पा लेने को ही जीवन का सबसे बड़ा एजेंडा या कहिए जीते जी मोक्ष पा लेने जैसा स्थापित कर दिया है. आप निःशब्द होने वाली उम्र में भी सेक्स और सेंसुअल्टी के जरिए सुखों की अनुभूति कर सकते हैं, यह सिखाया-समझाया जा रहा है. हर तरफ देह और पैसे के लिए मारामारी मची हुई है. फिर इससे भला मीडिया क्यों अछूता रहे. यहां भी यही सब हो रहा है. आगे बढ़ने के लिए प्रतिभाशाली होना मुख्य नहीं रहा. आप किसी को कितना फायदा पहुंचा सकते हैं, लाभ दिला सकते हैं, सुख व संतुष्टि दे सकते हैं, यह प्रमुख होने लगा है. 

लड़की है तो वह शरीर देकर फायदा पहुंचा सकती है, संतुष्ट कर सकती है, सुख पहुंचा सकती है. लड़का है तो कंपनी को या बॉस को आर्थिक रूप से, सामाजिक रूप से, मानसिक रूप से लाभ दिला कर फायदा पहुंचा सकता है. ग्लोबल इकानामी आई है तो अपने साथ खुलापन की आंधी भी लाई है. मान्यताएं और धारणाएं धड़ाम हुईं हैं. नए जमाने के लड़के-लड़कियों के लिए सेक्स और चाकलेट में कोई खास फर्क नहीं है. फास्ट फूड की तरह फटाफट सेक्स चलन में है. वर्जनाएं भयानक रूप से टूटी हैं और टूट रही हैं. ऐसे में मीडिया में यौनाचार विषय पर लिखना बड़ा मुश्किल काम है. अगर कोई दो अपरिचित लोग, आपसी सहमति के आधार पर, भले ही इस सहमति में कोई लाभ-हानि निहित हो या न हो, सेक्स संबंध जी रहे हैं, तो पारंपरिक दृष्टि से इसे रंडीबाजी कहकर, व्यभिचार मानकर इन पर पत्थर बरसाए जा सकते हैं. लेकिन आज का बाजार, आज का नैतिक शास्त्र, आज की लाइफस्टाइल इसे आजाद खयाली और व्यक्ति की स्वतंत्रता का मामला मानता है. और इन्हीं आधार पर इसे सहज और स्वीकार्य बताता है.

दो पुरुषों या दो महिलाओं के बीच आपसी समलैंगिक संबंध को लेकर कितनी जुगुप्सा और पर्देदारी हुआ करती थी लेकिन बदले हुए वक्त में अदालतों और सत्ताओं द्वारा इसे स्वीकार्य माने जाने के बाद ये चीजें अब सामूहिक चर्चा के विषय बन गए हैं. पहले इन पर बोलना भी पाप माना जाता था. अब जिधर देखो गे और लेस्बियन की चर्चा आम है. पहले दो पुरुषों के बीच आपसी संबंध को निहायत ही घटिया, असामाजिक, अमानवीय, मानसिक रोग का प्रतीक आदि माना जाता था लेकिन अब धीरे-धीरे इसे स्वीकार्यता मिल रही है. अब ये रिश्ते भले ही परंपरागत सामाजिक दृष्टि से अनैतिक हैं, लेकिन आज का आधुनिक समाज उसे नाजायज नहीं मान रहा. शादीशुदा स्त्री-मर्द, दोनों एक समय बाद आपसी सहमति से पार्टनर तलाशने लगे हैं. शादी से पहले चाहे जितने सेक्स संबंध बन जाएं, उसका हिसाब अब नहीं रखा जाता.

सेक्स को लेकर गलत-सही का पैमाना अगर परंपरागत दृष्टिकोण है तो कह सकते हैं कि इस समय भयानक रूप से व्यभिचार बढ़ गया है. अगर आप अति आधुनिक दृष्टि के पैरोकार हैं तो कह सकते हैं कि जीने की आजादी बढ़ गई है, सुख के मौके बढ़ गए हैं. आप संतुलित और मध्यमार्गी हैं तो दोनों अतियों को गलत मानते हुए एक संतुलित और वैज्ञानिक दृष्टि की वकालत करेंगे जिसमें सामाजिकता भी रहे और आधुनिकता भी.  मेरा कहने का आशय बस इतना है कि सेक्स शब्द आते ही हमें अतिरंजना और भावावेश में भरकर एकतरफा नहीं हो जाना चाहिए बल्कि इसे भी बुद्धि और विवेक की कसौटी के जरिए विश्लेषित करना चाहिए.

