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टीआरपी के बहाने नकवी, शाजी और कापड़ी

टीवी और टीआरपी

इस बार टीआरपी के बहाने टाप थ्री न्यूज चैनलों के साथ-साथ इनके न्यूज लीडरों की भी बात होगी ताकि हमारे पाठक और उनके दर्शक न्यूज चैनलों के साथ-साथ उसके पीछे के चेहरों के बारे में भी राय-समझ बना सकें। स्टार न्यूज बीते (12 अक्टूबर से 18 अक्टूबर 2008) हफ्ते भले ही नंबर दो पर पहुंच गया हो लेकिन दर्शकों के दिल में इसने नंबर वन न्यूज चैनल जैसी पोजीशन बना ली है।

नान-न्यूज के जरिए आज तक की नंबर वन की कुर्सी बरकरार रखने की मुहिम ज्यादा दिनों तक सफल होती नहीं दिख रही है। कई बार उसे नान-न्यूज के उस्ताद इंडिया टीवी से मुंहकी खानी पड़ी।

टीवी और टीआरपी

इस बार टीआरपी के बहाने टाप थ्री न्यूज चैनलों के साथ-साथ इनके न्यूज लीडरों की भी बात होगी ताकि हमारे पाठक और उनके दर्शक न्यूज चैनलों के साथ-साथ उसके पीछे के चेहरों के बारे में भी राय-समझ बना सकें। स्टार न्यूज बीते (12 अक्टूबर से 18 अक्टूबर 2008) हफ्ते भले ही नंबर दो पर पहुंच गया हो लेकिन दर्शकों के दिल में इसने नंबर वन न्यूज चैनल जैसी पोजीशन बना ली है।

नान-न्यूज के जरिए आज तक की नंबर वन की कुर्सी बरकरार रखने की मुहिम ज्यादा दिनों तक सफल होती नहीं दिख रही है। कई बार उसे नान-न्यूज के उस्ताद इंडिया टीवी से मुंहकी खानी पड़ी।

अब न्यूज के दम पर परफार्म कर रहे स्टार न्यूज ने इंडिया टीवी को धकेल कर जो नंबर दो की कुर्सी हासिल की है, उसके आधार पर कयास है कि अगले कुछ माह में स्टार न्यूज आगे-पीछे होते, आंख-मिचौली खेलते नंबर एक बन जाएगा। ध्यान रहे, दर्शक किसी को दिल में जल्दी नहीं बसाते और जब बसा लेते हैं तो उसे जल्दी बिसारते नहीं।

ये जो दौर है उसमें आज तक को दर्शक बिसार रहे हैं, मगर धीरे-धीरे। कभी न्यूज के जरिए दर्शकों के दिलों पर राज करने वाला आज तक आजकल आंय-बांय-सांय टाइप के कार्यक्रमों के जरिए दर्शकों को वो कुछ दिखा रहा है जो दर्शक न्यूज चैनल से उम्मीद नहीं करते। इन चैनल के न्यूज डायरेक्टर हैं कमर वहीद नकवी। इसे बाजार के दबाव से आंखों पर पड़ी प्रबंधन की पट्टी कहें या नए दौर के चलते हांथों में बंधी मजबूरी की रस्सी मानें, नकवी के नेतृत्व में आज तक अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। माया मिली न राम वाली कहावत इस चैनल पर फिट बैठती है। न न्यूज का रहा और न नान-न्यूज का। संशय में दोनों गए। फिलहाल तो अंधेरे में तीर मार रहा है यह चैनल। अपनी ही बनाई पिच पर फालोआन रोकने के लिए हांफ रहा है।

विनोद कापड़ी के हटाए जाने के बाद शाजी जमान के नेतृत्व में स्टार न्यूज ने अपने ट्रैक को न्यूज की तरफ मोड़ा। स्टार की टीम में दीपक चौरसिया जैसा मास अपील वाला स्टार रिपोर्टर जुड़ा। कुछ महीनों की मेहनत के बाद नतीजा सामने दिखने लगा है। बीते हफ्ते की टीआरपी बताती है कि  आज तक ने पूरे एक अंक खोये हैं और स्टार न्यूज ने एक अंक से ज्यादा जोड़े। आज तक 16.6 के साथ नंबर वन। स्टार न्यूज 15.2 के साथ नंबर दो। इंडिया टीवी .8 का घाटा उठाते हुए 14.9 पर ठहरा। इस तरह वह भरे मन से नंबर तीन के पायदान पर पहुंच चुका है।

इंडिया टीवी को नंबर वन बनाने के लिए विनोद कापड़ी के नेतृत्व में कई धुरंधर लगे हैं। कई बार वे नंबर वन बन भी जाते हैं लेकिन वे इस मायावी कुर्सी पर टिक नहीं पाते। वैसे, जानकारों का कहना है कि विनोद कापड़ी जिस फन के उस्ताद हैं, उस धुन पर रजत शर्मा पहले ही अपने चैनल को अधिकतम नचा कर ढेर सारी कामयाबी हासिल कर चुके हैं। इस फन का अधिकतम उपभोग और उपयोग रजत शर्मा पहले ही कर चुके हैं। ऐसे में विनोद कापड़ी को कला दिखाने के लिए कुछ बचा ही नहीं है। विनोद कापड़ी रजत शर्मा की धुन (स्टाइल और परंपरा) को अपनी अभ्यस्त बीन से बजाते, दुहराते रहें तो यही उनकी जीत होगी।

