मेरा अपना कोई निजी एजेंडा नहीं : शशि

शशि शेखरकुछ ही महीनों में हम सब गर्व से कहेंगे कि हम हिंदुस्तानी हैं : मृणालजी का मैं बेहद सम्मान करता हूं : हिंदुस्तान के एडिटर-इन चीफ पद पर शशि शेखर ने ज्वाइन कर लिया है। ज्वाइन करने से ठीक पहले आज सुबह भडास4मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में शशि शेखर ने कुछ मुद्दों, आशंकाओं व रणनीतियों पर चर्चा की। उन्होंने सबसे पहली बात यह कही कि- ‘कुछ ही महीने में हम सब गर्व से कहें कि हम सब हिंदुस्तानी हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि हिंदुस्तान में पहले भी कोई क्षेत्रवाद और जातिवाद नहीं था। यह लोगों की फैलाई बात है।

हिंदुस्तान में अच्छे ट्रेडीशन को बढावा दिया जाएगा। एचटी की लीडरशिप ने मुझमें जो यकीन जताया है, उस यकीन को मैं पूरा करूंगा। वो हिंदी जर्नलिज्म को जो बढावा देना चाहते हैं, उसमें मैं जरूर अपना एक विनम्र योगदान करना चाहूंगा। मैंने अमर उजाला में भी ऐसा किया।’

हिंदुस्तान के नेतृत्व में बदलाव से वहां काम करने वालों में भय व दहशत के माहौल के बारे में शशि शेखर ने कहा कि मैं जहां भी गया, वहां के पुराने लोगों के साथ ही काम किया। मेरे बारे में हमेशा मेरा काम बताता है। मैं इस समय क्या बोलूं। इतना कह सकता हूं कि मैं बहुत ही साफ-सुथरे तरीके से काम करना चाहता हूं। मैं किसी के खिलाफ नहीं हूं। मैं कोई एजेंडा लेकर कहीं जाता ही नहीं हूं। न अमर उजाला में कोई एजेंडा लेकर आया था न हिंदुस्तान में कोई एजेंडा लाकर जा रहा हूं। मैं अमर उजाला में गया तो कितने लोगों को ‘आज तक’ से लेकर आया? एक भी नहीं लाया। मैं ‘आज’ अखबार से ‘आज तक’ गया तो कितने लोगों को ‘आज तक’ ले गया? एक भी नहीं। तो फिर मैं कहूंगा कि मेरा कोई एजेंडा नहीं है। मेरा एजेंडा सिर्फ और सिर्फ काम है। मेरी कोई लिस्ट नहीं है। मैं प्रोफेशनल आदमी हूं। क्षेत्रवाद और जातिवाद में मेरा जरा भी भरोसा नहीं है। मैं किसी सामंत की तरह काफिला लेकर नहीं आता-जाता। मैं पुरानी टीम के लोगों को ही खडा करता हूं। अमर उजाला में जो प्रतिभाशाली लोग छोटे पदों पर काम करते थे, उनकी क्षमता का आंकलन करने के बाद उन्हें बडी जिम्मेदारियां दीं। ऐसे ही हिंदुस्तान में जो लोग बेहतर परफार्म कर रहे हैं, उन्हें और ज्यादा जिम्मेदारी दी जाएगी। अच्छे लोगों की एकता और सक्रियता से अच्छा अखबार निकलता है। मैं किसी की नौकरी यूं ही लेने के खिलाफ रहता हूं। मैंने अपने करियर में जितने लोगों को नौकरी दी है, उसके मुकाबले किन्हीं विशेष परिस्थियों में हटाए गए लोगों की संख्या बेहद मामूली है।

आखिर में मृणाल जी के बारे में शशि शेखर का कहना था कि मृणाल जी का मैं बेहद सम्मान करता हूं। मैंने बचपन में उनकी लिखी कहानियां पढी हैं। जब मैं हाईस्कूल-इंटर में था, तबसे मृणाल जी को पढ़ रहा हूं। मृणालजी के नेतृत्व में हिंदुस्तान ने काफी तरक्की की है। हिंदुस्तान की ग्रोथ एक उदाहरण है। मृणाल जी मेरे लिए हमेशा सम्मानीय रहेंगी। हर घर में कुछ न कुछ खटपट चलता रहता है। इस पर ध्यान नहीं देना चाहिए। मृणाल जी का जो योगदान है, वह बहुत ज्यादा है।


शशि शेखर के जीवन, उनकी सोच और उनकी शख्सियत, उनके सपनों, उनके बारे में लोगों की धारणाओं पर उनकी राय जानने के लिए आप ‘भड़ास4मीडिया’ के ‘हमारा हीरो’ कालम में प्रकाशित हो चुका उनका विस्तृत इंटरव्यू पढ़ सकते हैं। इस इंटरव्यू में उन्होंने कई नई और बेबाक बातें कहीं, मसलन-

  • अखबार में मेरी भूमिका मास्टर ब्लेंडर की तरह
  • पत्रकारों ने खुद को विदूषक  बना लिया है या दरोगा बन बैठे
  • हिंदी में समय के साथ इंस्टीट्यूशन नहीं बदले
  • मैं रुपये के पीछे भागने वाला आदमी नहीं हूं
  • एमबीए वाले एमजे वालों से ज्यादा सेलरी पा रहे
  • बेटी की शादी के बाद नौकरी नहीं करना चाहता
  • आप गालियों तक ही रुक गए, मैंने तो अपने बारे में काफी कुछ सुना है

ये सारी बातें शशि शेखर ने किन प्रसंगों और सवालों के जवाब में कहीं हैं, जानने के लिए और उनका विस्तृत इंटरव्यू पढ़ने के लिए क्लिक करें- बड़ा झूठ नहीं बोलता, रात में दिन भर के झूठ गिनता हूं

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