करप्शन विरोधी अभियान को न्यूज चैनलों के समर्थन से डरी सरकार ने निकाला डंडा

: लाइसेंस रिन्यूअल के फंडे को डंडे की तरह इस्तेमाल करने की रणनीति : काटजू ने नई नीति त्यागने की अपील की : केन्द्र सरकार ने न्यूज चैनलों पर अंकुश लगाने की तैयारी कर ली है. सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने न्यूज चैनलों के लिए जो नई गाइडलाइन जारी की है उसमें इन अंकुश का उल्लेख है. कहा गया है कि अगर कोई न्यूज चैनल पांच से अधिक बार न्यूज व विज्ञापन के लिए तय नियमावली का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

यह कार्रवाई उनके लाइसेंस को रीन्यू न किए जाने के रूप में भी हो सकती है. सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने अपलिंकिंग/डाउनलिंकिंग संबंधी जो संशोधित नीतिगत दिशा निर्देश तैयार किया था, उसे केन्द्रीय कैबिनेट ने पहले ही मंजूर कर लिया है. इस नए अंकुश लगाने वाले प्रावधान का न्यूज चैनलों के संपादकों और मीडिया संगठनों ने विरोध करना शुरू कर दिया है. दरअसल केंद्र सरकार काफी समय से न्यूज चैनलों पर लगाम लगाने के बारे में सोच रही थी और अब जाकर उसने लाइसेंस रीन्यू न किए जाने का डंडा मारने का अधिकार अपने हाथ में ले लिया है. बहाना बनाया है टीआरपी के चक्कर में न्यूज चैनलों द्वारा गलत-सलत, भड़काउ-सनसनीखेज व नान-न्यूज टाइप के आइटमों को दिखाना. पर जानकारों का कहना है कि सरकार न्यूज चैनलों द्वारा अन्ना और रामदेव को भरपूर सपोर्ट किए जाने और करप्शन के इशू पर आंदोलन को समर्थन दिए जाने से घबराई है और चाहती है कि भविष्य में ऐसी स्थितियों में न्यूज चैनलों को धमकाकर काबू में किया जा सके.

इस बीच, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) के चेयरमैन जस्टिस (सेवानिवृत्त) मार्कंडेय काटजू ने प्रसारण आचारसंहिता का उल्लंघन करने वाले टीवी न्यूज चैनलों के लाइसेंस के नवीनीकरण के नियमों में संशोधन करने संबंधी फैसले को टालने का आग्रह केंद्र सरकार से किया है.  जस्टिस काटजू ने कहा कि मीडिया के खिलाफ ऐसे सख्त कदम केवल अंतिम स्थिति में ही उठाए जाने चाहिए. इस बात में शक नहीं कि यदि मीडिया अगर अपने दायित्व को ठीक से नहीं निभा रहा तो उसके खिलाफ कठोर उपाय किए जाएं, लेकिन इसे अंतिम उपाय के तौर पर ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए, हमें पहले मुद्दे को चर्चा, परामर्श और आत्म नियंत्रण के जरिये सुलझाने की कोशिश करनी चाहिए. लोकतंत्र में शुरुआती तौर पर ऐसा रास्ता अख्तियार किया जाना चाहिए. मैं केंद्र सरकार से आग्रह करता हूं कि वह न्यूज चैनल के लाइसेंस से संबंधित अपने हाल के फैसले पर अमल को टाल दे ताकि हम इस मुद्दे पर भलीभांति विचार कर सुधारात्मक उपाय लागू कर सकें.

Comments on “करप्शन विरोधी अभियान को न्यूज चैनलों के समर्थन से डरी सरकार ने निकाला डंडा

  • लिमिटेड सेंसरशिप, लिमिटेड तानाशाही जैसा नहीं है!

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  • देवाशीष says:

    [b]इन न्यूज़ चैनलों को तो भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलने का कोई नैतिक अधिकार ही नहीं है. बिना किसी appointment लैटर के एम्प्लोयी रखते हैं. और बिना नोतिसे के निकाल भी देते हैं. ऐसे लोगों को भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलने का अधिकार किसने दिया. अगर देश से भ्रष्टाचार मिटाना है तो पहले अपने आप को सुधारो. फालतू के lacture बंद करो. दुसरो पर ऊँगली उठाना आसान है. पर खुद पर अमल लाना मुश्किल है. मीडिया के नाम पर आपका सारा गलत भी सही नहीं हो जाता. पहले तो खुद कायदे कानून के अनुसार चलो फिर दुसरे को भाषण दो. [/b]

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