अनिल चमड़िया अनैतिक टीचर : वीएन राय

वीएन रायअनिल चमड़िया ने इंट्रेस एक्जाम में हेरीफेरी की जिसके कारण परीक्षा कैंसिल करानी पड़ी : जांच कमेटी की रिपोर्ट आते ही अनिल राय अंकित पर कार्रवाई होगी : मेरे जीवन में ऐसी स्थिति आएगी, इसकी मैंने कल्पना नहीं की थी : जिन लोगों के स्वार्थ मुझसे पूरे नहीं हो पाए वही लोग आरोप लगा रहे हैं : एक पक्षीय रिपोर्टिंग और गाली-गलौज की भाषा के चलते ब्लागों की विश्वसनीयता कम हो रही है : इतने ही दलितवादी हैं तो ब्लाग वाले अपने ब्लागों का संपादक किसी दलति को क्यों नहीं बना लेते? : वर्धा स्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के कुलपति विभूति नारायण राय इन दिनों दिल्ली आए हुए हैं. इसी विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के प्रोफेसर अनिल चमड़िया को हटाए जाने के मामले में वे आजकल चर्चा में हैं. आज सुबह जब उनका फोन आया तो अनिल चमड़िया प्रकरण पर उनसे कई बातें हुईं. उन्होंने कई सवालों के जवाब भी दिए. पेश है बातचीत के अंश-

-इन दिनों आपको अनिल चमड़िया और उनके लोग खलनायक साबित करने पर तुले हुए हैं. आपका क्या कहना है इस पर?

-देखिए. बहुत साफ बात है कि अनिल चमड़िया चाहे जितने बड़े नायक हों लेकिन मेरी नजर में वे एक अनैतिक शिक्षक है. इंट्रेंस टेस्ट में उन्होंने अपनी हैंडराइटिंग से कई छात्रों के नंबर घटाए और बढ़ाए थे. जब वह घटना मेरे संज्ञान में आई तो मैंने सब कुछ देखा. आरोप बिलकुल सही था. अनिल चमड़िया की राइटिंग में पहले दिए गए मार्क्स को काट कर घटाया या बढ़ाया गया था. मैंने यह सब अनिल चमड़िया को बुलाकर दिखाया तो उनके पास कोई जवाब नहीं था. वे निरुत्तर रहे. मैंने इस पूरे मामले की जांच के लिए एक कमेटी बनाई. कमेटी ने जांच के बाद जो रिपोर्ट दी उसमें कहा कि प्रवेश परीक्षा में अनिल चमड़िया ने बड़े पैमानी पर धांधली की है. इसलिए प्रवेश परीक्षा कैंसिल कर नए सिरे से करानी चाहिए. बाद में जांच कमेटी की सिफारिश के आधार पर प्रवेश परीक्षा को कैंसिल कराकर फिर से इंट्रेंस एक्जाम लिया गया. दूसरी बात. अनिल चमड़िया कक्षाओं में नहीं जाते थे. उनसे मैंने कहा तो उन्होंने जाना शुरू किया. ये दो चीजें- नंबर घटाना-बढ़ाना और क्लास न लेना, किसी भी टीचर को अनैतिक बना सकती हैं. रही बात अनिल चमड़िया को हटाने की तो मैं कौन होता हूं हटाने वाला. किसी भी विवि में एक्जीक्यूटिव कौंसिल ही अंतिम निर्णय देती है. कार्यपरिषद ने उन्हें हटाने का फैसला सर्वसम्मति से लिया. उसमें कोई डिबेट भी नहीं हुआ. इसलिए क्योंकि वे निर्धारित अर्हताएं नहीं पूरा करते थे, सो उनका सेलेक्शन एप्रूव नहीं किया गया.

-आपके यहां जो कथित ‘चोर गुरु’ हैं, वो तो अब भी कार्यरत हैं. क्या अनिल राय अंकित की चोरी आपके संज्ञान में नहीं है?