ज्यादातर नर-नारियों के जीवन के डार्क एरियाज में सेक्स ही होता है लेकिन कोई इसे बताना-सुनाना नहीं चाहता क्योंकि इस डार्क एरिया पर प्रकाश पड़ते ही उस शख्स की सामाजिक शख्सियत के खंडित होने का खतरा पैदा हो जाता है. यही कारण है कि सेक्स शब्द का नाम आते ही ज्यादातर लोग अति एलर्ट हो जाते हैं, आशंकाओं से भर जाते हैं, आनंद व उन्माद के शिकार होने लगते हैं, पत्थर लेकर खड़े हो जाते हैं या फिर तेरी कहानी मेरी कहानी जैसी मानकर चुपचाप आगे बढ़ लेते हैं.

इतनी लंबी भूमिका के पीछे आशय एक आर्टिकल है, जिसे वरिष्ठ पत्रकार अखिलेश अखिल ने लिखा है. लिखा तो उन्होंने अपने ब्लाग पर है, लेकिन उसकी एक कापी भड़ास4मीडिया के पास भी भेजा है ताकि उनकी बात ज्यादा से ज्यादा मीडियाकर्मियों तक पहुंच सके. अखिलेश जी ने मीडिया में यौनाचार पर लिखा है. अखिलेश जी का लिखा नीचे प्रकाशित किया गया है. उसे पढ़िए और अपनी बेबाक राय दीजिए. साथ ही कोशिश करिए कि सेक्स पर बहस की शुरुआत हो सके जिससे मीडिया में किन्हीं दो के बीच रिलेशन को लेकर होने वाली कानाफूसी को तार्किक तरीके से विश्लेषित कर समझा-बूझा जा सके. 

-यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया


मीडिया में यौनाचार (1)

अखिलेश अखिलमीडिया में भ्रष्टाचार के साथ ही मीडिया में यौनाचार की परम्परा भी इन दिनों कुलाचे मार रही है। हालांकि मीडिया में यौनाचार की परम्परा काफी पुरानी है। पहले और आज में अंतर केवल इतना है कि पहले इक्का-दुक्का लोग गलत यौन संबंधों के लिए जाने जाते थे, लेकिन आज बहुतेरे मीडियाकर्मी सेक्सुअल संबंधों को अपना अधिकार और कर्तव्य मान बैठे हैं। देश में ऐसा न कोई राज्य बचा है और न ही कोई मीडिया संस्थान जहा सेक्सुअल संबंधों की कहानियां मौजूद नहीं है। ईमान की पत्रकारिता खत्म हो जाने के बाद नैतिक हिन्दी पत्रकारिता का जो चेहरा हमारे सामने आया है, उसकी चर्चा करने में भी शर्म आती है। पटना में पिछले कुछ महीनों में रंडीबाज पत्रकारों की एक लम्बी सूची तैयार हो गयी है। इसमें कुछ चैनलों के कलाकार हैं तो कुछ अखवारों के। इस खेल में महिला-पुरुष पत्रकारों ने मिलकर ऐसी नंगई की है कि पूरी पत्रकारिता पर ही कालिख पुत गयी है। किस चैनल में किस कथित पत्रकार ने कैसी रासलीला की है, और किस अखबारी पत्रकार ने कितनी महिला पत्रकारों का शोषण किया है, इनके नाम जारी कर दिए जाए तो संभव है कि ये लोग कहीं के नहीं रहेंगे। इनके घर भी टूटेंगे और इनका सामाजिक बहिष्कार भी होगा। लेकिन इशारों में ही इन रंडीबाजों के बारे में कुछ तस्वीर तो खींची ही जा सकती है। अभी कुछ महीने पहले की घटना है। एक चैनल के दफ्तर में उस वक्त मारपीट शुरू हो गयी जब एक पत्रकार की रखैल महिला पत्रकार के साथ चैनल प्रमुख बंद कमरे में मजा ले रहे थे। बंद कमरे में अपनी प्रेमिका के साथ अपने बॉस को देखकर रिपोर्टर आपा खो बैठा और बॉस को पीट दिया। बता दें कि उस बॉस ने उस महिला पत्रकार को इंटर्न से सीधे स्टाफ बना दिया था। बाद में दोनों पत्रकार संस्थान से बाहर कर दिए गए। आजकल दोनों एक दूसरे चैनेल में पटना में ही काम कर रहे हैं। दिल्ली में बैठे बॉस आजकल पटना कम जा रहे हैं।

