संघियों के दिमाग ठिकाने लगाने की जरूरत

शेषजी
शेषजी
: आजतक वाले सक्षम हैं यह काम करने में : संघियों से पूछें कुछ कठिन सवाल : याद रखें, फासिस्ट ही करते हैं मीडिया पर हमला : आजतक के नयी दिल्ली दफ्तर में आरएसएस के कुछ कार्यकर्ता आये और तोड़फोड़ की. आरएसएस की राजनीतिक शाखा, बीजेपी के प्रवक्ता ने कहा कि इससे टीवी चैनलों को अनुशासन में रहने की तमीज आ जायेगी यानी हमला एक अच्छे मकसद से किया गया था, उम्मीद की जानी चाहिए कि आगे से लोग अनुशासन में रहें तो यह नौबत की नहीं आयेगी.

आरएसएस से यह उम्मीद करना कि वह अपने विरोधी को सज़ा नहीं देगा, ठीक वैसा ही है जैसे यह उम्मीद करना कि गिद्ध शाकाहारी हो जाएगा. वह उसकी प्रकृति है और कोई भी कोशिश कर ले, प्रकृति नहीं बदली जा सकती. आरएसएस को काबू में करने का एक ही नियम है जिसे आज़ाद भारत के पहले गृहमंत्री, सरदार पटेल ने लागू किया था. उस पर पाबंदी लगाकर उसे बेकार कर दिया था. सरदार के बाद जवाहरलाल नेहरू ने आरएसएस को वैचारिक धरातल पर शून्य पर पहुंचा दिया था. बाद में इंदिरा गाँधी की विचारधारा से पैदल राज कायम हुआ और आरएसएस फिर सम्मान पाने की दिशा में अग्रसर हो गया.

इंदिरा गाँधी ने अपने नौजवान बेटे की सलाह से इमरजेंसी लगा दी और चेले चपाटों के राज की संभावना बहुत जोर पकड़ गयी. लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने आरएसएस को साथ लेकर लड़ाई लड़ी और संघ वाले फिर एक बार स्वीकार्यता की दहलीज़ लांघ कर मुख्यधारा की राजनीति में आ गए. उसके बाद तो देश को न को गाँधी मिला, और न ही सरदार और न ही जवाहर लाल. मझोले दर्जे की राजनीति का युग शुरू हो गया. और फिर आरएसएस वाले भी राजनेता बन  गए. केंद्र सरकार तक पहुंच गए. और अब वे बाकायदा एक राजनीतिक पार्टी हैं. लेकिन विपक्षी को ख़त्म कर देने की फासिस्ट सोच के चलते वे किसी तरह का लोकतंत्र बर्दाश्त नहीं कर सकते. लिहाजा अगर संभव होता है तो विरोधी को नुकसान पहुंचाते हैं.

इसी सोच का नतीजा है कि उनके लोग आजकल मीडिया के ऊपर हमलावर मुद्रा में हैं. यह काम उनकी विचारधारा के पुरानत पुरुष हिटलर ने बार बार किया, पाकिस्तान में शुरू के दो तीन वर्षों के बाद से ही इसी फासिस्ट सोच वाले हावी हैं और अब भारत में भी फासिस्ट ताक़तें पहले से ज्यादा ताक़तवर हो रही हैं. मीडिया को काबू में करना फासिज्म की बुनियादी तरकीब माना जाता है और उसी काम में आरएसएस की हर शाखा के लोग लगे हुए हैं. आजतक के कार्यालय पर हुए हमले को इसी रोशनी में देखा जाना चाहिए.

आजतक और हेडलाइन टुडे के दफ्तर पर किये गए फासिस्ट हमले की मीडिया संगठनों ने निंदा की है और उसे कायराना हमला बताया है. सरकार के पास जुलूस भी जायेगा जहां यह मांग की जायगी कि आरएसएस पर फिर से पाबंदी लगा दी जाए और उसके नेताओं को खुलेआम न घूमने दिया जाए. प्रेस क्लब में एक सभा भी हुई और उसी तरह की बातें रखी गयीं. लेकिन प्रेस को सरकार से याचना करने की कोई ज़रुरत नहीं है. आम तौर पर कहा जाता है कि मीडिया पर जब हमला होता है तो सभी लोग इकठ्ठा नहीं होते. जिसके  कारण हलावारों के हौसले बढ़ जाते हैं और वे बार बार हमले करते  हैं. यह मामला बहुत ही पेचीदा है, हालांकि सच है.