-ठीक सवाल पूछा आपने. मैं इसका भी जवाब देना चाहूंगा. अनिल राय अंकित के ज्वाइन करते वक्त यह प्रसंग नहीं आया था. बाद में ये प्रसंग उठा. जब लोगों ने शिकायतें कीं और मामला मेरे संज्ञान में आया कि इन्होंने दूसरों की किताबें से मैटर उठाकर अपने नाम करके पब्लिश कराया है तो मैंने जांच कमेटी बिठा दी है. हवाई बात करने से तो जांच नहीं होती. जब लोगों ने प्रमाण दिए, फैक्ट भेजे, लिखकर शिकायत की तो जांच कमेटी बनाकर उसे सारे आरोप दे दिए गए. कमेटी जांच कर रही है. अगर वे दोषी पाए जाएंगे तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी. दोषी नहीं पाए गए तो कार्रवाई नहीं होगी. ये तो जांच का विषय है.

– सांप्रदायिक ताकतों से लड़कर, ब्यूरोक्रेसी की कमियों को उजागर करके और शहर में कर्फ्यू जैसा असाधारण उपन्यास लिखकर विभूति नारायण राय नायक बन गए. आपने अपने जनवादी स्वभाव के अनुरूप वर्धा विवि में कई ऐसे लोगों की नियुक्तियां भी कीं जिससे आपका कद बढ़ा. पर जिस तरह से आपको खलनायक बनाने की कोशिश की जा रही है, उससे दुख नहीं होता है?

-दुर्भाग्य से हमारा विवि शुरू से ही विवादों से ग्रस्त रहा है. मेरे से पहले यहां दो योग्य कुलपित हुए. अशोक वाजपेयी जी और गोपीनीथन जी. विवादों ने उनका भी पीछा नहीं छोड़ा. ये एक खराब किस्म की परंपरा विवि में रही है और है. मुझे भी यहां आकर दुर्भाग्य से विवादों में घिरना पड़ा. मेरे लिए तकलीफदेह बात ये है कि मुझे सांप्रदायिक, जातिवादी और दलित विरोधी साबित करने की कोशिश की जा रही है. यह काम वे लोग कर रहे हैं जिनका निजी स्वार्थ मुझसे पूरा नहीं हो पाया. कोई व्यक्तिगत स्वार्थ पूरा न हो पाने पर अनर्गल आरोप लगाए तो उसे क्या कहा जा सकता है. मेरा लेखन और मेरा जीवन इस बात का गवाह रहा है कि मैंने हमेशा दलितों, शोषितों और अल्पसंख्यकों के पक्ष में लड़ाइयां लड़ीं. लड़ रहा हूं. इसके चलते नुकसान भी उठाया. ‘शहर में कर्फ्यू’ के प्रकाशन के बाद विश्व हिंदू परिषद के लोगों ने धमकियां दीं. अशोक सिंघल ने इस किताब पर फिल्म बनने पर सिनेमाहाल को जला डालने की बात कही थी जिसका देश भर के लेखकों ने विरोध किया था. इन दिनों मैं मेरठ के हाशिमपुरा दंगों पर काम कर रहा हूं. इस संबंध में मैटर मेरे ब्लाग पर बड़ा हुआ है. 1857 के दलित विमर्श पर सबसे ज्यादा मैंने लिखा. मेरा और वीरेंद्र यादव आदि का इसी कारण साहित्य में विरोध भी हुआ. पर अब जिन लोगों के व्यक्तिगत स्वार्थ मुझसे पूरे नहीं हो रहे उनके चलते आरोपों का सामना करना पड़ रहा है. जीवन में ऐसी स्थिति आएगी, इसकी मैंने कभी कल्पना नहीं की थी.

-क्या आपको लगता है कि दलित, अल्पसंख्यक और महिला जैसे मुद्दे उठाने वाले सभी लोग जेनुइन ही होते हैं?

