पत्रकार को फुटपाथ पर गुजारनी पड़ी रात

: अमन को चुकानी पड़ी संस्‍थान बदलने की कीमत : मीडिया जगत में ऐसा अक्सर होता रहता है कि एक पत्रकार या डेस्क कर्मी यहां तक कि संपादक तक बढिय़ा मौके व वेतन की तलाश में एक संस्थान से दूसरे संस्थान में चले जाते हैं। लेकिन ऐसा होने के बावजूद भी मीडियाकर्मियों के मन में कोई बदलाव नहीं होता और न ही कोई मनमुटाव। सभी को पता रहता है कि हो सकता है कि आने वाले समय में वह फिर से एक दूसरे के साथ मिलकर काम कर रहे हों, लेकिन बठिंडा में जो हुआ, वह पत्रकार जगत में चलती इस भाईचारे वाली परंपरा के उलट हुआ।

सभी को पता है कि कुछ ही दिनों पहले दैनिक भास्कर द्वारा बठिंडा में अपना नया संस्करण लांच किया गया है और अन्य कई सेंटरों से स्टाफ को यहां ट्रांसफर करके भेजा गया है। कुछेक साथी अपने शहरों से बठिंडा में काम करने से खुश नहीं थे। यही वजह थी कि उन्होंने दूसरे मीडिया हाउसों में अपने शहर की नौकरी तलाशनी शुरू कर दी। इनमें से ही एक हैं अमन चौहान। दैनिक भास्कर जालंधर से कैरियर शुरू करने वाले अमन चौहान को डेस्क कार्य का अच्छा-खासा अनुभव है और इस अंतरमुखी व्यक्तित्तव को बठिंडा शहर पसंद नहीं आया था।

किसी खास मित्र के जरिए दैनिक जागरण लुधियाना में नौकरी की सूचना मिली और अपने संपर्क के जरिए इसने भी अप्रोच किया। किस्मत अच्छी थी कि उसे बढ़े हुए वेतन पर जाने का मौका मिल गया। साफ दिल के मालिक अमन चौहान ने इस बारे में दैनिक भास्कर के बठिंडा एडिशन के एडिटर चेतन शारदा को बता दिया। नौकरी से औपचारिक त्याग पत्र भी दे दिया, जिसके बाद वह उस दिन की अपनी ड्यूटी को पूरा करने में जुट गया।

अपना काम निकलवाने के लिए प्यार व पुचकार करने तथा काम निकल जाने पर पहचानने से भी इनकार करने वाली पंजाब केसरी की मानसिकता वाले चेतन शारदा को शायद अमन चौहान की साफगोई बर्दाश्त नहीं हुई, जिस कारण डेस्क का काम खत्म होने तक चेतन शारदा ने अपनी कुंठित मानसिकता को छुपाए रखा और अमन से काम करवाते रहे। लेकिन रात के दो बजते ही चेतन शारदा का क्रूर चेहरा सामने आ गया। काम खत्म होने के कगार पर था और चेतन ने इंसानियत व भाईचारे की भावनाओं को तार-तार करते हुए अमन चौहान को तत्काल अपना बोरिया-बिस्तर उठाने और आफिस से बाहर चले जाने को कह दिया।

आफिस द्वारा उपलब्ध करवाए गए होटल रूम से पहले ही अमन का चेकआउट करवाया जा चुका था। आफिस के बाहर तैनात सिक्योरिटी गार्ड को भी अमन चौहान को अंदर न घुसने देने की ताकीद करके चेतन शारदा द्वारा इस भले मानुष को फुटपाथ पर रात गुजारने के लिए मजबूर करने का इंतजाम किया जा चुका था।न्यूज एडिटर का यह रुख देखकर किसी भी साथी कर्मचारी की हिम्मत नहीं हुई कि वह अपना बैग लेकर फुटपाथ पर बैठे अमन चौहान को भीतर बैठने या अपने साथ कमरे पर चलने को कह सके। अपना काम खत्म कर, एक-एक करके सभी चले गए। चेतन शारदा भी, लेकिन आफिस के बगल में ही फुटपाथ पर बैठे रहे अमन चौहान की हालत पर किसी ने भी तरस नहीं खाया।

