लखनऊ के मठाधीश पत्रकारों! बताओ तुम्‍हारी औकात क्‍या है

कुमार सौवीर: के. विक्रमराव ने खोली दलालों-मठाधीशों की पोल-पट्टी : माफिया जैसी हरकतें है जोखू और रवींद्र सिंह की : फुटपाथ पर रेस्‍ट्रां का ठेका देकर होती है भारी उगाही : न वेतन और न कोई संस्‍थान, फिर ये लोग कैसे पत्रकार बन कर बैठे हैं प्रेस क्‍लब में : बीस सालों से क्यों नहीं कराया गया प्रेस क्‍लब का नवीनीकरण : लाइब्रेरी की जगह में की जाती है शराबखोरी :

लखनऊ : प्रदेश मुख्‍यालय पर पत्रकारिता की काली दुनिया की पोलपट्टी खुद विक्रमराव ने ही खोल दी है। यूपी प्रेस क्‍लब के अध्‍यक्ष रवींद्र सिंह और मंत्री जोखूप्रसाद तिवारी को लिखे एक पत्र में उन्‍होंने इन लोगों को बाकायदा किसी माफिया की तरह व्‍यवहार करने वाला करार दिया है और कहा है कि इस तरह की स्थिति में वे कभी भी जेल तक जा सकते हैं। प्रेस क्‍लब में 30 से 35 हजार रुपये महीने की दर से दो रेस्‍ट्रां संचालित कराने का आरोप लगाते हुए उन्‍होंने कहा कि इन लोगों की करतूतें प्रेस क्‍लब को बेच डालने जैसी हैं।

इसी पत्र में उन्‍होंने इस बात का भी खुलासा किया है कि पिछले दो दशक से क्‍लब का पंजीकरण नवीनीकरण न कराने और क्‍लब भवन की लीज खत्‍म हो जाने की वहज यह लोग ही हैं। उन्‍होंने पूछा है कि दशकों से न तो तुम लोग किसी संस्‍थान में हो, और न ही कहीं लिखते-पढ़ते हो, फिर कैसे पत्रकार के तौर पर क्‍लब में जमे हुए हो। श्री राव का आरोप है कि केवल अपना आसन बचाये रखने के लिए इन दोनों ने क्‍लब की वोटर लिस्‍ट तक की समीक्षा नहीं की।

यह पहला मौका है जब यूपी प्रेस क्‍लब और यूपी श्रमजीवी पत्रकार संघ (डब्‍ल्‍यूजे) के मठाधीशों के कामकाज पर के विक्रमराव ने ऊंगली उठायी है। अब तक सामान्‍य धारणा यही रही है कि क्‍लब और यूनियन में जो कुछ भी होता है, के विक्रमराव की शह पर ही होता रहा है। लेकिन इस पत्र को लेकर समझा जाता है कि विक्रमराव ने अपनी छवि पर पड़ी गर्द की साफ-सफाई का काम शुरू कर दिया है। इस पत्र में उन्‍होंने इस पर नाराजगी जतायी है कि जोखूप्रसाद तिवारी और रवींद्र सिंह ने अपने चेलों-चापड़ों के साथ यूनियन भवन और प्रेसक्‍लब को बाकायदा बेचने की तैयारी कर ली है।

यहां हो रही लूटपाट का खुलासा करते हुए उन्‍होंने लिखा है कि क्‍लब से सटे फुटपाथ को इन लोगों ने दो रेस्‍टोरेंट मालिकों से भारी मासिक किराये के नाम पर लगभग बेच दिया है। जबकि यह जमीन नगर निगम की है और इसके चलते इस इलाके में यातायात की गंभीर समस्‍या बनी रहती है। इसके खिलाफ नगर आयुक्‍त और यातायात निदेशालय में मामला भी दर्ज हो चुका है।

राव का आरोप है कि इन रेस्‍ट्रां से हर महीने एक बड़ी रकम इन लोगों के बैंक आफ बड़ौदा के खातों में जमा होती है। इतना ही नहीं, आसपास के इलाके में खड़ी होने वाली गाड़ियों से भी यह लोग भारी रकम किसी माफिया की तरह अवैध रूप से रंगदारों की तरह वसूलते हैं। उन्‍होंने पूछा है कि करीब 15 बरसों से खाली बैठे हो और आय का और कोई दूसरा साधन न होने के चलते तुम्‍हारा खर्च अगर इन धंधों से नहीं चलता, तो कैसे चलता है। सवाल यह भी उठाया गया है कि आखिर चुनाव हार जाने के डर से तुम लोगों ने सामान्‍य बैठक क्‍यों नहीं बुलाते हो। अंत में इन लोगों को चेतावनी देते हुए विक्रम राव ने कहा है कि अगर तुम्‍हारी हरकतें न सुधरीं तो वे और आईएफडब्‍ल्‍यूजे से नामित सभी चारों सदस्‍य गवर्निंग बाडी से इस्‍तीफा दे देंगे।

