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दुख-दर्द

हर माह लुट-पिट रहा है एक जागरणकर्मी

एनसीआर में भी सुरक्षित नहीं हैं मीडियाकर्मी : जागरणकर्मी पर हमला कर लूटा : स्टारकर्मी पर बदमाशों ने किया हमला : देश के दूसरे हिस्सों में कौन कहे, दिल्ली-एनसीआर तक में मीडियाकर्मी सुरक्षित नहीं है। कभी किसी मीडिया आफिस के ठीक बाहर लुटेरे वारदात कर निकल लेते हैं तो कभी पत्रकार की कनपटी पर रिवाल्वर लगाकर जान से मारने की धमकी दे दी जाती है। ताजा मामला दैनिक जागरण, नोएडा स्थित मुख्यालय का है। सेक्टर-63 स्थित नए आफिस के ठीक बाहर एक जागरणकर्मी फिर बदमाशों का निशाना बना। सुरेश नामक मशीन विभाग का यह कर्मी मोबाइल पर बात करते हुए आफिस के बाहर टहल रहा था। अचानक बाइक सवार दो लुटेरे प्रकट हुए और उसके गाल पर चाकू मारकर मोबाइल छीनते हुए भाग निकले। सुरेश जब तक कुछ समझ पाता और शोर मचा पाता, लुटेरे नौ-दो ग्यारह हो चुके थे। इसी आफिस के बाहर पिछले महीने सुबह दस बजे एक लुटेरे ने अश्विनी नामक कर्मचारी का मोबाइल छीन लिया था। अश्विनी ग्राफिक डिपार्टमेंट में काम करते हैं।

एनसीआर में भी सुरक्षित नहीं हैं मीडियाकर्मी : जागरणकर्मी पर हमला कर लूटा : स्टारकर्मी पर बदमाशों ने किया हमला : देश के दूसरे हिस्सों में कौन कहे, दिल्ली-एनसीआर तक में मीडियाकर्मी सुरक्षित नहीं है। कभी किसी मीडिया आफिस के ठीक बाहर लुटेरे वारदात कर निकल लेते हैं तो कभी पत्रकार की कनपटी पर रिवाल्वर लगाकर जान से मारने की धमकी दे दी जाती है। ताजा मामला दैनिक जागरण, नोएडा स्थित मुख्यालय का है। सेक्टर-63 स्थित नए आफिस के ठीक बाहर एक जागरणकर्मी फिर बदमाशों का निशाना बना। सुरेश नामक मशीन विभाग का यह कर्मी मोबाइल पर बात करते हुए आफिस के बाहर टहल रहा था। अचानक बाइक सवार दो लुटेरे प्रकट हुए और उसके गाल पर चाकू मारकर मोबाइल छीनते हुए भाग निकले। सुरेश जब तक कुछ समझ पाता और शोर मचा पाता, लुटेरे नौ-दो ग्यारह हो चुके थे। इसी आफिस के बाहर पिछले महीने सुबह दस बजे एक लुटेरे ने अश्विनी नामक कर्मचारी का मोबाइल छीन लिया था। अश्विनी ग्राफिक डिपार्टमेंट में काम करते हैं।

जून महीने में इसी जगह से जागरण के विज्ञापन विभाग में कार्यरत ओमप्रकाश का स्कूटर चोरी चला गया था। आफिस के नजदीक ही एक जागरणकर्मी की लाश मिली थी। मतलब, हर महीने एक वारदता। अब तो जागरणकर्मी आपस की बातचीत में सवाल उठाने लगे हैं कि क्या देश के नंबर वन अखबार के मुख्यालय के ठीक बाहर उसके कर्मी यूं ही लुटते रहेंगे और बेचारे बनकर जीते रहेंगे? क्या पुलिस-प्रशासन पर जागरण प्रबंधन और जागरण के वरिष्ठ पत्रकारों की पकड़ इतनी ढीली हो चुकी है कि ताबड़तोड़ हो रही घटनाओं को रुकवा पाने और निरोधात्मक उपाय करा पाने में सफल नहीं हो पा रहे हैं? क्या जागरण प्रबंधन के एजेंडे में अपने कर्मियों की सुरक्षा कतई नहीं है? हर महीने यूं ही कोई एक बदमाशों का शिकार बनता रहेगा?

इसी हफ्ते एक और घटना हुई। स्टार न्यूज के सीनियर प्रोडयूसर विष्णु बाइक से आफिस जा रहे थे। नेशनल हाइवे-24 पर तेज रफ्तार कार ने उनकी बाइक में टक्कर मार दी। विष्णु ने कार वाले को डांटा और ठीक ढंग से कार चलाने की नसीहत दी तो तो कार सवार युवक भड़क गए। उन्होंने रिवाल्वर विष्णु की कनपटी पर सटा दी। जान से मारने की धमकी देते हुए रिवाल्वर से कनपटी पर पीटा। इससे विष्णु जख्मी हो गए। वे किसी तरह जान बचाकर भागे। विष्णु को पुलिस ने अस्पताल में भर्ती कराया। विष्णु की तरफ से हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कराया जा चुका है।

 

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