वो पत्रकार बाद में बनता है, टीआरपीबाज पहले : आशुतोष

आशुतोषअब तो एडिटर से अधिक पावरफुल हो गये ब्रांड मैनेजर : आइना दिखाने के लिये थैंक्स रामू : ‘हाऊ ऑनेस्ट इज द फिल्म’, उस अजनबी लड़के ने मुझसे ये सवाल किया। 

मैंने बचने की कोशिश की।

उसने फिर पूछा ‘हाऊ ट्रू इज द फिल्म’।

अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘रण’ देख कर निकला था कि ये ‘हादसा’ हो गया। फिल्म के दौरान भी कहीं न कहीं मन में ये बात थी कहीं कोई पहचान न ले। इसलिये थोड़ा बच-बच के चल रहा था लेकिन पकड़ा गया।

मैंने कहा- ‘फिल्म सच्चाई के काफी करीब है।’

फिल्म टीआरपी के पीछे भागते टीवी न्यूज चैनल्स की कहानी है। कैसे चैनल्स टीआरपी के लिये कुछ भी करते हैं? फिल्म देखते-देखते कई बार ये भी लगा शायद मैं भी इस फिल्म में एक किरदार हूं। सचाई कड़वी थी। कई बार राम गोपाल वर्मा को गाली देने का मन भी किया। लेकिन अगले ही पल ये भी लगा रामू ने गलत क्या दिखाया है। क्या हम टीवी वाले टीआरपी के लिये कुछ भी नहीं करते? क्या हमारे अंदर बैठा कोई विजय हर्षवर्धन मलिक कई बार जानते बूझते समझौता नहीं करता है? खुद को दिलासा देते हुये कि बाजार एक जरूरत है, थोड़ा बहुत झुकने में बुराई नहीं है।

टीवी हो या अखबार पत्रकारिता का चरित्र पिछले पंद्रह सालों में काफी बदला है। एडिटर्स हैं लेकिन वो रुतबा नहीं रहा जो कभी गिरिलाल जैन, बीजी, वर्गीज, राजेंद्र माथुर, प्रभाष जोशी, एस.पी. सिंह का हुआ करता था। एडिटोरियल में मैनेजमेंट की सही सलाह को भी दखलंदाजी माना जाता था, मालिक को भी एडिटर से मिलने के लिये अप्वाइंटमेंट लेना होता था। माथुर साहब कभी भी किसी सांसद या नेता से मिलने नहीं जाते थे। लेकिन उनकी मौत पर तत्कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर उनको श्रद्धांजलि देने गये थे। ये उनका रुतबा था।

एस.पी. सिंह ने एक बार अपने एक वरिष्ठ सहयोगी को इसलिये बुरी तरह से झाड़ दिया था क्योंकि उन्होंने मैनेजमेंट के एक सीनियर आदमी को उस दिन की खबरों का ब्योरा देने का दुस्साहस किया था। और साथ ही ये भी कहा था कि अगर दुबारा ऐसी गलती की तो निकाल दूंगा। लेकिन आर्थिक सुधार के साथ साथ जैसे-जैसे पूंजीवादी व्यवस्था ने अपने पैर पसारे प्रॉफिट ने अखबार और पत्रकार का स्वरूप बदलना शुरू कर दिया। अखबार में कहा जाने लगा कि खबर विज्ञापनों के बीच खाली जगह भरने की चीज भर है। झोला छाप पत्रकारों के पास गाड़ियां तो आ गयीं लेकिन एडिटोरियल में सेल्स और मार्केटिंग के लोगों की आवाजाही बढ़ने लगी, ब्रांड मैनेजर एडिटर से अधिक पावरफुल हो गये।

अखबार के पन्नों में रंग बिरंगी तस्वीरें ज्यादा छाने लगीं, फैशन और फूड महत्वपूर्ण बीट हो गई, पेज थ्री नाम के एक नये पत्रकारीय जानवर ने जन्म लिया। ए़डिटर पत्रकार कम लायजन अफसर ज्यादा हो गये। खबरों की समझ और एडिट लिखने से ज्यादा राजनेताओं और नौकरशाहों से सेटिंग करवाने की काबलियत अहम हो गयी। और पीएमओ के सुझाव पर एडिटर्स की नियुक्तियां भी होने लगीं। ‘पेड न्यूज’ का रोग लगा। क्या ये सच्चाई नहीं है कि कुछ अखबारों को छोड़ कर बाकी ने मुख्यमंत्रियों और उनकी सरकार के खिलाफ लिखना पूरी तरह से बंद कर दिया है।