ऐसा शायद इस लिए होता है कि जब ताज़ा हमले के पहले किसी और चैनल पर हमला हुआ था तो बाकी लोग नहीं आये थे. मुझे लगता है कि इस बहस से कन्नी काट लेना ही सही रहेगा लेकिन मीडिया पर हमला करने वालों पर लगाम तो लगानी होगी. कोई नहीं आता तो न आये लेकिन अगर आजतक और इंडिया टुडे ग्रुप तय कर ले तो बात बदल सकती है. इस हमले में हेडलाइन टुडे और आजतक पर हमला इसलिए हुआ कि उन्होंने आरएसएस से जुड़े कुछ लोगों को मुसलमानों के खिलाफ ज़हर उगलते कैमरे पर रिकार्ड कर लिया था और उस फुटेज को अपने चैनल पर दिखा कर अपना फ़र्ज़ निभाया था. लेकिन जिनके बारे में खबर थी वे भड़क गए और मार पीट पर उतारू हो गए. इनका जवाब देना बहुत ही आसान है. इतने बड़े न्यूज़ चैनल को किसी और मदद की ज़रुरत नहीं है. वे तो खुद ही इन तानाशाही के पुतलों को घर भेजने भर को काफी हैं.  बस उन्हें आरएसएस को परेशान करने का मन बना लेना चाहिए.

आरएसएस से कठिन सवाल पूछे जाने चाहिए. उनसे पूछा जाना चाहिये कि १९२० से १९४६ तक चली आज़ादी की लड़ाई में वे क्यों नहीं शामिल हुए, क्यों उनका कोई नेता जेल नहीं गया, महात्मा गाँधी की ह्त्या में जिस आदमी को फांसी दी गयी उससे उनका विचारधारा के स्तर पर क्या सम्बन्ध था. उनसे पूछा जाय कि बाबरी मस्जिद के विध्वंस में उनके नेता क्यों कई तरह की बातें कहते नज़र आये. उनसे पूछा जाए कि आपके यहाँ जो लोग जीवनदान दे चुके हैं उनको क्यों अकूत संपत्ति दी जाती है. मुराद यह है कि आरएसएस को ऐसे सवालों के घेरे में घेर दिया जाए कि बाद में जब कभी उनके नेता मीडिया सगठनों से पंगा लेने की सोचें तो उन्हें दहशत पैदा हो जाए. हालांकि यह तरीका बहुत ही लोकतांन्त्रिक नहीं हैं लेकिन शठ के साथ आचरण के कुछ नियम तय कर दिए गए हैं उनका पालन कर लेने में कोई बुराई नहीं है. दूसरी बात यह कि खबर को सही प्रसारित करने की बुनियादी प्रतिबद्धता को कभी नहीं भूलना चाहिए. और फासिस्ट ताक़तों को लोकतांत्रिक तरीकों से समझाया जाना चाहिए लेकिन उन्हें धमकाया भी जा सकता है.

लेखक शेष नारायण सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं.

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Comments on “संघियों के दिमाग ठिकाने लगाने की जरूरत

  • B.P.Gautam says:

    Baat Bilkul Shi Hai Sir Par RSS Desh Drohi Sangthhan Nhi Hai…Ye To Manna Hi Padega…Is Liye Media Ko Bhi RSS Aur ISI Ki Karypranali Me Fark Rakhna Hi Chahiye.

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  • mazhar husain Journalist says:

    SHARM KARO RSS KE LOGO……
    Sharm aani chahiye RSS ke logo ko ek taraf to RSS ke log Anushashan me rahne ki baat karte hai ye hamla Ajjtak ke Daftar par nahi kiya gay balki desh par hamla kiya gaya hai ..sabse badi baat to ye hai ki TV par pura Hindustaan tod fod ki is khabar ko dekh raha tha aur RSS ke Anushashan heen neta kah rehe the bayaan araha tha ki tod fod nahi ki gayi hai jhooth bolna inse koi seekhe .. hume to ab inhe sabak sikhane ke liye kamar kas lena chahiye…khabar chalne ke baad to RSS ke logo ko Chehra nahi dikhana chahiye tha lekin waah re besharm chehra chupane ke bajay sadak par nikal aaye….in logo ko aisa jawab dena chahiye taki koi bhi media ke logo se Bhidne ki himmat na kar sake …iske liye ham sabhi patrkaro ko ek hona padega tabhi is tarah ki harkat karne walo ko jawaab diya ja sakta hai

