उदय प्रकाश को साहित्‍य अकादमी पुरस्‍कार मिलने पर दी बधाई

रूद्रपुर : प्रख्यात हिंदी कथाकार, कवि और अनुवादक उदय प्रकाश को साहित्‍य अकादमी 2010 का पुरस्कार मिलने पर क्षेत्र के साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों ने हर्ष प्रकट करते हुए उन्हें बधाई दी है। सोमवार को नई दिल्ली में साहित्य अकादमी के सचिव अग्रहार कृष्णमूर्ति ने संवाददाता सम्मेलन में घोषणा की कि देश के कुल 22 साहित्यकारों को साहित्य अकादमी पुरस्कार के लिए चुना गया है।

निहत्थे होकर ही समाज को जान सकते हैं

उदय प्रकाशजयपुर में ‘लेखक-पाठक’ संवाद में उदय प्रकाश बोले…. : ताकतवर हों तो समाज बहुत अच्छा लगता है : ताकत से बदला जा रहा है भारत को : यह भारत माल संस्कृति के 28 करोड़ लोगों का है : गांधीजी की तरह गढऩे होंगे नए रूपक : कैसे बनता है कोई लेखक? कोई उदय प्रकाश कैसे बन जाता है? क्या होती है एक लेखक की रचना प्रक्रिया? कैसे देखता है वह दुनिया को? ये और ऐसे बहुत सारे सवालों-जवाबों का दरिया बहता रहा एक बरगद के पेड़ के नीचे। अवसर था जयपुर में जवाहर लाल केन्द्र के शिल्पग्राम में आयोजित पुस्तक मेले के समापन के दिन लेखक-पाठक संवाद का। पाठकों के सामने मुखातिब थे हमारे समाज के हिन्दी के सबसे बड़े कथाकार उदय प्रकाश। उदय प्रकाश के मुख से जैसे हमारे समाज की तस्वीर के अलग-अलग रंगों के झरने बह रहे थे। उदय प्रकाश से संवाद किया साहित्यकार दुर्गा प्रसाद अग्रवाल और युवा रचनाकार डॉ. दुष्यन्त ने।

फिर काहे का वितंडावाद : उदय प्रकाश

उदय प्रकाश

अब और चौकन्ने हो गए उदय प्रकाश बोले- मैं किसी का समर्थन नहीं करता : हर तरह की राजनीति, सरकारी तंत्र और मीडिया ने उदय प्रकाश को पहले से ही बहुत निराश-उदास कर रखा था, ‘पुरस्कार प्रकरण‘ के बाद रचना जगत के साझा विरोध-बहिष्कार के फतवे ने उन्हें और अंदर तक झकझोर दिया है। वह जितने खिन्न, उतने ही विचलित-से लगते हैं। भड़ास4मीडिया के कंटेंट हेड जयप्रकाश त्रिपाठी से बातचीत में उदय प्रकाश ने अपनी राजनीतिक निर्लिप्तता की घोषणा कर रचनाजगत में फिर अपने लिए संदेह की गुंजाइश बढ़ा दी है क्योंकि जो निर्लिप्त होता है, वह भी किसी न किसी तरह की राजनीति के पक्ष में जरूर होता है। बातचीत में उदय प्रकाश कहते हैं- ‘लेखक को हर तरह की राजनीतिक तानाशाही से मुक्त कर देना चाहिए। मेरा किसी भी तरह से कोई राजनीतिक सरोकार नहीं, न किसी ऐसे दल से कोई संबंध है। कभी रहा भी नहीं। रहना भी नहीं चाहिए। किसी को मेरा समर्थन करना हो, करे, अथवा मत करे, मैं किसी का समर्थन नहीं करता।’

हिंदी साहित्य में भूचाल, उदय प्रकाश घिरे

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पुरस्कार या फुरस्कार ?? हिंदी के सुपरस्टार कथाकार उदय प्रकाश के सितारे इन दिनों गर्दिश में हैं। योगी आदित्यनाथ के हाथों एक पुरस्कार लेने के बाद हिंदी साहित्य के वाम और प्रगतिशील विचार वाले छोटे-बड़े बुद्धिजीवी उदय प्रकाश की तगड़ी घेरेबंदी कर चुके हैं। अभी-अभी हिंदी के करीब 50 छोटे-बड़े विद्वानों-साहित्यकारों ने संयुक्त रूप से एक विज्ञप्ति जारी कर उदय प्रकाश के योगी आदित्यनाथ के हाथों पुरस्कार लेने पर नाखुशी जाहिर करते हुए विरोध जताया है। इस विज्ञप्ति में कहा गया है-