अमिताभ का लग गया काम, बाकी नूतन बताएंगी हाल-ए-धाम

: एक कमरे में चार आईपीएस अफसरों की तैनाती : बिना किसी इंट्रो और भूमिका के, केवल एक बात सूचनार्थ बताना चाहूंगा, उनको जिन्हें नहीं पता है कि ये अमिताभ कौन हैं. अमिताभ एक आईपीएस हैं. यूपी कैडर के हैं. पहले उनका नाम अमिताभ ठाकुर हुआ करता था. लेकिन उन्होंने अपने किसी आदर्शवादी जिद के कारण जाति-उप-नाम को निजी और सरकारी तौर पर त्याग दिया.

लेकिन त्यागने वालों को ज्यादा सितम झेलना पड़ता है, उसी अंदाज में उनका तबादला कर दिया गया. इसलिए नहीं कि उन्होंने जातिनाम बदला. इसलिए क्योंकि वे सच-सच और साफ-साफ को क्यों करना-कहना-जीना चाहते हैं. इस घटनाक्रम के पहले उनके झेलने और परेशान रहने की लंबी दास्तान है, सो उन बातों पर फिर कभी. फिलहाल जो ताजी बात है वो ये कि अमिताभ को लखनऊ से बेहद दूर भेजना भी मायावती सरकार को रास नहीं आया क्योंकि अमिताभ दूर बैठकर भी समाज के असामाजिक लोगों की खबर ले रहे थे. और कई ऐसे बड़े असामाजिक उनके फंदे में आ गए कि मायावती सरकार के कारिंदों को एक्शन लेना पड़ा. डीजीपी बृजलाल ने अपनी जादू की छड़ी घुमाई और बंदा ये गयो को वो गया.

अमिताभ को मेरठ के आर्थिक अनुसंधान अपराध शाखा के पुलिस अधीक्षक पद से हटाकर लखनऊ स्थित पुलिस विभाग के आफिस रुल्स एंड मैनुवल्स में भेज दिया गया है. उन्हें एक मिनट का भी मौका नहीं दिया गया कि वे अपने आफिस के कागजात सहेज सकें या उन पर अंतिम टिप्पणी दर्ज कर सकें. समझ सकते हैं आप इसका मतलब. सो, उन्हें लखनऊ भेज दिया गया. लखनऊ तो प्रदेश की राजधानी है पर उस राजधानी में कई डंपिंग ग्राउंड भी हैं जहां ढेर सारे क्रिएटिव आईएस-आईपीएस इसलिए पड़े हुए हैं क्योंकि वे ईमानदार हैं और नेताओं-अफसरों के कुत्तेपने के सांठगांठ को नहीं झेल सकते.

सो, उस मौजियल ग्राउंड में अमिताभ को भी भेज दिया गया.  लखनऊ जाना तरक्की कहा जाना चाहिए क्योंकि लखनऊ में अमिताभ का अपना घर है और वे मेरठ में रहते हुए अपने घर से बेहद दूर रहे थे. पर इसका दूसरा पक्ष है कि यूपी में सत्ता-सिस्टम ने अब तय कर लिया है कि अमिताभ को बहुत दूर की पोस्टिंग देना भी खतरनाक है, क्योंकि बंदा वहां भी ऐसे लोगों को अपने कार्यकाल में पकड़ सकता है जो सिस्टम के भ्रष्टाचार को खाद-पानी देने के लिए लाइन लगाए बैठे हों पर वह अपनी मनमानी करने की लोकल स्तर पर छूट जाहता हो. आए दिन चिट-फंड कंपनियां ऐसे ही माहौल में घपले-घोटाले करके हजारों लोगों के अरबों-खरबों रुपये डुबो देती हैं क्योंकि उन पर कोई अंकुश नहीं होता, न उपर से और न स्थानीय स्तर पर. इस बारे में बात फिर कभी.

जाहिर है, अमिताभ के लखनऊ जाने की परिघटना पर कहने वाले इसे डिमोशन ही कहेंगे. वजह? वो ये कि अमिताभ मेरठ में ईओडब्ल्यू के एसपी के पद पर भी एक तरह से डिमोशन के ही पद पर थे क्योंकि उनके बैच का हर कोई यूपी में डीआईजी या समतुल्य हो चुका है लेकिन अमिताभ अभी तक एसपी के पद पर सेवा दे रहे थे. ये यूपी की न्याय प्रणाली है. ये बृजलाल का न्याय है. और जाहिर है, ये पूरा न्याय मत्थे मढ़ा जाएगा मायावती के, जो सीएम हैं और सबकी चीफ हैं.