बठिंडा से बस सर्विस सुबह साढ़े चार बजे के बाद ही शुरू होती है, इसलिए अमन ने तिरस्कार से भरे तकरीबन ढाई घंटे फुटपाथ पर बैठे-बैठे ही बिताए। ऐसी हरकत एडिटर लेवल के व्यक्ति को तो क्या किसी को भी शोभा नहीं देती। यदि एक व्यक्ति आपके साथ संस्थान में काम कर रहा था और दूसरी जगह जा रहा है तो भी उसका जुड़ाव तो मीडिया से ही रहेगा। चेतन शारदा की इस हरकत से तो ऐसा महसूस होता है कि शायद उन्हें उसी ईष्‍या या दुर्भावना का आभास हुआ होगा, जो एक शोरूम में दो हजार रुपये प्रतिमाह लेकर साफ-सफाई करने वाले को म्यूनिसिपैलिटी में 15 हजार रुपये लेकर सफाई करने वाले से हो सकता है।

Comments on “पत्रकार को फुटपाथ पर गुजारनी पड़ी रात

  • jp rai santosh sunderial says:

    sasti lokpriyata ke liye ghatia privrity ke insaan aman chauhan ne ye sara drama racha hai jabki uske saath aisa kuch nahin hua
    denik bhaskar
    editorial team bathinda

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  • 007 james bond says:

    Agar aman ki aapbeeti sahi hai to uske saath galat hua hai, lekin ye koi breaking news to thi nahin ki iska prakashan zaroori tha. ye koi aisi khabar nahin hai ki rajya sarkar ya kendra sarkar hul jaayegi ya denik bhaskar editor ke khilaaf koi action lega. duniya ke saamne rone waale ka sabhi mazaak he udaate hain. ya to on the spot faisla kar leta ya chup baith jata. bhadas ko adalat mat samjho bhai. shayad 10 logon ko tumpar taras aayega aur kahange ki galat hua lekin baaki 90 ko koi fark nahin padega kyonki aansoo ponchane waale kam hote hain aur hasi udaane waale zyaada.

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  • गलत नहीं हुआ, बल्कि वही हुआ, जो चेतन शारदा जैसे सम्पादक के होते हुए हो सकता था। वह पंजाब केसरी मानसिकता का बंदा नहीं है, उसने तो पंजाब केसरी भी बेच खाई। लाले दमदार थे और पर्याप्त चालाक भी तो उन्होंने उठाकर कुत्ते की तरह फेंक दिया। इसी चेतन ने दैनिक भास्कर को भी जमकर लूटा, लेकिन मोटी पार्टी होने के कारण भास्कर के लालाओं को फर्क नहीं पड़ा। दरअसल, घटिया पत्रकारिता के स्तंभ रहे हैं। खबरें बेचने में माहिर। अमानवीयता और क्रूरता तो चेहरे पर ही दिख जाएगी। रही बात, अमन के साथ सहानुभूति की, तो उसे कितने लोग जानते होंगे। भड़ास के माध्यम से कुछ लोग जान लेंगे, तो जो उसका मजाक उड़ाएंगे, वे वहां के सम्पादक को गालियां भी निकालेंगे। आजकल, किसी का मजाक उड़ाना बड़ी बात नहीं है, लेकिन किसी गलत व्यक्ति को गाली निकालना बड़ी बात है। आजकल तो कोई अपने साथ शोषण की बात भी उठाना वाजिब नहीं समझता, नौकरी का खतरा जो रहता है। अगर अमन ने अपनी बात एक मंच पर रखी है, तो कम से कम मंच से जुड़े लोगों को तो स्वस्थ प्रतिक्रिया देनी ही चाहिए। उसका पक्ष न लिया जाए, किंतु उच्च पदस्थों के कुकृत्य की तो कम से कम सराहना न ही की जाए।

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  • BEHAD AFSOS HUA YE PADHKAR…SACH POOCHA JAAYE TO YE AMAN KI MAHANTA HAI KI ISKE BAAD BHI UNHONE SAMPADAK KI BEIZZATI NAHIN KI…KOI BAAT NAHIN AMAN JI….AAAPNE APNE NAAM KO SAARTHAK KIYA ISSE BADI BAAT AUR KYA HO SAKTI HAI…WAISE BHI PATRAKAR WAHI HOTA HAI JO AMAN KI TARAFDAARI KARE…AAPNE APNE NAAM KO SARTHAK KIYA….A BIG SALUTE FROM YHE CORE OF MY HEART..ALL THE BEST AND ALL WILL BE WELL

