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बुरा न मानें, होली है संतोष भारतीय जी!

संतोष भारतीय का मैं दिल से इज्जत करता हूं. भड़ास4मीडिया जब मैंने शुरू किया, और उस वक्त ज्यादातर वरिष्ठ पदों पर बैठे लोग इस प्रयोग को हेय नजरों से देख रहे थे, तब संतोष भारतीय ने न सिर्फ इसे सपोर्ट किया बल्कि इसे चलाए रखने को आर्थिक रूप से मदद भी की, एकमुश्त एक वर्ष तक विज्ञापन देकर. जाहिर है, जब कोई चीज चल जाती है तो उसके दस यार प्रकट हो जाते हैं.

संतोष भारतीय का मैं दिल से इज्जत करता हूं. भड़ास4मीडिया जब मैंने शुरू किया, और उस वक्त ज्यादातर वरिष्ठ पदों पर बैठे लोग इस प्रयोग को हेय नजरों से देख रहे थे, तब संतोष भारतीय ने न सिर्फ इसे सपोर्ट किया बल्कि इसे चलाए रखने को आर्थिक रूप से मदद भी की, एकमुश्त एक वर्ष तक विज्ञापन देकर. जाहिर है, जब कोई चीज चल जाती है तो उसके दस यार प्रकट हो जाते हैं.

पर जब कोई मुश्किल में होता है तो परिजन व पड़ोसी भी कन्नी काट लेते हैं. तो, संतोष भारतीय द्वारा भड़ास4मीडिया के मुश्किल वक्त में इसका साथ देने के कारण उनके प्रति उपजे असीम श्रद्धा और प्यार के बावजूद संतोष भारतीय जी की कुछ चीजों से मैं असहमत रहता हूं. जैसे उनका पोस्टरबाजी अभियान. खुद को देश का सबसे विश्वसनीय पत्रकार कहना.  परम मार्केटिंग के इस दौर में हर शख्स को थोड़ी-बहुत मार्केटिंग करनी पड़ती है पर इतनी भी मार्केटिंग न हो जाए कि कोई उसे पचा न सके. देश का सबसे विश्वसनीय पत्रकार खुद को कहने का आधार क्या है, सर्वे क्या है, इसका कहीं कोई जिक्र नहीं है.

वैसे, आजकल सर्वे भी भाड़े पर और पैसे देकर कराए जाते हैं जिसमें सब अपने-अपने मन मुताबिक नतीजे निकलवा लेते हैं. उसी तरह जैसे साल भर न होने के बावजूद एक युवा टीवी संपादक अनुरंजन झा को सर्वश्रेष्ठ चैनल हेड का एवार्ड मिल गया. मृतप्राय अवस्था में पड़े हमार, फोकस चैनलों को बेस्ट चैनलों का एवार्ड मिल गया. ऐसी खबरें हमारे यहां छप जाती हैं, प्रेस रिलीज के रूप में, लेकिन मैं मान कर चलता हूं कि पाठकगण खूब समझ रहे होंगे कि सही क्या है, गलत क्या है.  तो ऐसी भी लायजनिंग नहीं होनी चाहिए कि पाठक-दर्शक पचा ही न सकें और एवार्डों की पूरी परंपरा पर सबको शक होने लगे.

पर संतोष भारतीय अपने पोस्टरों पर यह तक नहीं लिखते की उन्हें सबसे विश्वसनीय पत्रकार माने जाने का स्रोत क्या है. खैर, आपस में असहमतियां स्वाभाविक है. सवाल-जवाब जरूरी है. मेरे में ढेरों कमियां हैं. और, उन्हें स्वीकारने का साहस मैं रखता हूं क्योंकि कमियों को स्वीकार लेने से मुझे फांसी नहीं लगने वाली और न ही इससे मुझे कोई नौकरी खोने का खतरा है, क्योंकि मैं यशवंत सिंह, आजकल छुट्टा पत्रकार हूं. जैसे मेरी कई चीजों से संतोषजी को असहमतियां हो सकती हैं, उसी तरह उनकी कई चीजों से मैं असहमत हो सकता हूं.

और असहमतियों के बावजूद हम लोग एक दूसरे का बेहद सम्मान करते हैं और एक दूसरे के प्रति दिल से इज्जत का भाव रखते हैं. इसलिए भी कि असहमतियां लोकतंत्र में बेहद अहम और जरूरी चीज हैं. खासकर हम लोगों के पत्रकारिता वाले पढ़े-लिखों के पेशे में. किसी मुद्दे पर मेरे विचार कुछ और हो सकते हैं और आपके कुछ और. किसी चीज को लेकर मेरा पर्सपेक्टिव अलग हो सकता है और आपका अलग. अगर आप असहमति का सम्मान नहीं करते, असहमति को सुनते नहीं तो फिर आप एकांगी, डिक्टेटर किस्म के आदमी हैं, आप पुलिसवाले, जेलर टाइप आदमी हैं. तब आपको या तो चापलूस पसंद आएंगे या फिर जी सर जी सर यस सर यस सर करने वाले गूंगे लोग. आजकल के कई हिंदुस्तानी संपादक इसी कैटगरी के हैं. पर मैं नहीं मानता कि संतोष भारतीय इस कैटगरी के होंगे. क्योंकि वे पत्रकारिता की उस धारा-समय के प्रतिनिधि हैं जहां असहमतियों को पूरे सम्मान और पूरी संपूर्णता के साथ स्वीकारने-सुनने का चलन संपादकों में था.