पटना में ही एक दूसरे चैनल की दो महिला पत्रकारों से एक एक ब्यूरो प्रमुख ने जमकर लुत्फ उठाया। मीडिया में बातें फ़ैल गयीं और एक दिन पत्रकार महोदय पिट गए। चर्चा है कि पत्रकार भाई ने दोनों को अपने यहां काम देने का वादा किया था। मामला पत्रकार भाइयों तक ही सीमित नहीं है। कई मामले तो ऐसे भी हैं जिनमे कई महिला पत्रकारों ने अपनी नौकरी के लिए या फिर आगे बढ़ने के लिए अपने साथी पत्रकार का भरपूर उपयोग किया। पटना में कम से कम 6 ऐसी महिला पत्रकार हैं जिन्होंने अपने पीछे कई पत्रकारों की वर्जनाएं तोड़ दी हैं। इनमे से दो महिला पत्रकार आजकल दिल्ली पहुंच गयी हैं और एक अखवार का हिस्सा बन गयी हैं।

मुजफ्फरपुर में दो वरिष्ठ पत्रकार वेश्या के कोठे पर पकड़े गए और पुलिस ने इन लोगों को पीटा। इनमें से एक राष्ट्रीय चैनल में काम करते हैं। यहीं के एक पत्रकार ने गलत तरीके से इतना धन कमाया कि उसका उपभोग करने के लिए वे रोज एक नई लड़की को मंगाने लगे। कहा जा रहा है कि ये महोदय हर रोज नेताओं को भी ‘माल’ पहुंचाने का काम करते हैं।

पटना में एक अखवार के सम्पादक आये तो थे दरिद्र के रूप में, लेकिन आज वह करोड़ों के मालिक हैं। हर शाम इन्हें शराब के साथ माल भी चाहिए होता है। इस महोदय ने अब तक दर्जनों महिला पत्रकारों को बर्बाद, या फिर कहें कि आबाद कर रखा है। इनकी रंडीबाजी की चर्चा पटना से लेकर बाहर तक है। पटना की कोई चार महिला पत्रकारों की शादी टूट चुकी है। इन पत्रकारों की सीडी बनी हुई है। आरा की एक महिला पत्रकार का सम्बन्ध एक नेता से है और पटना मीडिया सर्किल में इस महिला के खौफ से कई बड़े पत्रकार भी डरते हैं। नेताओं के यौनाचार के बाद मीडिया में यौनाचार की कहानी समाज के लिए एक नयी जानकारी हो सकती है। हमारी नजर इस पर है। हम कई चीजों से आपको रूबरू करायेंगे।

…जारी…

 वरिष्ठ पत्रकार अखिलेश अखिल बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के निवासी हैं. पटना-दिल्ली समेत कई जगहों पर कई मीडिया हाउसों के साथ कार्यरत रहे. मिशनरी पत्रकारिता के पक्षधर अखिलेश अखिल से संपर्क mukheeya@gmail.com के जरिए किया जा सकता है.

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Comments on “रंडीबाज पत्रकार-संपादक!

  • sandeep shrivastava says:

    Respected Akhilesh ji
    aapka samajik-vayasayik vishleshan ka mai samman karta hoo.aapke saath (watch News-Raipur) me work karne awsar mila tha.sir aap vastavikta ko
    saaf -saaf kahne par yakeen rakthe hai.ye young journalist ko life moto banana chahiye.
    sandeep shrivastav
    sr.journalist -chhattishgarh.

