एनडीटीवी और एचटी का क्या स्टैंड होगा?

बरखा दत्त और वीर संघवीराडिया राज 4 : करोड़ों रुपये के टेलीकाम घोटाले से संबंधित सरकारी दस्तावेज में बरखा दत्त और वीर सांघवी का नाम नीरा राडिया के लिए लाबिंग करने वालों के रूप में आने के बाद इन दिग्गज पत्रकारों के मीडिया हाउस क्या रवैया अपनाते हैं, यह भी देखा जाना बाकी है. बरखा दत्त एनडीटीवी की ग्रुप एडिटर हैं तो वीर सांघवी हिंदुस्तान टाइम्स के संपादकीय सलाहकार. इन दोनों बड़े मीडिया हाउसों के लिए बरखा और वीर का नाम टेलीकाम घोटाले से जुड़ना परेशानी पैदा करने वाला है. पर क्या अभी तक इन संस्थानों को अपने इन पत्रकारों की भूमिका के बारे में पता नहीं है? जो दस्तावेज मीडिया सर्किल में घूम रहे हैं, वे इन संस्थानों के संचालकों तक अभी नहीं पहुंचे हैं? या फिर इन मीडिया हाउसों को ये उम्मीद है कि उनके इन दिग्गज चेहरों के बारे में खुलासा कहीं नहीं होगा और ये मामला दब कर रह जाएगा? जो भी हो, लेकिन अब बरखा और वीर के नाम सार्वजनिक होने के बाद एनडीटीवी और एचटी प्रबंधन पर दबाव बढ़ेगा.

इन मीडिया हाउसों से उम्मीद की जाएगी कि वे अपने-अपने इन दिग्गज पत्रकारों से पूछताछ कर दुनिया के सामने अपना स्टैंड क्लीयर करें. या फिर जांच बिठाकर पूरे मामले की छानबीन कराएं. तदनुसार कार्रवाई कराएं. अगर इस देश का कोई छोटा पत्रकार किसी छोटे-मोटे मामले में शामिल पाया जाता है तो मीडिया समूह उसे बाहर करने में तनिक भी देर नहीं करते. ज्यादातर मीडिया हाउसों ने अपने यहां पत्रकारीय अनुशासन की कसौटियां तय कर रखी हैं, भले ही दिखावे के लिए ही सही. वे अपेक्षा करते हैं कि उनके न्यूज रूम के छोटे से बड़े लोग, उनके छोटे से बड़े पत्रकार पत्रकारीय मर्यादाओं का पालन करेंगे और ऐसा व्यवहार करेंगे जिससे उनके मीडिया समूह का नाम बदनाम ना हो.

हालांकि यही मीडिया समूह अपने हिस्से में लाभ हासिल करने के लिए अपने यहां के कई दिग्गज पत्रकारों को सत्ता से नजदीकी बढ़ाने और मीडिया हाउस को लाभ दिलाने के लिए कहते हैं लेकिन यह सब करते-कराते हुए भी वे अपेक्षा करते हैं कि सारा मामला ढंका-छुपा रहेगा. पर मीडिया हाउसों के लिए काम करते-कराते पत्रकार कब खुद के लिए काम कराने लगते हैं, इसका पता किसी को नहीं चलता और चलता भी है तो बहुत बाद में.

ऐसे ही नहीं है कि इस देश में पेड न्यूज की परंपरा मीडिया हाउसों में सर्वमान्य नैतिकता की तरह प्रचलित हो रही है और सत्ता से लायजनिंग के काम के पवित्र काम के रूप में स्थापित किया जा रहा है. बरखा दत्त जैसी चर्चित पत्रकार अभी तक एनडीटीवी के लिए ब्रांड एंबेसडर सरीखी हुआ करती थीं लेकिन टेलीकाम घोटाले में नाम जुड़ने से न सिर्फ उनकी ब्रांड इमेज पर असर पड़ेगा बल्कि एनडीटीवी की साख भी प्रभावित होगी. यही हाल वीर सांघवी और एचटी का भी है. इन दोनों पत्रकारों और जिन मीडिया समूहों में ये पत्रकार काम करते हैं उनके इस प्रकरण पर स्टैंड की प्रतीक्षा पूरी पत्रकार बिरादरी को रहेगी.

