”दिल्‍ली में साली हवा भी कम हो गई है”

यकीन तो नहीं होता लेकिन यकीन करना पड़ेगा. हमारे बीच अब आलोक तोमर नहीं रहे. अभी पिछले माह फरवरी को मैं अबंरीश जी के साथ उनके घर गया था. घर पहुंचने के बाद आलोकजी ने यह अहसास ही नहीं होने दिया कि वे बीमार चल रहे हैं. उनकी आवाज धीमी और फंसी हुई सी जरूर थी लेकिन चमचमाते दिनों को याद करने के दौरान उनकी आंखों में जो चमक चढ़-उतर रही थी, उसके बाद मुझे यकीन हो गया था कि चाहे जो भी हो आलोकजी अपनी जीवंतता के साथ लंबे समय तक हमारे बीच मौजूद रहेंगे ही.

छत्तीसगढ़ का न्‍यूज चैनल पुराण

[caption id="attachment_19294" align="alignleft" width="85"]राजकुमारराजकुमार [/caption]यह लेख किसी व्यक्ति विशेष पर केंद्रित न होकर प्रवृतियों को समझने का एक प्रयास मात्र है, फिर भी यदि किसी को बुरा लगता है तो मैं उससे फूलगोभी, आलू और मटर की सब्जी के साथ घी चुपड़ी हुई दो रोटी ज्यादा खाने का आग्रह कर सकता हूं। तो भाइयों.. जब छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण हुआ था तब सबको यही लग रहा था कि अब उनकी निकल पड़ेगी। दो-तीन अखबार वालों की दादागिरी से त्रस्त कुछ पत्रकार नुमा व्यापारियों को भी यह लगने लगा था कि बस थूंथने में अड़ाने वाला माइक और कैमरा लेकर आ जाओ सरकार हिल जाएगी।

पर नहीं बदली नत्था की जिंदगी

: अब भी मुफलिसी की जिंदगी जीने की मजबूरी : पूरी दुनिया से उसे बधाई संदेश मिल रहे हैं। जिसे देखो वही एक बार नत्था के दर्शन कर लेना चाहता है लेकिन आमिर खान की सर्वाधिक लोकप्रिय फिल्म पीपली लाइव का नायक ओंकारदास मानिकपुरी उर्फ नत्था अब भी गरीबी में ही जिन्दगी गुजर-बसर करने को मजबूर है।

न्यास की पवित्रता में पाखंड का प्रवेश न हो

राजकुमार सोनी: वरना सरकार की गोद में बैठने में देर न लगेगी : पिछले कुछ दिनों से प्रसिद्ध पत्रकार प्रभाष जोशी के नाम पर गठित किए एक ट्रस्ट (प्रभाष परम्परा न्यास) को लेकर जमकर जूतम-पैजार चल रही है। प्रभाष परम्परा न्यास को गठित करने वाला एक धड़ा मानता है कि जो कुछ वह कर रहा है शायद सही कर रहा है। न्यास के औचित्य को लेकर सवाल उठाने वाले दूसरे धड़े के भी अपने तर्क हैं।