भड़ासी चुटकुला (25)

अलग अलग लड़कों की गर्ल फ्रेंड अपने बॉय फ्रेंड से इस प्रकार लड़ रही थीं:-

पायलट की गर्ल फ्रेंड:- ज्यादा उड़ मत, समझा!!!

टीचर की गर्ल फ्रेंड:- मुझे सिखाने की कोशिश मत करो!!!

डेंटिस्ट की गर्ल फ्रेंड:- तुम्हारा जबड़ा तोड़ दूंगी!!!

सीए की गर्ल फ्रेंड:- तुम ज़रा हिसाब में रहना सीख लो!!!

पत्रकार की गर्ल फ्रेंड:- पहले नौकरी तो ढूंढ ले फिर बात करना!!!


(यह चुटकुला हमें सचिन के सौजन्य से प्राप्त हुआ है. आप भी मीडिया पर केंद्रित किसी चुटकुले को हम तक bhadas4media@gmail.com के जरिए पहुंचा सकते हैं. भेजने वाले अगर अपना नाम पहचान गोपनीय रखना चाहेंगे तो उनके अनुरोध का सम्मान किया जाएगा.)

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भड़ासी चुटकुला (24)

ये चुटकुला मीडिया पर नहीं है, मीडिया से संबंधित नहीं है. ”भड़ासी चुटकुला” में अब तक मीडिया से संबंधित चुटकुले ही शामिल किए जाते रहे हैं, लेकिन आज एक नान-मीडिया जोक पब्लिश किया जा रहा है. यह चुटकुला एक मित्र ने मुझे एसएमएस किया. इतना सटीक लगा और पसंद आया कि इसे मैंने फेसबुक पर डाल दिया. फेसबुक पर मेरे दो एकाउंट हैं. एक में पांच हजार दोस्त हैं. फ्रेंड लिमिट पूरी होने से दूसरे नया एकाउंट बनाया जिसमें करीब साढ़े छह सौ दोस्त हैं.

इस चुटकुले को अपने दोनों फेसबुकी एकाउंट्स पर प्रकाशित किया. चुटकुले ने लोगों के दिल-दिमाग पर असर किया और दनादन टिप्पणियां आने लगीं. रिस्पांस गजब का रहा. यहां मैं फेसबुक के दोनों एकाउंट्स पर डाले गये चुटकुले और उन पर आई प्रतिक्रियाओं को एक साथ प्रकाशित कर रहा हूं. -यशवंत, भड़ास4मीडिया


Yashwant Singh : सोनिया के सपने में एक दिन महात्मा गांधी आए. उन्होंने मरते वक्त कांग्रेस को सौंपी गई अपनी लाठी, चश्मा, टोपी के वर्तमान स्टेटस के बारे में पूछा तो सोनिया ने बताया- टोपी राहुल गांधी के पास है, चश्मा को मनमोहन सिंह की आंख पर चढ़वा दिया है. और, रही बात लाठी की तो उसे हमने पब्लिक की गांड़ में दे रखा है!!

