झगड़े में फंसा जम्‍मू से भास्‍कर का प्रकाशन

: टाइटिल वेरिफिकेशन और डिक्लयरेशन पर स्टे : भास्कर घराने का झगड़ा डीबी कार्प वालों को भारी पड़ता दिख रहा है. ताजी खबर जम्मू से है. डीबी कॉर्प ने 25 मई, 2010 को जम्‍मू से दैनिक भास्‍कर के प्रकाशन के लिये टाइटल वेरिफिकेशन के लिये आवेदन किया था. जम्‍मू जिला प्रशासन ने 2 जून को आरएनआई से राय मांगी. 9 जून को आरएनआई ने वेरिफिकेशन पर मुहर लगा दी. 15 जून 2010 को डीबी कॉर्प ने जिला प्रशासन जम्‍मू के यहां डिक्‍लयरेशन फाइल कर दिया.

भास्कर की लांचिंग पर छाए काले बादल

: संजय अग्रवाल कोर्ट से स्टे लाए : आरएनआई में आपत्ति खारिज हो गई थी : आरएनआई के खिलाफ कोर्ट गए थे संजय : दैनिक भास्कर, रांची व जमशेदपुर में लांचिंग पर फिर काले बादल मंडराने लगे हैं. अभी-अभी खबर मिली है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने आरएनआई के उस आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है जिसमें आरएनआई ने भास्कर की रांची व जमशेदपुर में लांचिंग को ओके कर दिया था और लांचिंग रोकने संबंधी आब्जेक्शन को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि पीआरबी एक्ट में उल्लखित आधारों पर लांचिंग रोकने संबंधी कोई नियम नहीं है.

भास्कर के मालिकों का झगड़ा और उलझा

जमशेदपुर, मुजफ्फरपुर, धनबाद में भी एक ने डिक्लयरेशन के लिए आवेदन तो दूसरे ने आब्जेक्शन फाइल  किया : पटना व रांची के जिलाधिकारियों ने डीबी कार्प की तरफ से जवाब मिलने पर आरएनआई के पास मैटर भेजा :

तीन बड़े अखबारों ने ‘भास्कर कथा’ का किया बहिष्कार

भास्कर के मालिकों के झगड़े की खबर को आज एचटी, हिंदुस्तान, नभाटा, टीओआई, राजस्थान पत्रिका ने अपने यहां प्रकाशित किया है. दैनिक जागरण, अमर उजाला और नईदुनिया ने इस खबर का बहिष्कार कर दिया. टीओआई, दिल्ली में पेज नंबर 26 पर डीप सिंगल में इस विवाद को प्रकाशित किया गया है.

राजस्थान पत्रिका में भी भास्कर कथा प्रकाशित

राजस्थान पत्रिका ने आज भास्कर कथा का विस्तार से प्रकाशन किया है. मध्य प्रदेश और राजस्थान में डीबी कार्प वाले दैनिक भास्कर से जबरदस्त आपसी प्रतिद्वंद्विता में उलझे राजस्थान पत्रिका ने भास्कर के अंदरुनी विवाद को प्रमुखता से अपने पाठकों तक पहुंचाया है. आमतौर पर ऐसे झगड़ों के बारे में माना जाता है कि दूसरे मीडिया घराने इसे तवज्जो नहीं देंगे. पर इस बार दैनिक भास्कर के एक मालिक संजय अग्रवाल की प्रेस कांफ्रेंस को दूसरे मीडिया हाउसों ने भी महत्व दिया है. राजस्थान पत्रिका में जो कुछ छपा है, वो इस प्रकार है- एडिटर

संजय डाल-डाल तो डीबी कार्प पात-पात

प्रेस कांफ्रेंसकारपोरेट घरानों का झगड़ा कितना भीषण होता है, किस तरह एक-दूसरे की मुखबिरी की और कराई जाती है, किस तरह एक दूसरे को पछाड़ने-निपटाने के लिए साम-दंड-भेद हर तरीकों का इस्तेमाल प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से किया जाता है, यह अनिल अंबानी और मुकेश अंबानी नामक दो सगे भाइयों के झगड़े से हमको-सबको पता हो चला है. भास्कर वालों के झगड़े में भी यह सब देखने को मिल रहा है. संजय अग्रवाल चाहते थे कि वे दिल्ली में जब प्रेस कांफ्रेंस करें तो उस जगह का पता डीबी कार्प के लोगों को न चल सके ताकि वे क्या खुलासा करने जा रहे हैं, इसकी जानकारी भास्कर वालों को प्रेस कांफ्रेंस होने तक न मिल सके.

नोएडा में डीबी कार्प को हरा चुके हैं संजय

[caption id="attachment_17480" align="alignleft" width="99"]संजय अग्रवालसंजय अग्रवाल[/caption]दैनिक भास्कर, झांसी के निदेशक संजय अग्रवाल डीबी कार्प का डिक्लयरेशन कैंसिल कराने के मामले में एक लड़ाई पहले ही जीत चुके हैं. मामला नोएडा का है जो उत्तर प्रदेश में पड़ता है. दैनिक भास्कर के मालिकों में जो इलाके का बंटवारा हुआ, उसमें यूपी संजय अग्रवाल के हिस्से में है. संजय अग्रवाल का कहना है कि अगस्त 2009 में रमेश चंद्र अग्रवाल एंड संस की कंपनी डीबी कार्प की तरफ से नोएडा से अखबार निकालने के लिए डिक्लयरेशन का आवेदन चुपचाप सबमिट करा दिया गया. जब संजय को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने आब्जेक्शन फाइल किया. उन्होंने सारे दस्तावेज जमा किए.

