द फ्रेश ब्रू : कहानी अपने चुने रास्‍तों की

फ्रेशआईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर तथा आईआईएम लखनऊ के द्वितीय वर्ष के छात्र अमित हरलालका द्वारा “द फ्रेश ब्रू – क्रोनिकल ऑफ बिजनेस एंड फ्रीडम” नामक पुस्तक लिखी गयी है. एलकेमी पब्लिशर, नयी दिल्ली द्वारा प्रकाशित होने वाली इस पुस्तक में आईआईएम लखनऊ के पच्चीस ऐसे विद्यार्थियों की जीवन गाथा है, जिन्होंने सामान्य जीवन पथ छोड़ कर अपनी मर्जी का कैरियर चुना.

ये वो लोग थे जिनके पास अपना एक अच्छा-ख़ासा कैरियर और सुरक्षित भविष्य था, जिसमे ये लोग चोटी के बैंकों, कंसल्टिंग फर्मों, मार्केटिंग तथा तकनीकी फर्मों में अच्छी सैलेरी पर कार्यरत थे, पर इनके अंदर स्वतंत्र ढंग से अपनी मर्जी के अनुसार कुछ अलग करने की कुलबुलाहट थी, जिसके कारण इन लोगों ने उन रास्तों को ठुकरा कर अपने लिए नए और चुनौतीपूर्ण रास्ते अपना लिए. जाहिर है इन लोगों को इस प्रक्रिया में काफी दिक्कतें भी आयीं और कई स्तरों पर विरोध भी झेलना पड़ा पर इन धुन के पक्के लोगों ने अपने इरादे को हमेशा मजबूत रखा और इस पथ पर चलते हुए सफलताएं पायीं.

इस पुस्तक में इन सभी लोगों के व्यक्तिगत तथा प्रोफेशनल जीवन में हुए अनुभवों को सामने लाया गया है. इन पच्चीस लोगों में विशेष रूप से उल्लेखनीय व्यक्ति हैं आईआईएम लखनऊ के गोल्ड मेडलिस्ट बिमल पटवारी, जिन्होंने श्रेष्ठतम कंसल्टिंग फर्म एएफ फर्गुसन छोड़ कर कैड डिजाइन का काम शुरू किया. सत्यजीत सदानंदन, जो अब फीफा तथा दूसरे विश्व-स्तरीय फुटबाल क्लबों के लिए काम करते हैं. तरुण त्रिपाठी, जिन्होंने यशराज फिल्म्स में काम किया, हम तुम के निर्माण के सक्रिय भूमिका निभाई और अब एक टीवी सीरियल लिख रहे हैं. गायत्री अय्यर, जो अंतर्राष्ट्रीय थियेटर में काम करती हैं और ब्लैक, सलाम नमस्ते समेत बीस फिल्मों में गा चुकी हैं. मैककिन्सकी के पूर्व कंसल्टेंट मयंक शिवम, जो अब ग्रामीण रेडियो तथा कम्युनिटी रेडियो का काम कर रहे हैं. सामजिक सरोकारों वाली फिल्मों के निर्माता नितिन दास, जिन्होंने न्यूयार्क फिल्म एकेडेमी से अध्ययन किया. वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर के लिए जेनेवा में काम कर रहे सुधांशु सिरोनवाला. बच्चों के लिए स्कूल चलाने वाले रत्नेश माथुर. छोटे शहरों के लिए मल्टीप्लेक्स के चेन शुरू करने वाले सुमंत भार्गव. मंजुनाथ शंमुगम ट्रस्ट के माध्यम से भ्रष्टाचार से लड़ने वाली अंजलि मुलाटी. कई सारे रेस्तरां शुरू करने वाले गौरव आहूजा. स्पोर्ट्स मिडिया और स्पोर्ट्स मनोरंजन के क्षेत्र में काम कर रहे आशीष काले तथा दो दशकों से ग्रीटिंग कार्ड के बिजिनेस में काम कर रहे किरीट मोदी शामिल हैं.

ये सारे वे लोग हैं जो सामान्य किस्म के थे पर जिन्होंने अपनी आँखों और दिलो-दिमाग को खुला रख के अपनी इच्छा के अनुरूप काम किये और सफलता अर्जित की. इस पुस्तक का प्राक्कथन पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलम द्वारा लिखा गया है. पुस्तक 31 जनवरी 2011 को बुक स्टोरों पर आएगी.

डॉ नूतन ठाकुर

संपादक

पीपल’स फोरम, लखनऊ

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