इसमे कोई दो राय नहीं कि इस दौरान अखबारों की संख्या और उनके प्रसार में गजब का विस्तार दिखा। खासतौर पर हिंदी और प्रांतीय भाषाओं में। हिंदी अखबारों का कलेवर बदला। वो भी प्रॉफिट कमा सकते हैं, ये मिथ भी टूटा। जैसे-जैसे बाजार के दबाव में प्रतिस्पर्धा बढ़ी तो अखबार लालाओं की दुकान से कॉरपोरेट हाउसेस में बदल गये। वहां भी प्रोफेशनल्स की इज्जत बढ़ी। लेकिन एडिटोरियल के स्तर पर आई नैतिक गिरावट भी हकीकत है।

इस बीच तकनीकी क्रांति का विस्फोट हुआ तो टीवी भी आ गया। प्रतिस्पर्धा और प्रॉफिट नाम के जीव यहां भी छा गये, अखबार को इस मुकाम तक पहुंचने के लिये दशकों लग गये तो टीवी ने ये फासला महज तीन-चार साल में ही तय कर लिया। अखबार में शायद ही कभी सरकुलेशन की बात होती हो लेकिन टीवी न्यूज रूम में एक ट्रेनी को भी पता होता है कि किस और किस तरह की खबरों से कैसी टीआरपी आती है। वो पत्रकार बाद में बनता है, टीआरपीबाज पहले। मुझको बिलकुल हैरानी नहीं होती जब कोई एक दो साल का अनुभव वाला लड़का मुझसे कहता है कि सर ये खबर नहीं बिकेगी यानी इसको चलाने पर टीआरपी नहीं आयेगी।

एक अदना सा लड़का भी जानता है कि टीवी में तीन सी, यानी क्रिकेट, क्राइम और सिनेमा बिकता है। और, प्रस्तुतीकरण जितना सनसनीखेज होगा, उतनी ही टीआरपी टूटेगी। और टीआरपी माने विज्ञापन, विज्ञापन माने पैसा, पैसा माने प्रॉफिट, प्रॉफिट माने बाजार में जलवा। जिस हफ्ते टीआरपी गिर जाती है, उस हफ्ते एडिटर्स को नींद नहीं आती, उसको अपनी नौकरी जाती हुयी नजर आती है, ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है, वो न्यूज रूम में ज्यादा चिल्लाने लगता है। और फिर टीआरपी बढ़ाने के नये-नये तरीके इजाद करता है। फिर शुरू होता है खेल। एक चक्रव्यूह। और ‘रण’ के किरदार जय मलिक की तरह निकलना मुश्किल हो जाता है।

और इस ‘रण’ में हमारे बीच वाल्टर क्रांकाइट जैसा एंकर नही है जिसकी वियतनाम पर खबर देख कर अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन कहता है कि अगर क्रांकाइट ने बोला कि अमेरिका वियतनाम युद्ध हार गया है तो इसका मतलब है मैंने मध्य वर्ग का भरोसा खो दिया है। क्रांकाइट के पास टीआरपी की नहीं, ईमानदारी की ताकत थी, इसलिये राष्ट्रपति उसकी बात सुनता था और कोई रामू ये नहीं कहता था कि वो मीडिया को एक्सपोज कर रहा है। और कोई एडिटर किसी अजनबी बच्चे के सवालों से बचने की कोशिश नहीं करता। आइना दिखाने के लिये थैंक्स रामू।

आशुतोष (आईबीएन7 के मैनेजिंग एडिटर) के ब्लाग से साभार

Comments on “वो पत्रकार बाद में बनता है, टीआरपीबाज पहले : आशुतोष

  • Anoop Srivastava, says:

    Sir kam se kam ab channel walo ko sabak lena chahiye, aur 3 C ke alawa news par dhyan dena chihiye, aaj ka aam jan manas news dekhna chahta hai, lekin channlo me pata nahi kya pratispardha chal rahi hai ki ve news kam 3C par jyada dhyan de rahe hain jo ki ek aam aadmi ki samajh se bahar hai.

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  • शेष नारायण सिंह says:

    आज के ज़माने के संपादकों में कृपया एक का नाम लीजिये जो गिरिलाल जैन, बीजी वर्गीज, राजेंद्र माथुर, प्रभाष जोशी, एस.पी. सिंह की बुलंदियों तक पंहुचा हो.

