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‘संघी’ होना पाप तो नहीं!

अभी कुछ दिन पहले भड़ास4मीडिया पर माखनलाल के ‘संघी कुलपति’ की पोल खुली खबर पढ़ी. आरोप है कि विश्वविद्यालय की भर्ती परीक्षा में संघ से जुड़े सवाल पूछे गए. आरोप लगाने वाले हैं कांग्रेसी. मेरा पूछना है कि क्या संघी होना पाप है. प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी विचारधारा से प्रभावित है. देश का बड़ा वर्ग संघ की विचारधारा से परोक्ष-अपरोक्ष रूप से इत्तेफाक रखता है.

<p style="text-align: justify;">अभी कुछ दिन पहले भड़ास4मीडिया पर <a href="vividh/5314-makhanlal-university.html" target="_blank">माखनलाल के 'संघी कुलपति' की पोल खुली</a> खबर पढ़ी. आरोप है कि विश्वविद्यालय की भर्ती परीक्षा में संघ से जुड़े सवाल पूछे गए. आरोप लगाने वाले हैं कांग्रेसी. मेरा पूछना है कि क्या संघी होना पाप है. प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी विचारधारा से प्रभावित है. देश का बड़ा वर्ग संघ की विचारधारा से परोक्ष-अपरोक्ष रूप से इत्तेफाक रखता है.</p>

अभी कुछ दिन पहले भड़ास4मीडिया पर माखनलाल के ‘संघी कुलपति’ की पोल खुली खबर पढ़ी. आरोप है कि विश्वविद्यालय की भर्ती परीक्षा में संघ से जुड़े सवाल पूछे गए. आरोप लगाने वाले हैं कांग्रेसी. मेरा पूछना है कि क्या संघी होना पाप है. प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी विचारधारा से प्रभावित है. देश का बड़ा वर्ग संघ की विचारधारा से परोक्ष-अपरोक्ष रूप से इत्तेफाक रखता है.

किसी विचारधारा को मानना और न मानना हर एक की निजी स्वतंत्रता है. लेकिन संघ की विचारधारा  को मानना मीडिया की भाषा में पाप समझा जाता है. हाँ, उन लोगों को हमारे देश में जरूर बुद्धिजीवी कहा जाता है जो नक्सली हमले में मारे गए जवानों की मौत को अपने कुतर्क के आधार पर जायज़ ठहराते हैं. मैं आज तक संघ की शाखा नहीं गया, लेकिन मीडिया में रहते हुए और उसके बाद भी जितना संघ को पढ़ा और जाना है उससे सिर्फ यही पता चला है कि संघ जैसा निष्काम भाव से राष्ट्र के लिए समर्पित संगठन पूरे विश्व में कोई नहीं. ये अटल सत्य है कि तमाम विरोधों के बावजूद संघ आज विश्व का सबसे बड़ा संगठन है.

आज छोटे से छोटा संगठन भी स्वार्थ और सत्ता लोभ की बुनियाद पर खड़ा है. जहाँ आज संगठनों में अनीति और भ्रष्टाचार का बोलबाला है वहीँ संघ आज भी निष्काम भाव के साथ आदर्शों की स्थापना करता चल रहा है. शायद इन सिद्धांतों की ही शक्ति है कि इतने विरोध के बावजूद संघ ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. राष्ट्र के स्वाभिमान को जाग्रत करने और संस्कार को बढ़ावा देने के लिए संघ जो काम कर रहा है वो अनुकरणीय है. जहाँ तक बात सांप्रदायिक दंगों की है तो ये दंगे सबसे ज्यादा कांग्रेस सरकारों के कार्यकालों में ही हुए. उसमें भी इतना अंदाजा तो कोई भी लगा सकता है कि इन दंगों के लिए उन इलाकों की राजनीती जिम्मेदार थी या फिर संघ.

मीडिया में फैला वामपंथ गाहे-बगाहे संघ और संघ से जुड़े लोगों की नकारात्मक छवि प्रस्तुत करता रहा है. विभिन्न अख़बारों, मैगजीनों, टीवी चैनलों द्वारा संघ की मुखालफत करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ा जाता. मीडिया का नजरिया देख कर केवल यही लगता है या तो मीडिया खुद संघ की शक्ति से घबराता है या फिर ऐसा करने के लिए वो कहीं और से निर्देशित है. लेकिन मीडिया के घोर मुखालफत का संघ की सिंह चाल पर कोई असर नहीं पड़ता नज़र आ रहा है.

संघ की शक्ति निरंतर बढ़ ही रही है. ये मीडिया की “नेगटिव पब्लिसिटी”  का ही नतीजा था कि मेरे मन में संघ को और नज़दीक से जानने कि उत्कंठा हुयी. शायद ऐसी ही उत्कंठा आज के उन नौजवानों में भी उठ रही है जो मल्टी नेशनल कंपनियों में भले ही काम कर रहे हों लेकिन सुबह शाखा जाना नहीं भूलते. दरसल देश में आज एक अजीब सी नौटंकी चल रही है. साम्प्रदायिकता और धर्मनिरपेक्षता के नाम पर लोगों को जम कर बनाया जा रहा है. “साम्प्रदायिकता” और “धर्मनिरपेक्षता” की परिभाषाएं वैसे चाहे जो भी हों लेकिन वर्तमान में इन शब्दों का जो अर्थ देश में है वो मेरे हिसाब से कुछ इस तरह है :

१. आप हिन्दू होकर हिन्दू हितों की बात करते हैं = आप सांप्रदायिक हैं

२. आप हिन्दू होकर हिदुओं का विरोध और अल्पसंख्यकों का समर्थन करते हैं = आप धर्मनिरपेक्ष हैं

३. आप अल्पसंख्यक होकर अल्पसंख्यकों के हितों की बात करते हैं = आप धर्मनिरपेक्ष हैं

४. आप अल्पसंख्यक होकर हिन्दू हितों की बात करते हैं (जो कोई नहीं करता) =  आप घनघोर धर्मनिरपेक्ष हैं

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सरकारें चाहे जो भी रही हों वो शिक्षा को अपना हथियार बनाना नहीं भूलती. माखनलाल के वीसी पर आरोप वो कांग्रेसी लगा रहे हैं जिन्होंने पूरे देश को नेहरु और गाँधी के नाम से रंग दिया है. देश की तमाम योजनायें उठाकर देखी जाएँ तो कम से कम ४५० योजनायें नेहरु, इंदिरा और राजीव गाँधी के नाम पर हैं. क्या देश में यही तीन प्रधानमंत्री हुए हैं. लेख के अंत में आप एक नज़र इन योजनाओं पर डाल सकते हैं, कभी इस दिशा में ऊँगली नहीं उठाई गयी, लेकिन जब भी बात संघ की आती है तो कलम ऐसी चलती है कि रुकने का नाम नहीं लेती….