-देखिए, इन मुद्दों में दम है. ये मुद्दे ऐसे ही नहीं हैं. इनके साथ इंसाफ नहीं हो पा रहा है इसलिए इनके पक्ष में लामबंदी जरूरी है. लेकिन ये भी सही है की कई लोग व्यक्तिगत हितों के लिए इन मु्द्दों का इस्तेमाल करते हैं. आप ये नहीं कह सकते कि हर व्यक्ति जो इन मुद्दों को उठा रहा है, वह जेनुइन है.

-वेब-ब्लाग पर आजकल हर कोई बेलौस व बेलगाम लेखन कर रहा है. आपको लेकर भी काफी कुछ लिखा-पढ़ा जा रहा है. क्या कहेंगे आप?

-देखिए, हर माध्यम की विश्वसनीयता सबसे बड़ी चीज होती है. ब्लाग की विश्वसनीयता खत्म हो जाएगी अगर हम एक पक्षीय विवाद पैदा करेंगे. ब्लागों को भी आत्मनियंत्रण जैसा सिस्टम लागू करना चाहिए. अगर गाली-गलौज की भाषा, व्याकरण विहीन व तर्क विहीन भाषा का इस्तेमाल करेंगे तो ब्लाग की विश्वसनीयता कैसे कायम रहेगी.

-आपसे कुछ लोग दिल्ली में भी मिलने आए थे अनिल चमड़िया के मुद्दे को लेकर. बातचीत कैसी रही?

-तीन लोग आए थे. ये लोग पहले से ही कनवींस होकर आए थे कि अनिल चमड़िया का पक्ष सही है. जब आप अपने आंख नाक कान खुला नहीं रखेंगे तो दूसरे की बात को कैसे सुने व परखेंगे. संभव है दूसरा पक्ष ही सही हो लेकिन इसे समझने के लिए आपको पूर्वाग्रह से मुक्त होना पड़ेगा. उनमें से एक सज्जन ने पूछा कि आपको कोई दलित नहीं दिखाई दिया तो मैंने कहा कि जो आप तीन लोग आए हो उसमें कोई दलित क्यों नहीं है? आप लोगों के जो ब्लाग हैं उसमें किसी दलित को क्यों नहीं संपादक बना देते. देखिए, सही बात तो यह है कि जब भी आप कोई टीम बनाते हैं तो उसमें आपको जातियों और धर्मों से परे हटकर काम करना चाहिए. तभी संस्था और माध्यम का कल्याण हो सकता है.

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Comments on “अनिल चमड़िया अनैतिक टीचर : वीएन राय

  • VN sir, aap nirash na ho. ye chirkut loag khud b khud shant ho jaayenge. aap badhiya kaam kar rahe hain. aage ki taraf dekhiye. regards DP Verma, Journalist

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  • krishna murari says:

    mai bhumihar jati se hun. bihar me bhumihar jati bahut dominant mana jata hai. mere paas purkho ki lagbhag sau bigha jamin thi. lekin ab sara khatm ho gaya hai. us jamin par sare dalito ne aur yadvo ne kabja jama liya. kagaj par jamin hamari hi hai lekin sirf kagaj par. hamare gaon ke kuchh logo ne jab virodh kiya to unki apni hi jamin par hatya kar di gayi. dalito ke kai gaon hamare gaon ke aaspaas hai. ye log jab bhi mauka milta hai hamare gaon me ghuskar logo ko marte pit,te hai.humlog do bhai hai dono ko pitaji ne LIC ka agent bankar padhaya. aaj hum dono bhai apne pairo pe khare hai. waqt aisa bhi aaya tha ki humlogo ko khane ke lale par gye the. maana mere purkho ne galti ki thi lekin uski saja mujhe kyo. dalitvadi agenda banakar kai log apna ullu sidha kar rahe hai. mai nhi jaanta anil ji ke saath kya hua. shayad vo sahi hi ho. lekin mera itna hi man,na hai ki dalit masum nhi rah gaye hai. ve apna haq aajkal mang nhi rahe hai balki chhin rhe hai.