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  • बहुत घायल लगते हैं आर एस एस से..? कभी जान ने की कोशिश की है कि क्या किया है आर एस एस ने और बाकि आपके प्रिय नेहरू ने..? जिन प्रश्नो की बात कर रहे हैं कोई साधारण स्वयं सेवक भी उनके जवाब दे देगा.. लेकिन नेहरू को ले कर अगर किसी स्वयं सेवक ने प्रश्न पूछे तो पूरी कान्ग्रेस के साथ आप भी बगले झांकते नजर आयेंगे.. और आप कह्ते हो कि संघ वैचारिक धरातल पर शून्य हो गया था.. वैचारिक धरातल पर शून्य कोई संगठन इतना ज्यादा स्वीकार्य हो सकता है जितना आज संघ है? आपके नेहरू की पार्टी का सेवादल क्यों नही आर एस एस जैसा हो सका..? गाल बजाने से और बिना जाने किसी के बारे मे लिखने से आप को पैसा तो मिल सक ता है.. पर समर्थन नही.. जाइये जा कर पहले संघ के बारे मे जानिये और किसी और से संघ का ज्ञान लेने की बजाय खुद संघ को जानिये और उस के बाद लिखियेगा..

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  • Amitabh Tripathi says:

    भावुकता के आवेग में लिखा गया लेख है। इससे तो यही प्रतीत होता है कि कम्युनिज्म , समाजवाद और वामपंथ के पतन और जनमानस में इन विचारधाराओं की प्रामाणिकता क्षीण होने से शेषनारायण जी जैसे पत्रकार भी शालीनता की सीमायें लाँघने को विवश हो रहे हैं। इस लेख में कुंठा, हताशा और पराजय स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रही है। परमात्मा इन विचारधाराओं की आत्मा को शान्ति प्रदान करे।

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  • Firdaus Khan says:

    मीडिया पर हमला करना ग़लत है…

    इस देश में तो तसलीमा नसरीन को भी नहीं बख्शा जाता…

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  • सीता राम says:

    लेखक ने जो सवाल उठाये हैं ,उनका जवाब यहीं भड़ास पर ही दे दीजिये आप लोग . लिखने वाले को क्यों फजीहत कर रहे हैं ?..

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  • anup anand says:

    बेचारे शेष नारायण सिंह को कुछ मत कहिए। उनकी दाल-रोटी ही हिंदुत्व विरोध के आधार पर चलती। जिस को इस बात में संदेह हो, वह यह पता कर ले कि शेष जी किस अखबार समूह से जुड़े हैं। हिंदू विरोधी धर्मनिरपेक्षता के रंग में रंगे ये तथाकथित बुद्धिजीवी तब तक नहीं मानेंगे जब तक कि ये पूरे भारत को पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसा मुस्लिम देश नहीं बना लेंगे।

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  • vinay pandey says:

    शेष जी के विचार बहुत नेक है, लगता है की शेष जी दुनिया दारी को नहीं समझते है, उन्हें शायद पता नहीं की आज तक वाले आर एस एस के कितने करीब हैं, आज तक ने इन्हें कितनी बड़ी वैचारिक ज़मीन दी हुई है. अगर यह फिक्स नहीं भी हैं तो भी ऐसे लोगों को प्रश्रय देना किसी को महंगा पड़ सकता है. जैसे लादेन को प्रश्रय देना अमेरिका को . जहाँ तक एक भाई साहब का यह कहना की आइ एस आइ और आर एस एस में फर्क कराने वाली तो नाम बस में फर्क है, आइ एस आइ वाले कम से कम दुसरे देश वालों को तबाह करते हैं ये तो अपने घर को ही तबाह करते हैं वो भी अपने ओछे स्वार्थ के कारण. काल तक साइकल में चलने वाला इनका प्रचारक आज कार में घूम रहा है, जहाँ सत्ता है वहां सत्ता की चटनी भकोस रहा है,ये लूटेरों की फौज है भैया ! इनसे इमानदारी शांति और सहिष्णुता जैसे सच्चे हिन्दू शब्द नहीं मालूम ये राक्षसी भाषा ज्यादा समझते हैं.ये तोड़ने वाले लोग ही हैं ,मूलतः.और जहाँ तक आज तक का सवाल है आपको याद होगा गुजरात चुनाव से ठीक पहले आज तक ने एक स्टिंग आपरेशन दिखाया था जिससे नरेन्द्र मोदी को सीधा लाभ मिला गया.
    शेषजी दुनिया दारी समझिये !

