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उसी तिहाड़ गईं कनी जहां एक ‘राजा’ रहता है

: ‘बेकार’ अमर पर शुरू हुआ सिस्टम का वार : कनिमोझी उसी तिहाड़ जेल गई हैं जहां राजा रहते हैं. कनी और राजा की प्रेम कहानी की पिछले दिनों खूब चर्चा हुई. नीरा राडिया ने रतन टाटा को फोन पर बताया था कि ए. राजा के सामने जब कनिमोझी का नाम लो तो वह शरमा जाता है. कनी-राजा के प्रेम के चर्चे उस जमाने में हर ओर थे. और कनी जो चाहती थी राजा से करा लेती थी.

: ‘बेकार’ अमर पर शुरू हुआ सिस्टम का वार : कनिमोझी उसी तिहाड़ जेल गई हैं जहां राजा रहते हैं. कनी और राजा की प्रेम कहानी की पिछले दिनों खूब चर्चा हुई. नीरा राडिया ने रतन टाटा को फोन पर बताया था कि ए. राजा के सामने जब कनिमोझी का नाम लो तो वह शरमा जाता है. कनी-राजा के प्रेम के चर्चे उस जमाने में हर ओर थे. और कनी जो चाहती थी राजा से करा लेती थी.

कनी और राजा के बीच पुल की तरह थी सुपर दलाल नीरा राडिया. वह राजा से कनी के बारे में बातें करती और कनी से राजा के बारे में. फिर वह अपने आकाओं रतन टाटा वगैरह को ब्रीफ देती. बरखा दत्त को भी सब पता रहता था क्योंकि वह भी नीरा राडिया से जुड़ी थीं और राडिया उन्हें बहुत कुछ अपडेट देती रहती थी. नीरा राडिया से जुड़े फोन टेप्स जारी होने के बाद बहुत सी कहानियों पर से पर्दा उठा. लेकिन दुर्भाग्य यह कि 2जी स्कैम में टाटा अंदर नहीं गए, अंबानी अंदर नहीं गए, राडिया अंदर नहीं हुई, कई बड़े चेहरे अब भी बेदाग बनकर घूम रहे हैं. मीडिया वाले जो लोग इस खेल में शामिल थे, उनका भी बाल बांका नहीं हुआ.

पर क्या कारण है कि सिर्फ राजा और कनिमोझी को तिहाड़ जाना पड़ा है. या फिर टाटा-अंबानी की कंपनियों के अफसरों को. सूत्रों का कहना है कि दरअसल केंद्रीय जांच ब्यूरो दस जनपथ के इशारे पर चलता है. किस केस में किसे कितना फंसाना और कितना बचाना है, यह सब पहले से गाइड कर दिया जाता है, और उसी के मुताबिक सीबीआई अपनी रिपोर्ट आदि बनाकर कोर्ट में पेश करती है. मायावती और मुलायम के केस आपको याद होंगे. इन दोनों के केस सीबीआई के पास है और सीबीआई केंद्र के पास है. केंद्र सरकार राजनीतिक फायदे के लिए इन केसों का इस्तेमाल करती है.

मुलायम अगर ज्यादा उछले तो उनके केस में सीबीआई तेजी से सक्रिय हो जाएगी. मायावती अगर ज्यादा आक्रामक हुईं तो सीबीआई खुद ब खुद उनके खिलाफ आक्रामक हो जाती है. राजनीतिक रणनीति के तहत सीबीआई की गति में कमी-तेजी को कोर्ट ने भी कई बार भांपा है और फटकार भी लगाई है लेकिन अफसर बेचारे तो अफसर होते हैं, आकाओं के इशारे में दुम हिलाते या भोंकते रहते हैं. बात राजा और कनि मोझी की हो रही थी. सूत्र कहते हैं कि दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में कांग्रेस को अब डीएमके से कोई उम्मीद नहीं है.