Syed Mazhar Husain-Journalist : bahut Sachchi baat kahi aapne
Yogesh Kumar Sheetal : फाड़ के बोलना कोई आपसे सीखे…
Bhupendra Singh katu : satya
Vishal Sharma : baat ekdam khari hai…lekin delhi-belly film se inspired hai
Santosh Tripathi : Kadwa sach hai Yashwant Bhai…
Syed Mazhar Husain-Journalist : Aapki Himmat ko Salaam Yashwant bhai
Vishal Sharma : ANNA INHI KI MEIN DENE KO TAYYAR HAIN…..SUPPORT HIM
Jitendra Singh Yadav : hahaha, very good
Ashish Awasthi : Sahi kaha Yashwant bhai !!!!!
Syed Faizur Rahman : Ek baaar phir jhut bol diya sonia ne nahi bataya gandhi ji ko yeh sab nilami ko tyaar hain ..
Shravan Kumar Shukla : क्या बात है जनाब…. हाहाहा..वास्तव में सही कहा.. अब देखिये.. वो मोहतरमा तो अमेरिका खिसक गई… कोई वरिष्ठ न मिला… जिसमे कांग्रेस पर कब्ज़े का भय हो .. इसीलिए अपने बेटे को बिरासत सौप कर गई है ……ताकि कांग्रेस जैसी भी रहे.. उसके घर में ही रहे …
Rohit Kashyap : ha ha ha kya baat kahi hai. kahin na kahin aapne sahi kaha hai.
Vivek Choudhary : आच्छी बात है यशवंत जी, आपकी इस बात में जो आक्रोश है …वोही आक्रोश हिन्दुस्तान के यदि ८०% युवाओं में आ जाये तो हिन्दुस्तान की तस्वीर रातों रात बदल सकती
Sandeep Mishra : apke g….d ka kaya haal hai…
Piyush Mishra : josh to bahut aati haio par kuych ho nhi sakta
Updesh Saxena : सार्वजनिक मंच पर एस तरह की भावाभिव्यक्ति उचित नहीं है दोस्त…
Awesh Tiwari : उपदेश
Awesh Tiwari : ‎Yashwant Singh shat pratishat sahmat
Updesh Saxena : Yes @Awesh………Updesh.
Rahul Singh : super duper updesh………… hai
Awesh Tiwari : ‎@updesh गांड पर कैसा उपदेश, डंडा सभी के है भले वो राजा हो या फकीर. गांड में डंडा भावाभियक्ति नहीं है, ये हार चुके आदमी की कराह है.
Yashwant Singh : मेरे पास ये एसएमएस आया था… मुझे लगा कि ठीक ही लिखा है. इसीलिए इसको आप लोगों तक पहुंचा दिया.
Updesh Saxena : आपकी परिभाषा कुछ भी हो सकती है….मुझे जो अच्छा नहीं लगा सो कह दिया….वैसे भी मेरे शब्द इतने तीखे नहीं थे कि किसी को उनसे मिर्च का अहसास हो….
Ritesh Verma : હા હા હા હા હા. બઢ઼િયા વ્યંગ્ય હૈ ભાઈ સાહબ.
Awesh Tiwari : उपदेश भाई अन्यथा न ले, किसी को डंडा हो जाने का एहसास हो और उस एक वक्त आप उसे ये कहें कि सार्वजनिक मंच पर ऐसी भावाभियक्ति उचित नहीं है तो मिर्च तो लगेगी ही. यहाँ सार्वजनिक मंच पर जाति,धर्म और नया विषयों में जो अतिवादिता अपनाई जा रही है वो सही मायनो में सार्वजनिकता के खिलाफ है. आपकी बातें केवल उपदेश हैं, मैडम आपरेशन कराने विदेश गयी हैं और ये बता कर गयी हैं कि हिंदुस्तान के डाक्टर चूतिया हैं और यहाँ के अस्पताल बूचडखाना. देश में हर साल बुनियादी स्वास्थय सेवाओं के अभाव में लाखों महिलाओं की जान चली जाती है, हम इसे गांड में डंडा ही कहेंगे.
Awesh Tiwari : ‎Yashwant Singh जो लिखा है वो सही मायनों में बुद्धिजीवी है उसे हमारी तरफ से बधाई भिजवा दीजिए
Anil Yadav : बहुत जानदार….
Pujit Sha : Great Yash….Great!
Vineet Mishra : kya baat hai….wah wah
Shailesh Mishra : Absolutly Right Sir Ji……………
Kundan Kumar : this is called portal kranti…..nirbhik aur satik…
Shravan Kumar Shukla : क्या बात है जनाब…. हाहाहा..वास्तव में सही कहा.. अब देखिये.. वो मोहतरमा तो अमेरिका खिसक गई… कोई वरिष्ठ न मिला… जिसमे कांग्रेस पर कब्ज़े का भय हो .. इसीलिए अपने बेटे को बिरासत सौप कर गई है ……ताकि कांग्रेस जैसी भी रहे.. उसके घर में ही रहे ..
Prem Arora : gajab yashu bhai..
Amit Upadhyay : Bhaut khoob kha sir ji….
Ashok Bansal : भाई जी ,मित्रों के बीच कहे जाने वाला चुटकुला आपने जनता के बीच कह दिया.बस यही कसूर है आपका.राही मासूम रज़ा ने आधा गाँव उपन्यास में यही अपराध किया था.
Kumar Gaurav : ये डंडा कैसे निकलेगा? थोडा प्रकाश डालें …….
Kamal Kashyap : aap ko ese sabad sarvjanik roop se shoba nahi dete yashwant ji