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  • Dr.Hari Ram Tripathi ,Journalist,Lucknow. says:

    TRUTH is with Mr.V.N.Roy.LEKIN CHAMARIA JAISE KU-PAATRA KO PROFESSOR BANANE KA FAL TO ROY SAHAB KO HI BHUGATANA HAI.VAHEE HO RAHA HAI.

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  • Dr.Hari Ram Tripathi ,Journalist,Lucknow. says:

    Mr. V.N. Roy is right and satya unke sath hai lekin chamaria jaise kupatra ko professor banane ka fal to unko hi bhugatana hai.vahee sab ho raha hai.

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  • अवनीश राय says:

    कुलपति महोदय
    आपने बहुत सही बात शुरू की है। आपकी बात से ऐसा लगता है जैसे विश्वविद्यालय में दो तरह की जांच कमेटियां हैं। एक, जो जल्दी रिपोर्ट दे देती हैं, और दूसरी जिनकी रिपोर्ट कभी नहीं आती। एक ही समय में दो जांच एंजेंसियों ने काम करना शुरू किया लेकिन अनिल चमड़िया की रिपोर्ट पहले आ गई और दूसरी रिपोर्ट शायद लिब्रहान कमीशन की रिपोर्ट साबित होगी। आप एक प्रशासनिक अधिकारी रहे हैं और इसका असर आप पर अब भी है। जवाबदेही से कैसे बचा जाए यह आपको बखूबी आता है।
    “जांच कमेटी बनाकर उसे सारे आरोप दे दिए गए. कमेटी जांच कर रही है. अगर वे दोषी पाए जाएंगे तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी. दोषी नहीं पाए गए तो कार्रवाई नहीं होगी. ये तो जांच का विषय है.” बहुत खूब!! जहान जानता है कि कौन सी कार्रवाई होगी।
    आप अच्छा लिखते हैं, ये अच्छी बात है। लेकिन आधी धोती पहनकर गुजारा करने वाला हर आदमी गांधी नहीं बन सकता। अगर वर्धा में वीसी पद का दामन इतना ही साफ है तो आखिर क्यों हर इमानदार और सम्मानित व्यक्ति वहां से अपने संबंध खत्म करना चाहता है ?

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  • विनीत कुमार says:

    आपने सारे सवाल ही इस अंदाज में पूछे हैं जिससे कि वी.एन.राय की साफ-सुथरी छवि स्थापित होने में मदद मिले। आप पूर्वग्रह से ग्रसित और चमचई की शैली में सवाल कर रहे हैं। आपके सवाल से ही साफ झलकता है कि पूर्वनियोजित तरीके से वी.एन.राय को अपनी बात रखने का मौका दे रहे हैं।…अगर उऩ्हें लगता है कि लोग ब्लॉग पर आकर व्याकरण विहीन भाषा में जो मन में आ रहा है लिख रहे हैं तो फिर उन्हें यहां आकर सफाई देने की जरुरत क्यों महसूस हो रही है?

