माखनलाल में बिना प्रवेश परीक्षा प्रवेश!

कुलपति का तुगलकी फरमान : भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय इस मायने में अनूठा संस्थान रहा है कि एक तो ये अकेला पत्रकारिता को समर्पित विश्वविद्यालय है, और दूसरा कि यहां से निकले पत्रकार देसी खुशबू लिए होते हैं. उन्हें भाषा के साथ साथ आम आदमी के मुद्दों और सरोकारों की समझ होती है। वर्तिका नंदा के शब्दों में कहें तो यहां परीकथा के किरदार…गुड्डे और गुड़िया पढ़ने नहीं आते हैं जैसा कि दिल्ली स्थित संस्थानों में आपको मिलेगा।

लेकिन आम आदमी से जुड़ी पत्रकारिता की ये नर्सरी अब शायद केवल किताबों के पन्नों में ही बचे, क्योंकि नए कुलपति ने आते के साथ ही तुगलकी फैसलों की झड़ी लगा दी है। विश्वविद्यालय के संघीकरण और अपनों को उपकृत करने के आरोप जैसे कम थे अब नए सत्र की प्रवेश प्रक्रिया को लेकर भी कुलपति कुठियाला ने अजीबोगरीब फैसला लिया है।

विश्वविद्यालय अपने इतिहास में पहली बार बिना किसी प्रवेश परीक्षा के प्रवेश प्रक्रिया पूरी करेगा। जी हां पत्रकारिता की पढ़ाई करने के इच्छुक अभ्यर्थी अब अपनी भाषा, लेखन क्षमता, सरोकारों और सामाजिक-राजनैतिक समझ की जगह अपने स्नातक के अंक-पत्र के आधार पर प्रवेश पाएंगे। नए सत्र 2010-2012 के लिए अभ्यर्थियों का चयन केवल ग्रेजुएशन की मेरिट के आदार पर किया जाएगा और उन्हें प्रवेश परीक्षा से होकर नहीं गुज़रना पड़ेगा। ज़ाहिर है कोई सामान्य बुद्धि भी समझ सकता है कि ऐसे में पत्रकारिता का भविष्य क्या होगा और कितना बड़ा अन्याय होगा उन अभ्यर्थियों पर जो पत्रकार बनने की काबिलियत तो औरों से ज़्यादा रखते हैं पर अंकपत्र पर अंक कम रखते हैं। क्या अब पत्रकारिता भी किताबी कीड़ों और रट्टू तोतों के लिए रह गई है.

हालांकि इस विषय में विश्वविद्यालय प्रशासन का तर्क है कि नए कुलपति के पदभार ग्रहण करने के कारण प्रशासन के पास प्रवेश परीक्षा कराने के लिए समय कम बचा और इसलिए ये निर्णय लिया गया। तो विश्विवद्यालय प्रशासन स्पष्ट करे कि कुलपति के पदभार ग्रहण करने से नियमित परीक्षा प्रक्रिया का क्या सम्बंध है? और जिस कुलपति के पास एक बेहद भव्य अलुमनी मीट का आयोजन करवाने के लिए समय था, उस के पास किन कारणों से नियमित प्रवेश परीक्षा कराने के लिए समय और संसाधन नहीं हैं.

वैसे अगर इस तर्क को भी मान लिया जाए तो एक सत्र में ही सही कम से कम ढाई सौ ऐसे छात्र पत्रकारिता की दुनिया में आएंगे जिनकी पत्रकारिता में वास्तविक अभिरुचि, उनके सामान्य ज्ञान, लेखन क्षमता और कुल मिला कर पत्रकारीय क्षमताओं का कोई भी आकलन नहीं किया गया होगा। आप में से ज़्यादातर लोग इस तथ्य से सहमत होंगे कि पत्रकार किसी को सिखा-पढ़ा कर नहीं बनाया जा सकता है पर शायद कुठियाला जी इससे सहमत नहीं होंगे, उनकी समझ में ग्रेजुएशन का अंक पत्र ही पत्रकार बनने की योग्यता है।

विश्वविद्यालय के तमाम वर्तमान और पूर्व छात्र इस प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं, वो सबी इस कदम से नाराज़ है और कुछ छात्र ब्लॉग्स के और ऑनलाइन पेटीशन के माध्यम से इस प्रवेश प्रक्रिया के खिलाफ़ मुहिम में जुट गए हैं। ऑनलाइन पेटीशन पर दस्तख़त करने के लिए आप इस लिंक पर जा सकते हैं.

http://www.petitiononline.com/savemcu/petition.html

इस मुहिम में साथ आने के लिए आप cavssanchar@gmail.com पर मेल भेज सकते हैं।

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Comments on “माखनलाल में बिना प्रवेश परीक्षा प्रवेश!

  • जब 3rd डिवीजन की मार्क शीट ले कर VC बना जा सकता है तो फिर प्रवेश परीक्षा .. या स्नातक के अंकों का भी क्या महत्त्व है ;D

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  • prashant rai says:

    kuthiyala ji ka yh decision patrkarita ke liye abhishap hai.ab wo student bahar hi rhenge jinke andar kabiliyt to hai pr nomber ka khel nhi jante.ab makhanlal university ke liye energetic student nhi blki kitabo ka ‘kira’ bnana padega.