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भड़ासी चुटकुला (23)

एक बड़े भाई तुल्य मित्र ने यह कहते हुए इस चुटकुले को भेजा है कि– ”इसका हिन्दी अनुवाद अश्लील हो जाएगा। इसलिए अंग्रेजी में ही भेज रहा हूं। अगर उपयोग कर सकें।” दो-तीन बार चुटकुला पढ़ा. सिर्फ एक शब्द का खेल है. उस एक शब्द का अर्थ गदहा भी होता है और वह भी होता है जो पिछवाड़े कपड़ों में ढका छिपा होता है. जो ढका-छिपा होता है, वह उत्सुकता पैदा करता है, कौतुक व रहस्य पैदा करता है.

और, जहां कौतुक, रहस्य, उत्सुकता है वहां तरह-तरह की कानाफूसियां भी हैं.  संभव है, बहुत सारे श्लील लोग इस चुटकुले पर नाक-भौं सिकोड़े लेकिन मुझे इसमें कोई अश्लीलता या आपत्तिजनक जैसा नजर नहीं आ रहा. आनंददायक चुटकुला है. आनंद लेंगे तो ठीक रहेगा, बाल नोचेंगे तो बीपी बढ़ेगा.

-यशवंत


A servant enrolled his donkey in a race & won.

The local paper read:’SERVANT’s ASS WON’

The MINISTER was so upset with this kind of publicity that he ordered the servant not to enter the donkey in another race.

Next day the local paper headline read:’MINISTER SCRATCHES SERVANT’s ASS’.

This was too much for the Minister, he ordered the servant to get rid of the donkey. He gave the donkey to his wife .

The local paper heading the news: “Ministers WIFE HAS THE BEST ASS IN TOWN”.

The Minister fainted.

WIFE sold the donkey to a farmer for Rs 1500:00

Next day paper read:”WIFE SELLS ASS FOR Rs 1500:00”

This was too much, minister ordered his wife to buy back the donkey & lead it to jungle.

The next day Headlines:”ministers Wife ANNOUNCES HER ASS IS WILD & FREE”

The Minister was buried next day!

This is called …Power of media.. :”-)

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भड़ासी चुटकुला (22)

एक संपादक जी को गर्म हवा के गुब्बारे में घूमने का शौक चढ़ा। भाई साब ने नीचे वालों से बंदोबस्त करने के लिए कहा। हो गया। और एक दिन भाई साब गुब्बारे में निकल लिए। कुछ समय बाद उन्हें अहसास हुआ कि वे खो गए हैं। उन्होंने उंचाई थोड़ी कम की और नीचे एक व्यक्ति को देखा। वे कुछ और नीचे आए तथा चीख कर कहा, “मैं भटक गया हूं। क्या आप मेरी सहायता कर सकते हैं। मुझे घंटे भर पहले ही एक मीटिंग में पहुंचना था। पर मुझे यह भी नहीं समझ में आ रहा है कि मैं कहां हूं।“

नीचे वाले व्यक्ति ने जवाब दिया, “आप गर्म हवा के गुब्बारे में हैं, जमीन से करीब 30 फीट की उंचाई पर हैं। आप 40 व 41 डिग्री नॉर्थ लैटीट्यूड तथा 59 और 60 डिग्री वेस्ट लैटीट्यूड के बीच हैं। गुब्बारे में लटके संपादक जी ने मन ही मन नीचे खड़े व्यक्ति को भर पेट गरियाया और कहा, “साला इंजीनियर कहीं का। अपनी काबिलियत दिखा रहा है।“ पर उस व्यक्ति से कहा, जरूर आप इंजीनियर हैं। नीचे वाले व्यक्ति ने कहा, “जी हां, पर आपको कैसे पता चला?”