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  • EISE TUCHCHE AADMI KO EDITOR KISNE BANAA DIYA………. YE JYADAA DIN TAK NAHI CHAL PAYEGA…..WO TO AMAN JEISA SHAREEF AADMI THA …KOI KHISKA HUA PATRAKAAR HOTA TO CHETAN JI KO BATAA DETA

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  • sarvjeet bawa haryana says:

    jaha tak main chetan ji ko janta hu wo aise harkat nahi kar sakte kyu ki jab main 2000 me punjab kesri me tha to chetan ji waha desk inchraj the aur apne reporters ke sath weh ek bade bhai ki tarha pesh aate rahe hain . muje nahi lagta ki unhone aisa kush kia ho

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  • Ravi Shankar Maurya says:

    Journalism is a river of challenge.where u never stop confronting the tough times ahead . In jornalist’s life every day is a ACID test …………………………………………………………………jane kaisi muskilo ka kisko kab samna karna pade … ya kaon kis muskil se is rah par chal raha hai ..ye kaun janta hai …aman ke ssath aesha nahi hona cahiye tha ….[b][/b][b][/b]

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  • chetan ji ki team me chatukar bharti ho gaye hen. ab yahi umid ki ja sakti he. aman ke sath jo hua galat hua. bhagwan is trg ke logo ko sabak dega. dil se nikli hay unhe sda-sda ke liye footpath pr betha degi. me chahunga bhaskar ki managment is trf dhyam de.

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  • Aman k sath yahi hona tha. Jaruat se jyada sach bolne walo k sath uksar chintu jase log assa hi karte hai. Par chintu ye yaad rakh kisi na kisi ki badua Jab tujhe lagege to tujhe bhi pata lagega. Bhagwan sab dekh raha hai. Jo Log jarurat se jyada metha bolte hai unnme se 1 hai chintu Aman Tum sochna mat bagwan sab dekh raha hai.

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  • singh is king says:

    Is story ko chapne wale or us par comment karne wale sab amritsar ya agra jakar checkup karayen. ab ye comment koi mat karna ki mai bhi to bhadas par apna samay zaya kar raha hoon or comment likh raha hoon. jai ho…..

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  • श्री मान चाटुकार जेपी संतोष आपका कमेन्ट आपको तरक्की नहीं दिला सकता क्योंकि चेतन के साथ आपसे भी ज्यादा तेज तर्रार चाटुकारों की फोज है. आपकी बिसात ही क्या है. और आपको दैनिक जागरण ने १० दिन पहले लात मारकर ऑफिस से निकाला था. उसे छुपाने का आपका परयाश बढ़िया लगा. साथ ही देना था तो सच्चाई का साथ देते. जब तेरे मुह पर तेरे बोस थूकेंगे तब तुझे समझ में आएगा .

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  • देखो अमन भाई मैं आपको नहीं जनता पर मैं संतोष सुन्देरिअल भगवन सब देख रहा है. तुम जसे चमचो की भास्कर को बहुत जरुरत थी. तेरे जसे लोग चेतन के लिए आच्छे है. पर भगवन सब देख रहा है. जब उसकी चोट तुम पर लगेगी न तब तुम मेरे इस कमेन्ट को याद करोगे. अनत में अमन मैं यही कहुगा भगवान सब देख रहा है…

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  • शशांक शुक्ला says:

    भाई साहब अगर मै होता तो उस एडिटर को सारी एडिटरगीरी सिखा देता….किसी संस्थान में नौकरी करने का मतलब ये नहीं होता आप उस संस्थान के गुलाम है…..खासकर उसी संस्थान में ही काम करने रहे कि की सीनियर के…ज़िंदगी में अगर स्वाभिमान के साथ काम करना है तो ऐसे एडिटर को सिर पर इतने जूते मारने चाहिये कि आइंदा किसी के साथ ऐसा करने की भी को न सोचे….रही बात आपकी तो आपको भी ऐसा ही करना चाहिये था…..लेकिन आप ज्यादा ही दब्बू मालूम पड़ते है……मेरी एक ही सीख ले लो….काम करो तो आत्मसम्मान,स्वाभिमान के साथ नहीं तो पेट पालना कोई बहुत बड़ा काम नहीं है….पेट तो रिक्शाचालक भी भर लेता है…..हमारे प्रोफेशन में इज्जत ही सबकुछ है अगर वो नहीं कुछ नहीं…..

