दुख-दर्द मेहंदी भाभी से शैलेंद्र बोले- ये मुझसे बर्तन धुलवाता है! खबर बनाते-बनाते तुम खुद खबर बन जाओगे.... सोच भी नहीं सकता। शैलेंद्र बड़े झूठे निकले यार तुम। अभी-अभी ही तो तुमने फोन कर मुझे... bhadas4media.comJune 21, 2009
दुख-दर्द शैलेंद्र सिंह, यानी एक प्यारे दुश्मन का जाना आईबीएन7 में कार्यरत पत्रकार पंकज श्रीवास्तव वो अंतिम शख्स हैं जिनसे शैलेंद्र जीते जी मिले थे। शैलेंद्र अपनी कार से पंकज को उनके घर... bhadas4media.comJune 21, 2009
दुख-दर्द शोक नहीं, उबाल खा रहा हूं यशवंत भाई, गमी का वक्त है, संभावनाओं से लैस साथी शैलेंद्र सिंह यूं चला जाना मुझे भी साल रहा है। भले ही व्यक्तिगत तौर... bhadas4media.comJune 20, 2009
दुख-दर्द तब बच्चे की तरह प्रसन्न हो गए शैलेंद्र शैलेंद्र से मेरी मुलाकात तकरीबन 18-19 साल पहले दिल्ली में हुई थी। तब वे पत्रकारिता में अपना कैरियर बनाने के लिए संघर्ष कर रहे... bhadas4media.comJune 20, 2009
दुख-दर्द हां जिंदगी बोलो न…ये कौन सा मुकाम है शैलेंद्र सिंह को कुछ अलग तरीके से याद किया है अगस्त्य अरुणाचल ने। शैलेंद्र की कविता की कुछ लाइनों को आगे बढ़ाते हुए अपने... bhadas4media.comJune 20, 2009