भड़ास4मीडिया बन रहा है ब्लैकमेलिंग का जरिया!

प्रति, संपादक, भड़ास4मीडिया, जनसंदेश के मेरठ संवाददाता सुनील तनेजा का मुख्यमंत्री मायावती को लिखा एक तथाकथित पत्र आपने पिछले दिनों प्रकाशित किया था। अब आपने कानपुर के जनसंदेश संवाददाता अतुल मिश्रा की एक तथाकथित चिट्ठी वेबसाइट पर प्रकाशित की है। सुनील तनेजा के तथाकथित पत्र के जवाब में हमने अपना पक्ष आपके पास भेजा था और उसे आपने छापा भी। हमने आपको बताया था कि हर महीने की पहली तारीख को पूरे स्टाफ को तनख्वाह देने वाला जनसंदेश प्रबंधन किसी का बकाया नहीं रखना चाहता है। लेकिन कुछ लोग इस बकाए में नहीं, बल्कि चैनल के चार-पांच लाख के उपकरणों को हड़पना चाहते हैं। साथ ही उन्हें डर है कि कहीं उनकी वसूली की दुकान बंद न हो जाए।

आपको बताना चाहते हैं कि चाहे सुनील तनेजा हों या अतुल मिश्रा या फिर अमितेश पांडेय, सभी को बार-बार कहा जा रहा है कि वो अपने पास रखा चैनल का आईमैक कम्प्यूटर, कैमरा यूनिट, चैनल आईडी और बाकी चीजें नोएडा मुख्यालय में वापस कर अपनी बकाया धनराशि ले जाएं। लेकिन वे ऐसा नहीं कर रहे हैं। चैनल की जो संपत्ति इनके पास है और जिसे ये हड़पना चाहते हैं, उसकी कीमत करीब पांच लाख रुपए है। आप अपनी वेबसाइट में इनके पत्र प्रकाशित कर रहे हैं, लेकिन इनके साथ हमें जो अनुभव हुआ है, उसके आधार पर हम आपको आगाह करना चाहते हैं कि इन तथाकथित पत्रकारों के वसूली अभियान को आप अनजाने में समर्थन दे रहे हैं। मुख्यालय से लगातार इन्हें बकाया रकम लेने को कहा जा रहा है, लेकिन ये न तो बकाया लेने आ रहे हैं और न ही सामान वापस कर रहे हैं। इनकी इस हरकत को ब्लैकमेलिंग न कहा जाए तो क्या कहा जाए?

हमें ये जानकारी भी है कि जनसंदेश छोड़कर गए कुछ लोगों के साथ ये जुड़े हुए हैं। इससे शक होता है कि सुनील तनेजा, अतुल मिश्रा और अमितेश पांडेय उनके इशारे पर जनसंदेश को बदनाम करना चाहते हैं। भड़ास4मीडिया के माध्यम से हम इन्हें फिर कहना चाहते हैं कि कंपनी का सामान वापस कर अपना बकाया भुगतान ले जाएं। अब भी अगर ये ऐसा नहीं करते तो शोषित कौन होगा? ये तथाकथित पत्रकार या जनसंदेश?

-जनसंदेश प्रवक्ता

jansandesh@live.com

Comments on “भड़ास4मीडिया बन रहा है ब्लैकमेलिंग का जरिया!

  • Tarsem chopra kotkapura says:

    पंजाब सरकार ने पतरकारों को अबी तक कुछ नहीं दिया जन बुज कर फिल्ड मैं काम करने वाले पतरकारों से दोखा किया है स्टाफर तो पहले ही आदरे से मोटी रकम और खर्चे वसूल रहे हैं और फिल्ड मैं काम करने वाले रिपोर्टर जान पर खेल कर न्यूज़ इकठी करते हैं ओन्हे न आदरे कुछ देते हैं और न सरकारे यह जुलम कब तक चलता रहेगा और कब तक सेहते रहेगे उठो और जागो मेरे बाइयो जन आदोलन शुरू करो

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