”भड़ास4मीडिया फिर फंसा संकट में” शीर्षक से अपनी बात कहने-प्रकाशित करने के बाद करीब 15 घंटे तक मोबाइल व मेल से खुद को दूर रखा. अब जब सारा कुछ देख चुका हूं, तो कह सकता हूं कि रिस्पांस गजब का मिला है. लगने लगा है कि एक बड़ी संख्या शुभचिंतकों, समर्थकों, चाहने वालों की भड़ास4मीडिया के आसपास है जो इसे इसके तेवर के साथ जिंदा रखने के लिए कुछ भी करने को तैयार है.
मेरे तमाम प्रयोगों में यह प्रयोग कि जिनके लिए पत्रकारिता करें, मुश्किल के वक्त समाधान खोजने उन्हीं के बीच जाएं, वाकई गजब अनुभव देने वाला रहा. इससे मेरा हौसला बढ़ा है कि सच्ची व जनपक्षधर पत्रकारिता करने वालों के लिए काम करने की अब भी बहुत गुंजाइश है, बस थोड़ा शुरुआती धैर्य धारण करने की जरूरत होती है. शुरुआत के दो वर्षों तक इस साइट के येन-केन प्रकारेण संचालन के बाद अब जनता के बीच जाने के फैसले को जनता-जनार्दन व पाठक वर्ग ने हाथोंहाथ लिया. उन्हें न सिर्फ मेरे पर भरोसा है बल्कि उनकी कामना है कि भड़ास4मीडिया इसी तेवर अंदाज में चलता रहे, इस कामना में पूरा समर्थन देने का आश्वासन भी है.
कई साथियों ने फोन कर लाख दो लाख रुपये तुरंत देने की बात कह डाली. मैं हैरत में हूं. उन्नाव से लेकर मुंबई और बिहार से लेकर जम्मू-कश्मीर, भारत से लेकर आस्ट्रेलिया, हर जगह से मेल एसएमएस व फोन काल्स आए. सबने एकाउंट नंबर मांगा. लेकिन एकाध-दो को छोड़कर और किसी को एकाउंट नंबर नहीं दे रहा क्योंकि मकसद पैसे इकट्ठा करना नहीं बल्कि भड़ास के पीछे के आर्थिक तंत्र के बारे में अवगत कराना था जिससे लोग जान सकें कि भड़ास को लेकर कायम मिथ व वास्तविकता में कितना फर्क है. साथ ही पारदर्शिता कायम रखना है जिससे भरोसे की खेती और फूले फले.
अच्छी खबर ये है कि कल शाम डेडीकेटेड सर्वर फाइनल कर दिया. साढ़े तेरह हजार रुपये महीने के हिसाब से तीन महीने का 39 हजार रुपये, कुछ छूट के बाद, का चेक सर्वर वाले को सौंप दिया. इतने पैसे देने के बाद भड़ास4मीडिया के एकाउंट में अब भी लाख-सवा लाख रुपये होंगे जिससे अगले दो महीने तक निश्चिंत होकर काम करने की गुंजाइश है. हम यह चाहते भी नहीं कि भड़ास4मीडिया के एकाउंट में इतने पैसे आ जाएं कि हम आर्थिक रूप से पूरी तरह निश्चिंत हो जाएं. अगर आर्थिक असुरक्षा और रोज कुआं खोदकर पानी पीने की स्थिति देश के ज्यादातर पत्रकारों की है तो हम लोग उससे अलग क्यों हों, हमें भी संसाधनों की खोज में लगे रहना चाहिए, कंटेंट के लिए जूझते रहना चाहिए ताकि बंधी हुई मुट्ठियों के साथ आगे बढ़ते रहने का भाव हमेशा तारी रहे. डाउन टू अर्थ होने का सुख नसीब होता रहे. फक्कड़पन को जीने की गुंजाइश बनी रहे.
अगले दो-चार दिनों में साइट के डेडीकेटेड सर्वर पर मूव कर जाने के बाद मजा आने की उम्मीद है क्योंकि इस बार बैंडविथ 1200 जीबी प्रति महीने के हिसाब से मिला है और इस बैंडविथ में गाने, वीडियो भी इसी सर्वर पर अपलोड किये जा सकते हैं. कुछ अन्य प्रयोग करने की भी अच्छा है, जिसे कम बैंडविथ होने के कारण रोके रखा था. इस बार भी ऐसे लोग मदद के लिए सामने आए हैं, जिनसे मुझे कोई उम्मीद न थी. सच कहूं तो इस बार की अपील से मुझे दोस्तों शुभचिंतकों की एक बड़ी और नई फौज मिली है, जिनके दम पर आगे बहुत कुछ किया जा सकता है. हां, केवल एक दुखी आत्मा वाले साथी मिले हैं जिनके कमेंट को भी पब्लिश करा दिया है ताकि भड़ास4मीडिया की डेमोक्रेटिक आत्मा की रक्षा की जा सके. पर मैं यह मानता हूं कि बिना वजह, फर्जी नाम से किसी की मानहानि करने वाले कमेंटों को प्रकाशित करने का सिलसिला बंद होना चाहिए क्योंकि इससे कई अच्छे लोग बेवजह बदनाम, परेशान होने लगते हैं. लेकिन अगर मेरे खिलाफ कोई कमेंट है तो उसे मैं इसलिए भी प्रकाशित करता हूं ताकि पीर पराई महसूस कर सकूं कि खिलाफ कमेंट आने पर मन में कैसे कैसे भाव पैदा होते हैं.
मेरे को लेकर अंड-बंड कमेंट पिछले आर्टिकल में करने वाले दुखी आत्मा वाले भाई साहब से, जिन्हें मेरी वजह से कभी दुख पहुंचा हुआ होगा, सिर्फ इतना कहना चाहूंगा कि मोहनदास के गांधीजी बन जाने के बावजूद उन्हें गोली मारने वाला पैदा हो गया, तो मैं तो न मोहनदास हूं न गांधी जी हो सका हूं, और न इरादा है, ऐसे में अगर सिर्फ गाली मिल रही है, गोली नहीं, तो बड़ी बात है दोस्त. आपका एहसानमंद हूं कि आपने अपने विचार भाव प्रकट कर अपने गुस्से को थूकने का साहस दिखाया, मन की कुंठा को बदले हुए नाम से ही सही उगल दिया है, जिससे आपका मन अब हलका महसूस हो रहा होगा. आपकी जिद मेरा विरोध करना है और मेरी जिद आपके विरोध को प्यार से स्वीकार करना है. देखते हैं कौन हारता है. आप चाहते तो बिना कमेंट किए हुए सिर्फ मन ही मन गरियाकर भी जा सकते थे, किसी शातिर दुश्मन की तरह, अपनी दुश्मनी के भाव को न प्रकट करते हुए, लेकिन आप सहज व सरल हैं, इसी कारण मन में आए गुस्से को तुरंत प्रकट कर दिया. आपको हम प्रणाम करते हैं. आपमें हम बदलाव की संभावना, गुंजाइश देखते हैं.
एक बार फिर उपर (पिछले वाले आर्टिकल में) सभी कमेंट करने वाले साथियों, मेल, एसएमएस व फोन करने वाले साथियों का दिल से आभार बोलता हूं. आप लोगों के प्यार ने मुझे खरीद लिया है. इस बिकने का जो सुख है, उसे केवल मैं ही महसूस कर सकता हूं.
आभार
यशवंत
[email protected]
09999330099












marwa tanvir
January 20, 2011 at 1:24 pm
jahan chaha he wahan raah he
arnav rajput
September 25, 2010 at 6:10 am
yasvan jee ye sunkar accha laga ki dedicated server final ho gaya…chinta ki koyee baat nahi..age bhi sab thik rahega…best wishes..
Bhupendra Pratibaddh
September 25, 2010 at 7:32 am
Yashwant ji, baat bikne aur kharidane ki nahin apne ko apna samjhane aur apne kam ko apna manane ki hai. aaj media ka mahaul kuntha ka paryay ban gaya hai to eske zimmedar hamin hain. es field mein aane wale mahaj naukari ki mansikta se aa rahe hain, kisi missionary bhav se nahin. digree aur diplomadhariyon ka hujum jivika chalane ke bhav se sana hua sarokari soch se achhuta hai. yahi wajah hai ki lakshy ke liye datane ki bajay maliko aur manageron ke haath ka khilauna ban bhatkana unki niyati ban gayi hai. chauthe khambhe ko numaeshi banane mein es jamat ka yogdan bhi kisi lihaz se kam nahin. dusare kshetron ki tarah yahan bhi taqatwar unionen thin aur unki hunkar se chauthe khambhe mein lagin dimakon ki safayi ho jati thi aur nayi chetna, naye josh se ham apne kam mein jut jate the. yah baat to aap bhi jante honge ki bhadas nikalte rahna aur nikalate rahna sangthnik bhav jagane mein kargar nahin hota, yah ek tatkalik sthiti hoti hai. jaise pet mein bhari gas niklane ke baad thodi raahat milti hai lekin usase gas nirmaan ki prakriya par viraam nahin lagta. kahne ka arth yah ki aapka dayitv es sandarbh aur gambhir ho gaya hai. yah jo forum aapne biradari ko diya hai ese aage aur mazbboti pradan karne ke liye aapko zyada saahas zyada sanklp aur zyada samrpan dikhana hoga. saath hi soch aur chintan ki ek disha ka nirdharan karna hoga tabhi vyavastha se do do haath karne aur nir chhir vivechan kaa dirghjivi karykram chalegaa. zahir hai yah sab updeshatmak nahin hai balki sanklpanatmak hai aur hamare jaise log ese apna kaam samajhkar aapke hamsafer hain.aaj ki ghadi jitni vikat hai jujhne ka jazbaa bhi utna hi ghanibhut hai.
Bhupendra Pratibaddh, Chandigarh
Imran Zaheer
September 25, 2010 at 7:57 am
[i]Yashvant ji sankat ke samay jis trah se aapne apne saath ghatit tamaam pida ko byaan kiya aur aapke kathni me jo vishvaas dikha aise me koi bhala aapko kaise toot ta hua dekh sakta hai, jin logo ne aapka is sankat ke samay me saath diya wo sach me mahaan log hai, aapka sangharsh kabhi zaaya nahi jayega. aik pariksha thi jisme aapne sangharsh kiya aur safalta prapt hui.[/i]
Badhai ho.!
[b]Jako rakhe saaiyan maar sake na koi… [/b]
Dharmesh
September 25, 2010 at 9:04 am
bakwas loge ki parvah kiye bina mission ki taraf badho behude frusted hai.
best of luck.
sonu
September 25, 2010 at 10:04 am
क्या बात है आपने यशवंत भाई की ….आपके भड़ास के वर्तमान ओअर भाविस्ये पर लिखे सब्द दिल को छु गये.. वैसे भी आपके लिखने की सिले गजब की hai
क्या हिमत दिखये है. भाई मै सोनू आपका पूरण सहयोगी हर पल आपके सहयोग को हर वक्त तयार है
a n shibli
September 25, 2010 at 10:42 am
yashwant ji ki jai ho, kamal ke hai bhai aap
chandan
September 25, 2010 at 11:11 am
aap sangharsh karo hum aapke sath hai. sach ke sth logon ka karwa hamesha judta hai.wo aapke sath bhi hamesha tha,hai aur jab tak aap sach likoge aur chapte rahoge tab tak rahega.
basant sharma
September 25, 2010 at 11:14 am
yashwant jee bhadas4media.com ko isi tarah dodate rahiye kabhi kabhi lambi ras ka ghoda bhi ladkhda jata he…lekin bo himmat nahi harta….aap bhi kamtar nahi he.. hosla rakhiye hum aapke sath he…….basant sharma
basant sharma
September 25, 2010 at 11:17 am
yaswant jee ko badhai…..hum aapke sath he….basant sharma( sagar m.p)
धर्मेश तिवारी
September 25, 2010 at 12:40 pm
नमस्ते सर,सबसे पहले तो आपके साथ साथ उन सभी को बधाई जो भड़ास ४ मिडिया से जुड़े हैं! जिन्दगी में हर तरह के समय आते है सो यहाँ आपने एक बड़ी जित हांसिल की और ये जित हमसब की है सर मै आर्थिक रूप से तो नहीं क्योंकि मै एक सामान्य परिवार से ही हूँ और पत्रकारिता भी निःस्वार्थ करना चाहता हूँ,लेकिन मन से तो निश्चित ही हमेशा साथ हूँ और भगवान से प्रार्थना है और हमेशा रहेगा की अपना ये भड़ास ४ मिडिया निस्पक्छ रूप से बुलंदियों को छूता रहे!आपने यंहा पर एक भडाशी की हैशियत से लिखने की जो अनुमति प्रदान की है उसके लिए भी शुक्रगुजार हूँ अपना पोस्ट यंहा देख कर ख़ुशी मिलती है धन्यवाद
rajkumar sirohi
September 25, 2010 at 3:17 pm
यशवंत जी नमस्कार , पत्रकार हूँ आपको जानता भी हूँ आपका समथक भी हूँ, आपसे मिला भी हूँ लेकिन पता नहीं क्यों पोर्टल पर आपसे मुखातिब नहीं हुआ
कल मेरे पास रविंदर नाम के पत्रकार का फोन आया कि भड़ास को खोलो देखो यशवंत ने क्या लिखा है. पढ़ा तो दिमाग ही हिल गया. यशवंत जी जब लिखते हो तो लिखते ही चले जाते हो ये भी नहीं सोचते कि सामने वालों को कितना दुःख पहुँच सकता है. आपने ये शब्द कैसे लिख दिए-‘यह भी एक तरह का भीख मांगना ही है’
आज की तारीख में आप जिस मुकाम पर हैं आपका तो आह्वान करें सिर्फ आह्वान, कि जो सच्चाई की आवाज़ को बचाना चाहते हैं वो भड़ास का साथ दें. खैर…. बहुत खुशी है कि संकट के बादल छंट गए.
भड़ास जिए हज़ारों साल.
मैं जैसा भी हूँ आपके साथ हूँ.
राजकुमार सिरोही
सिरसा
Ritesh Kumar
September 26, 2010 at 3:41 am
this is so nice to hear about the new server & the negative thoughts must have been cleared from your mind….
khushi ki baat hai ki aap dedicated server pe ja rhe hain or aapki or sabhi ki chintaaye door hui…. jo bhi hai, ek baat saaf hui saath dene ko sab taiyaar ho jate hain jab aap khud sahi hain…. shayad kisi ko umeed nahi hogi ki itni jaldi problem ka solution mil jaega…. Chaliye enjoy the success….media zindabaad, journalist jindaabaad, Wish a growing success fr all..
sahi kaha na yashwant ji & my frnds….!!
(bhadas bhi indirectly media ki awaaz ka hi ek hissa manna chahiye)
Ritesh-9654733858
[email protected]
Santosh
September 26, 2010 at 3:06 pm
RackSpace.com par cloud hosting lijiye. 100 Dollar me per month. Unlimited bandwidth with unmatched speed.
dhirendra pratap singh
September 26, 2010 at 4:37 pm
yashwant bhai dediketed server milane ki baat sunakar sukhad ahsas hua aasha h aap kisi bhi sankat me apne apko akela nahi samjhenge ham sab log her samay apke sath h godbless u. dhirendra pratap singh
Ravinder Singh
September 28, 2010 at 6:32 pm
प्रिय बड़े भाई,
मैं और मेरे जैसे तमाम पत्रकार साथी किसी न किसी अखबार, चैनल, पत्रिका, वेब पोर्टल के लिए कार्य करते हैं। उनके लिए लिखने से ज्यादा सुखद अनुभव हमें भड़ास4मीडिया के लिए लिखना लगता है। यह एक ऐसा मंच है जहां पत्रकार सही मायने में दिल की आवाज से लिखकर पत्रकारिता का कर्ज चुका रहा है। बनियों की चापलूसी व गुलामी से निकलकर इस मंच पर लिखना हर किसी के लिए गर्व की बात है। यदि यही मंच चला जाता तो फिर पत्रकारिता कहां रहती। मेरी शुभकामनाएं आपके साथ है। जब तक भड़ास4मीडिया रहेगा पत्रकारिता जीवित रहेगी।
Atul Shrivastava
September 28, 2010 at 8:01 pm
यशवंत जी आपको और भडास की पूरी टीम को बधाई, संकट के बादल छट गए अच्छा लगा,, वैसे भी जहां धूप है वहां छांव आनी ही है और जहां रात है वहां उजाला होना ही है, फिर अच्छे मकसद से कोई काम करो तो सफलता मिल ही जाती है।
bb goyal barnala
September 29, 2010 at 8:36 am
yashwant ji, i really cherished it that you have at last finalized dedicated server. in the past, i had felt that sit is opening a bit slowly. i do hope that speed will also increase with the introduction of dedicated server.
my best wishes are always with you. may god always keep you and bhadas4media going.
regards,
b.b.goyal
[url=http://www.punjabcolleges.com/indiacollegemaster/Punjab/Engineering/collegename/1/]Engineering Colleges in Punjab[/url]
Ashu
October 2, 2010 at 10:17 am
आईटी ओर सर्वर से सम्बन्धित कोई भी समस्या हो तो यशवंत जी आप हमारी टीम को १ बार जरुर याद करे…..हम पूरी कोशिश करके जितना हम कर सकते है, नि सवार्थ भाव से जरुर करेंगे………