Central

1 Rajiv Gandhi Grameen Vidyutikaran Yojana;
2 Rajiv Gandhi National Drinking Water Mission;
3 Rajiv Gandhi National Crèche Scheme for the Children of Wo rk ing Mothers, Department of Women & Child Development;
4. Rajiv Gandhi Udyami Mitra Yojana;
5 Indira Awas Yojana
6 Indira Gandhi National Old Age Pension Scheme;
7 Jawaharlal Nehru Urban Renewal Mission
8 Jawaharlal Nehru Rojgar Yojna
9.Rajiv Gandhi Shramik Kalyan Yojna;
10 Indira Gandhi Canal Project, Funded by World Bank
11.Rajiv Gandhi Shilpi Swasthya Bima Yojana

State schemes

1 Rajiv Gandhi Rehabilitation Package for Tsunami Affected Areas,
2.Rajiv Gandhi Social Security Scheme, Govt. of Puducherry
3Rajiv Ratna Awas Yojna;
4 Rajiv Gandhi Prathamik Shiksha Mission, Raigarh;
5 Rajiv Gandhi Shiksha Mission, Madhya Pradesh;
6 Rajiv Gandhi Mission on Food Security , Madhya Pradesh;
7. Rajiv Gandhi Mission on Community Health, Madhya Pradesh;
8 Rajiv Gandhi Rural Housing Corp.;
9 Rajiv Gandhi Tourism Development Mission, Rajasthan;
10 Rajiv Gandhi Computer Literacy Programme, Assam
11 Rajiv Gandhi Swavlamban Rojgar Yojana, Govt. of NCT of Delhi
12.Rajiv Gandhi Mobile Aids Counseling and Testing Services, Rajiv Gandhi Foundation
13.Rajiv Gandhi Vidyarthi Suraksha Yojana, Maharashtra;
14 Rajiv Gandhi Mission for Water Shed Management, M.P.;
15Rajiv Gandhi Food Security Mission for Tribal Areas, MP
16.Rajiv Gandhi Home for Handicapped, Pondicherry;
17 Rajiv Gandhi Breakfast Scheme, Pondicherry;
18 Rajiv Gandhi Akshay Urja Divas, Punjab;
19 Rajiv Gandhi Artisans Health & Life Insurance Scheme, Tamil Nadu;
20 Rajiv Gandhi Zopadpatti and Nivara Prakalpa, Mumbai;
21 Rajiv Arogya Sri programme, Gujrat State Govt. Scheme;
22 Rajiv Gandhi Abhyudaya Yojana, AP;
23 Rajiv Gandhi Computer Saksharta Mission, Jabalpur
24 Rajiv Gandhi Bridges and Roads Infrastructure Development Programme;
25 Rajiv Gandhi Gramin Niwara Prakalp, Maharashtra Govt
26Indira Gandhi Utkrishtha Chhattervritti Yojna , HP;
27 Indira Gandhi Women Protection Scheme, Maharashtra Gov;
28.Indira Gandhi Prathisthan, Housing and Urban Planning Department, UP Govt
29.Indira Kranthi Patham Scheme, Andhra Pradesh ;
30Indira Gandhi Nahar Pariyojana, State Govt. Scheme;
31 Indira Gandhi Vruddha Bhumiheen Shetmajoor Anudan Yojana, Govt. of Maharashtra
32.Indira Gandhi Nahar Project, Jaisalmer, Govt. of Rajasthan
33.Indira Gandhi Niradhar Yojna, Govt. of Maharashtra;
34 Indira Gandhi kuppam, State Govt. Welfare Scheme for Tsunami effected fishermen; 35 Indira Gandhi Drinking Water Scheme-2006, Haryana Govt.
36.Indira Gandhi Niradhar Old, Landless, Destitute women farm labour Scheme, Maharashtra Govt.
37.Indira Gandhi Women Protection Scheme , Maharashtra Govt.
38.Indira Gaon Ganga Yojana, Chattisgarh;
39 Indira Sahara Yojana , Chattisgarh;
40 Indira Soochna Shakti Yojana, Chattisgarh;
41 Indira Gandhi Balika Suraksha Yojana , HP;
42 Indira Gandhi Garibi Hatao Yojana (DPIP), MP;
43 Indira Gandhi super thermal power project , Haryana Govt.
44 Indira Gandhi Water Project, Haryana Govt.
45.Indira Gandhi Sagar Project, Bhandara District Gosikhurd Maharashtra;
46 Indira Jeevitha Bima Pathakam, AP Govt;
47 Indira Gandhi Priyadarshani Vivah Shagun Yojana, Haryana Govt;
48 Indira Mahila Yojana Scheme, Meghalaya Govt
49.Indira Gandhi Calf Rearing Scheme, Chhattisgarh Govt.
50.Indira Gandhi Priyadarshini Vivah Shagun Yojana, Haryana Govt.
51.Indira Gandhi Calf Rearing Scheme;
52 Indira Gandhi Landless Agriculture Labour scheme, Maharashtra Govt.

Sports/Tournaments/Trophies

1.Rajiv Gandhi Gold Cup Kabaddi Tournament;
2 Rajiv Gandhi Sadbhavana Run;
3.Rajiv Gandhi Federation Cup boxing championship
4.Rajiv Gandhi International tournament (football)
5.NSCI – Rajiv Gandhi road races, New Delhi;
6. Rajiv Gandhi Boat Race, Kerala;
7Rajiv Gandhi International Artistic Gymnastic Tournament
8.Rajiv Gandhi Kabbadi Meet
9.Rajiv Gandhi Memorial Roller Skating Championshi;
10 Rajiv Gandhi memorial marathon race, New Delhi;
11Rajiv Gandhi International Judo Championship, Chandigarh
12.Rajeev Gandhi Memorial Trophy for the Best College, Calicut;
13 Rajiv Gandhi Rural Cricket Tournament, Initiated by Rahul Gandhi in Amethi
14.Rajiv Gandhi Gold Cup (U-21), football;
15 Rajiv Gandhi Trophy (football;
16. Rajiv Gandhi Award for Outstanding Sportspersons;
17 All Indira Rajiv Gandhi Basketball (Girls) Tournament, organized by Delhi State
18.All India Rajiv Gandhi Wrestling Gold Cup, organized by Delhi State
19.Rajiv Gandhi Memorial Jhopadpatti Football Tournament, Rajura;
20.Rajiv Gandhi International Invitation Gold Cup Football Tournament, Jamshedpur
21.Rajiv Gandhi Mini Olympics, Mumbai
22.Rajiv Gandhi Beachball Kabaddi Federation;
23 Rajiv Gandhi Memorial Trophy Prerana Foundation;
24 International Indira Gandhi Gold Cup Tournament;
25 25 Indira Gandhi International Hockey Tournament
26.Indira Gandhi Boat Race;
27.Jawaharlal Nehru International Gold Cup Football Tournamen;
28 Jawaharlal Nehru Hockey Tournament.