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  • sachin pratap says:

    this miss understending is mak betwen aman and chetan. jo hua its very same on over all in media and specialy print media. its very bad and discusting

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  • Aman ji aapke sath jo hua us ka hume bhi afsos hai kya karen asli patrakarita to khatam ho chuki hai aur patrakaron ka samman karne wale bhi khatam ho chuke hain main mumbai tv9 me mere sath bhi aisa hi apmaan janak hadsa pesh aya tha is channel ko contract par chalaya ja raha hai ye patrakaron ko mohra bana kar buildar lobby se hafta wasooli kar raha hai jo yahan par patrakaron se peon wala bhi kaam karaya ja raha hai intern karne aye student se paper ki news ko tv news ki scripting anchor link vo1.byte. likhwayi jati hai news editor tulsidas bhoite jo zee24taas me the aur kuch producer jo mere sath me the pura programing sirf wasooli me laga hua hai bmc.police.mantrimandal par dabaav bana ka wasooli ki ranniti apnayi ja rahi hai main ne inkar kiya to mujhe bahar ka raasta dikha diya gaya kul mila kar AAJ GHODE GHASS KHA RAHE HAIN AUR GADHE JAAFRAAN KHA RAHE HAIN main na to channel se darta hun aur na hi in ghatiya logon se kyun ki kanoon aur patrakarita ki jitni jankari inko hai is se kahin zyada mujhe bhi hai ient ka jawab pathar se dena jaanta hun main ne jate jate inki poll kholne ki dhamki dekar inko nanga karne ki kasam khai hai aur mujhe kai aur patrakaron ka bhi samarthan mil raha hai

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  • Agar bhadas4media patrakaron ka saccha hitaishi hai to woh mere comment ko bhi add karega kyun ki aur patrakarita biradri bhi jane sampadak mahoday chahen to is ki pushti kar len

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  • Patrakar biradari ke sath es tarh ka bartav amanviy hai. durbhagy hai ki unche padon par baithe patrakar mhodya agar apne nimkarmi patrakaro ke sath aise karege to bo es pad ki tohin kar rahe hai. agar mai akhwar ka malik hota to esa babhar kabhi na sahta or us editor ko saja jaroor detha…

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  • Kumar Vinod 'Patang' says:

    hum patarkar always rise an issue for normal people about their adikar and shram kanun par ham nay kbhi bhi apne say shuruat nhai ki. patarkaritha hi ek aisa pesha hai jha par nuntham vethan nahi miltha.
    majedur bhi 6000 miltha hai. hum lachar or bikar ponga pandit ki bumikha may jinda hai. jaa goo patarkaro jaa goo. be united .

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  • यह बहुत ही शर्मनाक घटना है, कि एक पत्रकार को रात फुटपाथ पर गुजारनी पड़ी। इंसान इस हद तक गिर सकता है वो भी एक ऐसा व्यक्ति जो पत्रकारिता क्षेत्र से जुड़ा हो, इससे यह मालूम होता है कि आज पत्रकारों को किस प्रकार रौंधा जा रहा है। चेतन शारदा भले ही एक एडिटर हो पर एक अच्छे इंसान तो कदापि नहीं है और उनकी इस हरकत से पूरा मीडिया समाज शर्मिदा है।

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  • aman chauhan is not so. he is such an arrogant fello who knows nothing of a news and news sense. that fellow has been fighting know and then with his collegues, after two years of job. he insulted that fellow who helped him to get a job in bhaskar, you can find every single person in bhaskar ofiice that can gurantee aman is a very mean guy a big lier, but still the person who has published this article should be ashamed of himself and the fellow who is writing of punjab kesri mansikta he needs a sycatrist immidietly. nobody would allow anyone to stay in the ofiice even if he is working in the office if it has to be locked and that is what has happened . i dont blame aman chauhan for this because it is in his blood it cannot be changed , i am sure he will be kicked out of jagran soon and also on grounds of arrogance and also of no use on desk

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  • aman is a very mean guy a big lier, but still the person who has published this article should be ashamed of himself and the fellow who is writing of punjab kesri mansikta he needs a sycatrist immidietly. nobody would allow anyone to stay in the ofiice even if he is working in the office if it has to be locked and that is what has happened . i dont blame aman chauhan for this because it is in his blood it cannot be changed , i am sure he will be kicked out of jagran soon and also on grounds of arrogance and also of no use on desk

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  • ravi kant sahu says:

    इस घटना से यह पता चलता है की आज पत्रकारों का कितना शोसन हो रहा है . पत्रकार समाज मर्माहत है …………………………..

    रवि कान्त साहू

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