कैंसर से जूझ रहीं हैं जयप्रकाश आंदोलन की नूतन

जयप्रकाश आंदोलन का युवा चेहरा रहीं नूतन कैंसर से जूझ रही हैं। कल ही गंगा मुक्ति आंदोलन के अग्रणी नेता रहे अनिल प्रकाश ने फोन पर बताया कि वे लखनऊ आ रहे हैं और फिर मुंबई जाएंगे। मैंने पूछा कि मुंबई में कोई बैठक है क्या, तो उनका जवाब था – नहीं, नूतन जी को कैंसर हो गया है और उनका इलाज चल रहा है। कैंसर का नाम सुनते ही सहम गया। अब यह बीमारी डराने लगी है। आलोक तोमर याद आए। पापा का भी दिल्ली में कैंसर का इलाज हो रहा है।

अखबार, भाषा और आज के संपादक

कल एक दावत में नेताओं के साथ पत्रकारों का जमावड़ा हुआ तो मीडिया पर भी बात आई और अपने भट्ट जी (इंडियन एक्सप्रेस, लखनऊ के वीरेंद्र नाथ भट्ट) ने टिप्पणी की कि अब मीडिया में पढ़े लिखे अनपढ़ों का बहुमत हो गया है। पहले अगर किसी रिपोर्टर की स्टोरी कमजोर होती थी तो डेस्क पर बैठे उप संपादक उसे दुरुस्त कर देते थे। पर आज अगर संवाददाता भाषा के मामले में कमजोर हो तो उसकी स्टोरी संपादन करने वाला उप संपादक उससे भी ज्यादा कमजोर हो सकता है।

जनसत्ता का रायपुर एडिशन बंद, कहीं कोई चर्चा तक नहीं

: एक अखबार की बंदी जब खबर तक न बने : आजकल मीडिया पर कलम चलाना बड़ा शगल बनता जा रहा है। हाल ही में अनिल बंसल की एक खबर पढ़ी जो अफसरों के सौतिया डाह पर थी। पर जितना सौतिया डाह पत्रकारों में है, उतना शायद किसी और प्रोफेशनल के बीच हो। मीडिया में जो घट बढ़ रहा है उसे देखते हुए इंडियन एक्सप्रेस के सहयोगी वीरेन्द्रनाथ भट्ट एक बार बोले- हिंदी में एक साईट बनाना चाह रहा हूँ, नाम रखा है ‘फाड़ डालो डाट काम’, कैसा रहेगा?

प्रभाष जोशी के जन्मदिन पर एक साथी का जाना

: जनसत्ता के लोग दोतरफा आलोचनाओं के शिकार होते रहे हैं पर ऐसे किसी आयोजन में उन्हें पूछा भी नहीं जाता जिसकी वजह जनसत्ता अखबार और प्रभाष जोशी हों : इस बार प्रभाष जोशी के जन्मदिन पर जनसत्ता से शुरू से जुड़े रहे वरिष्ठ पत्रकार सतीश पेडणेकर को विदाई दी गई। प्रभाष जोशी को याद किया गया और एक ऐसे साथी को विदा किया गया जो शुरू से प्रभाष जी की टीम का हिस्सा रहे।

सीमा आजाद का सवाल उठाएंगे विनायक सेन

मानवाधिकार संगठन पीयूसीएल अब विनायक सेन की तरह ही माओवादी साहित्य रखने के साथ राजद्रोह के आरोप में इलाहाबाद जेल में बंद पत्रकार सीमा आजाद का सवाल उठाने जा रहा है। पीयूसीएल इस मामले में उत्तर प्रदेश में जन दबाव बनाने के लिए विनायक सेन को आमंत्रित करने जा रहा है। विनायक सेन इस अभियान में शामिल भी होंगे। विनायक सेन ने फोन पर कहा – सीमा आजाद पीयूसीएल में हमारी सहयोगी रही है और मैं इस सवाल पर लखनऊ की संगोष्ठी में जरूर आउंगा।

