सुधांशु महराज उर्फ छोटे शशि शेखर

: पुराने हिन्दुस्तानी हिंदुस्तान से जाएं तो जाएं कहां : नई दिल्ली। किसी अखबार में बदलाव का सबसे बुरा दौर हिंदुस्तान देख रहा है। यहां के एडीटोरियल विभाग में इस्तीफा देने का दौर लगातार जारी है। शशि शेखर की अमर उजाला नोएडा की लगभग पूरी टीम यहां आ चुकी है। छोटे ओहदे से लेकर बड़े ओहदे तक अमर उजाला के कर्मियों की फौज यहां पर पूरे अस्त्र-शस्त्र के साथ मोर्चा संभाल चुकी है।

साले सबकी नौकरी खाओगे…ब्रेकिंग है…

: बेनामी की टिप्पणी 3 : रनडाउन प्रोड्यूसर लाइब्रेरी में फोन लगाता है- “अरे यार वो राहुल के स्वयंवर के विसुअल्स निकलवाओ जल्दी….” उधर से आवाज आती है- “कौन सा स्वयंवर सर…” रनडाउन प्रोड्यूसर बिगड़ा- “अरे चूतिए हो क्या…वही इमेजिन वाले….” लाइब्रेरी से आवाज आई- “डेट बताइए सर….” रनडाउन प्रोड्यूसर का तनाव भड़क चुका था- “अरे यार हद कर रहे हो….डेट का क्या मतलब….इमेजिन डालो दिखा देगा…” लाइब्रेरी से- “सर नहीं दिखा रहा है…”

झंडेवालान पर भेड़िया आया….

: बेनामी की टिप्पणी-2 : भेड़िया आया…. शाम को एक एसएमएस आया कि झंडेवालान पर क्या करा दिया…. करा दिया ऐसे जैसे झंडेवालान हमारे दद्दा वसीयत में छोड़ गए थे और वहां कुछ भी हो ज़िम्मेदारी हमारी होगी…. खैर रास्ते में थे… तो घर पहुंच कर टीवी खोला… इतने तो समझदार हैं ही कि जानते हैं कि झंडेवालान में सबसे तेज़ चैनल का दफ्तर है….

प्रभाष जी, उनके चेले और हम

बेनामी लाल: बेनामी की टिप्पणी-1 : आज प्रभाष जी का जन्मदिन है, पत्रकारिता के संतों की भीड़ लगेगी। वही संत जिन्हें आज प्रभाष जी अगर होते तो इनमें से कइयों को बेहद निराशा और क्रोध में गरिया रहे होते। कई मठाधीश वहां आएंगे, बैठेंगे, प्रभाष जी को याद करेंगे, पत्रकारिता की दशा पर क्षोभ और ग्लानि का नाटक करेंगे। अपने-अपने को प्रभाष जी का चेला साबित करने की होड़ होगी।