अन्नाद्रमुक के पूर्ण बहुमत से सत्ता में आने और जयललिता के गद्दी संभालने के बाद कांग्रेस के रिश्ते जयललिता की अन्नाद्रमुक से बन सकते हैं. कांग्रेस भी उगते सूरज को सलाम करती है. इसी कारण ए. राजा को जेल भेजे जाने के बाद सोनिया-मनमोहन समेत कई कांग्रेसी दिग्गजों ने करुणानिधि से बात कर उन्हें समझाया था कि दरअसल ए. राजा को जेल भेजकर उनके खानदान के लोगों को बचाया जा रहा है, इसलिए आपको चुपचाप राजा की जेल यात्रा को स्वीकार कर लेना चाहिए और इसके खिलाफ बाहर किसी तरह की बयानबाजी या चूंचपड़ नहीं करना चाहिए.

बात करुणानिधि के समझ में आ गई और वे मान गए, चुप बैठ गए. उन्हें लगा कि अगर वे कुछ कहेंगे, करेंगे तो शायद उनकी बेटी कनिमोझी जेल न चली जाए. इस तरह राजा को अंदर करके केंद्र की कांग्रेस सरकार ने करुणानिधि व उनकी पार्टी से संबंध भी बचाए-बनाए रखा और यह मैसेज भी जनता में दे दिया कि 2जी घोटाले के घोटालेबाजों को दंडित करने में सरकार किसी किस्म का कोई समझौता नहीं कर रही. पर राजनीति बहुत क्रूर व कुत्ती चीज होती है. तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में करुणानिधि की पार्टी को मात मिलने के बाद डीएमके में कांग्रेस की कोई रुचि नहीं रह गई थी.

उल्टे जयललिता और उनकी पार्टी अन्नाद्रमुक ने करूणानिधि खानदान को निपटाने की शर्त पर कांग्रेस के साथ संबंध कायम करने के जो संकेत अतीत में दिए थे, उसे आगे बढ़ाने पर काम शुरू हो गया. और जया की ताजपोशी, कनि को जेल, दोनों घटनाक्रम करीब-करीब पास पास है तो इसमें कोई संबंध तो हैं ही. यह दोनों काम तभी हो सकता था जब विधानसभा चुनाव के नतीजे आ जाएं, करूणा खानदान हार जाए, जया जीत जाएं. सो, कनी के मामले में विधानसभा चुनाव के नतीजों तक कुछ नहीं होना था. सो, अदालत ने जमानत याचिका पर फैसला मुल्तवी कर दिया था. और, अब कनिमोझी को लाद दिया गया. तिहाड़ के लिए बुक कर दिया गया. उसी तिहाड़ में जहां राजा निवास करते हैं. 14 दिन की न्यायिक हिरासत में रिमांड पर तिहाड़ जेल भेजी गईं कनी जेल नंबर 6 में रखी गई हैं.

काश, 2जी घोटाले में शामिल कंपनियों के मालिक भी इसी तरह तिहाड़ भेजे जाते, काश मीडिया के जिन लोगों ने 2जी स्कैम में दलाली की, उन्हें तिहाड़ भेजा जाता, और उन मनमोहन को भी भेजा जाता जिनके प्रधानमंत्रित्व काल में ये महान महान घोटाले हो रहे हैं, पर मनमोहन के लाडलों का कहना है कि वे तो बड़े ईमानदार आदमी हैं, उनसे पूछ कर नहीं, चोरी-चोरी, चुपके-चुपके घोटाले-घपले किए गए. सोचिए, कैसा हो गया है अपना मुल्क जहां सब कुछ प्री-प्लांड होता है, पर हमें लगता है कि कानून अपना काम कर रहा है और अपराधी चाहे जितना बड़ा हो, कानून से बच नहीं सकता. सच कहा जाए तो सबसे बड़े अपराधी ही कानून का पालन कराने के लिए जिम्मेदार होते हैं, सो, वे छोटे-मोटे अपने विरोधी और फायदा दिला पाने में असमर्थ हो चुके अपराधी मित्रों को नापते रहते हैं, ताकि लोकतंत्र चलता हुए दिखे.

