टामियों का दिल कहे ‘इंडिया टीवी’ नंबर वन

टैम (चैनलों की व्यूवरशिप जांचने वाली प्राइवेट कंपनी) वाले टामियों का हरामीपन चरम पर है. बेहूदा खबरें दिखाने वाले न्यूज चैनलों को ज्यादा नंबर देने का सिलसिला जारी है. ‘इंडिया टीवी’ लगातार नंबर वन घोषित किया जा रहा है. पिछले कुछ हफ्तों से टैम के टामियों की जो रेटिंग लिस्ट जारी हो रही है, उसमें इंडिया टीवी लगातार नंबर वन पर बना हुआ है. टामियों ने बुरी गत कर रखी है आजतक की. कभी नंबर वन चैनल रहा यह आजतक आजकल दो और तीन स्थान पर फुटबाल की तरह लुढ़क रहा है. नंबर वन पर तो ‘बहनों को जहरीला‘ बताने वाले इंडिया टीवी को कायम कर रखा है.

संभव है, आजतक भी नंबर वन बनने के लिए ऐसे प्रयोग करने में जुट जाए. कर भी रहे हैं सब चैनल. इंडिया टीवी की स्टाइल को ही आजकल टीवी इंडस्ट्री में माई-बाप माना जा रहा है. जिस चैनल को खोल लो, वही इंडिया टीवी जैसे प्रोमो व कार्यक्रम दिखाते मिल जाएंगे. वो चाहें सहारा समय हो या पी7न्यूज. सबके सब टीआरपी पाने के लिए बेहूदा खबरों की अंधी दौड़ के हिस्से बन चुके हैं. किसी के पास मौलिक कंटेंट नहीं है. कोई कामेडी एक्सप्रेस दौड़ा रहा है तो कोई सास-बहू के सीरियलों की हकीकत बयान कर रहा है.

खाये, पिये, अघाये लोगों के बीच कथित अदृश्य मीटर लगाकर टीआरपी की चेकिंग करने वाले टामी जिस स्टैंडर्ड को अघोषित तौर पर टीवी न्यूज इंडस्ट्री में मान्यता दिलाये हुए हैं, वह आम आदमी से जुड़ा मसला कतई नहीं है. टामियों के लिए तो सनसनी, कामेडी, सास-बहू, नाच-गाना, फिल्म, सेक्स, क्रिकेट… आदि ही खबर है. इसी को वो लोग देखते हैं जिनके घर में टीआरपी में मीटर लगाए जाते हैं. जनता से धोखा कर और जनता के पैसे का बंदरबांट कर अमीर बने लोगों के लिए जनता के मुद्दे भला कब दर्शनीय हो सकते हैं. उन्हें तो चाहिए भरपूर मनोरंजन और यह मनोरंजन परोस रहे हैं आजकल के न्यूज चैनल. खबरें दिखाने वाला और खबरों का सरोकार रखने वाला एनडीटीवी टैम के टामियों की लिस्ट में छठें स्थान पर है.

वो चैनल ज्यादा पापुलर बताए जा रहे हैं जो बकवास दिखाते हैं. दिल्ली की बाढ़ और सलमान के ब्रेकअप पर दिन भर खबरें दिखाने वाले न्यूज चैनलों को देश के गांवों, किसानों, आंदोलनों की कोई परवाह नहीं है क्योंकि ये सब इनके व इनके टामियों के एजेंडे में नहीं आता. धन्य है अपना देश जहां न्यूज इंडस्ट्री को विज्ञापनदाता और खाये-पिये-अघाये लोग कंट्रोल करते हैं. जिस जनता व पत्रकारिता के नाम पर ये न्यूज चैनल चलाए जा रहे हैं, वही इनके एजेंडे से गायब हो गए हैं. लोग बहस करते रहें, गरियाते रहें, लिखते रहें, सलाह देते रहें, पर पैसे के लिए भूखे भेड़ियों को इससे कोई मतलब नहीं. इन्हें तो येन-केन-प्रकारेण पैसे ही चाहिए और पैसे मिलते हैं मनोरंजन व बकवास दिखाने पर.