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  • sushil Gangwar says:

    माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय me bina pravesh parichha ke agar admission ho rahe to esme harj kaya hai. Kya dusre kam number vale Patrakaar nahi ban sakte hai . Kuchh log shuruaat me padai me kamjor hote hai baad me vah bahut honhaar hote hai. Ese kitne exmple desh me nikal aayege . Aaj kuchh log kisi tv chennal or akhbaar me kaam kar rahe hai ,usme kuchh log to kaam karne yogya bhi nahi . jo kaam karne layak hai vah bhaher khade hokar taak rahe hai. Es liye jisme jitna dam hai use dikhane ka mouka milna chahiye ? http://www.sakshatkar.com

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  • shoaib ahmad khan says:

    kuthiyala ji nagpur me baithe logon ki charan-vandana kar yahan tak pahunce hain. unse university ko aage le jane ki ummid karna bemani hai.ye sab kuch University ko gart me le jane ki taiyari hai.

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  • sonu kumar says:

    Bhayi logo Khutyla ji JHa BHI RHE VHI PAR PATRKRITA KI SIKSA KE STAR KE SATH SMJOTA YA KHE STAR KA BEDA GARK KRNE KA KAM CHALA> INKI IN NITYO KE KHILAP DESH VYAPI ABHIYAN KI JRURT HAI

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  • ravishankar vedoriya says:

    patrikarita shetra mai acche gyanwan yuva aaye acchi baat hai lekin keval marksheet ke bade anko se logo ki kaviliyat ho ye baat thik nhi lagati kyu ki jo log college ke dino padai ko series nahi lete ho ve log baad mai apne laksye ke liye aage mahnet karte hai keval marksheet ke aanko se is shetra mai aane ki uski kabilyat ko aakna galt hoga jo gaywan log esa kar rahe hai unhe vichar karna hoga

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  • Akshay pratap singh says:

    bhai kuthiyala ji kya patrikarita ko bilkul rasatal mai lejana chahate ho. desh ke is chouthe stambh ki jimmedari ko bakhoobi nibhana seekhoo. aap par bahut badi jababdari hai iska sahiprayoog karen.

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  • SUJIT THAMKE says:

    YE PER COURSE 30 SEATS HAI TO YE SAMAZ SE PARE HAI KI MCRPV ME AANE VAALE STUDENTS SAARE DESH SE AATE HAI TO ADMISSION KAISE KARENGE…..DUSRI BAAT YE HAI KI AAJ SAARE MEDIA CHANNELS,NEWSPAPES,WEBSITE,GOVT ORGANISATION,NGO’S,ADVERTISING AGENCIES,PRODUCTION HOUSES ME MAKHANLAL KE STUDENTS ACCHE ACCHE POST PE HAI AISAA ADMISSION AGAR HONGA TO SANSTHAN KI IMAGE KHARAM HO JAAYENGI

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  • SUJIT THAMKE says:

    MCRPV YE PATRAKARITAA KAA NAHI RSS,VHP,BJP,BAJRAN DAL KAA ACTIVITIES CENTER HAI UGC KE CHAIRMAN DR.THORATH SAHAB SE APPEAL KARTAA HU KI USNE MCRPV KO BLACK LISTED KARNAA CHAHIYE AUR MAANYATA RAD KARNAA CHAHIYE……………

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  • IKRAM WARIS, LUCKNOW says:

    माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय me bina pravesh parichha ke agar admission hua to isse ek partibhashali journalist ki maut ho jayegi, VC ka tuglaki farman se na jane kitne students ke sapne jalkar bhasm ho hai, kyunki inko apne aap par confidence tha ki intrence nikal lenge.

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  • IKRAM WARIS, LUCKNOW says:

    माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय me bina pravesh parichha ke agar admission hota hai, to partibhashali jounnalist ki asamay maut ho jayegi. kyunki koi jarori nhi ki jiske ander likhne, bolne ki kala ho, uske pas achche number bhi ho.but vc ke tuglaki farman se new jounalist jalkar bhasm ho jayege aur desh good reporters ko kho dega.

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  • pooja bhatt says:

    pareekcha na hona theek nahi. des bhar ke jagruk patrakaron aor students ko iss ka birodh karna chahiye.

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  • अनूप says:

    भारतीय संस्कृति में शिक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण है. वह पथ प्रदर्शक होता है जो हमें किताबी ज्ञान ही नहीं बल्कि जीवन जीने की कला सिखाता है. समाज शिक्षको से गरिमापूर्ण आचरण की अपेक्षा करता है . शिक्षक का दर्जा समाज में हमेशा से ही पूज्यनीय रहा है क्योंकि उन्हें ‘गुरु’ कहा जाता है.
    आज कुछ कलयुगी शिक्षक जो अपेक्षित योग्यता न होने पर भी भ्रस्टाचार द्वारा पद पाकर शिक्षा जगत को कलंकित कर रहे है ऐसी ही एक मिसाल है माखन लाल विश्वविद्यालय के कुलपति …क्या ऐसे ही लोग “संघी” होते है ?
    [b][/b]

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  • salim routiya says:

    mayank bhai aap ka sukriya jo aap ne …patrkarita ke i mandir me ho rahi is dhandli ki taraf logo ka dhayan aakarsit kiya ….mayank bhai jab aap or hum ne yaha admition liya tha tab ..jo systum tha ..uske chalte hi un logo ko yaha adimtion diya jata tha jinme patrkarita ki kuch samaj thi …or yahi ek karan hai ki aaj makhan lal ka pada studen BTV SE LEKAR BBC jaise channalo me kaam kar raha hai…..lekin aaj jis tarha se news channalo me chaplusi or ji hazuri karne walo ki tuti bolti hai …or in channalo ko media karmi nahi media mazdur chahiye …to ab samye ki najakat ko dekhte hue or badlav ke is dour me makahn lal ne apne aap ko update karte hue ….media mazuduro ki mang ko dekte hue ..ye faisla liya hai ke is saal keval media me mazduri kar sakne wale logo ko hi admition diya jayega …agli baar agar mang media karmiyo ki aayegi to …media mazduro ke saath media karmi bhi taiyar karne ki koshis ..suru kar di jayegi …..

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