राख में बदल गया बारूद

लोधी रोड के शमशान घाट में आलोक तोमर को अंतिम विदाई के लिए पहुंचा तो जाम के चलते कुछ देर हो गई थी. उनकी चिता से लपटे निकल रही थी. वहीं खड़ा रह गया. करीब बीस साल का गुजरा वक्त याद आ गया. जनसत्ता में प्रभाष जोशी के बाद अगर कोई दूसरा नाम सबसे ज्यादा चर्चित रहा तो वह आलोक तोमर का था. जनसत्ता ने उन्हें बनाया तो जनसत्ता को भी आलोक तोमर ने शीर्ष पर पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

रमन सिंह ने कसी मीडिया की नकेल

बिनायकछत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री रमन सिंह ने मीडिया की नकेल कस दी है और निरंकुशता के मामले में वे अब अजित जोगी से आगे जा रहे हैं। यह बात हाल ही में बिनायक सेन की कवरेज को लेकर मीडिया की भूमिका से सामने आई है। रमन सिंह सरकार भी खबर से डरने लगी है और जब सरकार खबर से डरने लग जाए तो उसकी साख भी ख़त्म होने लगती है। सार्वजनिक रूप से रमन सिंह बहुत ही सौम्य, शालीन और विनम्र माने जाते हैं, पर जिस अंदाज में उनकी सरकार काम कर रही है उससे उनकी यह छवि खंडित होती नजर आती है।

मैंने कहा- ‘फिजा’, उसने लिख डाला- ‘फसाद’

अयोध्या । ख्वाजा हैदर अली आतिश, मीर अनीस, चकबस्त और बेगम अख्तर का फैजाबाद फिर एक युद्ध जैसी तैयारी में जुटा है। फैजाबाद से अयोध्या में पहरें में विराजमान रामलला के दर्शन करते जाते हुए यही अहसास होगा कि जल्द कोई युद्ध शुरू होने वाला है।

अयोध्या : सुलह नहीं, फैसला चाहते हैं पक्षकार

लखनऊ / अयोध्या : उत्तर प्रदेश में अयोध्या के फैसले से पहले लखनऊ से लेकर फैजाबाद तक माहौल गरमा गया है। लखनऊ में सियासी पारा बढ़ रहा है तो अयोध्या में आशंका और तनाव। दूसरी तरफ अयोध्या मसले पर दोनों तरफ के पक्षकारों में सुलह की अंतिम कोशिश भी नाकाम होती नज़र आ रही है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में इस मामले के पक्षकारों के बीच सुलह की एक और कोशिश के लिए 17 सितम्बर की तारीख़ तय की गई है। पर कोई पक्षकार सुलह के मूड में नहीं है।

इन माओवादी महिलाओं की भी सुनें

मिर्जापुर । हथियार उठाकर समाज बदल डालने का सपना देखने वाले माओवादियो के समाज से वे महिलाए ही बाहर धकेल दी जा रही हैं जो सशत्र क्रांति के लिए पुलिस की लाठी गोली का मुकाबला करते हुए जेल की यातना भरी जिंदगी गुजार चुकी हैं। इनकी संख्या भी कम नहीं है। जिसके नाम से कभी उत्तर प्रदेश, झारखंड  और बिहार के नक्सल प्रभावित इलाकों में लोग सिहर उठते थे, आज उन महिलाओं के आंसू पोछने वाला भी नज़र नहीं आता।

यूपी सरकार मेरा फोन टेप करा रही है

कुछ दिन पहले ही मुझे बताया गया कि उत्तर प्रदेश में सरकार कुछ पत्रकारों के भी फोन टेप कर रही है जिनमे मैं भी शामिल हूँ। वजह मानवाधिकारों और उन लोगों का सवाल उठाना है, जिन्हें पुलिस माओवादी बताती है। यह जानकारी हमारे इंडियन एक्सप्रेस के सहयोगी ने तब दी जब गिरफ्तार की गई सीमा आजाद को लेकर कई खबरें लिखी गईं। हमने उन्हें बताया कि फोन पिछले कई सालों से टेप हो रहा है और इसकी परवाह भी हम लोग नहीं करते हैं। इससे पहले मिर्जापुर जेल में नक्सली बताकर गिरफ्तार की गई बबिता से लेकर अन्य युवतियों के पुलिसिया शोषण की खबरें दी गईं।