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  • ओमनाथ शुक्ला says:

    शेष जी, आपके बारे में सुन रखा है कि आप समाजवादी हैं। वामपंथियों के मुंह से आरएसएस को गाली तो समझ में आती है, लेकिन समाजवादियों की गाली कुछ हजम नहीं हुई…आप भूल गए..1974 में आपके ही एक पुरोधा जयप्रकाश नारायण ने संघ के बारे में क्या कहा था। उन्होंने कहा था कि अगर संघ फासिस्ट है तो समझो मैं भी फासिस्ट हूं। अब आप जेपी को भी फासिस्ट मानेंगे….1956 में गणतंत्र दिवस परेड में आरएसएस को नेहरू ने ही बुलाया था। यह क्यों भूल जाते हैं कि तब गांधी जी की हत्या हुए महज आठ साल ही बीते थे। शेष जी, इस नाते तो नेहरू भी फासिस्ट हुए। संघ परिवार से तो रामबहादुर राय और प्रवाल मैत्रा भी जुड़े रहे हैं या हैं। सुना है आप उनकी भी बहुत इज्जत करते हैं। इस नाते तो वे भी फासिस्ट हुए और फासिस्ट की इज्जत क्यों…जवाब तो आपको देना ही पड़ेगा।

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  • jab media sharab ke nashe me bina kuch tathya ke kisi k piche hath dhokar pad jayega to wah react karega hee. Media hinduwadee sangthan k piche hath dhokar pada hai,use soft target samjh liya hai. lekin public ko yah bardast nahin.hindustan me Hindu hona gunah jaisa kar diya hai ye kuch bike hue patrkaron ne,chand tukre k liye…public sab jantee hai

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  • संजीव कुमार सिन्‍हा says:

    इतना घटिया लेख। संघ की आलोचना ही करनी है तो बात में वजन होना चाहिए तथ्‍यों और तर्कों के आलोक में, लेकिन यह लेख तो सड़ांध मानसिकता की उपज है और लेखक का ज्ञान भी अधूरा है। 1920 में चली आजादी की लड़ाई में संघ कैसे भाग ले सकता है जबकि उसकी स्‍थापना भी उस समय नहीं हुई थी। जीवनदानी कार्यकर्ता को अकूत संपत्ति दी जाती है, जनाब, संघ के विरोधी भी हंसेंगे आपकी इस बात पर। आजादी की लड़ाई में संघ ने भाग नहीं लिया, पहले इतिहास का ज्ञान प्राप्‍त करिये और यह लेख पढिए [url]http://www.pravakta.com/?p=10814[/url]

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  • Tej Bahadur Yadav says:

    हमारे गांव में कहावत- लातों के देवता बातों से नहीं मानते। संघी ऐसे ही देवता हैं, जिन्हें अब सिर्फ लातों से ही सुधारा जा सकता है। लात से बात नहीं बने तो जूतों के इस्तमाल की जरूरत पड़ सकती है। वैसे इस नीच संगठन से उलझने वाले के हाथ के गंदे होने का पूरा खतरा है। बुजुर्ग कह गए हैं कि न, कि कीचड़ में पत्थर फेंकोगे तो ऊपर ही आएगा। एक बात और बंदर-लंगूरों को सिखाने का परिणाम उलटे भुगतना पड़ता है। पंचतंत्र का किस्सा यह है कि एक चिड़िया घोसेले में अपने बच्चों के साथ रह रही थी। बारिश शुरू हुई तो चिड़िया ने अपने घोंसले में शरण ली। बंदर भी उस घोंसले में सिर छुपाने की कोशिश की। चिड़िया ने कहा- आदमी जैसे हाथ-पैर और आदमी की तरह शक्तिशाली हो। अपने लिए झोपड़ी बना लिए होते। बंदर ने आव-देखा न ताव चिड़ियां का सबक सिखाने के लिए उसका घोंसला ही उजाड़ दिया। चिड़िया को अपनी गलती समझ में आई। आज तक को भी अपनी गलती समझ में आ जाएगी-बंदरों को सही राह बताने की गलती। देशद्रोही, जो अपने को राष्ट्रप्रेमी के कवच में ढुकते हैं। चोरों का गिरोह।
    Tej Bahadur Yadav