विश्लेषकों के मुताबिक इस नान-न्यूज के फन के जरिए न्यूज चैनल के रूप में इंडिया टीवी ज्यादा दिनों तक नंबर दो की स्थिति में भी नहीं रह सकता। जैसे आज तक को स्टार न्यूज पछाड़ने की ओर बढ़ रहा है, उसी तरह इंडिया टीवी की पोजीशन को छीनने के लिए जी न्यूज या एनडीटीवी आगे बढ़ सकते (जी न्यूज बढ़ता हुआ दिख भी रहा है) हैं। सही कहें तो, दर्शक इंडिया टीवी के एक ही तरह के ‘सनसनीखेज’ कार्यक्रमों से बोर हो गए हैं। बोरियत दूर करने के लिए सनसनी पैदा की जाती है लेकिन जब सनसनी ही बोरियत पैदा करने लगे तो इसे दर्शकों के बदले टेस्ट में रूप में लिया जाना चाहिए। कुछ दर्शकों का कहना है कि वे न्यूज देखने जब टीवी पर पहुंचते हैं तो इंडिया टीवी जैसे चैनलों पर घंटे भर से पहले पता ही नहीं चल पाता कि आज खबरें हैं क्या-क्या। वैसे, कई लोगों का यह भी कहना है कि वे इंडिया टीवी पर न्यूज देखने जाते ही नहीं क्योंकि उन्हें पता है कि यहां कोई मसाला आइटम चल रहा होगा।

स्टार के बाद अगर न्यूज पर कोई चैनल काम करता दिख रहा है तो वो है जी न्यूज। जी ने अलग अलग कैटगरी के जो टाप टेन न्यूज चला रखे हैं, उसकी लोकप्रियता इन दिनों काफी बताई जा रही है। कुछ दर्शकों का कहना है कि जी न्यूज के टाप टेन को देखने के बाद किसी न्यूज चैनल को देखने की जरूरत ही नहीं रह जाती। दर्शकों की यह प्रतिक्रिया जी न्यूज की टीम के लिए संकेत हो सकता है कि वे जिस रास्ते पर बढ़ रहे हैं, उसे पसंद किया जा रहा है। जी न्यूज चौथे पोजीशन पर 10.2 की टीआरपी के साथ बरकरार है। एनडीटीवी चूहादौड़ से परे हमेशा की तरह खबरों को प्यार करने वाले चैनल के रूप में सदाबहार बना हुआ है। जब कहीं किसी चैनल पर कुछ न पाओ तो एनडीटीवी अपनाओ!!

आईबीएन 7, न्यूज 24 और समय जैसे चैनल अब भी टाप थ्री में आने के लिए सपना देख रहे हैं लेकिन इनके कार्यक्रम बताते हैं कि अभी काफी कुछ करने को बाकी है। इनकी टीआरपी बताती है कि फिलहाल ये आपस में ही उपर नीचे हो रहे हैं और अगले कई महीनों तक होते रहेंगे।

पिछले हफ्ते की टीआरपी चार्ट के जरिए आप विभिन्न चैनलों के नफा-नुकसान का अंदाजा लगा सकते हैं-

चैनल
पिछले 4 हफ्ते
पिछला हफ्ता
इस हफ्ते
नफा-नुकसान
1-आज तक
17.2
17.6
16.6
-1.0
2-स्टार न्यूज
15.0
14.2
15.2
1.1
3-इंडिया टीवी
16.8
15.7
14.9
-0.8
4-जी न्यूज
11.1
10.8
10.2
-0.6
5-आईबीएन 7
8.4
8.3
9.4
1.0
6-एनडीटीवी
7.9
8.5
8.0
-0.5
7-न्यूज24
5.8
6.3
6.3
0.0
8-समय
5.7
5.9
6.1
0.2
9-तेज
3.5
3.9
4.2
0.2
10-डीडी न्यूज
3.0
3.0
3.5
0.4
11-लाइव इंडिया
3.3
3.4
3.3
-0.1
12-इंडिया न्यूज
2.2
2.3
2.4
0.1

मार्केट  :  HSM, टीजी :  CS 15+  टाइम : 12 अक्टूबर 2008 से 18 अक्टूबर 2008 तक


इस विश्लेषण में न्यूज चैनलों के दर्शकों से बातचीत और टैम की टीआरपी लिस्ट का सहारा लिया गया है। अगर आप विश्लेषण में कही गई किसी बात से असहमत हैं तो आपकी राय का हम स्वागत करेंगे। आपके मत को हम ससम्मान प्रकाशित करेंगे। आप अपनी बात [email protected] के जरिए हम तक पहुंचा सकते हैं।

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