यूपी पुलिस की बहादुरी के कुछ फुटकर सबूत

आज मैंने भड़ास पर एक खबर पढ़ी “आईपीएस अफसर डीके ठाकुर का घिनौना चेहरा“. इसके बाद मुझे कुछ माध्यमों से एक छोटी सी विडियो क्लिपिंग मिली जिसमे इसी घटना के सम्बंधित फुटेज दिया गया है. मैं इस पर अपनी ओर से कोई टिप्पणी नहीं करते हुए पाठकों से ही निवेदन करुँगी कि वे इसे देख कर इस बारे में अपनी स्वयं की राय बनाएं. पुलिस विभाग की जनता में बदनामी के लिए शायद इसी प्रकार की घटनाएं जिम्मेदार होती हैं.

इस वीडियो में वो सारे फुटकर दृश्य हैं जो यूपी पुलिस के क्रूरतम चेहरे को थोक भाव में बयान करने के लिए काफी हैं. अगर ऐसी घटनाओं पर हम आप रिएक्ट न करेंगे तो यकीन रखिए, एक दिन हमारे आपके सिर भी इन बूटों तले होंगे और फिर हमारे साथ हुए अन्याय का विरोध करने के लिए कोई बचा भी न रहेगा. इसलिए चुप्पी, खामोशी, कायरता को त्यागने का वक्त है. ये वीडियो देखने के लिए क्लिक करें- घिनौने चेहरों का दर्शन

डॉ नूतन ठाकुर

सचिव

आईआरडीएस

लखनऊ

Comments on “यूपी पुलिस की बहादुरी के कुछ फुटकर सबूत

  • Anil Saxena says:

    Jab kuch police afsaron ko netaon ka saath mil jata hai to yeh jaalim ho he jaate hai. Abhi tak to mein samajta tha ki IPS thoda reasonable hota hai lekin ab meri dharna badal gaye hai.

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  • Harishankar Shahi says:

    मैडम जी यह तो पुलिस का बहुत मामूली चेहरा है. इससे भी ज्यादा घिनौनी हरकत करने से यू.पी. पुलिस बाज़ नहीं आती है. थाने में हर छोटी चीज़ पर रिश्वत और तो और अगर पैसा ना दो पीड़ित को ही चोर बताने की बहादुरी पुलिस करती रहती है.
    इस तरह की मार पिटाई तो रोज का शौक है. आपने निर्दयता के बारे में कहा इस पर यही कहूँगा की यह आपकी बहादुरी है.
    वह हमे शौक से रखवाला कहें हमे मंज़ूर हैं,
    पर खुद ही कहें की कत्लगर कहीं मुहाफिज़ होता है.

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  • Indian citizen says:

    मैंने अपने ब्लाग indzen.blogspot.com पर फोटो लगाई थी. यह भी आपातकाल जैसा कुछ नहीं लगता. हमारे यहां के बहादुर जब अमेरिका और यूरोप में कपड़े उतारकर तलाशी देते हैं, तो सब समझ में आ जाता है. क्या रवैया है. हम अपने लिये इन्सान कहते हैं.

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