संपादक जी ने कहा, “आपने जो कुछ मुझे कहा वह तकनीकी तौर पर सही है। पर आपकी यह सूचना मेरे किसी काम की नहीं है। और तथ्य यह है कि मैं अभी भी खोया हुआ हूं। सच कहूं तो आपसे मुझे कोई सहायता नहीं मिली। उल्टे आपने मेरा समय खराब किया।“

नीचे वाले इंजीनियर ने पूछा, “आप संपादक हैं क्या?”

“हां मैं संपादक ही हूं। पर आपको कैसे पता चला?”  गुब्बारे में लटके संपादक ने पूछा।

इंजीनियर ने कहा, “आपको पता नहीं है कि आप कहां हैं या कहां जा रहे हैं। आपको मीटिंग में जाना था पर गुब्बारे में घूमने निकल गए। आपको कुछ पता नहीं है कि मीटिंग में पहुंचने के लिए क्या करना है और आप अपने नीचे वाले से उम्मीद कर रहे हैं कि आपको इस संकट से निकाल दे।“

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भड़ासी चुटकुला (21)

CHILD- MOM, who is this man who comes every night & disapears in morning.

MOM- Thanks GOD! U saw him. he is ur father. Working in ”PRESS”

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आज दोपहर कटवारिया सराय के एक चौधरी ने दूजे से कही, ‘नूं सुन रहा है.’

तो दूजे ने हुक्के से मुंह काढ के बोला- हाँ, के बात सै.’

पहले ने कहा, रेडियो  वाली छोरी कहे सै – ‘हथियार खरीद में भारत दुनिया का बादशाह बण गया.’

पहले की बात सुन दूजा चौधरी बोला – ‘अच्छा ही हुआ जी…चलो अब तो कम से कम हमारी सरकार ने भुखमरी, आत्महत्या, बेकारी, अपराध, भ्रष्टाचार और महंगाई से निपटने में दिक्कत ना आवेगी. सब तसल्ली बख्श हो जावेगा.

भड़ासी चुटकुला (20)

अपने मनमोहन सिंह ने जिस ऐतिहासिक प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन किया, अपनी मजबूरी का रोना रोने के लिए, वह प्रेस कांफ्रेंस ही मनमोहन के गले की फांस बनने लगी है. उस पीसी के जरिए मनमोहन ने खुद को सबसे मजबूर आदमी के रूप में पेश कर दिया है. मनमोहन की उसी पेशकश पर कुछ चुटकुले तैयार होकर आजकल यहां वहां विचरण कर रहे हैं. अपने बेचारे पीएम मनमोहन को लेकर बने दो नए चुटकुले या कमेंट्स, जो कह लीजिए आपके सामने पेश हैं. इसे पढ़कर आप जरूर कहेंगे कि ये आज के दिन के दो सबसे मजेदार वाक्य हैं. जो लोग इसे पहले पढ़ चुके हैं, उनसे अनुरोध है कि वे भी इस चुटकुले को जहां-तहां फारवर्ड करें… ताकि बेचारे पीएम की मजबूरी वाली बात और उनका मजबूर दर्शन हर जगह पहुंच सके. जय हो. -यशवंत

1.) कम से कम महात्मा गांधी को छुट्टी तो मिली, अब “मजबूरी का नाम मनमोहन सिंह” हो गया है…

2.) ”दबंग” फ़िल्म का सीक्वल बनेगा, इसमें हीरो होंगे मनमोहन सिंह… और फ़िल्म का नाम रहेगा- “अपंग”…

भड़ास ब्लाग पर एक भड़ासी सदस्य द्वारा प्रकाशित

भड़ासी चुटकुला (19)

गब्बर सिंह का चरित्र चित्रण — 1. सादा जीवन, उच्च विचार: उसके जीने का ढंग बड़ा सरल था. पुराने और मैले कपड़े, बढ़ी हुई दाढ़ी, महीनों से जंग खाते दांत और पहाड़ों पर खानाबदोश जीवन. जैसे मध्यकालीन भारत का फकीर हो. जीवन में अपने लक्ष्य की ओर इतना समर्पित कि ऐशो-आराम और विलासिता के लिए एक पल की भी फुर्सत नहीं. और विचारों में उत्कृष्टता के क्या कहने! ‘जो डर गया, सो मर गया’ जैसे संवादों से उसने जीवन की क्षणभंगुरता पर प्रकाश डाला था.