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  • अफसोस, अफसोस इस बात का कि पुरानी कहावतों से विभूति जी कुछ नहीं सीख सके (उल्टा चोर कोतवाल को डांटे), अफसोस कि एक अच्छा आदमी बनने के लिये जिस सब्र की जरूरत है वह नहीं रही, अफसोस कि आप एक अच्छे छात्र भी आप नहीं बन सके, अफसोस कि आप अपने चिंतन में इतने थोथे निकले…. मसलन आप इतने झूठे निकले कि आपने अनिल चमड़िया के हेराफेरी के कारण परीक्षा तो करवायी, पर उन पर कोई कार्यवाही नहीं की, आपने यहाँ यह नहीं बताया कि उस प्रक्रिया में राम मोहन पाठक से लेकर, उप-कुलपति तक फंसे, आपने यह भी नहीं बताया कि दुबारा जो परीक्षा हुई उसमे जामिया के एक चोर गुरू और अनिल अंकित राय के सहयोगी चोर दीपक के.एम. ने कापी जाँची. क्या आप जबाब देंगे कि अनिल चमड़िया पर उस समय क्या कार्यवाही की गयी और नहीं तो क्यों?
    दरअसल एकपक्षीय रिपोर्टिंग इसे कहते हैं विभूति जी, क्या यह सच है कि आरोप वही लोग लगा रहे हैं जिनके स्वार्थ आपसे पूरे नहीं हो पाये तो क्या जो आपके साथ खड़े हैं उनके स्वार्थ पूरे हो चुके हैं या भविष्य में आप उन्हें पूरा करेंगे. जिन्दगी, संघर्ष और लड़ाईयां कई बार स्वार्थ से ऊपर उठकर भी लड़ी जाती हैं, इस तरह के खोखले तर्क निश्चिततौर पर दुनिया की जुझारु लड़ाईयों और लड़ने वालों के लिये भद्दे मजाक ही हैं. हिन्दी वि.वि. के मीडिया विभाग का रजिस्टर चेक कर लिजिये और छात्रों से पूंछ लिजिये क्या अनिल चमड़िया से अधिक और अच्छा क्लास किसी अध्यापक ने लिया है, पर आप छात्रों से पूंछने के नाम पर उनसे पूंछेगे जिन्हें स्टूडियो प्रभारी बनाने की बात या लेक्चरर बनाने की बात अनिल अंकित चला रहे हैं शायद……पर आपके कहने पर अनिल चमड़िया ने क्लास लेना शुरु किया इसको प्रस्तुत करने का आपका तरीका उनसे वाकई दुराग्रहपूर्ण लगता है. क्योंकि मामला क्लास लेने का नहीं था, मामला था कि क्लास, क्लासरूम में अनिल चमड़िया नहीं ले रहे थे और छात्रों को अपने चैम्बर में बुलाकर ४० मिनट के बजाय २ घंटे की क्लास लेते थे क्योंकि क्लास रूम में आवाज गूंजती थी. जिसपर छात्र तो खुश थे पर अनिल राय अंकित ने आपसे शिकायत की और कहा कि अनिल चमड़िया कक्षा में नहीं पढ़ाते. जिसे आप यहाँ प्रचारित कर रहे हैं क्योंकि आपके पास तर्क नहीं है. इसलिये आपकी दोनों बातें झूठी नहीं तो आधार विहीन हैं. निश्चित तौर पर जातिवादी कहने से आप जातिवादी नहीं हो जायेंगे, न ही महिला विरोधी कहने से महिला विरोधी पर आपके व्यवहार यह तय करेंगे कि आप क्या हैं. पिछले दिनों छात्रों की एक बैठक में कुछ छात्राओं ने कहा कि आप अश्लील शब्दों के साथ बात करते हैं इसलिये वे आपसे बात-चीत करने का जो कि छात्र प्रस्ताव रख रहे थे को वे छात्रायें मना कर रही थी. आपके कथन को ही वे दोहरा रही थी कि छात्र तुम लोगों को टाफी समझते हैं. तुम्हारी स्वतंत्रतायें छात्रावासों के कमरे तक ही सीमित क्यों है? व अन्य अन्य.
    गाली गलौज की भाषा में ब्लाग या कहीं भी बात करना गलत है पर अब तक अनिल चमड़िया और आपसे जुड़े इस विवाद में जितने प्रकाशन हुए हैं उनकी टिप्पणियों पर यदि शोध किया जाय तो आपके पक्ष में खड़े ज्यादातर लोगों की भाषा निहायत गंदी रही है. क्या यह पक्षधरता समरूपी चेतना का परिचायक नहीं है या फिर यह भी कहा जा सकता है कि आपकी तरफ से जो लोग लामबंद हुए हैं वे बेहद स्तर विहीन तरीके से सामने आये हैं, तो एक बार जरूर सोचना चाहिये कि ये कौन लोग हैं जो पूरे बहस को कुचर्चा में बदलना चाहते हैं क्योंकि इस पर एक स्वस्थ बहस हो इससे आपको भी एतराज न होगा. आपने ब्लाग माडरेटरों से सवाल किया कि सम्पादक के रूप में वे किसी दलित को क्यों नहीं रख लेते? इसका क्या आशय लगाया जाय क्या यह कि मसले से महत्वपूर्ण जातियां हैं. मैं आपको आपके विश्वविद्यालय का एक आंकड़ा देता हूं जिसे मैंने कहीं पढ़ा है इसलिये अगर वह स्रोत गलत हो तो मुझे क्षमा कीजियेगा आपके विश्वविद्यालय में एक मात्र छात्रावास है जिसका नाम सावित्री बाई फुले के नाम पर है, आपके वि.वि. में एक मात्र अस्पताल है जो अम्बेडकर के नाम पर है, आपके वि.वि. में अम्बेडकर जनजातीय अध्ययन जैसे विभाग चलते हैं, आपके वि.वि. में छात्रों की कुल संख्या २४७ है जिसमे १०० से अधिक अम्बेडकर स्टूडेंट फोरम के सदस्य है, यानि दलित छात्र बहुलता में हैं और आपके विश्वविद्यालय में ही एक माह तक दलित छात्रों को आंदोलन करना पड़ता है और न्याय नहीं मिल पाता, आपके द्वारा ही दलित अध्यापक को अम्बेडकर परिनिर्वाण दिवस की रैली में भाग लेने पर धमकाया जाता है, जो आस्थायी नियुक्तियां आपने की हैं उसमे एक भी दलित शामिल नहीं है.
    लिहाज़ा हम आपके इस झूठ, तथ्यविहीन और अनैतिक वक्तव्यों का क्या मायने लगायें. क्या यह कि प्रोपोगेंडा करके आप चल रही इन बहसों पर कर्फ्यू लगवाना चाहते हैं.
    आपका पूर्व और सकारात्मक कार्यों का अब भी प्रसंसक छात्र.

