राजस्थान पत्रिका में भी भास्कर कथा प्रकाशित

राजस्थान पत्रिका ने आज भास्कर कथा का विस्तार से प्रकाशन किया है. मध्य प्रदेश और राजस्थान में डीबी कार्प वाले दैनिक भास्कर से जबरदस्त आपसी प्रतिद्वंद्विता में उलझे राजस्थान पत्रिका ने भास्कर के अंदरुनी विवाद को प्रमुखता से अपने पाठकों तक पहुंचाया है. आमतौर पर ऐसे झगड़ों के बारे में माना जाता है कि दूसरे मीडिया घराने इसे तवज्जो नहीं देंगे. पर इस बार दैनिक भास्कर के एक मालिक संजय अग्रवाल की प्रेस कांफ्रेंस को दूसरे मीडिया हाउसों ने भी महत्व दिया है. राजस्थान पत्रिका में जो कुछ छपा है, वो इस प्रकार है- एडिटर

डीबी कॉर्प से मांगा स्पष्टीकरण

नई दिल्ली । बिहार व झारखंड में डीबी कॉर्प द्वारा दैनिक भास्कर का प्रकाशन शुरू करने के आवेदन पर दैनिक भास्कर, झांसी के निदेशक संजय अग्रवाल ने आपत्ति दर्ज कराई है। पटना के अनुमण्डल पदाघिकारी ने आपत्ति मिलने के बाद भास्कर को एक सप्ताह में स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के लिए पत्र लिखा है। दूसरी ओर, रांची के अनुमण्डल पदाघिकारी ने इस आपत्ति को कार्रवाई के लिए आर.एन.आई. को भेजा है।

भास्कर झांसी के निदेशक संजय अग्रवाल ने शुक्रवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि डीबी कॉर्प लिमिटेड कंपनी ने उनके साथ विश्वासघात किया है। उनकी सहमति के बिना पटना और रांची से अखबार निकालने की घोषणा कर दी। अग्रवाल ने कहा कि वे पूरी तरह से कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि जब तक उन्हें हिस्सेदारी नहीं दी जाती है वे अखबार नहीं निकालने देगे।

उन्होने बताया कि डीबी कॉर्प कंपनी ने गलत तरीके से भास्कर टाइटल पर कब्जा किया हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ आरएनआई में सांठ-गांठ कर इन्होने भास्कर नाम पर कब्जा किया हुआ है। झगड़ा बढ़ने पर उनके ताऊजी द्वारका प्रसाद अग्रवाल के बेटे रमेश अग्रवाल ने मामले को आपस में बातचीत से हल करने का सुझाव दिया। इन्होंने ही डीबी कॉर्प लिमिटेड कंपनी बनाई और कहा कि वे भी मालिक हैं और एक दूसरे की सहमति से अन्य संस्करण निकाले जाएंगे। आपस में सहमति बन गई।

इसके चलते दिल्ली और पंजाब में जब भास्कर निकला तो कोई विरोध नहीं किया। संजय ने बताया कि उन्हें तब झटका लगा जब उन्होंने देहरादून से अखबार निकाला तो इनकी तरफ से एतराज जताया गया। यही नहीं जब भास्कर समूह द्वारा आईपीओ लाया गया तो मुझे हिस्सा देने से इंकार कर दिया गया। को-ऑनर होने के नाते उनका हक बनता था। संजय ने कहा कि परिवार के बड़े होने के नाते उन पर भरोसा किया और कोई लिखत पढ़त नहीं की।

संजय ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि उनके साथ कोई धोखा नहीं होगा, लेकिन धोखा हो गया। इसके बाद ही उन्होंने रांची और पटना से निकाले जाने वाले संस्करणों को लेकर एतराज जता दिया। कानून रूप से मैं भी मालिक हूं और मेरी सहमति के बिना अखबार नहीं निकल सकता है। सभी तथ्यों को देखभाल करने के बाद ही वहां के जिलाघिकारियों ने अखबार निकालने वालों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

उन्होंने बताया कि इसी तरह से इन्होंने नोएडा में भी अखबार निकालने के लिए कागजी कार्रवाई कर दी थी बाद में शासन ने उनके एतराज करने पर उनको नोटिस जारी किया, जिसका जवाब इन्होंने आज तक नहीं दिया। कानूनी रूप से डीबी कॉर्प उत्तर प्रदेश से अखबार नहीं निकाल सकता हैं। उत्तर प्रदेश उनके हिस्से में है और वहां पर भास्कर अखबार उनके अलावा कोई नहीं निकाल सकता। यूपी का हिस्सा मान ही उत्तराखण्ड से उन्होंने अखबार निकाला था।

उन्होंने कहा, आपस में तय हो गया था कि सहमति के बाद ही अखबार निकाला जाएगा, लेकिन बिहार और झारखंड के मामले में इन्होंने ऐसा नहीं किया। संजय ने बताया कि कानूनी रूप से जो भी होगा वे अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। उनकी सहमति के बिना भास्कर अब कहीं से भी नहीं निकल सकता है।

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