हालांकि, विक्रमराव के इस पत्र को लेकर भी पत्रकारों में भारी सुगबुगाहट है। उनका कहना है कि प्रेस क्‍लब और यूपी श्रमजीवी पत्रकार संघ में यह सब पिछले बीस साल से चल रहा था, तो आखिर श्री राव ने इस गड़बड़घोटाले पर से अपनी आंखें क्‍यों मूंदें रखीं। आखिर अब ऐसी क्‍या वजह है कि उन्‍होंने अपनी ही इस प्रदेश इकाई और उसके क्‍लब को आरोपों के कटघरे में खड़ा कर दिया है। जल्द ही भड़ास4मीडिया पर के. विक्रमराव द्वारा रवींद्र सिंह और जोखू प्रसाद तिवारी को लिखा गया पूरा पत्र प्रकाशित किया जाएगा। के. विक्रम राव ने बातचीत के दौरान स्‍वीकार किया कि यह पत्र उन्‍होंने ही लिखा है।

यूपी के बेबाक और वरिष्ठ पत्रकार कुमार सौवीर की रिपोर्ट. उनसे संपर्क 09415302520 या kumarsauvir@yahoo.com के जरिए किया जा सकता है.

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Comments on “लखनऊ के मठाधीश पत्रकारों! बताओ तुम्‍हारी औकात क्‍या है

  • Ashok Kumar Mishra says:

    विक्रम राव खुद ही वर्षो से पद पर जमे हैं, लगता है हिस्सा नहीं मिल रहा होगा सो पत्र लिखा होगा।

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  • Vikram Rao had inaugurated the socalled canteen run on encroached footpath of press club. A photo of his cutting the ribbon is displayed in the UP Press Club for so many years. Why he did not object to such things for so long. Now that UP Press Club is running into profit and he is not getting his share, such an issue has been raised. Press Club has a body of elected office-bearers and Mr Rao wants to nominate his cronies over elected people.

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  • kailash sharma says:

    interesting to read words of K. Vikram Rao ji.. on lucknow press club. But very sad to say…..K. Vikram Rao Ji lead ShramJeevi Patrakar Sangh, then what they did for media persons. Here i wish to give only one example, when bannet colman and company closed navbharat times jaipur, lucknow and patna edition then what Vikram Rao ji did. Today when they are talking about Lucknow press club situation. .. may be he is right some where… but when journalist and non journalist were sitting on dharana in front of Nav Bharat Times Jaipur office, 8-9 Anumpam chambers, Tonk Road Jaipur from 1 december 1995 to 15 august 1996…then K Vikram Rao didnt find a single day to support retrenched journalist who were on dharana or agitation just to survive not only their job but hindi journalism too. More interesting thing is it that in those among 40 journalist 30 were member of rajasthan shram jivi patrakar sangh. And all have requested many time to K Vikram Rao ji that please come jaipur support us… he never come jaipur to support them. In Fact what type of leadership K. Vikram Rao did.. this god know or only he know.. but it is fact he was never in favour of true tradi unionism among journalists.
    I find one thing more interesting in his tenure when he was national president of shramjivi patrakar sangh… in those day we people were members of rajasthan shramjivi patrakar sangh…. and every time Peoples related with K. Vikram Rao did big ghapala in election process…I dont want to take name of two seniour journalist.. who were involve in this ghapala.. because they are now no more in this world.. but it was fact shramjivi patrakar sangh was taking annual fee from journalist memeber and didnt infrom them about election and other activities. So such was working style of K. Vikram Rao ji..now he is crying on situation of lucknow press club….. it is quite more interesting.. and why he doing such thing.. either he know or god Know.

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  • K. Vikram Rao says:

    Reference to Mr. Haider Rizvi.
    I never opened any non-vegetarian canteen on the footpath of the U.P. Press Club. I had cut ribbon in 1997 to set up a vegetarian snacks stall and tea counter well inside the main hall of the Club to serve the visitors. Moreover, the lease of the China Bazar Gate, which houses the IFWJ’s U.P. unit (called the U.P. Working Journalists Union) is in the Union’s name. The name of the Press Club does not figure at all anywhere in the lease document signed in 1969 when I was posted in Gujrat, Times of India. Press Club is a subsidiary of the Union. The IFWJ president has the right to nominate four person on the Press Club’s governing council which he does in consultation with the U.P. WJU president. Mr. Haider should have checked his facts and not shown his crass ignorance on the subject.

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  • हैदर रिजवी says:

    राव साहब अच्छा किया आपने बता दिया कि प्रेस क्लब नाम की कोई चीज नही खुद वो तो आपकी यूपी ईकाई का एक अंग है। पर क्या आपकी अपनी ईकाई पर ही जोर नही। मैं भी आपका सहारनपुर से सदस्य रहा हूं। आपकी मर्जी के बगैर पत्ता नही हिलता। सालों से सब जानने के बाद आप खमोश रहे अब उम्र के इस पड़ाव पर अचानक हो हल्ला। रही बात कैंटीन की तो उसे भी वही मुरगे वाला चलाता है ये आपको मालूम है। फुटपाथ की कैंटीन वाले का बनाया खाना आपके पेट में सैकड़ों बार गया होगा क्यों नही बोले।

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