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  • धीरज says:

    ऐसे लेखों के लिए तो आपने अलग कॉलम (विचार) बना ही रखा है यशवंत भाई.. फिर इसे यहां क्यों छाप दिया…? मुख्य पृष्ठ पर ऐसे ही लेख छापें जिनमें कोई पूर्वाग्रह ना हो और यथास्थित बयां की गई हो. लगता है शेष नारायण जी में सिर्फ पूर्वाग्रह ही “शेष” रह गया है. शायद उन्हें मालूम नहीं है कि आजकल विरोध प्रदर्शन भी प्रायोजित होते हैं और उनका फायदा प्रदर्शनकारियों को कम, जिनका विरोध हो उन्हें ज्यादा मिलता है. गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी इसका जीता-जागता उदाहरण हैं. बहरहाल, इसी बहाने शेष नारायण जी ने नेहरू, पटेल, इंदिरा, संजय और संघ सबकी झलक दिखा दी, लेकिन इतिहास कभी भी अपने आइने से नहीं देखा जा सकता. सच्चाई नहीं बदल सकती कि कांग्रेस की तुष्टिकरण नीति ने ही देश को अंतर्राष्ट्रीय मुस्लिम आतंकवाद के चंगुल में फंसा दिया है. संघी कितने भी बुरे क्यों न हों, सीमापार के आकाओं से संचालित तो नहीं होते?

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  • Shesh Ji

    Congratulations for daring to write such a brilliant article. It is difficult because like most other countries in Europe in the past, our middle-class is sympathetic to fascism.

    RSS is a danger to this country. Its threat is immense but we don’t realise it in general. Middle-class is anti-poor, doesn’t care about slum-walas, minorities, dalits or rural India. It is just concerned about itself and loves to talk about Hindutva but they are naive people with no understanding of the nefarious aims of the Sangh Parivar.

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  • Chandrabhan Singh says:

    RSS ki aalochna se headline today ko log janne lage hai. Shesh Narain Singh tum ko bhi ab log janne lag jayenge, do-char or ese lekh likho jinme RSS ko jam kar gali ho, yah bahut achha tarika talasha hai, desdrohiyon ki bhasa likhne walon tumhara charitra tum achhi tarah se prakat kar rahe ho. Shesh Narain Singh Tumhare par or Tumhare samarthan me likhne walon par mujhe daya aa rahi hai ki des bhakt sanghthan RSS par tumhara soch kitna ghatiya, desdrohiyon ki god se utro , BHAGWAN tume sadbudhhi de me to yahi prathna kar sakta hoon. NARUKA.

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  • ramesh singh says:

    aapne bhi shesh ji barre ke chattai mai hath dal diya…alternate media mai sangh chhaya hua hai…mujhai lagta hai RSS ne bakayada eik pracharak(alternate media) tainaat kiya hua hai…RSS ke bare mai boltai hi sare ke sare chipak kar dank marne lagtai hain…facebook par to inka jhatka dekhtai hi banta hai..sabhya log inka jabab dai bhi to kaisai…ye to galiyan dene lagte hain…

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  • shiv prakash singh chandel says:

    RSS JAISE DESHBHAKT SAGTHAN PER UNGLI UTHANE WALE NETA AUR LOG APNA GIREHWAN PAHLE JHANKER DEKH LEIN. TAB RSS PER PABANDI LAGANE KI BAAT KAREIN.RSS KI TULNA ISI JAISI DESHDROHI AGENSY SE NAHI KARNI CHAHIYE.

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  • कांग्रेस शाषित और गृह मंत्रालय कि सुरक्षा के अधीन राजधानी दिल्ली के ह्रदयस्थली में स्थित इस मरणासन्न TRP वाले चैनल पर हुए हमले को पुलिस अगर मूक दर्शक बन कर देखती रहे ,वो भी तब जब उसे RSS के इस प्रदर्शन की पूर्व जांनकारी हो, तो क्या ये सामान्य बात है, हमले के दौरान हुई तोड़-फोड को फिल्माते कैमरों को या स्टाफ सदस्यों से कोई दुर्व्यवहार ना होना, …….अजीब नहीं लगता क्या ?? चैनल तो अवसरवादी पत्रकारों और नेताओ के मुह में जुबान देकर सुलह का सफ़ेद झंडा लेके खड़ा हो गया… लेकिन भाई लोग मुह कि खुजली मिटाने से बाज़ नहीं आ रहे…अगर पूछे तो 90% लोगों ने headlines Today कि इस विवादस्पद रिपोर्ट को देखे भी नहीं होंगे, लेकिन हवा में गदा भांजने का मौका क्यों छोड़े भला???
    —विनीत—-
    swen news – newzone broadcom p ltd