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  • SHAILENDRA DWIVEDI, BHOPAL says:

    Dear,
    Ashutosh sir aaj ke daur me to khabar ki importance trp taya karti hai, jo kisi zamane me sampadko ka kam hua karta tha, kash apki tarah sabhi log aisa sochne lage to patrakarita ke purane din laut sakte hain, lekin aisa hona namumkin hi hai, TRP ke chakkar me hume aam admi ka dard king khan ke darde disco me sunai nahi deta,

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  • chandan goswami says:

    chalo JAB JAGE TB SAVERA ashutoshji ab to loktantra ke chouthe stambh ko bachane ki koshish kijiea.ibn 7 per jis prkar ancor chilla cilla kar samachar dete hei . aur ek baat ko kaie baar repit karte hei yeh hum pathko samjh mei aa jati hei ki esme DAL kitni KALI hone wali. kyonki kuch samay baad wah khabar kude daan mei chali jaati hei.

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  • Atul Gangwar says:

    रामू की रण पत्रकारिता से जुड़े लोगों के लिए एक ऐसे आईने की तरह है जिसने कुछ समय के लिए ही सही हमें हमारी औकात बताने की कोशिश की है… लेकिन दुर्भाग्य यह है कि इस आईने में वो लोग भी लाचार निरीह से दिख रहे हैं जो इस तंत्र की ताकतवर हस्तियां हैं. मोटी तन्ख्वाह वाले ये लोग जब अपने लालच को बाज़ार की आड़ लेकर या फिर टी आर पी का नाम देकर न. एक की दौड़ में हांफते नज़र आते है तो उस नये बालक का सोचिये जो अपने सफ़र की शुरूआत ही कर रहा है, वो क्या करेगा. क्या तंत्र व्यक्ति से बड़ा है…? क्या हम अपनी कमज़ोरियों को छिपाने के लिए बहाने नही ढूंड़ रहे? आदर्शों की बात करने वाले तमाम बड़े नामों में से किसी को इस व्यवस्था के खिलाफ लड़ते नही देखा… वो लोग आज इतिहास के पन्नों में दफन हो चुके हैं जिन्होंने कभी पत्रकारिता का इस्तेमाल देश के उत्थान और उसे आज़ाद कराने के लिए किया था. आज ये लड़ाई लड़ने की उम्मीद एक नए लड़के या लड़की से की जाती है, लेकिन ऊंचे ओहदो पर बैठे लोग ऐसा कोई उदाहरण नही प्रस्तुत करते जिससे कि लगे हां अभी कोई उम्मीद बाकी है… एक अजनबी बच्चे से मुंह छिपाते ये लोग… क्या खुद से नज़रे मिला सकते हैं

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  • Patrakar Tomar, Gwalior says:

    is vayastha ke khilaph ladne ki jaroorat hai. Nahi to jis tarah lo netaon ko dekhkar galiyan dete hai usi tarah hum or aap logon ko dekhar logon ki yahi pratikriya hogi. isliye is vayastha se ladne ka veeda uthana hoga. kishi n kishi ko to shuruat karni hogi.

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  • Ashish Agarwal says:

    Ashutosh Ji

    Aap media ke avmulyan ki baat karte hai,
    achhi baat hai

    but who is responsible

    aap jaise log hi na jo top position par hain

    maaf kijiye chhota muh bari baat keh raha hoon

    par ibn7 ki khabron aur wahan ke halat ke baare main bhi to aap behtar jante hi honge use kis type main rakhenge aap

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  • nadim akhter, Dhanbad says:

    Bilkul imaandari se aapne likha hai Ashutosh ji…shayad mann ki peeda bahar aa gayi…mai to patrakarita ka abhi ABC seekh raha hoon…phir v itna kah sakta hoon ki is CHAKRAVYUH se nikalne ka koi tareeka humne nahin khoja to jald hi EDITORS PURI TARAH MANAGERS mein badal jaayenge…phir kahan ki patrakarita aur kahe ki naitikta!!!