Comments on “एनडीटीवी और एचटी का क्या स्टैंड होगा?

  • satya prakash azad says:

    itane bade mudde par jab commennts tak nahi aa rahe hain……..to karwai ki kya ummeed ki jay……..sab maya hai…….

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  • Pratiman says:

    In one of the Raj Kapoor Film (May be Shree 420), Raj Kapoor had found one purse at the hotel. He rushed outside to return the purse to its owner. Raj Kapoor ran outside the hotel returned the purse to the owner. The owner said to Raj Kapoor that do you know how these persons dancing in hotel became rich. They all had found purse sometime in their life but instead of returning it they kept with themself. Meaning that all these so called high status, high society persons have done some act of 420 or other to become rich.
    Same with Barkha dutt and vir sanghvi also. They have become such a “Class Journalist” just due to their contacts.

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  • bilkul sahi keh rahe ho azad ji is baat par subha se koi comment tak nahi likha gaya to agae kya hoga aisa bhi nahi hai subha se lekar abhi tak is khabar ko kisi ne nahi padha hoga….. lekin kisi ne koi comment tak nahi likha….. kya baat hai…

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  • prem upadhyay says:

    misal bante the we bade ptarkar kabhi farzi sting kar ka kabhi lobing karte hai naam kharab hota hai uun logo ka jo sach me smajik sarokaro ki ladai kalam se ladte hai

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  • pankaj kumar sharma says:

    aaj patrakrita apna astitva khota ja raha hai…. ye media ke liye badey sharm ki baat hai….

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  • भगवान बचाए….इनसे नाम बड़े और दर्शन छोटे….कहां ईमानदारी….कहां सच्चाई…कहां है ज़मिर….और कहा है वो कहावत….जहां न पहूंचे रवि वहां पहूंचे कवि….ये कैसा कवि….भला हो भगवान का जो हम जैसे पत्रकारों का दामन तो बचाया…..

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  • patkarita jagat me jitna bhartachar aur casting cauch hai utna kahi nahi hai bus jrurat hai ,inka pol patti khola jai.

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  • i am not shocked or surprised by the acts of these two “journalist”…. behind the respectable glamour resides this gruesome and horrific truth that media today is no more the fourth estate or the torch bearer of the society… its another tool in the hands of people we idolise to make their own nefarious designs come true… but the broader question here is… how many of us are CLEAN………. lets do a soul searching…………..and then hang these two “journalist”.?
    perhaps the answers would shock the gallows too!

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  • Kisne kaha tha naye patrakaron se ki wey Barkha aur Sanghvi ko apna role model maanen? Lagta hai media me kaam karnewaale khud hi media ke jhoot ke shikaar hain. Maslan, yeh kisko nahin pata ki Kargil war ke waqt Barkha Bhartiya sainikon ke bunker me jakar shoot karne lagi aur Barkha ke jaate hi dushmanon ne bunker ko uda diya. Vir Sanghvi 2003 me Advani ke baare me kya likhte the aur ab kya likhte hain, unke articles mila lijiye. Prashikshu patrakaron ki aankhen apne aap khul jayengi. Isliye, bandhuon, chaunkne ki koi baat nahi. News channels Kasab ke piche pade hain. Unke paas apne dalalon ko expose karne ka waqt nahin, aur na hi iccha hai. Darpok kahin ke.

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  • surendra shukla says:

    kaha hai ,….jayaka india kaa kee vinod dua g,,,kaha hai aab aap kee khuddari& emanadari.lamba lamba lecture aab kyoo nahee detey ,,kyoo saap sungh gayaa,,,,,,,,,kyoo mr

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  • barkha datta aur vir sanghvi ke chorhe per jute marne chahiye aur radiya ko muh kala karke gadhe per bithana chahiye….. karunanidhi ke khandan ko nark main bhej dena chahiye…. sale chor

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