Stadiums

1.Indira Gandhi Sports Complex, Delhi ;
2.Indira Gandhi Indoor Stadium, New Delhi ;
3.Jawaharlal Nehru Stadium, New Delhi ;
4. Rajiv Gandhi Sports Stadium, Bawana
5.Rajiv Gandhi National Football Academy, Haryana;
6.Rajiv Gandhi AC Stadium, Vishakhapatnam
7.Rajiv Gandhi Indoor Stadium, Pondicherry;
8 Rajiv Gandhi Stadium, Nahariagun, Itanagar;
9.Rajiv Gandhi Badminton Indoor Stadium, Cochin;
10.Rajiv Gandhi Indoor Stadium, Kadavanthra, Ernak;
11.Rajiv Gandhi Sports Complex , Singhu
12.Rajib Gandhi Memorial Sports Complex, Guwahati ;
13.Rajiv Gandhi International Stadium, Hyderabad
14.Rajiv Gandhi Indoor Stadium, Cochin;
15.Indira Gandhi Stadium, Vijayawada, Andhra Pradesh;
16.Indira Gandhi Stadium, Una, Himachal Pradesh;
17.Indira Priyadarshini Stadium, Vishakhapatnam;
18 Indira Gandhi Stadium, Deogarh, Rajasthan
19.Gandhi Stadium, Bolangir, Orissa

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Airports / Ports

1. Rajiv Gandhi International Airport , New Hyderabad , A.P.
2.Rajiv Gandhi Container Terminal, Cochin
3.Indira Gandhi International Airport, New Delhi
4..Indira Gandhi Dock, Mumbai
5.Jawaharlal Nehru Nava Sheva Port Trust, Mumbai

Universities /Education Institutes

1.Rajiv Gandhi Indian Institute of Management, Shillong
2.Rajiv Gandhi Institute of Aeronautics, Ranchi, Jharkhand
3.Rajiv Gandhi Technical University, Gandhi Nagar, Bhopal, M.P.
4.Rajiv Gandhi School of Intellectual Property Law, Kharagpur, Kolkata;
5.Rajiv Gandhi Aviation Academy, Secundrabad ;
6 Rajiv Gandhi National University of Law, Patiala, Punjab;
7 Rajiv Gandhi National Institute of Youth Development, Tamil Nadu;
8 Rajiv Gandhi Aviation Academy, Begumpet, Hyderabad, A.P;
9.Rajiv Gandhi Institute of Technology, Kottayam, Kerala;
10 Rajiv Gandhi College of Engineering Research & Technology, Chandrapur, Maharashtra are among the 98 institutions named after Rajiv, Indira and Jawaharlal Nehru.

Awards

1.Rajiv Gandhi Award for Outstanding Achievement
2.Rajiv Gandhi Shiromani Award
3.Rajiv Gandhi Shramik Awards, Delhi Labour Welfare Board
4.Rajiv Gandhi National Sadbhavana Award
5.Rajiv Gandhi Manav Seva Award
6.Rajiv Gandhi Wildlife Conservation Award
7.Rajiv Gandhi National Award Scheme for Original Book Writing on Gyan Vigyan
8.Rajiv Gandhi Khel Ratna Award
9.Indira Gandhi Prize for National Integration;
10.Indira Gandhi Priyadarshini Award;
11.Indira Priyadarshini Vrikshamitra Awards, Ministry of Environment and Forests
12.Indira Gandhi Memorial National Award forBest Environmental & Ecological;
13 Indira Gandhi Paryavaran Purashkar;
14 Indira Gandhi NSS Award
15 Jawaharlal Nehru Prize” from 1998-99, to be given to organizations (preferably NGOs) for Popularization of Science;
16 Jawaharlal Nehru National Science Competition
17 Jawarharlal Nehru Student Award for research project of evolution of DNA are among the 51 named after the family members.

Scholarship / Fellowship

1.Rajiv Gandhi Scholarship Scheme for Students with Disabilities
2.Rajiv Gandhi National Fellowship Scheme for SC/ST Candidates,
3.Rajiv Gandhi National Fellowship Scheme for ST Candidates,
4 Rajiv Gandhi Fellowship, IGNOU;
5 Rajiv Gandhi Science Talent Research Fellows;
6.Rajiv Gandhi Fellowship, Ministry of Tribal Affairs;
7 Rajiv Gandhi National Fellowship Scheme for scheduled castes and scheduled tribes candidates given by UGC;
8Rajiv Gandhi Fellowship sponsored by the Commonwealth of Learning in association with IGNOU;
9 Rajiv Gandhi science talent research fellowship given by Jawaharlal Nehru Centre for advanced scientific research are among others named after the family members.

National Parks / Sanctuaries / Museums

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1.Rajiv Gandhi (Nagarhole) Wildlife Sanctury, Karnataka;
2.Rajiv Gandhi Wildlife Sanctury, Andhra Pradesh
3.Indira Gandhi National Pa rk , Tamil Nadu;
4.Indira Gandhi Zoological Pa rk , New Delh;
5 Indira Gandhi National Pa rk , Anamalai Hills on Western Ghats
6.Indira Gandhi Zoological Pa rk , Vishakhapatnam
7 Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya (IGRMS)
8.Indira Gandhi Wildlife Sanctuary, Pollachi;
9.Rajiv Gandhi Health Museum;
10.The Rajiv Gandhi Museum of Natural History
11.Indira Gandhi Memorial museum, New Delhi are pa rk s and museums named after the family members.
12. Sanjay Gandhi National Pa rk (Mumbai)

Hospitals/Medical Institutions

1. Rajiv Gandhi University of Health Science, Bangalore , Karnataka;

2 Rajiv Gandhi Cancer Institute & Research Centre, Delhi;

3 Rajiv Gandhi Home for Handicapped, Pondicherry;

4 Shri Rajiv Gandhi college of Dental Science & Hospital, Bangalore, Karnataka;

5. Rajiv Gandhi Centre for Bio Technology, Thiruvanthapuram, Kerala;

6 Rajiv Gandhi College of Nursing, Bangalore, Karnataka;

7 Rajiv Gandhi Super Specialty Hospital, Raichur;

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8 Rajiv Gandhi Institute of Chest Diseases, Bangalore, Karnataka;

9 Rajiv Gandhi Paramedical College, Jodhpur;

10.Rajiv Gandhi Medical College, Thane, Mumbai are among 39 medical institutions named after the family members. Maharashtra

Institutions/Chairs/ Festivals

1.Rajiv Gandhi National Institute of Youth Development. (RGNIYD), Ministry of Youth and Sports;
2 Rajiv Gandhi National Ground Water Training & Research Institute, Faridabad, Haryana;
3.Rajiv Gandhi Food Security Mission in Tribal Areas
4.Rajiv Gandhi National Institute of Youth Development;
5..Rajiv Gandhi Shiksha Mission, Chhattisgarh;
6.Rajiv Gandhi Chair Endowment established in 1998 to create a Chair of South Asian Economics