    Reply
  • bilkul sahi shabd. “Randibaj patrakar.”. inke raduo ki vajah se young journalist ko mauka nahi mil paa raha hai .. aise logon ko patrakrita me rahena ka koi adhikar nahi hai..bhago salo… kam se kam naye logon to mauka to milega ..

    Reply
  • chandan kumar jha says:

    sir bahoot hi sahasik prayas hai ya aap ki kalam ki takat na media ma bhuchal la deya hai ab in logo ka naam v prakasit kar dejeya take paterkarita ma unka chahra banakab hoo saka

    Reply
  • akhilesh jee, apne seedhe aur bebak lekhan kee wazah se hamesha hamare priya rahe hain. ho sakta hai ki seedhe seedhe sunne par inki batein ek baar ko aapko chot pahunchayein, lekin sach hamesha kashtprad hota hai.
    is masle par kuchh likh pane ke liye akhil jee ko badhai

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  • s.n gautam jaipur says:

    Dear Akhilesh Ji,

    Is sahsik kadam ke liye badhai.Par Galiyon ko jhelne ke liye bhi taiyyar rahen.
    aapne kafi had tak teek likha h. kamobesh ye hi halat rajasthan me bhi hote ja rhe h. yha ke kuch journalist to samlenging bhi h.or eak doo to …………?

    Reply
  • Pradeep Upadhyay says:

    “Yashwant
    I had recently shared your concern and article of Akhilesh Akhil . This is a commom situation in media circle. The way Akhil prtrayed it exagerratelly is not a healthy sign.
    Likewise you have given enough space to Dayanand Pandey’s Novel Apne Apne Yuddh.Sex is a vital issue but it not the only concern.
    Try to retain some balance and dignity on your portal.Though these type of news items carry large number of viewership as well as readership.”

    Reply
  • sapan yagyawalkya says:

    doosron ko aaina dikhane wale log bhi kabhi-kabhi darpan ke samne khade ho jayen to kaun -si burai hai.SAPAN YAGYAWALKYA_-BARELI-MP

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  • rajesh kumar says:

    Akhilesh Ji,
    Patna ki kya baat karte hain, Delhi ke subse tez channel me yahi chal raha hai. Boss ko do anchor ban jao. Lekin badhai is kadam ke liye. TV me jyadatar boss le de kar chal rahe hain aur ek bhi anchor nahi jo dene ko taiyar na ho.
    Rajesh

    Reply
  • arun pandey says:

    बेहूदा आर्टिकल है, कोई मतलब नहीं है। इस तरह की चीजें होना अस्वाभाविक नहीं है, पर उन्हें इस तरह से लिखना असामान्य गुस्सा दिखाता है अखिलेश जी का। फिर दो एडल्ड क्या करते हैं कैसे रहते हैं इससे किसी को क्या मतलब।

    Reply
  • Akhilesh ji
    is aarticle ke liye badhai aapne patrakaro ki ek aisi poll khol kar rakh diya hai jisako kahane me ek khuddar patrkar kahane me hichakata tha par ab aapke is lekh ne unhe bhi himmat di hai………..
    mai aapke isi kadi me jodana chaahunga aur mai desh ke sabase pahale news channal sansthan ke vartmaan input head aur news co-ordinator ke bich bhi aant – rang sambandh hai aur vah roz sansthan ke hi ek kamare me input head ka bistar garm karati hai to kabhi – kabhi unake sath hotalo me rat guzarti hai…… yah aaj ki co-ordinator kabhi mumbai byuro me reporter huaa karati thi aur vahan bhi isaka sambandh byuro head se tha aur vaha to isane do char baar apana garbhpaat bhi karavaa tha…… to aise logo se hamara yah patrakar samaz pradusht ho chuka hai…………….
    khair ek baar phir se aapko badhai

    Reply
  • satya prakash azad says:

    media loktantra ka chautha khamba hai. lekin khambe agar aise karenge to jahir hai, imarat dhahne me zyada der nahi lagegi. pesha galat nahi hota, peshewale galat hote hain, aur har galat ka virodh zaruri hai, nahi to yahi ek din niyam ban jayega aur bakayda manyata mil jayegi.

