शुक्रिया सुप्रीम कोर्ट, आदिवासी भाइयों का दर्द समझने के लिए : इरा झा

इरा झा की पत्रकारिता में अलग पहचान है। राष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता में पहली ‘न्यूज वूमन‘ होने के अलावा उन्होंने रिपोर्टिंग में भी मुकाम बनाए हैं। विषेष रूप से आदिवासी-नक्सल रिपोर्टिंग में। बरसों से वह आदिवासियों की समस्याओं / संस्कृति पर लिख रहीं है। करीब तीस साल से पत्रकारिता में सक्रिय इरा झा नक्सलियों का उनकी मांद में (बस्तर के बीहड़ इलाके से) उनका इंटरव्यू कर लाईं।

किसी भी सूचना में बड़ी खबर सूंघ लेना उनका मिजाज है और वह जिंदगी में रोमांच और चुनौती पसंद करती हैं। उनकी यह पसंदगी उनके प्रोफेशन में दिखती है। फिर चाहे वह करियर की शुरुआत में दिल्ली प्रेस के दिनों में लड़कियों के लिए वर्जित समझे जाने वाले दिल्ली के रेड लाइट एरिया जीबी रोड से रिपोर्टिंग हो या फिर नक्सल इलाकों से आदिवासियों पर रिपोर्टिंग। खबर सूंघने की ललक ने ही उन्हें उस कथित ‘आदिवासी जनजागरण अभियान’ सलवा जुडूम की असलियत उघाड़ने को उकसाया जिसे 5 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने गैर कानूनी घोषित किया है।


इरा झा

इरा झा


रमन सरकार की मिलीभगत से बस्तर के आदिवासी कांग्रेसी नेता महेंद्र कर्मा यह जतला रहे थे कि नक्सलियों से खफा आदिवासी अपनी मर्जी से तीर-कमान लेकर सलवा जुड़ूम में लिए घूम रहे हैं। अजब मंजर था। गांव के गांव खाली हो गए थे और सरकार लापता थी। शब्दों में जो बयां किया जा सकता था वह इरा ने खबर के रूप में दुनिया के सामने पेश किया। इरा की उस आंखों देखी की सच्चाई की सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पुष्टि हुई है। दुनिया ने उनकी रिपोर्ट से ही सलवाजुडूम का सच जाना। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर इरा झा भड़ास4मीडिया से बातचीत में कहती हैं- ”तीन दशक से पत्रकारिता में काम कर रही हूं पर ऐसा प्रोफेशनल सैटीसफेक्शन पहली बार मिला. ऐसा लगा जैसे पहली बार मेरा  काम सार्थक हुआ. धन्यवाद सुप्रीम कोर्ट मेरे आदिवासी भाइयों का दर्द समझने के लिए.”

पेश है, इरा झा की जून 2005 में हिंदुस्तान अखबार में सलवा जुड़ूम पर छपी कुछ खबरें… पढ़ने में दिक्कत आए तो स्कैन्ड खबर पर क्लिक कर दें….

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Comments on “शुक्रिया सुप्रीम कोर्ट, आदिवासी भाइयों का दर्द समझने के लिए : इरा झा

  • हमने तो सुना है कि मणिमाला को हिंदी पत्रकारिता की पहली न्यूज वूमेन माना जाता है..उनके कई रिपोर्ट की आज भी देश भर में चर्चा होती है। अपनी पीठ खुद ही थपथपाने का अच्छा चलन शुरु किया है भई। आप हिंदी पत्रकारिता के इतिहास को बरगलाने का काम कर रहे हैं। पहले तथ्यो की जांच तो कर लें।

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  • Vikash Chaubey says:

    इरा झा ने जब सलवा जुड़ूम पर लिखना शुरु किया, उससे पहले रुचिर गर्ग, आलोक पुतुल, शुभ्रांशु चौधरी, संजय शेखर उसकी बखिया उधेड़ चुके थे. इरा जी अपनी पीठ दिल्ली में खुद ही थपथपा रही हैं. यह बेशर्म पत्रकारिता का नमूना है.

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  • jai prakash tripathi says:

    मुद्दा कोई भी उठाये आदिवासियो का हित होना चाहिये इन खबरो को जिनहोने उठाया सबका आभार इन सभी के चेहरे पहचान के मोहताज नही है ……………………..

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  • दो उभरते हुए क्रांतिकारियों का नमूना इस खबर में पेश है. पहली क्रांतिकारी हैं इरा झा जिन्होंने भड़ास जैसे फ्रस्टेट मंच के माध्यम से अपनी पीठ ठोंकी है और दूसरे क्रांतिकारी हैं यशवंत सिंह जो टाइपराइटर पर बैठते ही क्रांतिकारी हो जाते हैं बाकी समय दलाल

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  • Dr. Maher Uddin khan says:

    Ira ji, aaj bkadas par aapko dekha achcha laga .do saptah pahle aap ke mobile par prayas kiya tha. aap ke aalekh pahle bhi padhe the aaj phir dekhe. kuch logon ne aalochna bhi ki hai jo is baat ka saboot hai ki aap ka lekhan logon ko sochne ko majboor karta hai. in ka bura mat maniye.

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  • Anuj Saksena says:

    News Women vo hoti hai jo News room ki kaman samhale.jis par poore akhbar ka daromdar ho.Ira Jha ne pahli bar Navbharat Times me Jane mane patrakar Superndra Pratap singh yani SP ke samay me news room ki kaman samhani shuru ki the aur fir vo hindustan men News Editor thi.Manimala mahaj reporter thi vo khabren bhejti thi.news room kei incharge yani News Women nahi rahi.vo habar bhej sakti thi unhen chhapne ya na chapne ka nirnay karna unke hath me nahi tha.

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  • Anuj Saksena says:

    News women aur Reporter me fark samajhiye.Ira Jha desh me pahli mahila thee jinhone news room kee kaman samhali.unke netritva me NavBharat Times jaisa akhbar nikalta tha.Manimala reporter thi vo mahaj khabar bhej sakti thi.ira bad me Hindustan kee New Editor bani.Hindi patrkarita me mahilaon ko hard news saupne ki parampara pahle nahin thi.ek News Editor Sankado reportaro ki khabre dekhta hai.Ira Jha ne Rajendra Mathur aur SP Singh jaise yashasvi sampadko ke sath kam kiya.Sp ke samay me unhone akhbar nikalna shuru kiya tha.[url][/url]

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  • Anuj Saksena says:

    EK bat aur ye ki Ira Jha behatareen reporter ke taur par jani jati hain unki kai khabron ki desh me khasi charcha hui hai.vo adivasiyo par lekhan ke liye jani jati hai.

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