सो, बृजलाल का एक और गंदा डंडा अमिताभ पर पड़ा है और अमिताभ आ चुके हैं उसी लखनऊ में जहां वे पिछले कई साल से लड़-मर-जी-जग-उठ-रो रहे हैं. वे कई वर्षों से सिस्टम से अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं. सिस्टम हर मोड़ पर उन्हें निराश और हतप्रभ कराने पर आमादा है लेकिन अमिताभ जाने किस मिट्टी के बने हैं कि वे अभी हारे नहीं हैं. वे हर हालात में सिस्टम में रहते हुए सिस्टम की दिक्कतों और चिरकुटई पर बात करना चाहते हैं, अदालत से, अपने सिस्टम से, अपने समय की राजनीतिक कार्यप्रणाली से… और कई अन्य चीजों से भी, जिसके बारे में बात करते हुए, सोचते हुए कई आईपीएस निजी जिंदगी के अकेले क्षणों में कांप जाया करते हैं, ताकि कोई ईमानदार आदमी अपना काम करते हुए कभी किसी से डरे नहीं, झुके नहीं और दुखी न होये.

अमिताभ ने लखनऊ में नया पद, नया कार्यभार संभाल लिया है. पहले एक दो दिनों में उन्होंने क्या देखा-महसूस किया, नए कार्यबार को लेकर, उन्होंने घर आकर हाल-ए-दिल बयान किया, और उसे बता रही हैं उनकी पत्नी, सोशल एक्टिविस्ट, आरटीआई एक्टिविस्ट और स्वतंत्र पत्रकार नूतन ठाकुर. पेश है डा. नूतन ठाकुर का लिखा आलेख. -एडिटर, भड़ास4मीडिया


एक कमरे में चार आईपीएस अफसर

-नूतन ठाकुर-

एक फूल दो माली वाली बात तो हम सभी लोगों ने सुनी है पर एक कमरे में चार आईपीएस अफसर वाली बात कभी-कभार ही सुनने को मिलती है. मैंने यह बात आज उस समय सुनी जब मेरे पति अमिताभ अपने नए दफ्तर में ज्वायन करने के बाद शाम को घर आये. स्वाभाविक उत्सुकतावश मैंने जब उनसे दफ्तर का हाल पूछा तो मालूम चला कि रूल्स और मैनुअल के इस नए दफ्तर में, जहां उनका तबादला ईओडब्ल्यू मेरठ से हुआ है, कुल दो कमरे हैं और कुल पांच आईपीस अधिकारियों की वहाँ तैनाती है. इनमे एक डीजी, दो डीआईजी और दो एसपी हैं. इनमे एक कमरा तो डीजी साहब के लिए है और बाकी चार आईपीएस अधिकारी एक छोटे से कमरे में बैठेंगे. इस तरह एक कमरे में चार वरिष्ठ आईपीएस अफसर इकठ्ठा बैठ कर क्या काम करेंगे, यह बात आसानी से समझी जा सकती है.

मैंने एक आईपीएस अफसर की पत्नी के रूप में इस दफ्तर से जुडी उन बुनियादी सुविधाओं के बारे में पूछा जिससे हर अफसर की पत्नी को सीधे मतलब होता है. मालूम हुआ कि इस पद पर उन्हें घर के कामकाज के लिए कोई कर्मचारी नहीं मिलेंगे क्योंकि वहाँ इस कार्य के लिए कोई कर्मचारी बचे ही नहीं हैं. जितने अधिकारी पहले से हैं उन्हें ही घर के लिए कर्मचारी नहीं मिले हैं, अब नए आने वाले अधिकारी को क्या मिलेगा. यह भी तब जब उत्तर प्रदेश में प्रत्येक आईपीएस अफसर को गृह कार्यों में मदद के लिए दो कर्मचारी मिलने का नियम है, जिन्हें सरकारी भाषा में फॉलोअर (या अनुचर) कहते हैं.