7 Rajiv Gandhi Project – A pilot to provide Education thru Massive Satellite Connectivity up grassroot Level are among 37 named after Rajiv, Indira and Nehru. Pondicherry

Roads/Buildings/places

1.Rajiv Chowk, Delhi;
2 Rajiv Gandhi Bhawan, Safdarjung, New Delhi;
3 Rajiv Gandhi Handicrafts Bhawan, New Delhi;
4 Rajiv Gandhi Pa rk , Kalkaji, Delhi;
5 Indira Chowk, New Delhi;
6 Nehru Planetarium, New Delhi;
7 Nehru Yuvak Kendra, Chanakyapuri, New Delhi;
8 Nehru Nagar, New Delhi;
9 Nehru Place, New Delhi ;
10 Nehru Pa rk , New Delhi Nehru House, BSZ Marg, New Delhi, are among 74 named after the family members.

लेखक सचिन राठौर पत्रकार रहे हैं. इन दिनों महाराजा अग्रसेन सेंटर फार रामायण स्टडीज के कोआर्डिनेटर के रूप में कार्यरत हैं.

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0 Comments

  1. Haresh Kumar

    June 8, 2010 at 1:28 pm

    जिनके अपने घर शीशे के होते हैं वो दूसरों पर पत्थर नहीं फेंका करते। लेकिन कांग्रेस वालों को लगता है कि यह देश उनके बाप की जागीर है। चाहे नेहरु, गांधी परिवार के नाम पर कितने भी संस्था का नाम क्यों न रखा दिया जाए यह सब पवित्र होती हैं। यही काम अगर संघ से जुड़े लोग करें तो राष्ट्रद्रोही. अब इनके दिन लदने वाले हैं। समय रहते सुधर जायें।

  2. vijay

    June 8, 2010 at 2:48 pm

    bahut sahi sachin bhai,

  3. raghwendra dwivedi

    June 8, 2010 at 3:12 pm

    yashwant jee bhi leftist hain, sachin jee apne sabka mooh hi band kar diya, ab kis mooh se log is shaandaar lekh par comment de payenge. ek accha khaasa insaan jab patrakaar ban jaata hai to sabse pehle hindu dharm evam sangh ko paani pee pee kar gaali deta hai, use charchit jo hona hai, khair is prakar se ye hindustaan ko ek din aise mod par le jaakar khada kar denge ki haalat afghanistaan aur iraaq wali ho jayegi. sangh ko gaali dena ek fashion ho gaya hai aur jisko dekho wahi sangh ke khilaf mooh utha kar bhonkta dikhta hai

  4. Ajay Golhani, Nagpur

    June 8, 2010 at 4:11 pm

    Atal Bihari Bajpai, Lal Bahadur shashtri jaise logo ko puchne wala koi nahi hai. kuch din baad Soniya Gandhi ke naam se b hajaro yojnaye chale toh tajjub nahi hona chahiye….

  5. chandrakant

    June 8, 2010 at 4:38 pm

    sang ke rastra vad se chintit so call congresi firoz ko gandhi bana mahatma ko hi samapt karna chahteyn hon to nehru ka kya dosh ab to nehru ki virasat gandhi ke nam se jani jati hai itihas to inehen kabhi nahin bhulega per inki jawani ka itihas log jab janengey to kya hoga vaise nehru aur gandhi main jyada antar nahi hai ek dusrey ki chaya ban ke rahna ek dusreye ko pasand tha bhi gandhi ne kaha tha ki congress ko samapt kar dena chahiye per kaun manta hai gandhi ki bat khud congressi bhi na na hum to unkey nam ka bhog kartey hain unhen pujtey hain

  6. उदय शंकर खवाड़े

    June 8, 2010 at 4:42 pm

    पहली बार मर्द पत्रकार दिखा
    संघ कि बात सही तरीके से पहली बार किसी पत्रकार ने खुले तौर पर कही है, मेरे कई लेख भड़ास पर आ चुके है, लेकिन सभी कमेन्ट और अन्य बातें ने मुझे संघी ही कहा था, हालाँकि मैं भी कभी संघ कए किसी प्रोग्राम में नहीं गया और ना ही संघ के किसी पदाधिकारी से मेरा कभी कोई निजी संपर्क रहा है, लेकिन जो लोग आज खुद को धर्मनिरपेक्ष पत्रकार साबित करने में लगे है, कम से कम उनको ये लेख जो कि श्री राठौर जी ने लिखा है , जरुर पढना चाहिए …उनको फिर से एक बार बधाई
    उदय शंकर खवाड़े
    समन्वय संपादक
    दैनिक श्वेत पत्र
    झारखण्ड

  7. दिलीप कुमार

    June 8, 2010 at 5:01 pm

    नेहरू परिवार इस देश को अपनी जागीर समझता है देश लिए काम करने वाला शख्स चाहे आज़ाद भारत का हो चाहे गुलाम भारत का इनके लिए कोई महत्व नहीं रखता पूरे देश का राजीव करण हो चुका है भारत वर्ष में महापुरुषों की कमी नहीं रही है… बाणों की शैय्या पर लेटने वाले भीष्म पितामह से लेकर सचिन तेंदुलकर तक…लेकिन गांधी का नाम धरकर इस परिवार ने पूरे देश का ठेका ले रखा है इन परिस्थितियों को बदलने की जरूरत है नहीं तो ये किसी दिन पूरा देश बेचकर इटली चले जाएंगे और सब हाथ मलते रह जाएंगे

  8. Shishupal Singh

    June 8, 2010 at 5:05 pm

    beshak sanghi ya congresi ya kuch bhi hona buri baat nahi he, lekin madheya prdesh me sanghi ka jo charitr parosa ja raha he vo guru ji ke charitr se bhinn he, is par rss ke jimmedaro ko vichar karna hoga. tomar

  9. Animesh

    June 8, 2010 at 6:58 pm

    1. Deen Dayal Upadhyay Marg
    2. Deen Dayal Upadhyay Hospital, Delhi
    3. Shyama Prasad Mookerjee Marg, Delhi
    4. K. B. Hedgewar Marg
    5. Dr Hedgewar Aarogya Sansthan, Delhi
    6. Dr Hedgewar Rugnalaya Hospital, Aurangabad
    7. Dr Hedgewar Hospital Road, Aurangabad
    8. Keshavpuram, Delhi
    9. Pandit Deen Dayal Petroleum University
    10.Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University
    11.Deen Dayal Upadhyay College, Delhi
    12.Deen Dayal Antyoday Upachar Yojana, MP
    13. Deen Dayal Upadhyay Dental College, Solapur
    etc…etc… Baaki Google karke dekh len.