माया राज में दो माह में चार पत्रकारों की हत्या

: नया रिकार्ड : बहुत जोखिम भरी है अब उत्तर प्रदेश में पत्रकारिता : लखनऊ : दो महीने में चार पत्रकारों की हत्या का नया रिकार्ड मायावती के राज में बना है। उन मायावती के राज में जो ‘चढ़ गुंडों की छाती पर मुहर लगाओ हाथी पर’ के नारे के साथ सत्ता में आई थी। इस नारे का सबसे ज्यादा प्रचार प्रसार करने वाले पत्रकार ही आज संकट में है।

मुफलिसी के शिकार पत्रकारों का सवाल

श्रमजीवी पत्रकारों के वेतनमान को लेकर केंद्र सरकार की तरफ से बनाए गए वेज बोर्ड की दिल्ली में मंगलवार को हुई बैठक में जनसत्ता के पत्रकार अंबरीश कुमार ने देश भर के पत्रकारों की सामाजिक आर्थिक सुरक्षा का सवाल उठाया और बोर्ड ने इस सिलसिले ठोस कदम उठाने का संकेत भी दिया है. बैठक में जो कहा गया उसके अंश –

प्रभाषजी की टीम को हाशिए पर फेकने की साजिश!

: प्रभाष परंपरा की रचनात्मक पहल : कल रात उस जमात पर लिखने बैठा जिसने कुछ सालों पहले पूरे देश में गणेश जी को दूध पिला दिया था. इनके दुष्प्रचार तंत्र का यह सबसे रोचक उदाहरण रहा है. तभी दो जानकारी मिली. उस पोस्ट को रोक दिया है. पता चला कि भगवा रंग में रंगा प्रभाष परंपरा न्यास ने काम शुरू कर दिया. कैंसर से जूझ रहे साथी आलोक तोमर को धमकाने की कोशिश हुई. दूसरी सूचना पत्रकार सुप्रिया (आलोक तोमर की पत्नी) के बारे में मिली.

संजय तिवारी ने दिया अंबरीश के आरोपों का जवाब

15 जुलाई की शाम दिल्ली के गांधी दर्शन में प्रभाष जोशी को जानने मानने वाले कोई पांच सात सौ लोग इकट्ठा हुए और उन्होंने उनके जाने के बाद पहला जन्मदिन मनाया. प्रभाष जी जब थे तब वे जन्मदिन पर भी अपनी उत्सवधर्मिता का पालन करते थे. उनके जाने के बाद जिस न्यास ने इस कार्यक्रम का आयोजन किया था उसकी कोशिश भी यही थी कि प्रभाष जी की उस परंपरा को भी जन्मदिन के बहाने बरकरार रखा जाए. जिस दिन यह कार्यक्रम हो रहा था, मैं खुद मुंबई में था. चाहकर भी नहीं पहुंच पाया क्योंकि दिल्ली और मुंबई के बीच अच्छी खासी दूरी है और मुंबई से दिल्ली पैदल चलकर नहीं जाया जा सकता था. फिर भी लोगों से बात करके जो पता चला वह यह कि खूब लोग आये और प्रभाष जी को याद किया.

प्रभाष परंपरा न्यास पर अंबरीश के सवाल

अंबरीश कुमार जनसत्ता के यूपी ब्यूरो चीफ हैं. लंबे समय से जनसत्ता में हैं. प्रभाष जोशी के जमाने से. रामबहादुर राय से अंबरीश कुमार की अदावत काफी पुरानी है. रामबहादुर राय बहुत चिढ़ते हैं अंबरीश से. अंबरीश भी खूब भड़कते हैं रामबहादुर राय के नाम से. प्रभाष जोशी के जन्मदिन पर प्रभाष परंपरा न्यास के बैनर तले रामबहादुर राय के नेतृत्व में जो कार्यक्रम हुआ उसमें कई लोग नहीं बुलाए गए. खफा अंबरीश ने भड़ास अपने ब्लाग ‘विरोध’ पर निकाली है, जो यूं है. -एडिटर