मुर्दा समाज देखे शव में तब्दील नीरू की तस्वीर

शव में तब्दील नीरू
शव में तब्दील नीरू
नीरू की मौत (4) : इस मरी हुई निरुपमा को देखिए. कोडरमा के अस्पताल में चिरनिद्रा में बेसुध सोई हुई निरुपमा को देखिए. पत्थदिल इंसान भी इसकी कहानी सुन-पढ़कर पिघल जाएगा. पर हमारा मुर्दा समाज और मुर्दा परंपराएं जिंदा रहेंगी. इन्हें मौत न आएगी. देखिए-देखिए. किस तरह बेजान, अकेले, निष्प्राण, शांत पड़ी हुई है यह लड़की.

किसी की बिटिया. किसी की प्रेमिका. किसी की बहन. पर कोई न बचा पाया. जाने किसने मार डाला. वो अपनी मर्जी से जी न सकी. वह बिना किसी को दुखी किए जीना चाहती थी. उसकी इसी संवेदनशीलता ने उसे मार डाला. कोडरमा के सदर हास्पिटल में पड़ी इस निस्तेज निरुपमा को देखिए. जाने कितने सपने छिपे हैं बंद आंखों के अंदर. जाने कितनी बातें बची हैं बंद लबों के पीछे. जीने कितना कुछ करना था इस शांत पड़ी लड़की को. जाने कितने लम्हों में जीवन की धड़कन भरना था इस नौजवान मन को. पर सब कुछ रुक गया है अचानक.

वो ट्रेन जो नीरू को ले गई, फिर लौटी नहीं. संदेश आते रहे पर वो नहीं आईं. दिल्ली में उनके दोस्त, मित्र, साथी, सहकर्मी सब स्तब्ध हैं. पता नहीं, इस युवा होनहार महिला पत्रकार के अचानक मर जाने से हमारे समाज और हमारे मां-पिताओं का कथित मान-सम्मान बच गया या नहीं. पर यह सच है कि अगर यह जिंदा रहती तो हमारा बेहूदा समाज अपनी कथित चिरकुट इज्जत को इस लड़की से खतरा मानता. तभी तो शायद मार डाला गया.

कहने को हम कट्टरपंथी देश पाकिस्तान – अफगानिस्ता नहीं हैं. हम खूंखार तालिबान नहीं हैं. पर सच कहें तो हमारा भारत और हमारा भारतीय समाज अपने सभ्य, लोकतांत्रिक, प्रगतिशील, खुले दिल-दिमाग वाले दिखाऊ आवरण के पीछे एक वहशी शैतान है, पूरे के पूरे कट्टरपंथी पाकिस्तान और अफगानिस्तान हैं, दिन-दहाड़े तालिबान है. इस तालिबानी समाज की ढोंग से परिपूर्ण परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए चल रहे यज्ञ की खूनवेदिका में एक और पढ़ी-लिखी-समझदार युवती का रक्त, जीवन, संवेदना होम कर दिया गया है.

खूनवेदिका का यज्ञ रुकेगा नहीं. चलता रहेगा. ऐसी जाने कितनी निरुपमाओं का खून इस खूनवेदिका में गिरने वाला है, होम होने वाला है. बावजूद इसके, हमारे कथित समझदार माता-पिताओं की आंखें नहीं खुल रही हैं. उनकी आंखों पर उनके समाज और उनके आस-पड़ोस की निगाह से देखने वाला चश्मा चढ़ा है. अगर इतना ही बुरा था निरुपमा का विजातीय प्रेम विवाह करने का प्रस्ताव तो उसे वहीं ताले में बंद रखते. क्यों भेजा दिल्ली पढ़ने और दुनिया को खुद की निगाह से देखने-समझने और जीने. लानत है इस देश पर जहां अब भी ऐसा समाज बचा हुआ है.

यही प्रार्थना करते हैं कि शव में तब्दील नीरू को देखकर इस मुर्दा समाज के पत्थर हो चुके मन-मस्तिष्क पर हथौड़ा चल सके और सदियों पुराना मवाद बाहर आ सके ताकि बेटियां, युवतियां, बच्चियां खुश रहने की इच्छा पालने के कारण मर न जाया करें.

(कुछ लोगों के अनुरोध के कारण नीरू की मृत्यु पश्चात की तस्वीरें अब यहां से डिलीट कर दी गई हैं.)

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Comments on “मुर्दा समाज देखे शव में तब्दील नीरू की तस्वीर

  • gulshan saifi says:

    nirupma aaj hamare beech nahi hai.
    bade dukh ki baat hai ki log aaj bhi ye nahi samajh pate ki baccho se jo galti hoti hai.usme kahi na kahi ghar walo ki laparwahi bhi samil hoti hai.har cheej ka hal gussa nahi hai.

