पत्रकारों को जिन्दा जलाने की कोशिश

पीड़ित पत्रकारविधायक संरक्षित गुंडों को बचाने में जुटी है पुलिस : हरदोई जिले के पाली इलाके में दैनिक जागरण के लिए रिपोर्टिंग करने वाले विनोद मिश्रा और आज अखबार के लिए काम करने वाले प्रकाश बाजपेयी को जिंदा जलाकर मार डालने की कोशिश की गई। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर एक आरोपी को हिरासत में ले लिया है। भड़ास4मीडिया को मिली जानकारी के अनुसार ये दोनों पत्रकार इलाके के एक गांव करडई नकतौरा में नरेगा व अन्य विकास कार्यों की हकीकत जानने के लिए मोटरसाइकिल से पहुंचे थे। इन्हें गांव वालों ने ही बुलाया था। जब ये दोनों गांव से लौट रहे थे तो ग्राम प्रधान व उसके गुर्गों ने इन्हें घेर लिया। पहले तो जम कर पिटाई की। फिर इन पर जला मोबिल आयल उड़ेल कर जिन्दा फूंकने का प्रयास किया। यह तो गनीमत थी की उसी समय पानी बरस जाने से हमलावरों की माचिस गीली हो गयी। कहा जा रहा है कि पत्रकारों को जिंदा फूंकने की मंशा इन्द्र देव ने पूरी नहीं होने दी। इस बीच कुछ लोग वहां आ गए। इनके ललकारने पर हमलावर घायल पत्रकारों को छोड़ कर भाग निकले। घटना की जानकारी जैसे ही मुख्यालय तक पहुंची, जिले के पत्रकारों ने पुलिस पर तुरंत दबाव बनाया। पुलिस ने मौके पर जाकर एक आरोपी को हिरासत में ले लिया।

पत्रकारों की तहरीर पर मामला दर्ज कर लिया गया है। सूत्रों का कहना है कि कुछ विधायकों के फोन पुलिस के पास हमलावरों के पक्ष में पहुंचे। इसके बाद पुलिस की तेजी गाएब हो गयी और पत्रकारों की तहरीर पर महज लूट का मामला दर्ज कर लिया गया। पुलिस राजनैतिक दबाव के आगे इस कदर टूटी की उसने हमलावरों को थाने में बुलाकर बाकायदा कुर्सी पर बिठाकर पत्रकारों के खिलाफ हरिजन एक्ट, फ्राड, बलवा सहित सोलह छोटी-बड़ी धाराओ में मामला दर्ज कर लिया। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद इलाके के पत्रकारों में इस कदर भय बैठ गया है कि उन लोगों ने पुलिस की हरकत की सूचना भी जिले स्तर के पत्रकारों को नहीं दी।

सूत्रों का कहना है कि इन कस्बाई संवाददाताओं के मुश्किल में फंसने के बाद इनके जिले स्तर के ब्यूरो चीफों ने इनसे पल्ला झाड़ लिया है। पत्रकारों पर हमले की सूचना मिलते ही हिंदुस्त्तान के संवाददाता कमर अब्बास और आज तक व यूनीवार्ता  के प्रशांत पाठक ने सारे पत्रकारों को एकत्र किया। अमर उजाला के ब्रजेश मिश्रा और दैनिक जागरण के पंकज सचान को छोड़कर ज्यादातर पत्रकार पहुंचे। इन लोगों ने जिलधिकारी राजामौली से दोनों पीड़ित पत्रकारों के साथ मुलाकात की। पुलिस के रुख पर अपना रोष व्यक्त किया। इन लोगों ने डीएम को साफ तौर पर बता दिया कि यह लड़ाई किसी ग्रामीण पत्रकार की नहीं है। ना ही इन पत्रकारों को उनके अखबारों की मदद की जरूरत है। अगर पत्रकारों के साथ न्याय नहीं हुआ तो अखबारों  के पन्ने पुलिस और प्रशसन के खिलाफ दस गुनी रफ्तार से काले होंगे और सच को सामने लाने के लिए सभी पत्रकार दस गुनी ताकत से काम करेंगे। जिलाधिकारी ने न्याय दिलाने का आश्वासन दिया है। साथ में यह भी कहा कि अगर पुलिस जांच से पत्रकार संतुष्ट नहीं होते हैं तो वे वे मजिस्ट्रेट जांच करवा देंगे।

पुलिस अधिक्षक नवनीत राणा ने पत्रकारों की तहरीर के अनुरूप मामले में धारा बढ़वाने की बात कही। उन्होंने भरोसा दिया कि इस मामले में मीडिया के लोगों की अगर गिरफ्तारी की नौबत आती है तो यह कार्यवाही जांच पूरी होने के बाद ही की जाएगी। उन्होंने बताया कि दूसरे पक्ष की ओर से मिली तहरीर के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है लेकिन विवेचना में अगर पत्रकारों पर कोई आरोप नहीं बनता है तो मामला समाप्त कर दिया जायेगा। श्री राणा ने कहा कि वह पूरी कोशिश करेंगे कि मीडिया को काम करने की आजादी में कोई रुकावट न आए।

उधर, पत्रकारों पर हमले की घटना को सभी स्थानीय अखबारों ने प्रमुखता से प्रकाशित किया लेकिन दैनिक जागरण और अमर उजाला जैसे अखबारों के रिपोर्टरों के सूचना सूत्र कमजोर रहे। इस कारण इन अखबारों में मीडिया की इस लड़ाई को जगह नहीं मिल सकी।

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