मैं नहीं कह रही कि यह बहुत अच्छी व्यवस्था है. मैं इसकी कोई बहुत बड़ी समर्थक नहीं हूँ और पिछले लगभग तीन सालों से, जब से अमिताभ आईआईएम लखनऊ गए थे, हम लोग वैसे भी बिना फॉलोअर के ही आराम से रह रहे हैं और मेरे घर के सारे काम-काज आराम से हो रहे हैं. यहाँ तक कि अमिताभ के मेरठ में ईओडब्ल्यू की तैनाती के दौरान भी हमारे पास फॉलोअर नहीं थे. तकलीफ तो बस इस बात की होती है कि जहां इसी विभाग में एक-एक अफसर तो आठ-आठ, दस-दस फॉलोअर इसीलिए रखे हुए हैं क्योंकि वे सरकार के महत्वपूर्ण लोगों को खुश कर के ताकतवर कुर्सियों पर बैठे हुए हैं लेकिन चूँकि मेरे पति ने इससे अलग अपना रास्ता तय करने की सोच ली है इसीलिए वरिष्ठ अधिकारी होने के बावजूद हमें बुनियादी सहूलियतें भी जानबूझ कर नहीं दी जा रही हैं.

तो जो हाल मेरठ में था, वही लखनऊ में भी रहेगा. लेकिन इसका मतलब यह नहीं हुआ कि फॉलोअर नहीं होने के कारण मित्रों को घर पर खाना नहीं खिलाउंगी. सभी मित्रों का हमेशा घर पर स्वागत है और उनकी मर्जी के अनुसार खाना भी स्वयं बना कर खिलाने में पीछे नहीं हटूंगी. मैं तो यह बात मात्र हक की लड़ाई और सरकारों द्वारा की जाने वाली बेईमानी के उदाहरण के तौर पर कर रही हूँ. मेरठ से लखनऊ में रूल्स और मैनुअल में अचानक ट्रांसफर भी तो इसी कारण से हुआ था. ईओडब्ल्यू विभाग के कुछ चोटी के बड़े अधिकारियों द्वारा की जा रही बेईमानियों का विरोध मेरे पति ने किया और इस के कारण अचानक मिड-सेशन में उनका ट्रांसफर कर दिया गया था.

दूसरी बात मैंने गाडी की पूछी तो यहाँ भी बात वही पायी. विभाग में गाडी नहीं है और इसीलिए अमिताभ अपनी ही गाडी से दफ्तर आया-जाया करेंगे. यदि सच पूछा जाए तो इसमें भी कोई बुराई नहीं है क्योंकि करोड़ों लोग तो इसी तरह से निजी अथवा सार्वजनिक वाहनों से दफ्तर आते-जाते हैं. कष्ट बस इसी कारण से होता है क्योंकि यह सब कुछ जान-बूझ कर एक अधिकारी को परेशान करने के लिए किया जाता है, क्योंकि वह व्यवस्था की गुलामी नहीं कर रहा. जब गाडी नहीं, फॉलोअर नहीं, तो सरकारी फोन आदि कहाँ से होंगे.

लेकिन इससे कई गुणा ज्यादातर गंभीर बात यह है कि यह विभाग तो बना दिया गया है, पांच-पांच आईपीएस अफसर भी तैनात कर दिये गए हैं पर काम कुछ नहीं है. आगे शायद यही होने वाला है कि दफ्तर गए, दिन भर दफ्तर की हवा खायी और शाम होने पर घर लौट आये. ऐसा इसीलिए कि जब काम ही कुछ नहीं है तो कोई करेगा ही क्या. शायद दफ्तर बनाया ही इसीलिए गया है कि यह “डम्पिंग ग्राउंड” का काम करे और सरकार या उसके ताकतवर नुमाइंदों को जिससे नाराजगी हो जाए, उसे यहाँ शीत घर में ठंडा होने और अपनी औकात जान लेने के लिए भेज दिया जाए.

पांच आईपीएस अधिकारियों के नीचे लगभग नहीं के बराबर स्टाफ है- एक स्टेनोग्राफर हैं जो सभी अधिकारियों के साथ लगे हैं. इस तरह उस विभाग में, जहां सिद्धान्ततया नियम बनाने का ही काम हो, इस काम में अफसरों की मदद करने के लिए किसी सहायक को नहीं लगाया गया है. कारण भी बहुत साफ़ है- आखिर उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में पुलिस से सम्बंधित क़ानून और नियम बनवाना ही कौन चाहता है. ये अफसर तो बस इसीलिए यहाँ तैनात कर दिये गए हैं क्योंकि सरकार को एक डम्पिंग ग्राउंड चाहिए था. इस तरह कई लाख रुपये का सरकारी पैसा इन अधिकारियों पर खर्च तो हो रहा है पर इनसे कोई भी काम लेने की सरकार को कोई दरकार नहीं दिख रही. क्या ऐसी ही सोच से उत्तर प्रदेश और उसके विभाग का कोई भला हो सकना संभव है?