इसी कारण उनको पसंद ना आने वाले इस पत्र और तस्वीर का प्रकाशन करने का साहस कर पा रहा हूं. पीटीआई के वरिष्ठ पत्रकार नीरज भूषण का पत्र और उनके द्वारा खींचकर भेजी गई एक तस्वीर को यहां नीचे प्रकाशित कर रहा हूं. उन्होंने जो कुछ लिखा है, उससे जाहिर है कि उनको ये तस्वीर जब इस रूप में दिखी तो वे इस तस्वीर की तस्वीर लेने से खुद को रोक न सके. संतोष जी इसे दिल पर न लेंगे, इतना अनुरोध है. और अगर न लेने की कोशिश करने के बावजूद दिल पर लेने को मजबूर हो रहे हों तो मैं सिर्फ इतना कहूंगा, बुरा न मानें, होली है सर. और, पाठकों से अनुरोध है कि वे होली के मौके पर मीडिया के लोगों की ऐसी ही चिकोटी काटने का दौर शुरू करें ताकि माहौल फगुवामय हो सके, बात भी निकल जाए और कोई बुरा भी न मान सके.

जय हो

यशवंत

एडिटर

भड़ास4मीडिया


Dear Yashwant Bhai,

It would be a wonderful idea to encourage Bhadas readers to contribute images also. A good picture says 1000 words, isn’t it. May this suggestion be acceptable to you and to begin with I am sending you the first image to set a trend. (This is an image of an advertisement displayed on Rafi Marg where the weekly ‘Chauthi Duniya’ has its office also. Someone played with the image and I got interested and clicked the same. It is attached)

दिल्ली के रफी मार्ग पर चौथी दुनिया व संतोष भारतीय के विज्ञापनी होर्डिंग का किसी ने बुरा हाल कर रखा है

Hope this benefits our readers.

Regards

Neeraj Bhushan

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
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0 Comments

  1. Dr. Maher uddin Khan

    March 15, 2011 at 9:42 am

    ]patrkarita par chadha, holi ka ullas
    yashwant singh bhi kar rahe, apni prkt bhadas
    apni prkt bhadas, ghire santosh bharti
    ek or rahe kos aur kar rahe aarti
    achchi lagti mitr aapki hame.n thitholi
    theek keh rahe aap bura mat mano holi.
    santosh bharti ki agar bat kare.n hum mitr meri aankhon me abhi ghoom raha veh chitr, ghoom raha veh chitr aur meerut maliyana,hashimpura me zulm hua tha tab manmana, veer bhadur ki tab sab kar rahe aarti, logon ke tab sath sikhe santosh bharti
    inke bare me itna hi janta h00n aur in ko tabhi se vishvaniy manta hoon

    .

  2. prashant kumaar

    March 15, 2011 at 10:06 am

    Pata nahi kahan kahan se aa jate hain log.

  3. sudhir pandey

    March 15, 2011 at 10:11 am

    santosh ji sampadak . aadmi . lekhak bahut aachche hai isme shak ki koi gunjaish nahi hai . aapno ko pahchan pane aur shadyantra karne vale chamcho ko na door kar pane ki shamta me thode kamzor hai . desh ke bade patrakar hone ka dawa unka aapna hai isme koi kuch nahi kar sakta . aaj to patrakarita me kal paida hua mahan hone ka dawa kar rahe hai . santosh ji ko unki chahi hui manjil maile aur kabhi ek bar voaapno ko bhi pahchan sake yahi prarthana hai . sudhir

  4. Ruby Arun

    March 15, 2011 at 11:49 am

    यशवंत जी …
    यकीनन असहमतियां कई मसलों पर हो सकती हैं ….पर आपकी इस राय से मैं भी सहमत हूँ ….की
    “संतोष भारतीय पत्रकारिता की उस धारा-समय के प्रतिनिधि हैं जहां असहमतियों को पूरे सम्मान और पूरी संपूर्णता के साथ स्वीकारने-सुनने का चलन संपादकों में था.”

  5. sunil chhhaiyan

    March 15, 2011 at 3:33 pm

    WAH DOCTER SAHEB. EK ARSE BAAD AAPKA KABEER CHAURA PADHANE KO MILA. DOOSRE 1987 KA WOH DAUR YAAD AA GAYA, BADE BHAI VERENDR SAINGER JI KA HASHIMPURA KAND KHULASA AUR US PAR MERA KHEENCHA PHOTO.BHADAS KE JARIYE JINDAGI KE JUJHARU DIN YAAD AA GAYE.

  6. Abhay Kumar

    March 15, 2011 at 3:39 pm

    By Abhay Kumar

    By breaking story Jitner Bade Partkat Utne Bade Dalal Santosh Bhartiya demonstrated that he has really such gutts to take the bulls by horns. By braking story on IPL& showed true colours of Lalit Modi Bhatiya zee had did such exemplary work which is not even dared by the Govt headed by Manmohan Singh & Sonia Gandhi.His such exploits are uncountable.Off course one can also find loopholes in him.

    Abhya Kumar

    09031792498

  7. Abhay Kumar

    March 16, 2011 at 4:03 am

    Abhay Kumar,Bihar

    One point I also want tomention that Bhartiyazee brings DO TOOK on Etv.Now a days when all the senior journalists bring Political Interview under different names means same wine in different bottle.Bhartiyazee may also go for such Political interview instead of INSIDE STORY. It reflects that Bhartiya zee has confidence to go for find out the truth within shortest span of any happenings be it the Maoists /Naxal kidnapping of the in Lakhisarai,Bihar or Adarsh Housing Society Scam etc.

    Abhay Kumar

    09031792498

  8. prem gupta

    March 17, 2011 at 6:38 am

    yeh insaniyat ki achi misal hai jo aapne yaad rakha,iswer aap ko aur aage unaati pradan kare kyunki bahut kam log puarana wakt yaad rakhte hai.
    thanks app ki vichardhara ki liye

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