Comments on “टामियों का दिल कहे ‘इंडिया टीवी’ नंबर वन

  • india tv ke harami aur maurya tv ke liye yahi tam accha kaise ho sakta hai. kya khel hai yashwant. begusarai ka kuch locha hai kya;D;D;D;D

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  • यशवंत says:

    प्रवीण भाई, किसी भी न्यूज चैनल जो प्रेस रिलीज भेजता है, उसमें खुद का विचार नहीं डालते हम लोग. मौर्या टीवी, साधना, न्यूज24… जो भी जैसा रिलीज भेजता है, उसके लास्ट में प्रेस रिलीज भेजकर उसे हम लोग प्रकाशित कर देते हैं. किसी दूसरे के विचार, दूसरे की प्रेस रिलीज से ये आशय नहीं निकाला जा सकता कि उससे हम लोग सहमत हैं. टैम की खिलाफत हम लोग शुरू से करते रहे हैं और आज यह बात सबके सामने है कि जर्नलिस्ट जिस न्यूज चैनल को सबसे गया गुजरा मानते हैं, वही टैम के लिहाज से नंबर वन है. यही बात इस खबर में बताने की कोशिश की गई है.
    आपने कमेंट किया, अपनी बात पूरी ईमानदारी से रखी, इसके लिए आपका आभार.
    यशवंत
    एडिटर, भड़ास4मीडिया

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  • main bhi stabdh hun jab se suna ki india tv no.1 ho gaya … ye tam ka to koi auchitya main nahi manta….. itne sandaar content dikhane wale channels hain kabhi no.1 ki kursi pe tam walon ne nahin baithaya…..niradhar hai …bakwas hai ye TRP ka khel……

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  • दर्द का हद से गुजरना…दवा हो जाना, हर खबर…हर पैकेज में वियाग्रा जैसी उत्तेजना का इस्तेमाल कर खबर बेचने की डॉक्टरी की दुकान मंद हो रही है, खबरों में वियाग्रा का इतना इस्तेमाल हो गया की दर्शक की उत्तेजना कुंद हो रही है, और लोग न्यूज नाम के चैनलों से भाग रहे हैं,
    यहीं से बदलाव शुरु होगा…दर्द और बढ़ने दो..बट दोषी चैनल या सिर्फ टैम नही है, एक पूरा मंत्रालय है इसके लिए जो ये करने की इजाजत दे रहा है, क्योंकि सच दिखाते ही सत्ता डोल जाएगी…तो सरकार का भी इसी में भला है कि जो हो रहा है होने दो, रही बात चैनल में काम करने वालों की तो वो क्या करें मालिक को सिर्फ पैसा चाहिये..वर्कर को रोटी और बच्चों की पढ़ाई।
    जय हो देश मेरा रंगरेज ओ बाबू….

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  • SANTOSH KUMAR says:

    BEGUSARAI KE KUCHH PATRAKARON KA ASLI CHEHRA BHADAS PAR AA CHUKA HAI.PRAVIN KUMAR JI USI GIROH KE SAMARTHAK LAGATE HAI.AISE LOGO KE KHILAF BHADAS KA ABHIYAN JARI RAHEGA.WAISE BHI EK PATRAKAR DWARA PATRAKAR SANGH KE NAM PAR KIYE GAYE WASOOLI SE JALD HI BHADAS LOGO KO AWAGAT KARAIEGA.

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  • Sir,
    bura n mane to ek baat jaroor kahunga,
    aapki itni jalti kyo h indiatv Se. jab TAM wale aaj tak ko no 1 btate h to theek h,
    magar indiatv no 1 ho to aap anab shanab likh dete H

    ye to galat baat h.