    Hamaam Men Sab Nange Hain.!!

  10. seema

    June 8, 2010 at 8:29 pm

    ek such aapke saath share karna chati hu……agar galat hu to zazoor bataye……aapne itna sang sang kiya……congress aur alpsankhyako ka samarthan karne walo ko kosa mujhe apati nahi lekin mere do sawal hai agar jawab de to khushi hogi……ghar me agar 4 betiya aur ek beta hota hai hai to pyar sabse zyada kisko milta hai?…..aur agar ghar me 4 bete aur ek beti ho to pyar kisko zyada milta hai?(ek samanye pariwar kii baat kar rahi hu jaha beta beti ka bhed nahi).agar apka bhai kamzoor ho kam kamata ho to maa baap kisa saath zyada dete hai……kher chodiye…yeah bataye jo takatwar hota hai usko sahara chahiye ya kamzoor ko….is desh me hindu mijority me hai….aur alsankhayak ka matlab hi minority hota hai…..to kisko zyada protsahan kii zarurat hai…..ek takatwar bhai ka faraz kya hai……ab ek baat batati hu…….gandhi aur vir savarkar me ek bada fark tha……vir savarkar ki biography ke pehle page per likha hai hai…..i am an atheist….(yani who dharm ko nahi mante the lekin unhone dhram ke naam per rajniti kii) gandhi kii autobiography me likha hai….i am practicing hindu (lekin unhone dhram ko rajniti se door rakha)…..to bhai faisla aapka, gandhi ya savarkar…..ek ne jo mana usse upar utkar rajniti kii aur ek ne jo nahi nama uske naam per hi rajniti ki….aap samajdar ho…..me bhi ek partrkar hu….aur secular bhi……kyukimai apne parivar, dhram aur state ki bajae, desh aur uske upar insaniyat ko dhyan me rakh kar likhti hu…..mera mai insaniyat ke hum se hamesha chota rehta hai…..aap bhi mai aur hum me chunav kar le

  11. dinesh mansera

    June 9, 2010 at 12:38 am

    bahut kuch sahi likha..himmet nahi haro aage barho bhai..

  12. Lovekesh Singh Raghav

    June 9, 2010 at 6:19 am

    aap ne soleha aane sahi kaha sachin bhai…………..yahan par congressi vichar dhara rakhne walon ka yehi soch hai………..

  13. satya prakash "AZAD"

    June 9, 2010 at 6:36 am

    सही बात है, सभी राजनीतिक दल धर्मनिरपेक्षता का ढोल वोट के लिए पीट रहे हैं.

  14. रमेश

    June 9, 2010 at 6:48 am

    योग्यता न होने पर भी पद हथियाना अपराध है , महा पाप है. लेक्चरर बनने के लिए योग्यता अच्छी शैक्षिक योग्यता आवश्यक है ..फिर तृतीय श्रेणी में पास होकर कुलपति बनना घोर पाप है .संघी बनने की योग्यता क्या है ?[b][/b][b][/b][b][/b][u][/u]

  15. अतुल गंगवार

    June 9, 2010 at 7:35 am

    बात शुरू हुई है तो दूर तक जाएगी… वास्तव में यह सोचने की बात है कि हमें हमारे देश में रहने के लिए वो भाषा बोलनी पड़ती है जो तथाकथित धर्मनिर्पेक्षता की भाषा है… आज 67 वर्षों के बाद इस देश में अल्पसंख्यक और बहुसंख्यकों के नाम पर राजनैतिक रोटियां सेकीं जा रही हैं…चलिए मान लेते हैं कि मुसलमान देश में अल्पसंख्यक हैं…लेकिन इसी देश में कश्मीर एक ऐसी जगह है जहां हिन्दू अल्पसंख्यक था…जब उसको कश्मीर से निकाला जा रहा था तो किसी बुद्धिजीवी ने इस बारे में तो आवाज नही उठाई…आज वो हिन्दू कहां है किस हाल में हैं क्या किसी की जानने की इच्छा होती है…पता नही. घर में किसी भी बच्चे को क्या आप घर की कीमत पर मनमानी करने देते हैं…बात संख्या की नही है… समानता की होनी चाहिए… किसी भी तरह से किसी को भी अगर आप छूट देते हैं तो मान कर चलिए कभी भी दूरियां समाप्त नही होंगी. वोट बैंक के चलते नेताओ ने देश को छोटे छोटे टुकड़ों में बांट रखा है…कोई तो ऐसा प्रयास करे की ये संख्या की गिनती बंद हो…अब तो जाति के आधार पर जनगणना होनी की बात करने लगे हैं ये लोग…. क्या ये समाज को एक बार फिर तोड़ने की साजिश नही की जा रही है… गांधी की भी ज़रूरत है इस देश को…सावरकर की भी… कहीं ऐसा न हो गांधी के नाम पर राजनीति कर रहे लोग देश के गौरवशाली इतिहास से जुड़े अन्य लोगों के बलिदान को धीरे धीरे इतिहास के पन्नों से मिटा दे…

  16. anand soni

    June 9, 2010 at 9:18 am

    इसे दुर्भाग्य ही कहेंगे। राजनीतिक और वैचारिक रूप से दिवालियेपन की वजह से भी ऐसा किया जा रहा है। अगर मैं हिंदू होकर हिंदू का विरोध करूंगा तो इसे क्या कहेंगे। कहने का मतलब अपना घर संवारे या न संवारें पर दूसरे का जरूर संवारें। कांग्रेसी साले चूतिया होते जा रहे हैं।

  17. Manoj Burnwal

    June 9, 2010 at 1:58 pm

    Sachin ji,
    Aap ka lekh padh kar maja aa gaya. mujhe khusi is baat ki hai ki aaj ke samay mai bhi itne bebak lekh likhne wale maujud hain. lekh na so called secular logon ko ek jordar tamacha marne ka kaam kiya hai.