रांची से भास्कर का प्रकाशन मुश्किल

कानूनी अड़चनें आईं सामने : डीबी कार्प को नोटिस : टाइटिल विवाद फिर प्रकट हुआ : संजय अग्रवाल ने की प्रेस कांफ्रेंस : रांची में अखबार लांच करने से ठीक पहले भास्कर समूह के मालिकों का आपसी झगड़ा सड़क पर आ गया है. ‘दैनिक भास्कर’ टाइटिल के पांच मालिकों में से एक ने रमेश चंद्र अग्रवाल व उनके बेटों वाली कंपनी डीबी कार्प को कानूनी लड़ाई में घसीट लिया है.  रांची से दैनिक भास्कर अखबार लांच करने की तैयारियों की सूचना मिलने के बाद ‘दैनिक भास्कर’ टाइटिल के पांच मालिकों में से एक ने इस कदम को कानूनी तौर पर चुनौती दी है. चुनौती देने वाले शख्स का नाम है संजय अग्रवाल. वे दैनिक भास्कर टाइटिल के पांच मालिकों में से एक हैं.

महेशजी का बयान रमेशजी के साथ नाइंसाफी

भारत के चुनिंदा अखबारी घरानों के लिए संभवत: यह एक बुरा दौर है जब वे एक तरफ तेजी से गिरती प्रसार संख्या को थामे रखने के लिए अत्याधुनिक खर्चीली तकनीकी प्रणाली का इस्तेमाल कर रहे हैं और रोजाना नए-नए संस्करणों की रूपरेखा बना रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इन घरानों के अब तक दबे-ढंके पारिवारिक विग्रह सुर्खियों में आने लगे हैं। ताजा प्रकरण दैनिक भास्कर समूह का है। जो लोग भास्कर समूह के उत्थान को जानते हैं उनके लिए इस समूह के एक भागीदार श्री महेश चंद्र अग्रवाल की प्रतिक्रिया अत्यंत चौंकाने वाली और उतनी ही पीड़ादायी भी है। श्री महेश चंद्र अग्रवाल ने ‘दैनिक भास्कर’ टाइटल पर सवाल खडे़ किए हैं। नाम में क्या रखा है। केवल टाइटल से क्या होता है?

‘जांच हो तो जेल जाएंगे रमेश चंद्र अग्रवाल’

[caption id="attachment_16454" align="alignnone"]महेश प्रसाद अग्रवालमहेश प्रसाद अग्रवाल[/caption]

भास्कर के मालिकों का झगड़ा फिर सड़क पर आया : भड़ास4मीडिया के साथ रिकार्डेड बातचीत में दैनिक भास्कर, झांसी के मालिक और संपादक महेश प्रसाद अग्रवाल ने किए कई खुलासे : डीबी कार्प के चेयरमैन रमेश चंद्र अग्रवाल पर लगाए कई गंभीर आरोप : सोनिया गांधी के नाम का दुरुपयोग कर सरकारी व मार्केट मशीनरी को प्रभावित किया जा रहा : पिता के फर्जी हस्ताक्षर के जरिए अखबार पर कब्जा जमाया : भास्कर का मालिक कोई एक नहीं बल्कि ‘द्वारिका प्रसाद अग्रवाल एंड ब्रदर्स’ फर्म है : भास्कर ब्रांड नेम मेरे बेटे संजय अग्रवाल के नाम रजिस्टर्ड : भास्कर के नाम पर किसी एक साझीदार द्वारा मार्केट से पैसा उगाहना गलत : विवाद सुलझने तक आईपीओ से आया पैसा कोर्ट या बैंक में सुरक्षित जमा कराएं : अखबार मालिकों में देश को लूटने और एक दूसरे के खिलाफ खबरें न छापने का समझौता :

डीबी कार्प के आईपीओ के खिलाफ पीआईएल

मुंबई में बीते रोज डीबी कार्प के मैनेजिंग डायरेक्टर सुधीर अग्रवाल, चेयरमैन रमेश चंद्र अग्रवाल और डायरेक्टर गिरीश अग्रवाल ने आईपीओ के संबंध में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया. (फोटो दैनिक भास्कर से साभार)

लखनऊ की कोर्ट नंबर एक में सुनवाई जारी : भास्कर और डीबी कार्प के नाम पर आईपीओ लाकर 385 करोड़ रुपये जुटाने का इरादा पालने वाले रमेश चंद्र अग्रवाल, सुधीर अग्रवाल और गिरीश अग्रवाल के सामने नई मुश्किल आ गई है। इनके खिलाफ लखनऊ की एक अदालत में पीआईएल (पब्लिक इंट्रेस्ट लिटिगेशन) दाखिल किया गया है। इसमें आईपीओ पर रोक लगाने की मांग की गई है। आधार बनाया गया है भास्कर पर मालिकाना हक के विवाद को। पीआईएल में कहा गया है कि आरएनआई ने भास्कर का मालिक चार लोगों को माना है तो कोई कैसे अकेले आईपीओ ला सकता है।