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  • RAHUL CHOUKSEY says:

    YEH KAAFI DUKH KI BAAT HAI …..AAJ JAHAA HUM CHILLA RAHE DAHAAD RAHE HAI KI HUM WAQT K SAATH AAGE BAD RAHE HAI… PARANTU USI SAMAJ MEIN BAUDHDHIK VARG MEIN IS PRAKAR KI GHATNA STHAAN LETI HAI TO KAAFI SHARMINDAGI KA VISHAY HO JATAA HAI…..AUR SAATH HI SHARAM AANA CHAHIYE AISE MAA BAAP KO SAATH HI SAATH LAANAT HAI UN PAR…..JO SANSKAARO K NAAM PAR APNE BACHCHO KI BALI DENA PASAND KARTE HAI….
    “MAY UR SOUL REST IN PIECE NEERU”

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  • ankit mathur says:

    यशवंत भाई, ये तस्वीरें कुछ लोगों को विचलित कर सकती हैं, कृपया संज्ञान लें…

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  • कमल शर्मा says:

    निरुपमा को मेरी भावभीनी श्रद्धांजलि। भारतीय समाज कट्टर जाति व्‍यवस्‍था से उबर नहीं पाया है। भारतीय समाज को राजा राममोहन राय और ईश्‍वरचंद विद्यासागर जैसे लोगों की इस समय बड़ी आवश्‍यकता है।

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  • अश्‍वनी कुमार निगम says:

    आखिर कब तक इस ब्राम्हणवादी, जातिवादी व्यवस्था की शिकार भारत की बेटियां होती रहेंगी। समय-समय पर प्रगतिशिलता की दिखावट करने वाले हमारे समाज में जातिवाद कितने गहरे तक अपनी जड़े जमाए हुए है, यहां देखने को मिलता है। जहां दो लोग अपनी मर्जी से अपना जीवन साथी भी नहीं चुन सकते। आज जरूरत है युवाओं को इस व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने की। नीरूपमा को सही मायने में श्रद्धांजलि तभी होगी जब उसके मौत के जिम्मेदार लोगों को सजा मिले और बड़ी संख्या में युवा जाति और धर्म के बंधन तोड़कर अंतर्जातीय विवाह करें।

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  • sapan yagyawalkya says:

    Nirupma ki wewaqt maut par aapki vevak tippani uddwelit karne ke sath hi samaj ki tathakathit adhunikta ke pichhe ki barvar sachai ko bhi ujagar karti hai.hamari gairat ka takaja hai ki hamari jankari me aane ke bad kisi nirupma ko aise na marne den. Sapan Yagyawalkya. Bareli(MP)

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  • tum sab regional media walo ka dimmag kharb hai, tusab logo ki jara bhi sense nahi hai ki report kaisi likhi jaee,

    is report ko masaladar bana ke bech ke apnie sadi se website ka kya nam karna chahtee hoo .. kisi ki maut hui haiii aur tum log uski maut ki tasweere bech rahe hoo ….

    kasoor tumhara nahi tumharii masaleeder mansikta ka haiii … tabhi regional media wale regional media me rah jatee jate haiii nikameee kah keeee
    itnee masale dar story bana ke tumh kya milega… jisne ye story likhiii hai wo nehayat hi bhadda kisam ka hogaaa

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  • santoshsingh,raipur cg says:

    darasal hum aaj bhi purani dhakoslo ko lekar chal rahen hai.neeru ji kee mout.esi ka parinam hai.brahman samaj ke liye shaeed neeru ji ko bhavbhinee shrdhanjali…shayad hame or hamare samaj ko ab bhi sharm nahi aayegi

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  • Shyad jo log tano aansu baha rahe hai unme pariwarik bhandhan kamjor ho, ek beti ke paida hone ke hi din se us khalnayak baap ke sene me uske vida hone ki parikalapana ayam lene lagati hai ,ye prem vivah jisaki jayadatar ant middle samaj me acha nahi hi hota hai, jo log terk denge unme kitane unke apane honge ye vohi jante honge,dosto yeh prem vivah us pita ke 20, 21 verso ke sapano ko todane jaisa hota hai, hum apane 2,4 6 saal a dahik prem ke liye maa baap a atmik prem ki tilanjali dete hai aur galiya bhi, ye mat bhule kal hum bhi isi duchkra se gujarenge.

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  • neerus’ parents have actually committd a shameful act…..even in this generatn, they wanted their daughter to live her life the way they wished……..it is so pathetic to know that they cant see their daughter happy…….shame on such parents……….
    i pray for neerus soul to rest and peace and pray that Priyabhaanshul gets out of this soon…….
    God Bless her suol……

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  • praveenmohta says:

    कुछ नहीं कहना सिवाय एक शेर के…..
    [b]भूल कर अपना ज़माना ये ज़माने वाले
    [/b]आज के प्यार को मायूब समझते होंगे….:'(

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  • diptiman says:

    Nirupama, u wil never die. You will always live in our hearts. You were a sweet person loved by every one…..you will be rememberd for ever…….ur perpretators won’t sleep peacefully ever. We your friends and colleagues assure you this. The world is a bad place for people like you.

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