  18. Rajat

    June 9, 2010 at 3:37 pm

    सचिन जी,
    दरअसल यह कांग्रेस की ईष्र्यालु प्रवृत्ति का नतीजा है। कांग्रेसियों को ऐसा लगता है कि उनके नेताओं ने जितनी चापलूसी करके देश के दुश्मनों को खुश किया है, कहीं संघ उस पर पानी न फेर दे। जिस तरह अंग्रेजों के राज में राष्ट्रद्रोही प्रवृत्ति के लोग अंग्रेजों की चमचागिरी करके तरह-तरह की सुविधाएं और जागीरें हथिया लेते थे, उसी तरह कांगे्रसी नेताओं ने अपने स्वार्थ के लिए देश की जमीनें तक चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश के हवाले कर दीं। आज भी वे धर्म निरपेक्षता के नाम पर आतंकियों को दामाद की तरह पाल-पोस रहे हैं। इस देश को सर्वाधिक प्रधानमंत्री कांग्रेस ने दिए हैं, लेकिन उसकी नजर में इंदिरा, नेहरू और राजीव ने ही सबकुछ किया है। बाकी प्रधानमंत्री शायद मक्खी मारते रहे। कांग्रेस में शुरूआत से चली आ रही चापलूसी की परंपरा के कारण आज भी इस दल को एक जमीनी नेता नहीं मिला जो पार्टी का नेतृत्व कर सके। कांग्रेसी अच्छी तरह जानते हैं कि जिस दिन संघ अपनी पर उतर आया, उस दिन देश से आतंकियों को पनाह देने वाली कांग्रेस का वजूद समाप्त हो जाएगा।
    अब एक नजर संघ की तरफ डालें। चूंकि संघ छपास का शौकीन नहीं है, इसलिए वह अपनी गतिविधियों का प्रचार-प्रसार नहीं करता। इसी का फायदा उठाकर कांग्रेसी नेता संघ के बारे में गलत प्रचार करते रहते हैं। आपकी तरह मैंने भी कभी संघ की विधिवत सदस्यता नहीं ली और न ही कोई शाखा में उपस्थित रहा, लेकिन संघ के कुछ कार्यक्रमों के कवरेज के दौरान उसकी शिक्षा से रूबरू हुआ हूं। संघ अपनी शाखा में स्वयंसेवकों को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सारा कार्य अपने हाथ से करना सिखाता है। वह भारतीय संस्कृति को अपनाने की सीख देता है। इसलिए कांग्रेसियों को बुरा लगता है, क्योंकि कांग्रेसी तो शुरू से ही विदेशियों के चम्मच रहे हैं और आज भी विदेशी की ही गुलामी कर रहे हैं।
    कहने को कांग्रेस देश का सबसे पुराना राजनीतिक दल है, लेकिन उसमें राष्ट्रीय नेतृत्व लायक एक भी नेता नहीं है। वह तो आतंवादियों को फांसी से बचाना ही अपना मूल धर्म मानती है।

  19. Mayank

    June 9, 2010 at 4:36 pm

    संघी होना बिलकुल पाप नहीं है….मैं कॉंग्रेसी भी नहीं हूँ….संघी भी नहीं…..मेरे कई संघी मित्र हैं….लेकिन क्या केवल उनके संघी होने की योग्यता पर उनको किसी विश्वविद्यालय का कुलपति बना दिया जाए……क्यूंकि सरकार भाजपा की है….
    कुलपति कुठियाला पर भ्रष्टाचार और हेराफेरी की धाराओं के तहत केस दर्ज हैं….वो मूर्खतापूर्ण फैसले संस्थान पर थोप रहे हैं…..उनके पास कुलपति बनने की अनिवार्य अहर्ताएं नहीं हैं….और आप उनको केवल इसलिए सही ठहरा देंगे क्यूंकि वो संघी हैं…..
    संघी होना क्या दोषमुक्त होना है…या महान होना…या पवित्रता और सदाचरण की निशानी …

  20. अनूप

    June 10, 2010 at 7:39 am

    भारतीय संस्कृति में शिक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण है. वह पथ प्रदर्शक होता है जो हमें किताबी ज्ञान ही नहीं बल्कि जीवन जीने की कला सिखाता है. समाज शिक्षको से गरिमापूर्ण आचरण की अपेक्षा करता है . शिक्षक का दर्जा समाज में हमेशा से ही पूज्यनीय रहा है क्योंकि उन्हें ‘गुरु’ कहा जाता है.
    आज कुछ कलयुगी शिक्षक जो अपेक्षित योग्यता न होने पर भी भ्रस्टाचार द्वारा पद पाकर शिक्षा जगत को कलंकित कर रहे है ऐसी ही एक मिसाल है माखन लाल विश्वविद्यालय के कुलपति …क्या ऐसे ही लोग “संघी” होते है ?
    [b][/b]

  21. anoop

    June 10, 2010 at 2:23 pm

    भारतीय संस्कृति में शिक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण है. वह पथ प्रदर्शक होता है जो हमें किताबी ज्ञान ही नहीं बल्कि जीवन जीने की कला सिखाता है. समाज शिक्षको से गरिमापूर्ण आचरण की अपेक्षा करता है . शिक्षक का दर्जा समाज में हमेशा से ही पूज्यनीय रहा है क्योंकि उन्हें ‘गुरु’ कहा जाता है.
    आज कुछ कलयुगी शिक्षक जो अपेक्षित योग्यता न होने पर भी भ्रस्टाचार द्वारा पद पाकर शिक्षा जगत को कलंकित कर रहे है ऐसी ही एक मिसाल है माखन लाल विश्वविद्यालय के कुलपति …क्या ऐसे ही लोग “संघी” होते है ?

  22. Ratan Singh Shekhawat

    June 10, 2010 at 4:27 pm

    मयंक जी, आप अति भावुक हो रहे हैं। मेरे ख्याल से कुठियाला जी एमसीयू के वीसी बनने से पहले हरियाणा में भी इस पद की शोभा बढ़ा चुके हैं। हरियाणा में तो कांग्रेस की सरकार है और कांग्रेस संघ की सगी नहीं है। कुटियाला जी इससे पहले देश के प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थान आईआईएमसी में भी प्रोफेसर रह चुके हैं। आप और हम किस आधार पर दावा कर रहे हैं कि कुठियाला जी संघ से प्रमाण पत्र लेकर आ गए और उन्हें वीसी बना दिया गया। उन्होंने जिंदगी के कितने साल पत्रकारित को दिए हैं इस बारे में पता कीजिए। हमारी कमी यही है कि भेड़ की तरह एक दूसरे के पीछे हो लेते हैं बिना यह जाने कि मामला क्या है। राज्य सरकारें राज्य स्तरीय विश्वविद्यालयों में अपना पूरा दखल रखती हैं और हो सकता है कि एमपी सरकार ने भी इस तरह के सवाल डालने के लिए दबाव बनाया हो। क्या हम दावा कर सकते हैं कि कांग्रेस शासित राज्यों में गांधी और नेहरू का पाठ पढ़ाने के लिए दबाव नहीं डाला जाता होगा। उत्तर प्रदेश में मायावती अंबेडकर साहब का गुणगान करने के लिए कसर छोड़ती होगी। किसी की राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए किसी व्यक्ति की जीवनभर की मेहतन और साख को तार-तार करने का अधिकार किसी को नहीं है। थोड़ा संतुलित होइए।

    धन्यवाद

    रतन सिंह शेखावत

  23. KAMAL PRATAP SINGH

    June 10, 2010 at 4:28 pm

    badhiya bhai sahab, lekh bohat badhiya laga ye thik hai k koi beiman hai to usce beiman kahana chahiye par uske sath SANGHI vishesan jod dena thik nahi hai. beiman to kahi bhi ho beiman hi hota hai uski jitni bhi ninda ki jaye kam hai par uske sath kisi sangthan ka naam jodna to aisa lagta hai jaise yew sab jaan bujh kar sangh ka naam badnaam karne k liye kiya gaya hai, aur apke diye hue data based facts tathakathit budhijiviyoo ki aankhe kholne k liye paryapt hai.