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  • HEMANT TYAGI says:

    JO LOG V.N.RAI KO DALIT VIRODHI KAHTE HAIN VO SARASAR GALAT KAHTE HAIN. MEERUT KE MALIYANA KAAND KI F.I.R UNKI GHAZIABAD MEI POSTING KE DAURAN DARZ HUI THI JIS SE TATKALIK C.M KE KOP KA BHAJAAN RAI SAHEB KO BANNA PADA ISKI MEINE KHUD REPORTING KI THI.GHAZIABAD KE BHOJPUR KE TYAGI BAHULYA GAON MEIN DO GUTON KI AAPSI RAJNEETI KE SHIKAAR SUKHBEER NAMAK DALIT KO KAAFI CHOT LAG GAYI THI US MAMLE KI MEINE REPORTING KI THI RAI SAHEB NE US MAMLE MEI NA KEWAL KANOONI KARWAI KI BALKI PEEDIT DALIT KO SARKAARI AARTHIK MADAD BHI DILAI.EK BAAR MEINE AISA HI EK MAMLA JHANSI MEI UNKI POSTING KE DAURAN DEKHA UNSE EK EX MINISTER EK MAMLE MEI POLICE ACTION NAHI KARNE KI SIFARISH KAR RAHE THE UNHONE NETAJI KO TARKEEB SE TAAL DIYA AUR PEEDIT DALITON KO NAYAY BHI DILAYA.IS GHTANA MEI EK GAON KE DABANGO NE EK DALIT KE YAHAN AAYI BAARAT KO BANDHAK BANA LIYA THA AUR POORI RAAT BARAATIYON SE LAKDIYAN KATWAAI THI IN GHATNAO KE JAANKAR LOG RAI SAHEB KO DALIT,MUSLIM VIRODHI NAHI KAH SAKTE MEINE UNHE HAMESHA GAREEBON KE HAMDARD KE ROOP MEI DEHA.UNHE DALIT VIRODHI SIRF WOH AADMI HI KAH SAKTA HAI JO UNSE APNA SWARATH POORA NAHI KAR PAAYA HO.