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  • Tarkeshwar Mishra says:

    Akhilesh Ji, media is now an industry and part of our society. This is also a part of our society, but there are so many good people and organizations also. New generation of media have to choose their own path.
    Tarkeshwar Mishra
    In charge (Publication Division)
    PATRIKA PUBLICATION,
    409, Laxmi Complex, M.I. Road,
    Jaipur – 302001.99280 24883

    Reply
  • Respected, Akhilash je sath may Yashwant je Aap dona sathi ko salam…Akhilash je sahe batey kahna ka karan mujhey lagta hay aap ko log bampanthey kahtey hay kher aap ka report ka karan barey-barey mathadesho ke nend ure gae hoge.Aap ke ise sahesh ka leya badhai..Jung jare rahay hum aap ka sath hay…….Anant Amit

    Reply
  • charan Devesh says:

    Dear Akhilesh,
    u r trying to peep into private affairs of an individual. As long as as two individuals are enetring into any kind of relationship with mutual consent then whats the deal. i strongly beleieve that rape is wrong and unethical. But sex is always mutual and believe, we are from the animal kingdom with animal instincts. Unfortunalety humans are not separating themselves from ANIMALs
    if a male is having sex with his female colleague then it must me mutiual. Lust plays a greater role now a days in entering any kind of relationship. So let it be. We are enetering inmto a sexual revolution era just like waht happened in europe in Victorian era, let it be. Let the dust settle down everything will be in right place. We are living in a liberalized era. So Please Akilesh ,”BE LIBERAL”

    Reply
  • Respected, Akhilash je or Yashwant je ko sathi ka salam…Akhilash je aap ke sach or sidhi bat he logo ko kahana par majboor kartey hay ke aap bam panthey hay.khayar aap ke report say barey barey mathadeso ke nend uar gaey ho ge.aap ko aapko badhai. Aap ka eas jung ko mera samarthan bhe,jung jarey rahay…….Anant Amit

    Reply
  • akhilesh akhil says:

    mere patrakar sathio. mai kahi se bhi jan bujh kar kuchh nahi likh raha hun. kai log ye bhi kahte hai ki mujhe yogyata ke mutabik avsar nahi mila isliye yeh sab kar raha hun. loktantra hai sabki apni samajh hai. lekin mai patrakarita ko natikta par aadharit mission manta hun. yeh aisa mission hai jisme apna paraya koi nahi hota. hamare ek sambandhi randiwaj police adhikari the. maine umper bhi likha aur we rasatal me chale gaye. aur jis aadmi ke pas charutra aur naitikta nahi haiuse is kaam se alag ho jana chahiye. mujhe kisi se naukari lene ka dar nahi hai ki mai jo dekh raha hun use chhipa du.har rajyo ke randiwaj patrakaro per yeh story chalegi.suchna dene ka yug hai. sabko suchna milni chahiye ki hum kitne patit ho chuke hai. aaj isi kamsutra ke karan media ka content kamjor hua hai aur hum gali sunne ke liye badhya hai. sadar.

    Reply
  • akhilesh akhil says:

    mere bhai log.namaskar. charitrahin aur anaitik log behter patrakarita nahi kar sakte. aaj jis tarah patrakarita badnaam hai uske liye yehi log jimedar hai.
    kai log kah rahe hai ki mere pas koi kam nahi hai isliye ye sab likh raha hun. aisa ho bhi sakta hai. kahne wale kahte rahe aur mai apna kam karta rahunga. sabal uthaya ja raha hai ki aapsi samajh se kamsutra hota hai to koi babal nahi hona chahiye.kya is bat ki jankari uske ghar walo ko hoti hai ?jan lijiye hamesa takatwar aadmi ke samne hi log sar jhukate hai.jo log yeh kam kar rahe hai we apne pad ka durupyog kar rahe hai. hum chahe jis aadhunikta me ji rahe ho hame charitrahin banne ko nahi kahta hai. media me kamstra ki jankari sabhi rajyo ki di jayegi. iske bad bhrast sampadko aur patrakaro se aapko parichay karaya jayga.sadar
    akhil

    Reply
  • arvind giridih says:

    aaj media me bajarupan havi ho gaya hai. patrakarita me pairvi wa pahuch ke bal par waise logo ki bheed badhati ja rahi hai jo patrkarita ko hathiyar banakar galat kam karte hai. chaplusi or settingbajo ki chalti ayegi to aisi kuritiyan badhegi hi.