  24. Ratan Singh Shekhawat

    June 10, 2010 at 4:36 pm

    सचिन ने यहां एक महत्वपूर्ण बात उठाई है। कांग्रेसी चाहते हैं कि नेहरू और गांधी नाम से इतनी योजनाएं चलाई जाएं और इतनी जगहों के नाम उन पर रखे जाएं कि अगले युग में जब इतिहास जानने के लिए खुदाई हो तो उन्हीं के नाम के स्मारक निकलें। और तब यह शोध का विषय बने कि पता करो इन गांधी और नेहरू राजवंशों का साम्राज्य कहां तक था। इस देश के बुद्धिजीवियों पर मुझे तरस आता है कि उनकी कलम केवल आरएसएस के खिलाफ ही आग उगलती है। ये क्यों नहीं लिखते कि क्या राजीव गांधी, इंदिरा गांधी और जवाहर लाल नेहरू से बड़े या समकक्ष महापुरुष इस देश में हुए ही नहीं क्या? क्या गांधी परिवार का त्याग भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव से भी बड़ा था?

  25. अनूप सिंह

    June 11, 2010 at 12:41 pm

    लेक्चरार बनने के लिए सम्बंधित विषय में MA परास्नातक , NET नेट या PhD पी एच डी व शैक्षिक रिकार्ड उत्तम होना आवश्यक है क्या MA में 3rd डिवीजन वाले कुटियाला अहर्ता रखते है रही बात पूर्व पदों की .. उन्होंने किस प्रकार ये पद हासिल किये इस पर जांच कर इस गलत प्रवत्ति को रोकना चाहिए न की मिसाल मान कर वी सी बना देना चाहिए ?
    वैसे संघी लोग ऐसे व्यक्ति को झेलते कैसे है ?[b][/b]

  26. sristy

    June 11, 2010 at 1:30 pm

    कढीन परिस्थितयो में
    संघ के स्वयं सेवको ने हमेशा जात धर्म पूछे बिना पीडितो की जिस प्रकार सेवा की है.वह इन तथा कथित मीडिया को नजर नहीं आती

  27. seema

    June 15, 2010 at 6:26 pm

    are maha pursho hamare sawal ka to jawab de deti….fata dhol pitne se sur nahi nikalte himmat hai to charcha karo……ya sang kii tarha aap log bhi sirf gundagardi me vishwas karte hai

  28. Sachin Rathore

    June 19, 2010 at 9:52 am

    भई वाह! इतने सारे कमेंट्स. मैं तो ये लेख लिखकर कुछ दिनों के लिए दिल्ली से बहार एक ट्रिप पर गया था. मैंने सोचा भी न था कि बेहद साधारण भाषा में बहुत जल्दी-जल्दी में लिखा गया ये छोटा सा लेख इतने सारे कमेंट्स आकर्षित करेगा. दरअसल ये लेख की विशेषता नहीं ये विषय की विशेषता है. अब मुझे विश्वास हो चला है कि संघ आज के समय में सबसे दिलचस्प विषय बन गया है और इसका सबूत हमारे सामने है. अब तक मैं यही सोचता था कि आखिर मीडिया में संघ की इतनी निंदा क्यों होती है. अब मुझे स्पष्ट हो गया है कि संघ कि निंदा केवल अपने प्रोडक्ट को बिकाऊ बनाने का एक हथकंडा मात्र है. मैंने ये लेख माखनलाल के वीसी के समर्थन या विरोध में नहीं लिखा था. मेरा उद्देश्य सिर्फ इतना था कि किसी व्यक्ति के बहाने संघ पर निशाना क्यों साधा जा रहा है. सही और गलत लोग हर समाज, हर संगठन, हर संस्थान और हर स्थान पर हैं. लेकिन जब भी बात संघ से जुड़े लोगों की आती है तो दसो उँगलियाँ एक साथ उठा दी जाती हैं. ये परंपरा गलत है. बहरहाल मैं हर उस सक्श का धन्यवाद् करना चाहता हूँ जिन्होंने न केवल मेरे विचार पढ़े बल्कि कमेंट्स भी दिए.

    रहा सवाल सीमा जी का, तो मैं उनको बड़े विनम्र भाव के साथ कहना चाहता हूँ कि मीडिया की भाषा को पढ़कर संघ को सतही तौर पर जानने की बजाय थोड़ा गहरायी में उतरने की कोशिश करें. आप खुद भी भली भांति जानती हैं कि आज जो लोग अल्पसंख्यक-अल्पसंख्यक चिल्ला रहे हैं वो उनका भला चाहते हैं अपना. लेकिन आपको ये बात समझ में नहीं आएगी क्योंकि आपके दूसरे कमेन्ट से ये साबित हो चुका है कि आप भी संघ के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रस्त हैं.

  29. Sachin Rathore

    June 19, 2010 at 9:53 am

    भई वाह! इतने सारे कमेंट्स. मैं तो ये लेख लिखकर कुछ दिनों के लिए दिल्ली से बहार एक ट्रिप पर गया था. मैंने सोचा भी न था कि बेहद साधारण भाषा में बहुत जल्दी-जल्दी में लिखा गया ये छोटा सा लेख इतने सारे कमेंट्स आकर्षित करेगा. दरअसल ये लेख की विशेषता नहीं ये विषय की विशेषता है. अब मुझे विश्वास हो चला है कि संघ आज के समय में सबसे दिलचस्प विषय बन गया है और इसका सबूत हमारे सामने है. अब तक मैं यही सोचता था कि आखिर मीडिया में संघ की इतनी निंदा क्यों होती है. अब मुझे स्पष्ट हो गया है कि संघ कि निंदा केवल अपने प्रोडक्ट को बिकाऊ बनाने का एक हथकंडा मात्र है. मैंने ये लेख माखनलाल के वीसी के समर्थन या विरोध में नहीं लिखा था. मेरा उद्देश्य सिर्फ इतना था कि किसी व्यक्ति के बहाने संघ पर निशाना क्यों साधा जा रहा है. सही और गलत लोग हर समाज, हर संगठन, हर संस्थान और हर स्थान पर हैं. लेकिन जब भी बात संघ से जुड़े लोगों की आती है तो दसो उँगलियाँ एक साथ उठा दी जाती हैं. ये परंपरा गलत है. बहरहाल मैं हर उस सक्श का धन्यवाद् करना चाहता हूँ जिन्होंने न केवल मेरे विचार पढ़े बल्कि कमेंट्स भी दिए.