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  • V.N. Sir

    Mai apke baktavyo se sahmat hu…. ap sahi mai in vivadit University mai akar ap bhi nahi bach sake…..

    lekin jab apne join kiya tha tab aisa kio laga ki is university ka ab udhhar hone ko hai… lekin aisa kuchh nahi hua……

    kher ye sare sansar ki prampra hai……

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  • sajjan mishra says:

    anil ankit ka kush nahi hoga ye to sab jante sirf ak national media dikha raha uske liye cneb ko badhai. lekin jis post per ankit rai ji hai kya uske liye wo kabil hai . jo phd ki degree unke pass hai wo hindhi main hai . lekin wo journalism jaise subject ke professior ban gaye hai kaise malloom nahi .jo kabhi media researsh nahi kiya wo kaise student ko research karayga . A.P.S university rewa se B.J aur M.J. ki degree lene wale wo bhi distance education se . isse phele wo raipur ke journalism university ke electronic media ke head rahe . rai ki niukti waha dr. josi ne ki thi. jin per lokayukt me 5 mamle darg hai galat niukti ko lekar . raipu university ka student hone ke karan mai ye batana chata hu ki patrakarita me josi aur rai ke rehte na to anche patrakar ban payage aur na hi media ke annche teacher . jara un students se puchiye ki ankit kya padate hai . aise hi raipur university me kai teacher hai jo anil k rai ankit ke bhai jaise he hai . student ne raipur me strike bhi kiya tha kul 60 students me se 56 students ne in teachers per aarop lagaya tha , ki aapse padate nahi banta phir bhi na in teachers ko saram aati na khud v.c. ji ko . josi ji phir se waha ke kulpati ban gaye hai iske liye badhai. governor Narsimhan ji ne jate-jate phir se unhe v.c bana hi diya. ab to viswas hi tootgaya hai ki ek teachers ki sikayat kulpati se kare to kuch nahi hona . Governor se chahe C.M. se kare kuch nahi hona kya yahi hai patrakarita .

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  • arvind, amethi, up says:

    V N SIR,
    DARASAL DESH KE LOGON KO LACHAR FAISALON KI AADAT HAI. KOI BHI KATHOR KADAM KUCH LOGON KO VICHLIT KAR DETA HAI AUR WE ANAAP SHNAAP BOLANE LAGTE HAIN. UNKI TIPPANI PAR KYA KAHNA JO AAPKE BAARE MEN KAM JANTE HAIN. DONT WORRY CARRY ON.

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  • sayityakar ya secular hone se aadmi ki virasatana maansikta bhi badal jaye , ye sochna or hon adono hi bada mushkil hai.v. n. roy ke saath bhi hahi ho raha hai.vaicharik kutilta se upje dalit samartha vaktavyo se koi vastav meai hi dalitvadi ho jaye ye aavashyak nahi hai. satta aur uchhavargiya sambando ka nirvahan bhi vyaktigat swatanra soch ke aade aa sakta hai.naukarshahi ke vimarsho main prabhhot-prashikshit ek naukarshah se yahi umid thi ki wo jhuthe aaropon ka sahra lega aur prof.chamaria jaise logon ko apni jaativadi mansikta ka sikar banaa kar baki saare samaaj ke saamne sawaal uchhaale ga ki wo khud kyon nahi apne pratishthano (ex.blogs) ka editor dalit ko banaa dete.

    patanshil brahminvaad sarvratra vijyi bhava !

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