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  • chandra kant says:

    seshji
    samajvad ke communism ne dubla kar diya hai lagta hai aapko
    RSS walon ke pas to danda hai voh chalayen to acha lagta hai
    aap kuyn paresan ho rahen hai
    RSS walon ki bat obama bhi manta hai
    apni cabinet mein sarey hindustani hi bhar rakhen hai
    phir aap ki to oukat hi kya
    RSS wale kartey pahley hain shochtey bad main hai
    RSS ko janey bina koi kuch kahe unhen acha nahi lagata hai
    jo sochtey hai woh kar hi detey hai
    desh main hi nahi duniya main shakha lagatey hai
    yeh hindustan hai aap bol bhi rahen hai , varna ser kalam kar diya hota
    1947-1987chalis saal tak aawaj nahi nikalti thi
    aapaat kal main bhi in RSS waleon ne hi jaan bachai thi
    narsimha rao aur atal ki sarkar ke bad se aap jaison ne deshdrohi aur samprdaiyikta jaise sabdon ka chalan suru kar diya hai
    vaise farak nahi padega aap kuch bhi kahen
    dhirey dhirey yeh bharat ban raha hai india nahi raha
    india main samajvad communisum bahut panpa
    ab rastravad ka pahada padhana padega

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  • प्रभाकर सिंह says:

    नाम है शेष लेकिन है अवशेष …बचारे की दुकान ही गाली देकर चलती है क्या करे गाली नही देगा तो खाना भी नही मिलेगा .ये चैनल वाले क्या दिखाते हैं मुझे पता है यशवंत जी इसमें एसे लोगों के कमेंट को जगह मत दिजिए जो एक दम निर्थक हों
    कोइ तेज बहादुर यादव है बाप ने गदहे का नाम तेज रख दिया कुछ पता नहीं है चले आये मुह उठा कर भडास पर भडास निकालने बेटा हिम्मत हो तो सड़क पर आकर गाली दो कितने लात मिलेंगे गिन पाना भी मुश्किल होगा…शे
    शेषनारायण जी आपका राग पुराना हो चुका है आप भी उस चैनल की तरह कोइ विस्फोटक खबर सुनाईये भड़ास नही भारत में मशहूर हो जायेगें ….

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  • shabnam hashmi says:

    BAN the RSS
    We, the undersigned, demand an immediate ban on the RSS and all its front organisations and wings.
    We strongly condemn the recent attack by hundreds of RSS goons on the office cum studio of leading news channels Aaj Tak and Headlines Today. This vicious sequence was supplemented by yet another attack on another TV network in Mumbai by yet another lawless mob of the Shiv Sena. There have been many cases earlier, though none as big as the recent attack, when various RSS outfits have attacked the media violently, in a planned moved to terrorise and intimidate. This follows the basic premise that these fanatic Hindutva outfits, with their hydra-headed joint family, are undemocratic, do not have faith in normal codes of decent, social behaviour, dislike all forms of dissent, debate or intellectual enquiry, and are staunchly non-believers in the basic tenets of the Indian Constitution.
    Banned several times earlier, and accused in the assassination of Mahatma Gandhi, their sinister fronts and masterminds have been behind innumerable tragic events , violence and massacres which have rocked the country: from a series of communal riots, to Babri Masjid demolition and the riots thereafter, to the State sponsored Sangh Parivar carnage in Gujarat 2002, to the series of organised terror bomb blasts which killed hundreds across the Indian landscape in recent times.
    It is widely known that the RSS (Rashtriya Swayamsevak Sangh), which claims to be a cultural outfit, is the umbrella organisation of the entire Sangh Parivar, and the political vanguard of the family. It appoints and dismisses BJP presidents. It even decides chief ministers and cabinet ministers of BJP governments. Most BJP leaders are confirmed RSS members. It is aligned symbiotically with VHP/Bajrang Dal and a network of similar lumpen organisations. It has thousands of branches which have been at the forefront of not just spreading communalised-hate propaganda but also in carrying out various kinds of systematic and underground terror and violent activities especially through Abhinav Bharat, Vishwa Hindu Parishad and Bajrang Dal.
    The sting operation executed by Headlines Today/Aaj Tak and stories covered by other media houses show that he RSS think-tank connived in the bomb blast at Ajmer Shrief shrine on October 11, 2007. Some of the cases where the sinister hands and minds of the Hindutva forces are being explicitly talked about are: Nanded/ April 6, 2006, Delhi/ April 14, 2006, Malegaon (Maharashtra)/ September 8, 2006, Samjhauta Express (Haryana)/ February 18, 2007, Mecca Masjid (Hyderabad)/ October 18, 2007, Kanpur/ August 24, 2008, Delhi/ September 27, 2008, Malegaon and Modasa (Gujarat)/ September 29, 2008, Grace church at Margao in South Goa/ October 16, 2009.
    ANHAD as well many other civil society organisations and several media publications/ channels have raised the question about the organised and penetrative involvement of Sangh in terror activities many a times during the past five years in the media as well as with various political parties and the government. It has been our stated position that these organisations are infiltrating law enforcement and other official agencies, subverting the legal process, and working on a long term and on a highly insidious plan to destroy the Indian social fabric, the Constitution of India and usher in a fundamentalist Hindu Rashtra. It is in this context that their bloody attacks on minorities and innocents can be explained: to polarise society, to create violence and anarchy among communities, to destroy institutions and peaceful civil societies, to penetrate government systems, including the army, and to finally carry out a kind of coup.
    Due to the infiltration of the rightwing in almost every sphere of public life including the establishment and part of the media, a blatant cover up has been provided to the Sangh terror network. The same media and the spokespersons of the government who brand Muslim youngsters or individuals as terrorists within minutes of a bomb blast and declare their connections to various dubious ‘Muslim’ organisations — have not only kept quite but have surreptitiously suppressed the information about the direct involvement of the Sangh Parivar and many of their leaders in the terror killings and bomb blasts.
    Clearly, top leaders of the RSS and its front organisations are involved. So how is the BJP, which receives orders from the RSS, with most of its members intricately associated with the RSS, outside the shadow of doubt?
    Few excerpts from the revelations made in the Headlines Today sting operation and other media stories about the RSS pracharaks , workers and their linkages to the terror attacks:
    Involvement of top RSS leader Indresh Kumar, a close aide of the RSS chief Mohan Bhagwat in the terror activities points towards the depth of terror nexus with the Sangh Parivar. Late Maharashtra ATS chief Hemant Karkare had in fact revealed the involvement of these links starting from the Malegaon blasts.
    Col. Purohit from Abhinav Bharat and Sadhvi Pragnya’s orginally have Hindutva links, and their role in the Malegaon blast has been exposed. The names of Devendra Gupta and Lokesh Sharma along with Sandeep Dange and Ramchandra Kalsangra have emerged in the Ajmer, Mecca Masjid, Samjhauta express and Malegaon blasts.
    For the Mecca Masjid blast inquiry, two top RSS leaders from UP and Jharkhand, namely, Ashok Beri and Ashok Varshney, are stated to be directly involved in giving shelter etc to the bomb blasts accused.
    ANHAD demands
    •an immediate imposition of ban on RSS and all its front organisations and wings.
    •an urgent and impartial time-bound enquiry in all the terror bomb blast cases should be held to bring the fundamentalist Hindutva forces to book. It is a sensitive matter pertaining to security of the country and hence the terror links of RSS and its other offshoots should be cracked urgently.
    •Immediate release of innocent Muslim boys from those cases where RSS involvement has been unearthed.
    1.Aamir Idrisi, President, Association of Muslim Professionals, Mumbai
    2.Aditi Mangaldas, Dancer
    3.Ali Javed – Progressive Writers’ Association
    4.Ambarish Rai, Convener, People’s Campaign for Common School System (PCCSS)
    5.Anuradha Chenoy, Professor, JNU
    6.Arjun Dev, retired professor, historian
    7.Arundhati Dhuru- social activist, NAPM, Lucknow
    8.Ashok Bharti, Chairman, National Confederation of Dalit Organisations (NACDOR), Delhi
    9.Digant Oza, senior journalist, Jal Seva, Ahmedabad
    10.Dr Harshvardhan Hedge, surgeon, Delhi
    11.Dr. Sirivella Prasad, General Secretary, National Dalit Movement for Justice (NCDHR – NDMJ)
    12.Dunu Roy- Consultant, Environment, Delhi
    13.Fr Cedric Prakash sj-Human Rights Activist, Director, Prashant, Ahmedabad
    14.Harsh Kapoor- South Asia Citizens Web, Delhi
    15.Henri Tiphagne, Lawyer & Executive Director, People’s Watch, Tamil Nadu
    16.Hiren Gandhi, theatre, Ahmedabad
    17.Indu Prakash Singh- social activist
    18.Indubhai Jani, Editor, Naya Marg, Ahmedabad
    19.Jaya Mehta, Researcher, Sandarbh Kendra , Indore
    20.K.G. Kannabiran, Peoples’ Union for Civil Liberties, Hyderabad
    21.KN Panikkar, academicians, historian, Trivendrum
    22.Madhu Chandra-All India Christian Council, Delhi
    23.Mahesh Bhatt, film producer and director, Mumbai
    24.Mallika Sarabhai- dancer, actor, Ahmedabad
    25.Manglesh Dabral, poet, journalist, Delhi
    26.Mansi Sharma- Social Activist, Delhi
    27.Nandini Sundar, Professor of Sociology, Delhi University, Delhi
    28.Naseeruddin Shah Theatre and Film Actor, Mumbai
    29.Nawaid Hamid- Movement for Empowerment of Muslim Indians
    30.Prasad Chako, National Campaign for Dalit Human Rights, Ahmedabad
    31.Ram Puniyani, All India Secular Forum, Mumbai
    32.Saba Azad-Dancer, Actor
    33.Sachin Pandya, Anhad, Ahmedabad
    34.Sandeep Pandey-social activist, NAPM, Lucknow
    35.Sanjay Sharma, social activist, Delhi
    36.Seema Duhan- social activist, Anhad, Delhi
    37.Shabnam Hashmi-social activist, Anhad, Delhi
    38.Sheba George, Social Activist, Ahmedabad
    39.Sohail Hashmi-filmmaker, writer, Delhi
    40.Swarup Dhruv, poet, writer, Ahmedabad
    41.Uttambhai Parmar, social activist, Surat
    42.Vineet Tiwari,Writer,General Secretary, Madhya Pradesh Progressive Writers’ Association, Indore (M.P.)
    43.Zafar Agha, journalist, Delhi
    44.Zakia Jowher, Bhartiya Muslim Mahila Andolan
    45.Prof Akhtarul Wasey, Delhi
    46.Mohd Mubashiruddin Khurram, Journalist, Siasat Daily, Hyderabad
    47.Syed Ali Mujtaba, Senior Journalist, Chennai
    48.Reny Ayline
    49.Yogi Sikand, National Law School, Bangalore
    50.Dolly Daftary, Research Scholar, Delhi/USA

