36 की उम्र में शाद चले गए

मैं शाद का कोई परिचित नहीं हूं. उनके जिला-जंवार, प्रांत का रहने वाला नहीं हूं. उनके मजहब का भी नहीं हूं. पर शाद अपने जैसे लगते हैं. जिला मुंगेर प्रांत बिहार के शाद दिल्ली में सरकुलेशन देखते थे. दी संडे इंडियन से चौथी दुनिया में आए थे. बड़े पद व पैसे में. नेशनल सरकुलेशन इंचार्ज बनकर. नौजवान शख्स. सिर्फ 36 वर्ष उम्र. सुबह जल्दी आफिस जाने की हड़बड़ी सबमें होती है. उनमें भी थी. नहाने के लिए वे बाथरूम गए. पानी नहीं आया तो तौलिया लपेटे छत पर चले गए टंकी देखने.

वहीं उन्हें अचानक जबर्दस्त दिल का दौरा पड़ा और वे चल बसे. देर होने पर जब शाद नीचे नहीं आए तो उनकी पत्नी उपर पहुंचीं. देखा तो शाद औंधे मुंह गिरे पड़े थे. उन्होंने शोर मचाया और पड़ोसियों की मदद से शाद को नजदीकी अस्पताल ले गईं. पर डाक्टरों ने जवाब दे दिया. उन्हें बचाने की स्थिति ही नहीं थी. हंसमुख व्यक्तित्व वाले शाद को यह पहला और आखिरी दिल का दौरा पड़ा था. हार्ट अटैक की घटना सुबह करीब नौ बजे की है. उनके परिवार में पत्नी के अलावा एक बच्चा आठ महीने का है तो दूसरा पांच साल का. वे दिल्ली में भास्कर कंपाउंड, ओखला में रहते थे. शाद का दाह संस्कार शाम पांच बजे है, बाटला हाउस कब्रिस्तान में. शाद को खुदा जन्नत दे, यही दुवा हम करते हैं.

दिल्ली की भागदौड़ वाली ज़िंदगी में हम किस तरह बेबस होकर खुद के जीवन के साथ खेलने लगते हैं, यह पता ही नहीं चलता. तनाव व आपाधापी के कारण हम पत्रकार जीने-खाने के प्राकृतिक तौर-तरीकों से दूर हो जाते हैं. ऐसे में एक दिन अचानक पता चलता है कि हमारे शरीर के कुछ अंगों ने अब साथ देना बंद कर दिया है. मीडियावालों की ज़िंदगी के साथ होने वाले ये हादसे बढ़ते ही जा रहे हैं. किसी और से उम्मीद करना बेमानी है. हम लोगों को खुद ही खुद पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है. अपने जीवन की बेहतरी के लिए आराम व तनाव मुक्त जीवन जीने का अभ्यास खुद ही करना पड़ेगा क्योंकि बाजार व उसकी शर्तें मीडियाकर्मियों को एक ऐसे अंतहीन सुरंग की ओर ले जा रही हैं जहां से लौटने का कोई रास्ता नहीं दिखाई दे रहा है.

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Comments on “36 की उम्र में शाद चले गए

  • अमित गर्ग. राजस्थान पत्रिका. बेंगलूरू. says:

    भाई यशवंतजी. मीडिया की हालत पर आपका चिंतन तो अपनी जगह है ही. पत्रकारों के लिए भी आपका दर्द कुछ कम नहीं है. शाद जी के लिए संक्षिप्त रूप में आपकी बात इसका प्रमाण है. खुदा शाद जी की रूह को सुकून और उनके परिवार को इस वज्र से प्रहार को सहने की शक्ति दे.

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  • Salman Ahmed (Saudi Arabia) says:

    Yashwant Bhai, Ap ke qalam se Shad Bhai ke mout ki khabar parh ke meri ankhen bheeg gaeen. Bhai, aap ne patrkaron ko jo apni sehat par dheyan dene ki nasihat ki hai woh bahut hi qabile tareef hai. Duniya ke dard ko zahir karne wale patrkar bhaiyon ko chahiye ke woh apne dard ko samjhne ke leye bhi thora sa waqt nikalen war na unuka pura khandan tabah hujaega. Ek Shad hi nahin un jaise darjanon nojwan patrkaron ko maine apni ankho ke samne jawani ki mout marte dekha hai useke sath un marhoom patr karon ke ghar aur khandan walon ko bhi ghut ghut ke zindagi guzarte dekha hai, leken ham unke ley kuch nahin kar sake.
    Patrkar Bhaiyon se main anorod karonga ke woh apni sehat par khas dhiyan den warna unke biwi bachon ko aanso puchne wala koi nahi melga.

    KOSHISH HAI SIRF TUM KO JAGANE KI DOSTON
    SHAYED KE UTAR JAYE TERE DIL MEN MERI BAT

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  • Yashwant ji, shad ji ko me nahi janata magar me bhi iss dukh me apni shirkat karta hù. Ek shabd ki chook ho gayi hai, theek kar lijiyega. Unka antim sanskar hona to likha ja sakta hai, par daah sanskar nahi. Daah ka matlab aap janate hain. Ummid hai, Aap samajh gaye honge.

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  • sandip thakur says:

    Yashwantjee,
    Ek Kabristan ke bhar likha tha
    MANZIL TOH MERI YAHIN THI
    BAS ZINDAGI GUZAR GAYI YAHAN TAK AATE AATE…
    Kisi ki Zindagi gujar jati hai,koi jaldi chala jata hai. Jana toh ek din sabko hai.Shad bhai jaldi chale gaye.Bhagwal unki aatma ko shanti de aur pariwar ko zindagi se jughne ki himmat.

    sandip thakur
    Metro Editor
    Mahanagar hindi daily

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  • shad ka jana mere liye zaati nuksaan ki tarah : Asdar Ali
    shad mere bahut qareeb rahe hain.. wo behad hansmukh aur khushdil insaan the. hum jab bhi saath baithe, khub achche mahaul me baatein hoti thi. unki maut ki khabar sun kar mujhe apne kaano per yaqeen nahi hua.. per yeh sach tha to maanna pada. m,ujhe behad afsos hai ki main unke janaaze ki namaaz me shareek nahin ho saka, kyonki main delhi me nahin hoon.. shad ke chale jaane se mujhe personal loss hua hai, kyonki woh sirf eik dost nahin, balki hamaare liye bhai ki tarah the. allah unhe jannat me jagah de aur unke ghar waalon ko sabar ki taufeeq de aameen. Asdar Ali.

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  • Jinki yahan chahna hai unki wahan chahna hai,
    Jinki yahan chah naa hai unki wahan chah na hai !!

    May God give strength to his family to bear this unbearable loss.

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