जागरण ग्रुप से मृदुल ने तौबा किया

: इस्तीफे का नोटिस भेजा : अमर उजाला में जाने की चर्चा : आई-नेक्स्ट, मेरठ से सूचना है कि डिप्टी न्यूज एडिटर मृदुल त्यागी ने पिछले सप्ताह प्रबंधन को इस्तीफे का नोटिस भेज दिया. मृदुल उत्तराखंड व वेस्ट यूपी स्टेट हेड के रूप में आई-नेक्स्ट की तीन यूनिटों मेरठ, देहरादून और आगरा के कामधाम को देखते थे. मृदुल चार सदस्यीय आई-नेक्स्ट थिंक टैंक के सदस्य भी थे. इस थिंक टैंक के पास संपादकीय नीति से संबंधित फैसले लेने का अधिकार है. सूत्रों के मुताबिक मृदुल ने प्रबंधन को एक माह का नोटिस भेजा है. संभवतः 23 को मृदुल का नोटिस पीरियड पूरा होगा.

बताया जाता है कि आई-नेक्स्ट व जागरण प्रबंधन ने मृदुल की मनुहार की लेकिन मृदुल आई-नेक्स्ट में अब किसी कीमत पर काम करने को राजी नहीं है. मृदुल त्यागी ने स्पष्ट रूप से कह दिया है कि अब वह जागरण समूह में कार्य नहीं करेंगे. वजह क्या है, यह तो पता नहीं चल पाया है लेकिन सूत्र बताते हैं कि मृदुल ने अभी तक किसी दूसरे अखबार में भी जाब के लिए कोई बात नहीं की है. ऐसे में यह कुछ नहीं कहा जा सकता कि मृदुल इस्तीफे के बाद क्या करने जा रहे हैं.

मृदुल त्यागी ने अपना इस्तीफा ग्रुप एडमिन हेड अजय मिश्रा के इस्तीफे के बाद दिया है. इसकी कॉपी दैनिक जागरण के समूह संपादक संजय गुप्ता, निदेशक देवेश गुप्ता, निदेशक तरुण गुप्ता के अलावा आई-नेक्स्ट हेड आलोक सांवल को भी भेजी गई है. मृदुल त्यागी तेजतर्रार पत्रकारों में माने जाते हैं. चर्चा यह भी है कि उनकी अमर उजाला के एक स्थानीय संपादक के जरिए निदेशक अतुल माहेश्वरी से बात लगभग पक्की हो चुकी है.

मृदुल पहले भी अमर उजाला में छह साल तक काम कर चुके हैं. शशि शेखर के कार्यकाल में प्रतिभावान लोगों के अमर उजाला से पलायन के दौर में मृदुल त्यागी ने भी अमर उजाला को गुडबाय बोल दिया था. उन्होंने संडे इंडियन मैग्जीन, दिल्ली में बतौर चीफ एडिटर काम किया है. दैनिक हिंदुस्तान में सीनियर कापी एडिटर व दैनिक जागरण, मेरठ में सीनियर रिपोर्टर रहे हैं. इस पूरे प्रकरण के बारे में भड़ास4मीडिया की तरफ से मृदुल त्यागी से जब संपर्क का प्रयास किया गया तो उनका मोबाइल आउट आफ कवरेज बताता रहा.

Comments on “जागरण ग्रुप से मृदुल ने तौबा किया

  • Sachin Rathore says:

    मृदुल त्यागी की गिनती उत्तरी हिंदी बेल्ट के सबसे प्रतिभावान और तेजतर्रार पत्रकारों में होती है. ये उनके ही दमखम और सोच का नतीजा था की उन्होंने रातों रात आई-नेक्स्ट को मेरठ का लोकप्रिय अख़बार बना दिया. अब वो जिस भी संस्थान से जुड़ें ये उनका निर्णय है, लेकिन मृदुल जिसका भी हाथ पकड़ेंगे उसका लाभ ही लाभ है.

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  • right move on right time Mridul . . . . Amar Ujala mein already tumhare purane sathi bhi hain, aise mein working atmosphere co-operative hoga.