    Reply
  • alok nandan says:

    अखिलेश भाई कुछ भाई लोग कह रहे हैं कि आपसी शारीरिक संबंध दो व्यक्तितों का आपसी मामला है….बिलकुल सच है….इन भाई लोगों के इस बात से मैं भी सहमति व्यक्त करता हूं…लेकिन मीडिय में जारी सेक्सबाजी का मामला सिर्फ दो व्यक्तियों के बीच आपसी सहमति का मामला नहीं है….यह लोभ और लाभ के गणित से संचालित है…बिस्तर तक जाने वाली महिला पत्रकार अक्सर बड़े अधिकारियों का ही चयन करती है…ताकि उसका कैरियर आगे बढ़ सके…बिस्तर तक पहुंचने के बाद बड़े अधिकारी महिला पत्रकारों को अन्य प्रतिभाओं की अनदेखी करके उसे आगे बढ़ाने की जुगत मे रहते हैं जिसका पत्रकारिता की गुमवत्ता पर तो पड़ता ही साथ ही बेहतरीन प्रतिभाओं का रास्ता भी अवरुद्ध होता है…पत्रकारिता एक सामूहिक जिम्मेदारी है. अत इसमें सेक्सबाजी करने वाले पत्रकारों को कठघरे में खड़ा किया ही जाना चाहिये…मुझे याद है कि दिल्ली में मेरे एक मित्र इस सेक्सबाजी को लेकर इतने हताश हो गये थे कि यहां तक कहने लगे थे कि अच्छा होता कि मै एक लड़की होता…धड़ाधड़ कैरियर बढ़ जाता….आप बिल्कुल ठीक फरमा रहे हैं कि पत्रकारिता के गिरते स्तर के लिए कही न कहीं रंडीबाज पत्रकारों का समूह भी जिम्मेदार है…अब तो स्थिति ऐसी हो गई है कि लोग पत्रकारिता में इस तरह के कृत्य को सामान्यरूप से ले रहे हैं…आप इस पर लिखते रहिये….सूचना के अधिकार की जय हो…..

    Reply
  • Agar aapke paas proof hai to aap Patna aur Aara ke un mahila patrakaron ka naam bhi to bataiye…kam se kam koi hint to dijiye…Agar aapne satya ko saamne laane ka sankalp liya hai to uska swagat hai magar baat proof ke saath honi chahiye…aur ab jabki un mahila patrakaron ki shaadi toot hi gayee hai to phir kis baat ka dar? yaa to aap unke naam bataiye yaa phir jhoothi baat failane ke liye awilamb maafi maangiye…

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  • vishwapratap bharti says:

    respectet yaswant ji akhilesh ji. media mai sex ki baten hona aam ho gaya hai.tamam issu sex per hi hote hai.sex prachin kal se bikta aaya hai…shayad bikta bhi rahega.dukh ki bat hai ki ismai bhondapan aa gaya hai…talent ko piche chod diya hai sex ne.maine khud dekha hai ki midia mai ladakiya kis tarah apni deh ke sath samjhouta kar aage badh rahi hai.to yahan jimmedar to male femal aur pura media hai. sabko sab malum hai phir bhir bhi chal raha hai sab.apne apne phayde hai.lekin sab galat ho raha hai.