अमर सिंह का ही मामला लीजिए. सपा से लेकर कांग्रेस तक ने जब इस शख्स को दुत्कार दिया तब जाकर अब कोर्ट ने आदेश दिया है कि इनकी काली कमाई की जांच की जाए. और यह भी कि इनकी गिरफ्तारी के लिए लगी रोक हटाई जा रही है. कुछ दिनों पहले इनके टेप पर लगी रोक को सुप्रीम कोर्ट ने हटाया. टेप बजने लगे. अखबारों और न्यूज चैनलों पर बहुत थोड़ा बजा, वेबसाइटों ने फुल बजाया.

अनिल अंबानी अमर सिंह को एक टेप में कहते हैं कि आरती ले लीजिए. यानि दलाली ले लीजिए. मतलब साफ है. अमर सिंह दलाली खाने के शौकीन रहे हैं. एक टेप में वे कहते हैं कि दिवाली के पहले और बाद में आए किसी भी तरह के गिफ्ट को छोड़ा नहीं जाता. और, वे मारुति स्विफ्ट ले लेते हैं, किसी दूसरे के नाम और किसी दूसरे शहर से. सारा कुछ फोन टेपों में जाहिर है. तो, अगर अमर सिंह ने उत्तर प्रदेश विकास परिषद का अध्यक्ष रहते हुए पांच छह सौ करोड़ रुपये की दलाली खा ली है तो इसमें कोई बड़ी बात नहीं. बड़ी बात ये है कि पूरा सिस्टम अपना सोया रहता है, सब जान बूझकर, क्योंकि सिस्टम के प्रत्येक हिस्से को किसी न किसी तरह से ओबलाइज कर मुंह बंद करा दिया जाता है.

सौ बात की एक बात ये है कि इस समय यूपी में जो माया राज है, उसमें जो दलाली और उगाही का नंगा नाच चल रहा है, शराब पर, बालू पर, सरकारी फैक्ट्रियों पर, विकास के नाम पर, रोड बनाने के नाम पर, हाईवे बनाने के नाम पर, शहर बसाने के नाम पर…. उसका भांडा कब फूटेगा और कौन फोड़ेगा. यकीन मानिए. नहीं फूटेगा. सिर्फ मायावती ही क्यों, किसी भी प्रदेश को उठा लीजिए. अपनी केंद्र सरकार को उठा लीजिए. हर पल हर जगह घपला-घोटाला हो रहा है. पर उसे लिखने-बताने वाली कलमें खरीदी जा चुकी हैं. अखबार छापने वाले और टीवी चलाने वाले इन खेलों में शामिल हैं.

जजों को खरीदा-बेचा जाता हैं, उन्हें आयोगों के अध्यक्ष जैसे पदों का लोभ दिया जाता है. नामी लोगों के खिलाफ दायर जनहित याचिकाओं का कोर्टों द्वारा संज्ञान नहीं लिया जाता है. तो कैसे फूटेगा भांडा. सिर्फ उनका फूटेगा, जो यूजलेस हो चुके हैं, सिस्टम के लिए. अमर सिंह सिस्टम के साथ-पास नहीं है, और बड़बोले हैं, इसलिए वे अब बुरी तरह फंसेंगे. ए. राजा और कनिमोझी दक्षिण की हैं और चुनाव हारे हुए लोग हैं, कांग्रेस के लाभ की चीज नहीं रहे, इसलिए जेल गए. पर टाटा और अंबानी बाहर हैं. इनके केवल अफसर जेल भेजे गए. क्या तमाशा है. क्या नाटक है. लोकतंत्र चालू आहे.

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0 Comments

  1. spark

    May 20, 2011 at 5:03 pm

    जैसी करनी वैसी भरनी / ये कहावत हमलोगों ने अपने बुजुर्गो से सुना था / आज देखने को मिला / सीबीआई देर से कदम न्यायलय के फटकार के बाद उठाई /

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