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  • संदीप द्विवेदी says:

    “पत्रकार बाद में बनता है, टीआरपीबाज पहले। मुझको बिलकुल हैरानी नहीं होती जब कोई एक दो साल का अनुभव वाला लड़का मुझसे कहता है कि सर ये खबर नहीं बिकेगी यानी इसको चलाने पर टीआरपी नहीं आयेगी”
    आपने बिलकुल सही कहा है…राम गोपाल वर्मा की फिल्म रण को देख कर ऐसा लगा की न्यूज़ चैनलों की धोती खोली जा रही है……

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  • DEVESH CHARAN says:

    thanks ashutosh for such an outstanding accetance of the truth of media today. i have interviewed you earlier during my exchange4media time. and during that interview i understood the honesty hidden inside your soul. but frankly speaking when i asked this same TRP question to you the u have reluctantly but very vociferously supported TRP. i still remeber ur word during one of the event at e4m when u told “agar anchor banan chanthe ho tho confidently jhoot bolna sikh lo.”

    thanks ashotosh

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  • अभिषेष माथुर says:

    वैसे परमआदरणीय आशुतोषजी। आप क्या है… क्या आप अपने आपको टीआपीबाज पत्रकार से ज्यादा कुछ मानते हैं… आप और आपका चैनल क्या सारे ही समाचार चैनल और चैनलों में कार्यरत ९९ प्रतिशत तथाकथित पत्रकार, तथाकथित स्वयंभू सम्पादक टीआरपीबाज नहीं है….? और आपके जैसा इंसान तो रण की तारीफ करेगा ही…. रामू भैय्या की भी तारीफ करेगा, क्योंकि वो पूरी टीम-टुल्लर के साथ आपके स्टू़डियो में आये थे। पता नहीं आप जैसे पत्रकारिता के महापुरुष कैसे रण को अच्छी मीडिया वाली फिल्म बता रहे हैं…. शरम आती है आप पर, आपकी पत्रकारिता पर और रामू भैय्या पर। अगर आप रण को अच्छी फिल्म मानते हैं तो इसका मतलब ये निकाला जाए कि जिस प्रकार रण में बिना जांच के सीडी प्रसारित की जाती है वैसे ही शायद आपके चैनल में भी किया जाता होगा। वैसे बुरा मत मानियेगा आप सभी एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हो। अरे डूब मरिये चुल्लू भर पानी में जो दम भर रहे हैं अपने बड़े टेलीविजन पत्रकार सम्पादक होने का। बात करते हैं टीआरपी की… अरे क्यों लाये रण और रामू की टीम को स्टू़डियो में… टीआरपी बढाने के लिये न। रात को दिखाया, दूसरे दिन दो बार दिखाया…. आपकी तो कथनी और करनी में वैसे १०-१२ सालों से अंतर रहा है। कहते कुछ हैं…. करते कुछ हैं…. एक बात और ये जो ब्राण्ड मैनेजर हैं न वो ही सही मायने में चैनल चला रहे हैं नहीं तो आपके जैसों की औकात नहीं है किसी चैनल को चलाने की…. सड़क पर आ जाएंगे आपके जैसे पत्रकार।

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  • Aashtosh Ji 80 Prtishat Filme Netao Aur Thakuro Par Banai Jati Hai…To Sawal Uthhta Hai Ki Kabhi In Logo Ne Aap Jaisi Prakriya Ki…Ek Tarah Se Charcha Karne Ka Matlab Bhi To TRP Ka Hi Khel Lag Raha Hai…Mai News Ke Liye Sirf NDTV Hi Dekhta Hoon…Aap Vahaan Bhi Nazar Aa Gaye…Aap Ko Suna…Pahle Aap Nishchit Karo Ki Naukari Kar Rahe Ho Ya Patrakaarita…Patrakaarita Kar Rahe Ho To Aap Ka Chhavi Sudharne Ki Aawaj Uthhane Ka Haq Banta Hai…Jo Kamiya Hai Unhe Sudharo Aur Sudharbao…Rahi Baat Film Ki To Vo Sirf Kalpnik Kahani Hai…Us Par Dimag Mat Khfao…Channel Malik-Film Nirmata Aur Ek Patrakaar-Amitabh Bachchan Ke Bich Agar Aap Tulna Kar Rahe Hai To Aap Hi Bataiye Ki Vaishyao Se Tulna Nahi Kar Rahe Hai…Fir Bhi Aap Ko Tulna Sahi Lag Rahi Hai To Sirf Khud Ki Hi Kijiye…Ramgopal Ya Amitabhbachchan Ki Itni Auqat Mat Badaiye.

