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जय जनता, जय अन्ना : दस बज गए हैं लेकिन पार्टी अभी बाकी है

ये आधी जीत है. आधी लड़ाई बाकी है. अगर आप लोगों की अनुमति हो तो ये अनशन तोड़ दूं. हाथ उठाएं. अन्ना के इतना कहते ही रामलीला मैदान में खड़े हजारों हाथ उठ खड़े हुए. तिरंगा झंडा लहराते हुए हजारों लोगों का करीब 13 दिन तक रामलीला मैदान में डटे रहना, सैकड़ों-हजारों लोगों का हर बड़े छोटे शहरों कस्बों में निकलना, सांसदों के घरों को घेरना, राजनीतिज्ञों को गरियाना…

ये आधी जीत है. आधी लड़ाई बाकी है. अगर आप लोगों की अनुमति हो तो ये अनशन तोड़ दूं. हाथ उठाएं. अन्ना के इतना कहते ही रामलीला मैदान में खड़े हजारों हाथ उठ खड़े हुए. तिरंगा झंडा लहराते हुए हजारों लोगों का करीब 13 दिन तक रामलीला मैदान में डटे रहना, सैकड़ों-हजारों लोगों का हर बड़े छोटे शहरों कस्बों में निकलना, सांसदों के घरों को घेरना, राजनीतिज्ञों को गरियाना…

इन सबने मिलकर भारतीय संसद के बंद पड़े कान को थोड़ा बहुत खोलने में कामयाबी हासिल की. वही कामयाबी जो कभी अंग्रेजों के जमाने में इकलौते भगत सिंह ने संसद में बम गिराकर और फांसी पर चढ़कर हासिल की थी. जनलोकपाल बिल की राह का बहुत बड़ा रोड़ा आज हट गया. जनताकत के बल पर बहुत बड़ी जीत हासिल हुई. कल दस बजे अन्ना हजारे अपना अनशन तोड़ेंगे. उन्होंने अनुरोध भी कर दिया कि जिस तरह भी तक सब शांतिपूर्ण हुआ, उसी तरह जश्न का कार्यक्रम भी शांतिपूर्ण रहे. पूरा देश जश्न में है. मीडिया के लोग जश्न में हैं.

अन्ना ने मीडिया को भी बधाई दी कि इन लोगों के कारण भी जीत हासिल हुई. कहने वाले कहते हैं कि सत्ता और सरकार ने सिस्टम के खिलाफ जनाक्रोश को अन्ना के जरिए कम कर लिया. और, कहीं कुछ बिगड़ा भी नहीं. सरकार भी वही. नेता भी वही. सिस्टम भी वही. और, माहौल बन गया जीत का. कहने वाले यह भी कहते हैं कि दुनिया में करोड़ों कानून है लेकिन मानवता अब भी हर जगह त्रस्त है, सो, कानून से काम नहीं बनने वाला, काम बनेगा हर एक आदमी को अन्ना जैसा बनने पर. इस जीत की जितने मुंह उतनी व्याख्याएं हो रही हैं. फिलहाल यह जश्न का दौर है. सवाल उठाना लोगों को कम पचेगा. सो, हम भी यही कहेंगे कि दस बज गए हैं लेकिन पार्टी अभी बाकी है. लेकिन दोस्त, दस बजे के बाद की जिंदगी उतनी की रुखी और बेजान होगी, जितनी अब तक थी.

भ्रष्टाचार कोई एक शब्द नहीं जिसे डिक्शनरी से मिटा दो. यह जीवन पद्धति है. इस भ्रष्टाचार के खिलाफ हजारों लोग सदियों से लड़ते रहे हैं और आज भी लड़ रहे हैं. इस देश के कोने कोने में लोग लड़ रहे हैं और अपनी जान गंवा रहे हैं. सिस्टम शांत और निष्ठुर बना हुआ है. अन्ना भाग्यशाली हैं जो उनको आधी ही सही, जीत हासिल हुई. पर अन्ना और उनके लोगों की यह आधी जीत क्या देश के कोने कोने में लड़े जा रहे भ्रष्ट जीवन शैली और पद्धति के खिलाफ भी कामयाब होगी, कहना मुश्किल है. पूरी दुनिया जिस बाजार से संचालित हो रही है, उस बाजार के नियामकों के काम करने के तौर तरीके में भ्रष्टाचार रचा-बसा है.

कैसे आप मल्टीनेशनल्स को अपने देश का दाम और सामान बाहर ले जाने से रोक सकोगे. कैसे आदिवासियों की अच्छी भली जिंदगी को उजड़ने से बचा सकोगे. कैसे किसानों की जमीन को भ्रष्ट लोगों द्वारा कब्जाने से बचा सकोगे. कैसे हर शिक्षित व्यक्ति को बेरोजगार बनने से रोक सकोगे. कैसे हर हाथ को काम न मिलने की घुटन से मुक्त करा पाओगे… दर्जनों सवाल हैं. और इनका जवाब सिर्फ जनलोकपाल बिल नहीं है. पर, निराश होने की जरूरत नहीं. बस जरूरत इसी जज्बे को बनाए रखने की है. जो भी सत्ता-सिस्टम के खिलाफ सही सवालों पर लड़ता दिखे, उसे सपोर्ट करने के इसी जज्बे की जरूरत है. जाति, धर्म, क्षेत्र और पैसे की राजनीति के विरोध करने के लिए इसी जज्बे की जरूरत है.

ध्यान रखिए, सत्ता और सिस्टम बहुत मक्कार होता है. यह दुनिया के सबसे चालाक लोगों के हाथों संचालित होने वाली चीज होती है जो आसानी से अपने राज करने की ताकत को छोड़ नहीं सकते. इन्हें हमेशा संघर्षों से हराया जा सकता है. वह संघर्ष चाहे अहिंसक हो या हिंसक. अंग्रेजों के खिलाफ चले लंबे आंदोलन गवाह हैं कि वहां हमेशा दो धाराएं सक्रिय रहीं. गरम दल और नरम दल. दोनों दलों का बहुत बड़ा योगदान रहा है अंग्रेजों को नाको चने चबवाने में. आज इस देश के आम नागरिक को सलाम है जो अन्ना के पक्ष में उठ खड़ा हुआ. और इस दस बारह तेरह दिन के आंदोलन की प्रक्रिया ने पूरे देश के आम जन का राजनीतिकरण कर दिया. मेरी नजर में सबसे बड़ी उपलब्धि यही है.

अगर हम राजनीतिक चेतना से लैस रहेंगे और विरोध करने के अपने लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल करते रहेंगे तो इसी तरह आगे भी हम बड़े बड़े सूरमाओं को परास्त करते रहेंगे. फिलहाल तो मैं अन्ना और उनकी टीम के सभी लोगों के साथ साथ इस देश के आम जन को प्रणाम-सलाम करता हूं और उनका दिल से शुक्रिया अदा करता हूं कि सबने मिलकर एक चमत्कारिक माहौल का सृजन किया जिससे जनजीवन के मुख्य मुद्दे एजेंडे में आए और भ्रष्ट राजनीति व राजनेताओं को घुटनों के बल बैठना पड़ा.

यशवंत

एडिटर

भड़ास4मीडिया

[email protected]

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0 Comments

  1. shravan shukla

    August 27, 2011 at 7:06 pm

    ORIGNAL RESULTS…CNFTSN DOOR…JYADA KHUSHIYAN NA MANAYE…ABHI SAHMATI BANI HAI >> NIYAm nahi: The Lok Sabha was adjourned Saturday after it adopted what is called the ‘sense of the house’ and agreed to Anna Hazare’s three demands that will now be sent to the standing committee on the Lokpal bill for its consideration.

  2. Sudarshan Pandey

    August 27, 2011 at 7:48 pm

    samajh naheen aata………Anna ke aandolan ke paksha mein bol rahe hain ya Vipaksha mein..

  3. sonu

    August 28, 2011 at 5:39 am

    Har raah aasan ho
    Har raah pe khushiya ho
    Har din khubsoorat ho
    Aisa hi poora jivan ho
    Yahi har din meri dua ho
    Aisa hi humhara Anna ho!!

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