    रहा सवाल सीमा जी का, तो मैं उनको बड़े विनम्र भाव के साथ कहना चाहता हूँ कि मीडिया की भाषा को पढ़कर संघ को सतही तौर पर जानने की बजाय थोड़ा गहरायी में उतरने की कोशिश करें. आप खुद भी भली भांति जानती हैं कि आज जो लोग अल्पसंख्यक-अल्पसंख्यक चिल्ला रहे हैं वो उनका भला चाहते हैं अपना. लेकिन आपको ये बात समझ में नहीं आएगी क्योंकि आपके दूसरे कमेन्ट से ये साबित हो चुका है कि आप भी संघ के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रस्त हैं.

  30. मृत्युंजय

    June 20, 2010 at 7:46 am

    सचिन जी , लेक्चरार बनने के लिए सम्बंधित विषय में MA परास्नातक , NET नेट या PhD पी एच डी व शैक्षिक रिकार्ड उत्तम होना आवश्यक है . MA में 3rd डिवीजन वाले कुटियाला कैसे एक के बाद एक संस्थानों में सेंध लगाते रहे और अब कुलपति बने यह प्रश्न अभी भी अनुत्तरित है . किस राजनीतिक दल के किस नेता के नाम पर क्या बना यह बताने के बाद आप इस बात को कृपया स्पष्ट करे की अयोग्य को कुलपति का पद दिलाने में संघ की क्या भूमिका है ? मध्य प्रदेश की ” संघी ” सरकार को क्या कोई और योग्य व्यक्ति संघ के कुनबे में नही मिला ? [b][/b]

  31. अनूप सिंह

    June 20, 2010 at 2:30 pm

    श्रीमान सचिन जी , आपने पूछा है .. क्या संघी होना पाप है ? आपने यह प्रश्न माखन लाल विश्वविद्यालय के कुलपति के पोल खुलने की खबर से विचलित होकर किया . फिर आप साम्प्रायदिकता और धर्म निरेपक्षता जैसे मुद्दों पर अपने विचार लिख कर अपने को संघ से प्रभावित बता कर न जाने क्या क्या बताने लगे . और अनेक लोगों ने अपने विचार प्रकट किये . इस दौरान आप न जाने कहाँ गायब रहे शायद नागपुर गए हो..खैर आप के प्रश्न का उत्तर यदि आपको अभी भी समझ में ना आया हो तो कुलपति जी से जा कर स्वयं पूछ लीजिये और उनका जवाब पोस्ट कर दीजिये .

  32. Sachin Rathore

    June 21, 2010 at 5:10 am

    श्रीमान अनूप एंड मृत्युंजय,
    मैंने अपने लेख के माध्यम से जो बात कहनी चाही वो अभी तक आपके समझ नहीं आई है. यहाँ तक की मेरे जवाब के बाद भी. मैं किसी कुलपति का न समर्थन कर रहा हूँ न विरोध. मेरा कहना सिर्फ इतना है की कुलपति के बहाने संघ पर ऊँगली क्यों. गड़बड़ हर जगह होती है लेकिन जब भी बात संघ से जुड़े लोगों की आती है तो ढोल फोड़ दिए जाते हैं. गलत चीज़ कहीं भी किसी भी रूप में हो रही हो वो अस्वीकार्य है उसको रोका जाना चाहिए. मैं तो सिर्फ ये बताना चाहता था कि आँख मूंदकर ऊँगली उठाने की प्रवृत्ति से बचना चाहिए. आव देखा न ताव और लगे गाल बजाने. सब नाच रहे हैं तो हम भी नाचें. किसी ने कहा भी है कि- दूसरे की बुराई जब किया कीजिये आइना सामने रख लिया कीजिये. रही बात डिग्रियों और डिविजन की तो मैं विश्वविद्यालयों के बहार दलालों के हाथों पांच-पांच सौ रूपए में बिकने वाले इन कागज के टुकड़ों पर विश्वास नहीं रखता. पत्रकारिता में रहकर इतना अच्छी तरह देखा है कि लोग किस तरह फर्जी डिग्रियों के साथ ऊंचे ओहदों पे बैठे हैं. ज्ञान अगर इन डिग्रियों में ही होता तो क्या कहना था, आज देश की तस्वीर ही दूसरी होती.
    उम्मीद है अब आपको और ज्यादा स्पष्टीकरण की जरुरत नहीं पड़ेगी.

  33. अनूप सिंह

    June 21, 2010 at 9:01 am

    श्रीमान सचिन जी , आपने स्वीकार कर लिया है कि…… ” लोग” फर्जी डिग्रियों के साथ ऊँचे ओहदों पे बैठे हैं …. हाँ , लेक्चरार बनने की योग्यता भी न रखने वाला ” कुलपति” बना बैठा है. जब संघ से जुड़े इस मुद्दे की बात होती है तो आप कहते है … ” गड़बड़ हर जगह होती है “….इस हर जगह में संघ शामिल हैं या नहीं ? .जैसा आप कहते है कि…” आँख मूंद कर उंगली उठाने की प्रवत्ति से बचना चाहिए “…तो इस पर अमल करिए और आँख खोल कर देखिये , जानिये और स्वीकार करने की हिम्मत कीजिए कि माखन लाल विश्वविद्यालय का “संघी” कुलपति पापी हैं .[u][/u][i][/i][i][/i]

  34. ramesh singh

    August 26, 2010 at 9:21 am

    kamal ki baat hai……desh ka aisa kaun sa pradesh hai jahan kabhi bhi BJP/jansangh ka raj raha ho aur wahan kai har shahar /kasbe mai shyama prasad mukharjee ya deendayal upadhyay kai nam sai chowk/sadak/udyan na bana ho…delhi mai MCD ki nai aleeshan imarat ka nam bhi Deendayal upadhya kai nam par rakha ja raha hai…ye doosri bat hai ki aap 40 sai kam umr kai kinhi bhi das lagon ko rendemly chun leejiye aur unsai poochhiye ki SP Mukharjee ya Deendayal Updhya kaun thai to ykeen maniye 9 logon ko pata nahi hoga..kya yahi bat gandhi, nehru, indira, subhash bose, ambedkar ya rajiv ke barai mai kahai ja sakti hai…sanghi khud to brainwashed hotai hi hain bakiyon ko bhi apne jaisa samjhtai hain…..jhoot aur faraib kai sahare takat prapt karnai ki kala lambe samay tak kargar nahi hoti…

  35. Tulesh.chandra

    April 29, 2012 at 11:40 pm

    Chahe jo bhi ho par ye bat satya hai ki ekta me shakti hoti hai, agar aap ko lagta hai ki sangh galat kar raha hai to aap bhi sangh se judiye aur sahi disha nirdesh ki jiye * kyoki sangh ka uddeshya rashtra ka hit hai * aur ek dusare ka pair na khincha * danyawad *

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