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  • jitendra kumar says:

    aaj kal electronic media or print ek dalali ke kam se kucch jyada nahi hai. ashutosh apne ko bada patrakar batane ka dava karta hai aur bade bade patrakaro ke nam bhi likhta hai lekin vo yeh bhul jata hai ki vo bhi yahi sab karva raha hai.aj sare channel aur akhbar apna profit kamane ke liye har galat bat ko sahi bata rahe hain,

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  • राजेश पांडेय says:

    आशुतोष जी, आजकल आपके अंदर का ईमानदार पत्रकार जाग गया है। आजकल आप टीआरपी को कोसने को लेकर जब भी मौका मिलता है, आप सवाल उठाने से नहीं चूक रहे हैं। पिछले दो महीनों में आखिर क्या हो गया कि आपके विचार बदलने लगे हैं। कहीं ये आपकी उस असफलता से उपजी खीझ और बेबसी का इजहार तो नहीं, जो टीआरपी के बाजार में आपके चैनल आईबीएन 7 को स्थापित नहीं कर पाया। अभी 11 जुलाई 2009 को उदयन शर्मा की याद में आयोजित कार्यक्रम में आपके विचार टीआरपी समर्थक थे। तब आपको कितना हूट किया गया था। तब तो कुरबान अली ने आपको इशारे-इशारे में वेश्यावृत्ति तक करने का सुझाव दे दिया था।
    सच तो ये है कि आप और अजीत अंजुम जैसे लोग हाल तक टीआरपी को सही ठहराते नहीं थकते थे। लेकिन टीआरपी की दौड़ में न तो आपका चैनल सफल हो पाया ना ही माननीय अजीत साहब का, ऐसे में अब आप लोगों को टीआरपी बुरी लगने लगी है। आप दोनों ही लोग इसे लेकर जमकर सवाल उठा रहे हैं। काश कि आप लोगों ने शुरू में ही इस प्रवृत्ति पर रोक लगाई होती। तब तो आप लोग उसी गटर में नहाने को गंगा में नहाने जैसा पुण्य मान रहे थे। लेकिन जब गटर में नहाने से पुण्य नहीं मिला और चर्मरोग फैलने का खतरा बढ़ने लगा है तो आप लोग रोदन में शामिल हो गए हैं। आखिर टीआरपी की ये माया आजतक के प्रमुख कमर वहीद नकवी, स्टार न्यूज के प्रमुख शाजी जमा साहब और जी न्यूज के सतीश कुमार सिंह जी को क्यों नहीं बुरी लग रही है।
    आज एसपी सिंह का नाम लेकर खुद को सर्वश्रेष्ठ साबित करने का फैशन हो गया है। उन्हें पत्रकारिता का पैरोकार और नई स्थापनाओं का संस्थापक माना जा रहा है। लेकिन आखिर क्या वजह है कि उनके ही नक्शेकदम पर चलने का कथित दावा करने वाले लोग और उनके ट्रेंड किए लोग ही टीआरपी की माया में डूबने को ही अपना सौभाग्य मानने लगे। आशुतोष जी, आप भी उसी टीम का हिस्सा रहे हैं। कमर वहीद नकवी साहब भी एसपी के साथी रहे हैं। क्या यह सच नहीं है। सच तो ये है कि आज जो मीडिया में चूहा-दौड़ चल रही है, उसमें गिरने का जब पैमाना तय हो रहा था तो आप लोग भी उतने ही भागीदार रहे, जितना आज के कथित टीवी कर्ता धर्ता हैं। बेहतर होता कि आप लोग हिंदी भाषी जनता से माफी मांगते। तब शायद आप लोगों की गलतियां और पाप कुछ हद तक धुल जातीं।

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  • Shalini Garg says:

    Main bhi Media se hi tallukh rakhti hu. Ashutosh Sir aur sabhi ke dwara likhe gaye unke vichar padhe. Mujhe padhkar sirf acha laga bura kuch bhi nahi laga. Har kisi ne apne vicharo ko kulkar rakha yahi baat is baat ka bharosa dilati hai ki ab agar kuch hoga to sirf acha hi hoga. Ab yakeenan ek kranti hogi jo is corruption ko mitayegi kyunki ab hum ek jagruk nagrik ka role ada kar rahe hai.
    Hum sabhi ko saath aana hoga. Ekjut hona hoga. Ek-dusre par kichad uchalne se kuch nahi hone wala. Balki ek si soch rakhne walo ko ek saath kam karna hoga.
    Main is mission mein shamil hu. Aur asi hi soch rakhne walo ke saath judna chahti hu. In Life 3-things are important-: Peace, Hope and Honesty.