चूँकि आज के समय सरकारें और उनके अधिकारी अपने किसी काम के लिए उत्तरदायी नहीं हैं और उनकी जेब से कुछ नहीं जा रहा इसीलिए वे जो मनमानी चाहें करते रहें. अन्यथा यदि वास्तव में क़ानून का राज होता और ये अधिकारी भी अपने कुकर्मों के लिए जिम्मेदार बन पाते तो इस तरह की गैरजिम्मेदार कार्यवाही के लिए उनके जेब से इन अधिकारियों को दिये जा रहे पैसे की वसूली होनी चाहिए थी. अमिताभ यहाँ चले तो गए हैं पर चूँकि वे स्थिर और शांत रहने वाले प्राणियों में नहीं हैं, इसीलिए मैं यही सोच रही हूँ कहीं ऐसा ना हो कि कहीं वे ऐसे शांत पड़े महकमे को भी गरम ना कर दें जिससे उन्हें यहाँ से भी हटाने की नौबत आ जाए.

डॉ नूतन ठाकुर आरटीआई एक्टिविस्ट और स्वतंत्र पत्रकार के बतौर सक्रिय रहने के साथ-साथ सम-सामयिक और बेहद निजी व पारिवारिक मुद्दों पर भी खुलकर लिखती-बोलती रही हैं. नूतन का मानना है कि संविधान-कानून में उल्लखित अपने अधिकारों का हम लोग समुचित उपयोग करते रहें तो पूरे देश से ज्यादातर बुराइयां खत्म हो जाएंगी और फिर वाकई अपने देश का लोकतंत्र दुनिया का सबसे महान लोकतंत्र माना जाएगा.

Comments on “अमिताभ का लग गया काम, बाकी नूतन बताएंगी हाल-ए-धाम

  • सृजन शिल्पी says:

    वक्त तो अपनी रफ्तार से बदल ही जाएगा। ईमानदार लोगों के लिए सिस्टम में जगह होगी और वे आगे आएंगे।

    अभी हमें बस अपना काम करते जाना है। धैर्य और संतोष के साथ….

    मगर, प्रतिरोध जारी रखना है, संयत रहते हुए…..

    इस दौर को लिखने-पढ़ने में गुजारिए। जब बिना काम लिए तनख्वाह सरकार दे रही है तो समय का सदुपयोग क्यों न किया जाए?

    जिस स्टडी लीव के लिए इतना संघर्ष किए, अब तो सरकार बगैर लीव के स्टडी करने की फुरसत दे रही है…. ऐसा क्यों न मानकर चला जाए…

    आम आदमी के साथ समानुभूति का ऐसा अवसर कब मिलता !

    आपकी परिस्थितियां मेरी परिस्थितियों से काफी-कुछ मेल खाती हैं… पर हमने प्रतिकूलताओं को अपने हिसाब से ढाल लेने की कोशिश की है।

    आपलोग ऐसा बेहतर तरीके से कर सकते हैं।

    Reply
  • pramod kumar says:

    nutan ji aaj jo aapke pati ko mansik taur par pratarit kar rahe hain unko bhi durdin dekhna parega.amitabh ji wala samman unhe nahi milega.aapake pati d.g.tak jayenge.kisi bhi padadhikari ko asli samman awakash prapt karne ke bad miltahai.d.n.gautam,d.p.ojha.anadsahnkar ji ko jaisa samman aaj bhi prapt hai waisa samman birle logon ko milega.http://thapper.blogspot.com/

    Reply
  • Raghwendra Dwivedi says:

    नूतन जी, आपके एवं अमिताभ जी के जुझारूपन को नमस्कार. उस राज्य मे जहाँ लोग भूख, ग़रीबी एवं गुंडागर्दी एवं इस प्रकार की अनेकों समस्याओं से जूझ रहे हों और राज्य की मुख्यमंत्री घो,ड़ों मूर्खों एवं हाथियों की प्रतिमायें बनवाने में व्यस्त हों, एक कर्मठ एवं सच्चे व्यक्ति के साथ ऐसा व्यवहार आश्चर्यजनक नहीं है. मुख्यमंत्री एवं उनके दलाल अनुचारों का बोलबाला है, सच्चे लोगों का इन दलालों ने निकाला दीवाला है . . . . . .