    Released on July 21, 2010

    Shabnam Hashmi

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  • nitin thakur says:

    shabnam hashmi ji aapki jay ho……..;D
    aapne kaum ki izzat badha di ye sab facts dekar.
    aap logon ko RSS ke har kaam par bada malaal rahta hai magar ye kalam itni he jor-shor ke saath tab kyon nahin uthti jab hindu marte hain.

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  • bhupendra singh says:

    shesh ji ke dimag ka ilaz karana parega isliye nhi ki kam chlta hai balki isliye ki jyada chalta hai.hame to sharm aati hai ki hamare des me in jaiso ki roji roti chal jati hai wo bhi hindutva virodh par.aaz mushkil se 10 % muslim kattar hai to pure hinduo ki halat kharab hai jis din hindu kattar ho jayenge kya us din koi muslim bachega kya?????

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  • ramkinker mishra says:

    mr.shes narayanji! aap jaise deshdrohiyo ke karan hi desh gulam tha.ab chinta ki baat nahi hai hindustaan ki janta jaag rahi hai aur aap jaise samaj drohiyo ko sahi rasta dikhane me jaada samay nahi lagega.agar likhane ka shaok hai to desh aur samaj ke hit ke liye lekhani ka upyog karo.iske pahale apne dimak ka ilaj karalo kyoki dumhare jaisa pagal hi es prakar likh sakta hai.

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