    Reply
  • alok nandan says:

    रश्मि जी मुझे नहीं लगता कि अखिलेश जी किसी के खिलाफ व्यक्तिगत खुंदक निकालने के मूडे है़, वह मीडिया के उन परतों को कुरेद रहे हैं जहां पर संडाध हैं, जिससे एक दमघोटूं माहौल उत्पन्न हो गया है…यदि आपको ये बाते झूठ लग रही हैं तो फिर मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि मीडिया के तह तक नहीं गई हैं…जो लोग मीडिया चला रहे हैं उनको आप करीब नहीं जानती हैं. नाम लेकर किसी के खुलासा करने का कोई औचित्य फिलहाल नहीं है….बेहतर होगा हम उस तालाब को समझे जिसमें जिसका तल पूरी तरह से गंदा हो चुका है…उन महिला पत्रकारों की शादी गई है तो आप क्या चाहती हैं कि उनका नाम उछाल दिया जाये ताकि भविष्य में भी उनकी शादी नहीं हो सके…इन चीजों को व्यक्तिगत स्तर पर ले जाने की जरूरत ही नहीं है….मीडियी की प्रकृति और स्वरूप को समझने की जरूरत है…इसके बदलाव को समझने की जरूरत है….पत्रकारिता निर्माणकारी राह पर चहे तो ज्यादा बेहतर है…वैसे हर कोई अपने तरीके से सोचने के लिए स्वतंत्र है.

    Reply
  • Amit Chourasia says:

    Res Akhilesh jee

    aapne ptrakarita ka vah sach bayan kiya hai jiski himmat kisi main bhi nahi. kyanki har patrakar ne kahi na kahi yonachar ko badhava diya hai…….our kehte hai na ki hamam main rks sabhi nange hai…….dusro ki pol kholne wale un patrkaro ki aapne pol kholi hai jo kahi na kahi patrkarita main randibajee karte rahe hain ………aise patrakaro ko ek baar is artical ko padhne ke baad main apne girebaan main jhaank lena chahiye……..akhilesh jee is vishleshan ke liye aapko Watch News Ke Saathi Ki badhai
    Amit Chourasia
    Sr. Journlist Raipur (Chhattisgarh)

    Reply
  • Amit Chourasia says:

    Akhlesh jee

    apne patrakaro ki vah pol kholi hai jiski himmat har kisi ki nahi hoti. dusro ki pol kholne wale patrkaro ki pol kholna itna assaan bhi nahi hai…..kyaki hammam mai sabhi nange hai……aise patrkaro ko is artcal ko padhne ke baad apne girebaan main ek baar jaroor jhankna chahiye. akhilesh jee ko is vishleshan ke liye watch News ke Saathi ki badhai

    Amit Chourasia
    Sr. Journalist, Raipur (Chhattisgarh)

    Reply
  • JAGDISH FROM MATHURA says:

    keval patrkarita me hi nahi aajkal har kshetr me sex hi chhaya hua h. sabhi jagah iska istmal aage badne ke liye kiya ja raha h. nayi bat bas itani h ki ab yah sab normal ho chuka h. nahi to aap hi btaeye blog ke sruaati dino me kya aap is tarah ke lekh likhte the kya?

    Reply
  • प्रिय चरण देवेश जी !अखिलेश जी के आलेख पर आपकी प्रतिक्रिया पढ़ी.बड़ा दुःख हुआ आपके विचारों पर .लेकिन ख़ुशी भी -कम से कम इस समाज में आपके जैसे लोग भी हैं जो अपनी माँ बहन की इज्जत से खेलने वालों को सामान्य घटना के रूप में लेते हैं . धन्यवाद आपको

    Reply
  • gyanendra tiwari bhopal says:

    sir pranaam aapne bilkul sahi likha hai aise isthti main aajkal jo patrkaarita main apna bhavisya dekhte hain woh bhi yuvaa varg jo is chetra main ruchi rakhte hain un logon kaa kya hoga agar ladki hai tab to use acche jagah pahuchaya jaa sakta hai aur agar ladka hai to …???? aapne sahi likha hai media main aisi bhaavnaao kaa khaatmaa hona chahiye tab hi yuvaaon ko apni pratibha dikhaane kaa avsar milega

    Reply
  • sandeep tiwari says:

    written by sandeep tiwari aaj kal yeh sab aam baat ho gai hai aage badne ke liye aadmi aur aurat kuch bi karne ko taiyar hai ispe koi tika tippadi nahi honi chahiye

    Reply

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