    Reply
  • Ajay Tiwari says:

    Bilkul sahi kaha aapne , sarkar ke pass dumping ground hote hai , jise logo niskriya karne ke taur mai istemaal hota hai , khaskar police jaise muhakme mai ise saza ke taur pe , lekin shayad unhe yah aihsaas nahi ki sona jitna tapta hai , uski chamak aur bharti jati hai jaise taare andhere mai. Some are born great , some achieve greatness and some have greatness thrust upon them. —W. Shakespeare

    Reply
  • Vivek Umrao Glendenning says:

    Respected Dr Nutan ji,
    Do not worry about the shits. Keep walking with values without feeling tired, that is real enjoyment of life.

    I was planning to have a dinner/lunch with your family in coming weeks, now I think I will follow the rule of my house in your house, I will take charge of host and will cook vegetable, chatteney and rice. Do not worry, I have good reputation in 5 countries for cooking specially for tomato chatteney.

    Each time, Dr Amitabh bhai will be dumped we will celebrate his victory. Yes in my views, these dumps are his victories.

    Love for whole family of Amitabh bhai.
    Vivek

    Reply
  • Deepak Jaiswal says:

    शायद उत्तरप्रदेश की व्यवथा और हुक्म्नारानो को मालूम नहीं अमिताभ किस मिटटी के बने हैं…वो एक पाटलीपुत्रियन हैं… ( सर जी दी पाटलिपुत्र स्कूल, पटना के पूर्ववर्ती छात्र) .उन्होंने ने विषम परिथितियों समाज और संसार में अपनी पहचान और जगह बनाने की शिक्षा पायी है…ऐसे लोग टूटना मंजूर करेंगे पर झुकना नहीं..कर ले मायावती सरकार या बृजलाल कितने भी जुल्म-ओ-सितम.. पर जीत हमेशा अमिताभ की ही होगी…हमारी शुभकामनाएं…

    Reply
  • नूतन ठाकुर says:

    यशवंत जी,

    मैं जानती हूँ और आप भी जानते हैं कि आपने जो बातें मेरे और अमिताभ जी के लिए कहीं हैं, उनमे आपकी कही हुई बात और हमारी वास्तविक स्थिति में बहुत अंतर है. यह सही है कि हम अभी इस पथ पर बढ़ने और चलने की कोशिश मात्र कर रहे हैं पर आपके जैसे अद्भुत मित्र को पा कर हम लोगों को इस पथ पर चलने में बहुत अधिक सहूलियत मिली और बहुत अधिक सहारा भी मिला है. यह भी सही है कि हम लगातार चाहेंगे कि इस पथ पर, जिसे हम लोगों ने स्वयं अपनी मर्जी से चुना या जो पथ आपने अपने जीवन में अपने लिए अपनी इच्छा से चुना, उसे खुशी से स्वीकार करें.
    शायद कोई दूसरा यदि हम लोगों को हमारी हकीकत दिखाए तो हम उसे मानने से इनकार कर दें पर आपकी भावना के सामने हम सच के सिवाय और कुछ नहीं कह सकते. यह जरूर है कि अपनी तमाम गलतियों और कमियों को सुधार कर हम इस दिशा में चलने की कोशिश में लगे हैं.

    नूतन ठाकुर
    # 94155-34525

    Reply
  • अनुपम पाण्डेय says:

    सरकार को एक तीर्थ दर्शन विभाग भी बनाना चाहिए,जहाँ ऐसे तकनीकी खराबी वाले अधिकारियो को परिवार सहित भेज दिया जाये ,और सरकार मनमाने ढंग से निश्चिंत होकर प्रदेश को लूटे और मूर्तियां लगवाये | जिस प्रदेश की सरकार जनता को मूलभूत सुविधाए नहीं दे पा रही हो,जिनके गिरोह के मंत्री व अधिकारी ही नहीं चपरासी तक करोड़पति हो गये हो, इंदिरा आवास योजना में रहने वाला मंत्री आज करोडो रुपये का मालिक हो गया हो,उनको डिस्टर्ब करने का परिणाम अच्छा नहीं होगा|
    ये अलग बात है कि आप आइ०पी०एस० अधिकारी की पत्नी है,और सरकार भी अभी व्यस्त है, नहीं तो आपके उनका हाल संजीव भट्ट से भी बुरा हाल करते |
    लेकिन यकीन मानिये की आप बहुत से अधिकारियों व समझदार नागरिको की पत्त्नीयों की प्रेरणा स्रोत रहे है,आपकी इस मुहिम से विभाग में व्याप्त भ्रस्टाचारियो की पत्नीजी को भी ये वाइरस लग जाये तो नेता कुछ करे ना करे ,अधिकारी ही बहुत हैं| जब पूरे विभाग में एक अकेले हिलाए है तो ……….
    सरकार अगर पंगा लेगी,तो इतना कर रखा है कि एक तो सरकार बननी नहीं ऊपर से आप जमानत भी जब्त करा देंगी|