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  • ek tv journalist says:

    आप लोग चाहे जो कहें…. पर सच यही है कि इंडिया टीवी ने भारतीय टीवी न्यूज इंडस्ट्री का नया ट्रेंड सेट किया है….. उसे सब फालो करते नजर आते हैं….. वो चाहे आज तक हो…. या बिलकुल निचले पायदान पर संघर्ष कर रहा कोई चैनल…. इंडिया टीवी को इस मुकाम पर लाने में सबसे ज्यादा अगर किसी का योगदान है तो वे हैं इसके मालिक और चर्चित पत्रकार रजत शर्मा…. उनके नेतृत्व में न्यूज रूम की टीम ने दर्शकों की नब्ज को पकड़ा…. बदलते भारत की बदलती रुचियों को समझा…. न्यूज के विस्तृत फलक और दायरे को खंगाला…. विजुवल के साथ किस-किस तरह के प्रयोग किए जा सकते हैं, इस पर शोध किया…. बाजार का नियम होता है कि या तो साथ चलो या फिर दूर हटो….. जो लोग नैतिकता और सरोकार की बातें करते हैं वे भी मजबूर हैं बाजार के साथ चलने के लिए…. और उसी टीआरपी को पाने के लिए जिसे पानी पी-पी कर कोसा जा रहा है…. अगर सरोकार के आधार पर दोष मढ़ने की बात है तो दोषी इंडिया टीवी कतई नहीं है…. उसने अपने तरीके से प्रयोग किए….. अपने अंदाज में परोसा…. पर असल दोषी तो वे लोग हैं जो सरोकार व न्यूज की बात करते करते जाने कब इंडिया टीवी के पिछलग्गू बन गए…. आजतक हो चाहे स्टार न्यूज या कोई अन्य चैनल…. सबको पता है कि टीआरपी महत्वपूर्ण है और टीआरपी का नया फंडा, टीआरपी का नया फार्मूला इंडिया टीवी के पास है….. इसी कारण लोग इंडिया टीवी की नकल करने लगे….. उसी की तरह आवाज निकालने लगे….. उसी की तरह डराने लगे. उसी की तरह प्रोमो और प्रजेंटेशन तैयार कराने लगे…..
    यशवंत जी, आपसे अनुरोध है कि तस्वीर के दूसरे पहलू को भी देखें…. रजत शर्मा और विनोद कापड़ी हिंदी टीवी न्यूज मार्केट के नए लीडर हैं…. इसे जितना जल्द समझ लेंगे, उतना ज्यादा आसानी होगी टीवी के नए दौर को समझने में….. आप लोग बहस आजतक के लगातार गिरते जाने पर करें….. क्यों एक अच्छा भला चैनल इंडिया टीवी बनने पर उतारू है और इस नकल के चक्कर में वह न तो आजतक बन पा रहा है और और न इंडिया टीवी बन सका है…. वह बीच में खिचड़ी बन गया है…. आजतक की जो ताकत थी, देश भर में फैला नेटवर्क और तुरंत लाइव होती खबरें…. वो ताकत खुद आजतक ने खो दिया है…. इंडिया टीवी के लोगों को भी अच्छा लगता अगर आजतक के लोग अपनी ताकत के साथ लड़ते…. वे तो इंडिया टीवी को इंडिया टीवी के हथियार से मात देने में लगे हैं…. तो, दोषी इंडिया टीवी बिलकुल नहीं है… दोषी वे लोग हैं जो न्यूज व सरोकार की बात करते हैं पर करते वह हैं जो इंडिया टीवी करता है…. उम्मीद करता हूं कि आप मेरी भावनाओं को स्थान देंगे….. मैं टीवी न्यूज इंडस्ट्री से ही जुड़ा हूं…. नाम के साथ लिखना मुख्य मुद्दा नहीं है इसलिए नाम नहीं दे रहा ताकि बहस कहीं और न पहुंच जाए….

    एक टीवी पत्रकार

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