२. दयालु प्रवृत्ति: ठाकुर ने उसे अपने हाथों से पकड़ा था. इसलिए उसने ठाकुर के सिर्फ हाथों को सज़ा दी. अगर वो चाहता तो गर्दन भी काट सकता था. पर उसके ममतापूर्ण और करुणामय ह्रदय ने उसे ऐसा करने से रोक दिया.

3. नृत्य-संगीत का शौकीन: ‘महबूबा ओये महबूबा’ गीत के समय उसके कलाकार ह्रदय का परिचय मिलता है. अन्य डाकुओं की तरह उसका ह्रदय शुष्क नहीं था. वह जीवन में नृत्य-संगीत एवंकला के महत्त्व को समझता था. बसन्ती को पकड़ने के बाद उसके मन का नृत्यप्रेमी फिर से जाग उठा था. उसने बसन्ती के अन्दर छुपी नर्तकी को एक पल में पहचान लिया था. गौरतलब यह कि कला के प्रति अपने प्रेम को अभिव्यक्त करने का वह कोई अवसर नहीं छोड़ता था.

4. अनुशासनप्रिय नायक: जब कालिया और उसके दोस्त अपने प्रोजेक्ट से नाकाम होकर लौटे तो उसने कतई ढीलाई नहीं बरती. अनुशासन के प्रति अपने अगाध समर्पण को दर्शाते हुए उसने उन्हें तुरंत सज़ा दी.

5. हास्य-रस का प्रेमी: उसमें गज़ब का सेन्स ऑफ ह्यूमर था. कालिया और उसके दो दोस्तों को मारने से पहले उसने उन तीनों को खूब हंसाया था. ताकि वो हंसते-हंसते दुनिया को अलविदा कह सकें. वह आधुनिक यु का ‘लाफिंग बुद्धा’ था.

6. नारी के प्रति सम्मान: बसन्ती जैसी सुन्दर नारी का अपहरण करने के बाद उसने उससे एक नृत्य का निवेदन किया. आज-कल का खलनायक होता तो शायद कुछ और करता.

7. भिक्षुक जीवन: उसने हिन्दू धर्म और महात्मा बुद्ध द्वारा दिखाए गए भिक्षुक जीवन के रास्ते को अपनाया था. रामपुर और अन्य गाँवों से उसे जो भी सूखा-कच्चा अनाज मिलता था, वो उसी से अपनी गुजर-बसर करता था. सोना, चांदी, बिरयानी या चिकन मलाई टिक्का की उसने कभी इच्छा ज़ाहिर नहीं की.

8. सामाजिक कार्य: डकैती के पेशे के अलावा वो छोटे बच्चों को सुलाने का भी काम करता था. सैकड़ों माताएं उसका नाम लेती थीं ताकि बच्चे बिना कलह किए सो जाएं. सरकार ने उसपर 50,000 रुपयों का इनाम घोषित कर रखा था. उस युग में ‘कौन बनेगा करोड़पति’ ना होने के बावजूद लोगों को रातों-रात अमीर बनाने का गब्बर का यह सच्चा प्रयास था.

9. महानायकों का निर्माता: अगर गब्बर नहीं होता तो जय और व??रू जैसे लुच्चे-लफंगे छोटी-मोटी चोरियां करते हुए स्वर्ग सिधार जाते. पर यह गब्बर के व्यक्तित्व का प्रताप था कि उन लफंगों में भी महानायक बनने की क्षमता जागी.

भड़ासी चुटकुला (18)

My dog sleeps about 20 hours a day. He has his food prepared for him. He can eat whenever he wants, 24/7/365. His meals are provided at no cost to him. He visits the Dr. once a year for his checkup, and again during the year if any medical needs arise. For this he pays nothing, and nothing is required of him.