    Reply
  • brasht mayawati gov. me achchi post ka matlab bhi bhrasht afsar hai .. amitabh ji ko firozabad me kaam karte dekha hai gundo ki ruh kaap jati thi.. yaha to gundo . mafiyo, dalalo ka bol bala hai.. abi Lucknow me yah post Imandari apne aap darshati hai kamal to kichad me khilta hai door se dikhai deta hai to we don,t wory

    Reply
  • Sanjay Akhoury says:

    I am sure Mr Amitabh will definitely bring his new department in the news and will force his other coleagues to pull up their socks.He has nothing to fear now as UP Gove has tried its best and nothing worse is expected from them. Keep Up and dont give up…

    Reply
  • Pankaj Sangwan says:

    Chalo Acha hai ab lucknow ja ke natakbaji karna aap dono pati patni kahin bhi shanti se baith nahi sakte .bus politics karne me lage rehte ho. Kabhi Anna hazare ki team ko corrupt bol ke uske khilaf jantar mantar ramlila maidan me protest karte ho,kabhi swamy ramdev ka virodh karte ho.Amitabh ji itne pareshan rehte hain to IPS se resign kyon nahi kar dete. har 10,15 din me aap dono ka koi na koi naya nautanki aata rehta hai.Aap log jita bhi acha banne ki koshish kar lo desh ki janta kabhi nahi bhool sakti ki aap dono ne kaise India against corruption ki acche kamo ki alochna aur virodh kiya hai.Jai Hind Jai Bharat

    Reply
  • Dr. Mohit Verma says:

    An excellent note by an excellent social activist and an excellent wife too…:) All the very best and don’t forget that we are with you………..:) Aaap jahan bhi rahoge Amitabh Bhai, vahan Roshni hi karoge, ye mein to bohut acche se jaantahu aur chahata hu ki baaki bhi ye ab jaan se ki ye Amitabh ki Abha ab kisi ke roke se nahi rukne vaali hai………:) Jai Hind..:)

    Reply
  • Pramod KaushikNews Editor, Sarvottm Times says:

    Nutan ji sachai ki kimat chukane wala samaya jald hi samapt hoga. aur sach ka sath dene walon ka utpidan karne wale log janata dwara nakar diye jayenge. Soochana kranti ke yug me sab kuch fatafat hota hai. duniya ka har ek sacha insaan aapke saath khada nazar ayega,

    Reply
  • ॒ पंकज जी, आदमी दुन्या से परेशान होता है, इसका मतलब यह तो नहीं कि दुन्या ही छोड़ दे. आपको नूतन जी और अमिताभ जी ने या फिर यशवन्त जी ने इन्वाइट तो नहीं किया कि आओ और टिप्पणी दो. अच्छा नहीं लगा तो वैसे लिखो, लेकिन यह क्या बात हुई कि यह क्यों नहीं करते वह क्यों नहीं करते.
    नूतन जी, फालोवर तो किसी को भी नहीं मिलना चाहिये. अधिकारियों की कमी तो एक बहाना होती है सरकार के पास. किसी भी ठीक काम करने वाले अधिकारी/कर्मचारी को कोई नहीं चाहता, न उसका अफसर और न भारत की अधिकांश जनता. फिर भी Best Wishes…

    Reply
  • sachin raj singh chauhan says:

    Please forget these shits. it will never harm you. just go and do wonder. I and my team from noida will always with you and Amitabh ji at the end of my life… I know he is vey nice and gentle man. I learnt a day when he was in england my team was facing a problem in mainpuri. I wrote a mail. his prompt action helped us a lot….. It show how he is committed for social cause…Thanks…. Don’t give up.

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *