टीम में ‘किलिंग इंस्टिंक्ट’ बढ़ा रहे राजेंद्र तिवारी

राजेंद्र तिवारीभास्कर के रांची पहुंचने की तैयारियां तेज हो गई हैं. भास्कर के आने से एलर्ट रांची के बड़े अखबारों में क्या कुछ चल रहा है, यह जानने के लिए भड़ास4मीडिया ने इन अखबारों के कुछ लोगों से संपर्क साधा. इन लोगों ने अपने अखबार और अपने संपादकों के बारे में काफी कुछ बताया. सबसे पहले हिंदुस्तान, रांची के बारे में जो जानकारी मिली, उसे यहां पेश किया जा रहा है, एक रिपोर्ट : रांची में हिंदुस्तान अखबार अपने रंगरूप और सामग्री को तेजी से बदल रहा है। हिंदुस्तान की टीम भी पूरे जी-जान से जुटी हुई है। सबसे कनिष्ठ पत्रकार से लेकर संदीप कमल व चंदन मिश्र तक। हिंदुस्तान एडीटोरियल में धीरे-धीरे जो किलिंग इंस्टिंक्ट बढ़ती जा रही है, उसके पीछे वरीय स्थानीय संपादक राजेंद्र तिवारी हैं।

पांच माह पहले आए राजेंद्र तिवारी शायद हिंदुस्तान के पहले ऐसे संपादक होंगे जिनके आने पर टीम भागी नहीं और न ही वे बाहर से लोग लेकर आए बल्कि मौजूदा टीम को ही अपना बनाने की कोशिश की। वैसे राजेंद्र तिवारी की यह फितरत बहुत पुरानी है कि वह जहां जाते हैं, वहीं के लोगों को अपना बना लेते हैं। भोपाल में, हरियाणा में, रायपुर में, इंदौर में और अब रांची में, सब जगह उन्होंने वहीं के लोगों को अपना बनाया। जब 2008 में इंदौर में राजस्थान पत्रिका आया था तब बड़े-बड़े आफर के बावजूद भास्कर के लोग नहीं टूटे जबकि भोपाल में एक हफ्ते में ही भास्कर के 28 पत्रकार पत्रिका चले गए थे। राजेंद्र तिवारी ने अपने इन साथियों का अच्छा इंक्रीमेंट भी कराया।

इंदौर के भास्कर के पत्रकार मानते हैं कि राजेंद्र तिवारी के समय में अधिकतर लोगों की सेलरी ठीक हो गई थी। झारखंड हिंदुस्तान में भी लोगों को उनसे यही उम्मीद है। दूसरी खास बात यह है कि राजेंद्र तिवारी ‘आनंद लेते हुए खूब काम करो’ के सिद्धांत पर चलते हैं। अधिकतम काम, न्यूनतम तनाव और सर्वश्रेष्ठ नतीजे के सिद्धांत पर चलने वाले इस आदमी ने शायद भास्कर छोड़ा ही इस वजह से होगा कि वहां अधिकतम काम तो है ही, साथ में प्रबंधन अधिकतम तनाव भी देता है, ऐसे में नतीजा अच्छा निकलता है लेकिन आनंद की वह अनूभूति कभी नहीं हो पाती जो होनी चाहिए। तीसरी खास बात है एडीटोरियल स्किल्स व ताजा ट्रेंड्स की जानकारी रखना और नए-नए प्रयोगों के लिए साथियों को प्रोत्साहित करना।

राजेंद्र तिवारी की यह खासियतें किसी भी विरोधी पर भारी पड़ने के लिए काफी है। इस बार हिंदुस्तान रांची में यह भी चर्चा है कि पहली बार किसी संपादक ने एक-एक संपादकीय सहयोगी से उसके अप्रेजल पर बात की और यह जानने की कोशिश की कि संपादकीय सहयोगियों की उम्मीदें और क्षमताएं क्या हैं। इसके चलते उन लोगों की दुकान बंद हो गई जो यह रुतबा गांठते थे कि वे संपादक से कहकर किसी का भला-बुरा करा सकते हैं।

Comments on “टीम में ‘किलिंग इंस्टिंक्ट’ बढ़ा रहे राजेंद्र तिवारी

  • बात तो सही है। बड़ों-बड़ों के भ्रम दूर हो गए हैं अब। खलबली सिर्फ भास्कर आने की ही नहीं बल्कि भास्कर सहित दूसरे अखबारों में राजेंन्द्र तिवारी को लेकर भी चिंता है।

    Reply
  • Siddharth Kalhans says:

    Rajendra Tewari is a quite workers and he never puts on weight on anyone that is his biggest quality. Shayad Tewari Ji ke rahte kisi naye ki launching se Hindustan par koi asar nahi padega

    Reply
  • Priyabrata says:

    Ane vale dinon men aise sampadak jyada succssessful honge. apne yahan ke jyadatar sampadak manate hain ki unka kam sirf raub ganthna hai. koi apna khoon bhi de de to sampadak ke munh se usaki tarif nahi nikalati hai. junior staff se editor log jo doori bakar rakhate hai usaka bahut bada khamiyaja junior logon ko uthana padata hai aur dalal logon ki chandi rahati hai.

    Reply
  • Narender Vats says:

    Tiwari ji ke saath kaam karne ka maja hee kuch or hai. ve na to tenson lete hai or na hee workers ko tension dete hai.

    Reply
  • anujasanghvi says:

    aap logon ko galatfamahmi hai. Tiwari ji jaise dikheten hain vaise hain nahin. kisi ki roji-roti kaise chini jati hai ye koi unse pooche jinhen unhone sirf isliye sansthan se nikal diya ki unka chehra vo pasand nahin karte tha. yeh bat indore main bo jab editor the tab ki hai.

    Reply
  • He is nice person to work with. Despite of some negative points, he has so many things to learn from. He is always bubbling with the confidence, very positive, transperant and passionate towards journalism. He dont have any personal interests and that is why, he is always so straight forward. And one thing….he never allows personal grudges to come across the professional matters.

    Reply
  • Anil Pandey says:

    सौभाग्य से मुझे भी तिवारी जी के साथ काम करने का मौका मिला। मुझे इंदौर में उनसे काफी कुछ सीखने को मिला, चाहे वो संपादकीय गुर हों या प्रबंकीय। और उन्हीं की वजह से मैं आज यहां हूं। तिवारी जी जानते हैं कि कैसे बिना हो-हल्ला के काम किया जाता है। वरना प्रिंट के न्यूज रूम में काम कम और उसका शोर ज्यादा होता है। लोग दिखावे में ज्यादा समय देते हैं जबकि सर के साथ ऐसा नहीं रहा। मानवीय और सहृदयी तिवारी जी सही मायनों में संपादक हैं। अब तक के करियर में उनके जैसा संपादक देखने को भी नहीं मिला। बाकी जो भी मिले वो ऐसे नहीं रहे कि जिनसे आत्मीयता बनती।

    Reply
  • Narender Vats says:

    haryana me breakup story kee suruaat tiwari jee ne panipat aane ke baad kee thee. is state kee patrkarita me ye pahla paryaog tha, jiska anusharan aaj sabhi akhbaar kar rahe hai. unme creativity ka jabardast soak hai.

    Reply
  • Narender Vats says:

    anujsanghvi ji aap khulkar apna naam kyo nahi batate. agar aapki naukri chali gyee to ye aapki ayogta hogi. saayad hum indor me jroor mil chuke honge. us samay arvind tiwari jee vaha beuro chief the. apni ayogta chipane ke liye doosro ko dos dena theek nahi.

    Reply
  • Vijay Shukla says:

    वो कहते थे की फितरत में मेरे प्यार बसता है न जाने कब प्यार ही उनकी फितरत बन बैठा .
    अंदाजे कयास लगाने वालों ने चुन चुन के काटों का गुलिस्तान सजाया पर क्या बुरा हो उसका जो गुलाबे गुलिस्ता हो हर दिल में है बैठा….एक छोटी सी कोशिश आपके लिए किसी अपने की

    Reply
  • tiwari sir ke sath maine bhi kaam kiya hai. aaj unke baare me ye padhkar bahut khushi huye. unme logo ko apna banane ki jo kabiliyat hai wo abhi tak to maine kisi or editor me nahi dekhi. kabhi laga hi nahi ki editor ke sath baat kar rahe hai. hamesha dosatana rayaiya or khula mahol unhone diya. unke dil ki tarah unke cabin ka darwaza bhi hamesha khula raha hai. 🙂 mujhe khbushi hai ki mujhe unke sath kaam karne or bahut kuchh sikhane ka moka mila.
    rahi baat anuj sanghavi ji ke vicharo ki to main anuj ji yahi kahna chahungi ki un par ilzam lagane se behtar hoga ki aap apne andar jhanke. tiwari ji bina kisi wajah ke kisi ko nahi nikalate, ye maine dekha hai. agar sansthan ke liye samne wala achha kaam kar raha ho to, wo use kabhi nahi nikal sakte, fir bhale hi shakal pasand ho ya na ho. apne jarur ya to kaam chori ki hogi ya …. ? aap behatar jante hai. dhanyawad. likhane ke pahale socha kare. ok.

    Reply
  • rajendra ji ke sath maine bhi kaam kiya hai. unke dil ke darwaze logo ke liye jitnae khule hai, utne hi cabin ke darwaze bhi hamesha khule rahte the. kabhi laga nahi ki editor hukum chala raha ho. wo dostana andaz me baat samjha dete the or bura bhi nahi lagta tha. unse maine bahut kuchh sikha hai. wo knowledga ka bhandar hai. khabar se lekar lay out tak gajab ki creativity hai.
    rahi baat anuj sanghavi ji ke vicharo ki to, anuj ji main ye hi kahna chahti hu ki rajendra ji kabhi bhi kisi ko shakal pasand n aane ki wajah se nahi nikal sakte. jo sansthan ke liye achha kaam karta hai, unhe uski bahut kadra hai. fir shakal pasand ho ya n ho. ok… aapne jarur kaam chori ki hai ya fir… aap hi behatar jante honge. jara apne andar jhaank kar dekhe, fir hi kuchh likhe. thanx.

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *