अमर उजाला का एक और संपादक हिंदुस्तान गया

केके उपाध्यायअमर उजाला, बरेली के स्थानीय संपादक केके उपाध्याय के बारे में खबर है कि उन्होंने इस्तीफा दे दिया है। वे हिंदुस्तान जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि वे हिंदुस्तान, बरेली के स्थानीय संपादक बनाए जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक वे 20 नवंबर को हिंदुस्तान ज्वाइन करेंगे। सूत्रों का कहना है कि केके उपाध्याय ने अमर उजाला प्रबंधन को अपने हिंदुस्तान जाने के बारे में पहले ही बता दिया था। शायद, इसी के तहत सुनील शाह को राष्ट्रीय सहारा से इस्तीफा दिलाकर अमर उजाला ज्वाइन कराया गया। सुनील शाह अमर उजाला, बरेली में लंबे समय तक वरिष्ठ भूमिका में रह चुके हैं। सुनील शाह को अमर उजाला में शशि शेखर की सर्वोच्चता के दौर में इस्तीफा देना पड़ा था।

केके उपाध्याय के इस्तीफे के बाद अब यह स्पष्ट होता जा रहा है कि सुनील शाह अमर उजाला की बरेली यूनिट को ही देखेंगे। पर बड़ा सवाल यह है कि केके उपाध्याय अगर दैनिक हिंदुस्तान, बरेली के स्थानीय संपादक बन रहे हैं तो अभी तक स्थानीय संपादक पद पर बैठे अनिल भास्कर का क्या होगा? इस बारे में अभी कुछ पता नहीं चल पा रहा है। 

सूत्रों के मुताबिक अब यह प्रतीत होने लगा है कि हिंदुस्तान की ज्यादातर यूनिटों में शशि शेखर अपने करीबियों व विश्वासनीयों को नियुक्त करना चाहते हैं। केके उपाध्याय का हिंदुस्तान जाना यह संकेत देता है कि शशि शेखर अपनी अमर उजाला की टीम को हिंदुस्तान लाने के अभियान पर विराम नहीं लगाने वाले हैं। साथ ही उन्होंने यह भी संदेश दे दिया है कि लोग उनके बारे में चाहे जो बात करें, वे चो चाहते हैं, उसे करा लेते हैं।

हालांकि दैनिक हिंदुस्तान, आगरा में नासिरुद्दीन की नियुक्ति से नवीन जोशी की मजबूती का अंदाजा लगाया जाने लगा था लेकिन सूत्रों के मुताबिक ग्रुप एडिटर आखिर ग्रुप एडिटर होता है और वो अपने ज्यादातर निर्णयों को लागू करा ही लेता है। खासकर हिंदुस्तान में जहां ग्रुप एडिटर को काफी अधिकार दिए जाते हैं। हालांकि हिंदुस्तान में एचआर डिपार्टमेंट भी संपादकीय विभाग की गतिविधियों पर गहरी नजर रखता है पर ग्रुप एडिटर के अधिकारों में छेड़छाड़ करने जैसी ताकत उसके पास भी नहीं है।

देखना है कि अमर उजाला से अपने लोगों को ले जाने का शशि शेखर का यह अभियान कब थमता है। पर यह तो सही है कि इस आवाजाही के कारण हिंदुस्तान और अमर उजाला दोनों अखबारों में आजकल चर्चा का विषय संपादकों के बारे में कयासबाजी ही है। खासकर अमर उजाला में लोग काम में कम, आने-जाने वालों में ज्यादा दिलचस्पी लेने लगे हैं। कई जगह इसका असर अखबार की क्वालिटी पर भी दिखाई पड़ने लगा है। 

लौट कर फिर आते हैं केके उपाध्याय की तरफ। केके का पत्रकारीय करियर कुल 21 वर्षों का है। अमर उजाला, बरेली में उनका पद सीनियर न्यूज एडिटर का है। अमर उजाला में वे चंडीगढ़ में रहे। फिर उन्हें गोरखपुर यूनिट का प्रभार सौंपा गया। गोरखपुर से उनका तबादला बरेली के लिए कर दिया गया। केके भास्कर समूह के साथ 1992 से 2006 तक जुड़े रहे। ग्वालियर में सेंट्रल डेस्क इंचार्ज के बतौर काम शुरू कर केके श्रीगंगानगर में डीएनई, बीकानेर एडिशन में एनई और झांसी एडिशन के इंचार्ज बने। भास्कर, भोपाल में प्रादेशिक डेस्क पर काम करने के बाद केके उपाध्याय को जयपुर भेज दिया गया, राजस्थान का कोआर्डिनेटर बनाकर। जयपुर में केके ने युवाओं पर केंद्रित सिटी भास्कर की प्लानिंग कर इसे मूर्त रूप दिया। केके ग्वालियर में स्वदेश (वर्ष 1988), भोपाल में स्वदेश (1990) और अमर उजाला, आगरा (1994) में भी पारी खेल चुके हैं।  

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