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  • डब्बू says:

    इतने प्रतिभावान पत्रकार के बारे में पहले कभी पढ़ने को नहीं मिला।
    जागरण को तो काफी नुकसान होगा उनके जाने से।

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  • Piyush Sharma says:

    Mridul ji ek creative journalist hain unhone jaha bhi kam kiya waha fayda kiya hai unki chavi ek eemandar patrakar ki hai, nshchi hi we jaha jaenge labh pahonchaenge

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  • ज्ञान says:

    मृदुल अगर अपनी सनक, अहंकार और दारुबाजी छोड़ दें तो वाकई अच्छे पत्रकार बन सकते हैं। वैसे मृदुल का इस्तीफा जागरण वालों से सौदेबाजी ज्यादा लगता है। न मृदुल कही जा रहे हैं और न ही जागरण के अलावा उन्हें कोई झेल सकता है।

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  • hi,
    maine bhi mridul ji ke bare me kafi suna hai. vo kafi honest, samjhdar or co-oprative person hain. unke sath kam karne ka mauka bhi har kisi ko nahi milta. aaj bhi is insan me josh ki koi kami nahi hai. ab nai jagah naye log tumhara intjar kar rahe hai or jo log tumhe nahi pahchan paye vo pachtayege. mager is media line me bahut gande log bhi hain jo khud to kuch hote nahi or kisi aache insan ki tareef karne me unki nani mar jati hai. aadate har insan me hoti hain kisi dusre par ungli uthane wale khud ko bhi dekh le to acha hoga.

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  • inme se adhi baatein jhuthi hain. Kabi i next ka meerut edition utha kar dekhein in pratibhawan patrakar ki pratibha dikhegi. inke jaiso ne hi inext ka mahaul ganda kar rakha hai. na bat karne ki tamiz na kisi ke kam ki koi izzat.

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  • सुनील सिंह, पूर्व कर्मचारी आईनेक्स्ट says:

    अरे यशवंत भाई अंदर की कहानी क्यों नहीं लिखते कि जागरण पत्र समूह में अब मालिकों से ज्यादा आलोक सांवल की चलती है। आईनेस्क्ट के देहरादून संस्करण से शुरुआत करते हैं यहां देवेश गुप्ता ने मिथलेश सिंह को डीएनई बनाया था, आगरा में विजय नारायण सिंह और मेरठ में प्रभात सिंह थे। तीनों चले गए, देवेश हाथ मलते रह गए। प्रभात सिंह तो फोटोग्राफर होने की वजह से संपादक का दायित्व ढंग से नहीं निभा पाते थे लेकिन विजय जी और मिथलेश जी के साथ तो बहुत बुरा हुआ। देहरादून से चीफ रिपोर्टर का भी इसी तरह पलायन हुआ। आगरा में चीफ रिपोर्टर अमी आधार निड्र, को चलता किया गया। डेस्क प्रभारी अनिल दीक्षित का कानपुर तबादला हुआ, और वहां उत्पीड़न से तंग आकर उन्होंने आलोक सांवल को इस्तीफा सौंप दिया। देवेश जी के विकेट एक-एक करके आलोक सांवल ने उड़ा दिए। इसी तरह का कृत्य मेरठ के डेस्क प्रभारी के साथ हुआ हालांकि वह समय रहते चाटुकारिता के बल पर जागरण अलीगढ़ में जान बचाने में कामयाब रहे पर इसमें उनका ही हुनर था। आलोक उनसे सेट थे इसलिये वीटो यूज नहीं किया। जागरण के प्रतिभाशाली लोगों का आईनेक्स्ट ने खात्मा कर दिया। मैं जानता हूं कि आप इसे छापेंगे नहीं क्योंकि आप आलोक सांवल के बेहद नजदीक हैं। मेरा मकसद महज आपको झकझोरना है कि पत्रकारों के हित में काम करते रहें, जिसके लिए लोग आपको पसंद करते हैं। जरा एक स्टोरी इस पर डेवलप कीजिए कि आईनेस्क्ट ने कितनों का बेड़ा गर्क किया। हाल यह है कि इसमें काम कर चुके लोगों को नौकरी नहीं मिल रही। जो लोग हैं, सब पलायन करना चाहते हैं पर करें क्या। हर दर्जे का उत्पीड़न है। एक नजर डालिये, इसे टिप्पणी के रूप में छापकर महज औपचारिकता न करें, बल्कि यह एक बड़ी स्टोरी का सब्जेक्ट है आपके लिए।

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