    Reply
  • Ashutosh ji namaskar ….bahut aachi baat hai aap film dekh aaye …aur aapne likha hai ki ramu ne aap ko aaina dikha dya ,,,,,toh aab yeah umid ki jaye ki aab aap trp ke peeche nahi bhagenge ….aab aap bhi har khabar dikhane ka maadda rakhte hai ….

    Reply
  • ravi priyanshu says:

    Ashutosh ji
    mujhe aapki baat bahut acchhi lagi ki aap ne ye baat swikaar kee ki media ki haqiqat kya hoti ja rahi hai ..aapke likhe har shabd mein aapke dil ki peeda dikhai di…sahi kaha aapne ki TRP ka nasha chauthe stambh ko lagataar kamzor aur bikau banata ja raha hai………ummeed karta hun jaise aapko ahsaas hua waise hi doosro ko bhi ye dikhai de jaye ki media ki badalti surt kitni ghinauni hoti ja rahi…. AUR use uski asal surat lautane ka prayaas karein…………

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  • Hanuman Mishrra says:

    आशुतोष जी दुनिया में जितने लोग हैं उतनी विचारधाराएँ भी हैं। जिनमे से कुछ लोगों की विचारधाराएँ आपस में मेल भी खाती हैं और कुछ लोगों की नहीं भी। बस यूँ ही अपने जज्बे को बनाये रखें मौका परस्ती और स्वार्थ को अपने से दूर रखें, आने वाले दिनों में बुद्धजीवी वर्ग आपको भी आदर्श पत्रकार मानता जायेगा पर ध्यान रहे
    ‘पर उपदेश कुशल बहुतेरे । जे आचरहि ते नर न घनेरे । ।
    कल को आप किसी भी तरह के दबाव में आकर टी आर पी या सर्कुलेशन के पीछे न भागें। आप भी गिरिलाल जैन, राजेंद्र माथुर, प्रभाष जोशी, एस.पी. सिंह जैसे मूर्धन्य बनेगें हमारी शुभकामनायें आप के साथ हैं।

    Reply
  • ashutosh ji, ye baat sach hai ki RANN media par ek achhi movie bani hai jo dil ko jhakjhor dene wali hai, 85% ka area coverage to DD karta hai or TRP ki ladai sirf 15% ki hai..usme bhi jo 6-8% tak jata hai uski jai-jai ho jati hai..baat sidhi or sapat hai..gaadi ko chalane ke liye petrol chahiye or insaan ko roti..vaise insaan ko bahot kuchh chahiye is par charcha aage badhane ki jaroorat nahi hai..Ram Gopal ki film hit to paisa vasool..rahi baat media ki to iski khichdi me kaun kitna tadka daal raha hai or kitni business kar raha hai..ye unending process to chalta hi rahega..hame audio-video media ka istemaal sahi dhang se karna hai yeh ek sawal hai..or iski pehel hame hi karni hogi..akela media doshi nahi hai..kyunki aap agar gir jate hain to koi aapki madad koi nahi karega..govt ki to baat hi mat kijiye..hum media wale to juta khate bhi hain or khilate bhi hain..kya gum hai..bas ek achhi pehel ki jaroorat hai..

    Reply
  • व्यंग्यकार says:

    हनुमान मिश्र जी की टिप्पणी पढ़ कर मुझे बहुत उम्मीद बंधी. और खुशी हुई कि अभी अपने देश में उच्च कोटि के व्यंग्य लेखकों की कमी नहीं है

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  • Akhilesh chandra says:

    Ashutosh ji

    You are great, Aaj mai kush ho gaya ki koyi ek bhai milla es bhid me jo meri tarha such bol ne ka dum rakh ta hai. jab aap NDTV talk show me thae to mai vo show dekh raha tha,kyo ki vo film humare upar ban rahi thai,hum kal tak dosro ki khabar likh te thae aur aaj khud khabar ho gaye.
    Agar ho sake to media se dala lo ko bhi mitane ki kosis kare.

    I am always with you in this work, patrakarita business nahi junoon hai, sayad es liye he hum es media me aaye hai na ki dalali karne ya TRP ke chakar me apni ijjat lotane.