He lives in a nice neighborhood in a house that is much larger than he needs, but he is not required to do any upkeep. If he makes a mess, someone else cleans it up. He has his choice of luxurious places to sleep. He receives these accommodations absolutely free. He is living like a King, and has absolutely no expenses whatsoever. All of his costs are picked up by others who go out and earn a living every day. I was just thinking about all this, and suddenly it hit me like a brick in the head…….

Is my dog is a POLITICIAN?

भड़ासी चुटकुला (17)

देश के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है. मानवता की महायात्रा के दौरान ये मोड़ पहली दफे आया है. मजबूरी, जरूरत और विलासिता जैसे शब्दे एक रेट पर बिक रहे हैं. यकीन नहीं हो रहा है न. लेकिन सच्चाई बिलकुल यही है.

प्याज 65 रुपये किलो

पेट्रोल 65 रुपये लीटर

और

बीयर 65 रुपये बोतल.

धीरे धीरे ही सही, पर समाजवाद आ ही गया. गोरख पाण्डेय जी का कहा सच हुआ. अब कुछ यूं गाओ… समाजवाद बबुआ धीरे धीरे आईल… घोड़ा पर आईल, हाथी पर आईल, मनमोहन महारथी के राजकाज में आईल… सोनिया महारानी की किरपा से आईल… समाजवाद बबुआ धीरे धीरे….

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भड़ासी चुटकुला (15)

नया भर्ती पत्रकार अपने संपादक की रोज-रोज की नुक्ताचीनी से आजिज था। संपादक हर बार और हर खबर में एक ही नसीहत देता- ‘‘बरखुरदार, गागर में सागर भरना सीखिये। केवल पन्ने भरने से काम नहीं चलेगा। खबरें छोटी लिखा करें।’’

एक दिन तो हद ही हो गयी। संपादक ने उसकी खबर को चार बार छोटा करने के लिये लौटाया। इस बात से पत्रकार बड़े गुस्से में था। अगले दिन उस रिपोर्टर ने ठान लिया कि वह बेहद छोटी खबर लिखा करेगा। अगले दिन वह पहली और महत्वपूर्ण खबर लिखने के बाद उसे दिखाने संपादक के पास गया। रिपोर्टर द्वारा गागर में सागर के अंदाज में लिखी गई खबर इस प्रकार थी-

”एक आदमी ने अंधेरे में तेल के कुंए के भीतर की स्थिति जानने के लिये माचिस की तीली जलाई। उम्र 28 वर्ष।”


यह चुटकुला भेजा है मुकेश कुमार उपाध्याय उर्फ मुकेश मणिकांचन ने. इसके पहले के 14 भड़ासी चुटकुलों को पढ़ने के लिए नीचे कमेंट बाक्स के आखिर में आ रहे शीर्षकों पर एक-एक कर क्लिक करें. मीडिया पर अगर आपके पास भी कोई चुटकुला हो तो bhadas4media@gmail.com पर मेल करें.

भड़ासी चुटकुला (14)

स्वर्ग के द्वार पर तीन लोग खड़े थे. तीनों ही अंदर घुसना चाहते थे. लेकिन अंदर जाना था किसी एक को. ऐसे में भगवान को सामने आकर इन तीनों से कहना पड़ा…

भगवान : आप में से केवल एक ही अन्दर जा सकता है.

पहला : भगवान मैं एक पुजारी हूँ, सारी उम्र आपकी सेवा की है, स्वर्ग पर मेरा ही हक़ है.

भगवान शांत रहे.

दूसरा : भगवान मैं एक डॉक्टर हूँ, सारी उम्र दूसरों की सेवा की है, स्वर्ग पर तो मेरा ही हक़ है.

भगवान फिर शांत रहे.

तीसरा : भगवान मैं एक पत्रकार हूँ, और….

इतना सुनते ही भगवान से रहा न गया.

भगवान : बस बस… कुछ मत बोल मेरे बच्चे.. अब रुला भी देगा क्या? मुझे पता है, सारी जवानी तू नर्क में रहा है, नारकीय माहौल में काम भी किया है… स्वर्ग पर तो केवल तेरा ही हक़ है.

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