    Thanks
    Akhilesh chandra
    Sr. journalist
    Lucknow
    +91-9838474911
    akhilesh.lovey@gmail.com

    Reply
  • Dr. Ashfaq Ahmad says:

    Dear Aushutosh ji namaskar
    Kabile tareef hain aap kam se kam aap ne accept to kiya media ka sach.
    per isse kya hota hai
    Kam se kam ek kadam aage aa kar shruaat to karein
    Karwaan kud hi ban jayega.
    Dr. Ashfaq Ahmad
    PNI News Agency
    Lucknow

    Reply
  • sir, satya hamesha kadwa hota h. or ese leya apna ramu ko gale dena k soche paar ap ruk gaaye kyoke ya trp k khel h jesma media kese bhe haad taak ja sakte h. pher unha sarpo ke he sade kyo n karwane paade…

    Reply
  • ashutosh G jo abhishek mathur G ne kaha wo sahi hai, jab tak TRP namak is flue ko khatm nahi kiya jayega tab tak punjiwad chaya rahrga aur puri media industry ko apne aagosh me le lega, so ise khatm karna sabse jaruri hai

    Reply
  • ashish pathak ratlam says:

    janab aashutosh ji….jara ek baar bina trp vali khabar batayiye…delhi ya ncr mai rape hoo toh khabar hai lekin gav ki ladki k sath rape hoo toh khabar nahi…jab tak is mansikta ko nahi badlenge sachi patrakarita nahi kar payenge aap bhi. mai trp sistam k khilaf nahi hu. jo log is baat ka virodh kar rahe hai un se ek nivedan hai ki bhai logo maal bechna hai toh chillana padega…bina marketing k aaj kal toh gold bhi nahi bikta fir tv ya print media marketing kare ya kisi khabar k liye trp ki soche toh kya burayi hai? koi bhi paper ya tv channel ye dava nahi karta ki vo ngo ki tarah kaam karega toh fir ummid kis baat ki our kyu? aashutosh ji aap toh apna kaam karo maal bechna koi buri baat nahi hai…becho bhai becho our jamkar becho…….

    Reply
  • nitesh sharma says:

    vki us lp flohdkjk bl ds fy;s /kU;okn de ls de vki esa ;p cksyus dk eknnk rks gSaA cl vc vki fnYyh esa cSBdj ,d fpaxkjh rks yxkvks vkx nqj rd Qsyrs nsj ugha yxsxh

    Reply
  • समीर कुमार says:

    सर जी प्लीज थोड़ा धीमा बोला करो। इससे एक हमें खबर समझ आ जाएगी और दूसरा आपको बोलने से बहले सोचने समझने का मौका मिल जाएगा। अगली बात इलैक्ट्रौनिक मीडिया को कुछ सुधारने का काम नए लड़के ही कर सकते हैं आप जैसे बड़े लोग तो जो जनता को बेवकूफ बनाने की नौटंकी चल रही है उसके रमें हुए किरदार हो। साथ ही एक सामान्य और नए बाजार के गढ़े हुए पत्रकार हो ,महात्मा गांधी नहीं हो जो लोग आपको देखते ही जय-जयकार कर घेर लेंगे। फिल्मकारों की चाटूकारिता छोड़ सच्ची पत्रकारिता कीजिए।

    Reply
  • hi,
    ashutosh sir,
    I am shweta from patna, i am in std 10th.. niche mai jo likhne wali hu, agar wo apko nhi acha laga ya kuch galat laga to I am sorry…. waise to mujhe aapke is lekh pe koi comment nhi krna hai, pr kuch dino se mere man me kisi ke liye gussa hai jo mai kisi ke sath share krna chahti hu..
    humare area ke city SP(central) the shri shivdeep lande! I dont know why? govt ko unse kya problem thi ki wo unhe transfer kr arariya bhej diye.. kuch din pehle ek newspaper me ( newspaper ka naam lena thik nhi hoga) ek famous editor ne un pr comment kiya ki unki policy thi ‘ NO PUBLICITY IS THE BEST PUBLICITY’ kya ye sahi hai? samaj kisi ek insan se nhi chalta hai, agar aap samaj ko badalna chahte hai to pehle khud ko to badaliye!!! human nature hai, log kisi me v pehle positve signs dekhne ke bajaye negetive signs dhundte hai. agar wo publicity chahte v the to kya hua, atleast wo samaj ke liye kuch to kr rahe hai na! >:(
    inke bare me pata krke
    kuch reply jaroor kijiyega! coz u r reporter na!!!

    Reply

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