पुण्य प्रसून का ओजस्वी भाषण, यशवंत का मंत्री से दमदार सवाल

: पुण्य बोले- इस सभागार में उदयन शर्मा या एसपी या राजेन्द्र माथुर होते तो संपादकों के वक्तव्य सुनने के बाद उठकर चले जाते : यशवंत ने अंबिका सोनी के समक्ष स्ट्रिंगरों का मुद्दा उठाया- लाखों रुपये लेने वाले संपादकों नहीं देते अपने स्ट्रिंगरों को पैसे : मीडिया की दयनीय दशा का वर्णन करने वाला पंकज पचौरी का भाषण अंबिका सोनी को पसंद आया :

प्रख्यात पत्रकार स्वर्गीय पंडित उदयन शर्मा के 63 वें जन्मदिन पर शानदार संवाद हुआ। उदयन शर्मा फाउंडेशन की यह दसवीं संवाद गोष्ठी थी। मौजूं विषय था- भ्रष्टाचार का मुद्दा और मीडिया की भूमिका। संवाद की शुरुआत भ्रष्टाचार के मुद्दा से ज्यादा, मीडिया की दयनीय हालात से हुई। संपादक और प्रधान संपादकों की टोली में से एक के बाद एक वक्ताओं ने मीडिया के भ्रष्टाचार के दलदल में फंसते जाने की दुहाई दी, रोना रोया। मुख्य अतिथि के तौर पर सूचना व प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी मंच पर मौजूद थी। बाद में बोलने आए मुख्य चुनाव आयुक्त वाईएस कुरैशी ने संबल देने का काम किया। कुरैशी मीडिया के योगदान पर कह गए कि चुनाव आयोग की तरफ से तैनात चार लाख कैमरे धांधली की तस्वीर कैद नहीं कर पाते, पर यह काम मीडिया के चंद हजार कैमरे कर देते हैं।

मीडिया संस्थानों की मदद से ही चुनाव सुधार का काम हो पा रहा हैं। सेल्फ रेगुलेशन की सफलता की शानदार नजीर पेश करते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान लागू होने वाला मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट राजनेताओं की तरफ से सेल्फ रेगुलेशन के तौर बनाई गई। उस पर सुप्रीम कोर्ट का ठप्पा लग जाने के बाद बखूबी निभाया जा रहा है। उन्होंने मीडिया से कायम खौफ का जिक्र करने के साथ अपराधी और भ्रष्टाचारी को रोकने के लिए चुनाव सुधार को अनिवार्य बताया।

शुरुआत चौथी दुनिया के प्रधान संपादक संतोष भारतीय ने यह कहकर की कि पहले वक्ता के तौर पर बोलने की वजह से उनमें भय है। भय की बात से शुरू हुए संवाद ने मीडियाकर्मियों से खचाखच भरे सभागार में भय और बेबसी के माहौल को हावी कर दिया। तकरीबन डेढ घंटे बाद सभा इसी भय के माहौल की तस्वीर उकेरती रही। लेकिन जब पुण्य प्रसून वाजपेयी बोलने आए तो ये कहकर हलचल पैदा कर दी कि अगर आज उदयन शर्मा होते, एसपी होते, राजेन्द्र माथुर होते तो सभागार से उठकर चले जाते। पुण्य को पूर्व वक्ताओं का केंद्र सरकार को कठघरे में न खड़ा करना और मुद्दे को गोलमोल कर देना ठीक नहीं लगा।

संतोष भारतीय के बाद शशि शेखर ने पत्रकारिता के जन सरोकार को बचाने के लिए समाज को उत्तरदायी बनने की जरूरत जाहिर की। पत्रकारिता में दक्ष लोगों की कमी बताई। पेड न्यूज से धूमिल छवि का रोना रोया। अपनी सीमाएं और खुद की बेबसी का हवाला दिया। स्टार टीवी के सीईओ उदय शंकर ने अंग्रेजी में बोलते हुए कहा कि वो पत्रकार हैं। पत्रकारिता को लेकर उनमें चिंता है। उन्होंने खोजी पत्रकारिता से मीडिया की बेरूखी को खतरनाक बताया। ज़ी न्यूज के प्रधान संपादक सतीश के सिंह ने मीडिया के बजाय जिम्मेदारी विशिष्ट दीर्घा में मौजूद चुनाव आयुक्त की तरफ ढकेल दी और कहा कि देश के बचाने के लिए इंस्टीच्यूशनों में सुधार की जरूरत है। चुनाव सुधार उनमें सबसे अहम है। उन्होने भी पेड न्यूज की दाग के हवाले से खुद को संपादकों ने खुद को शर्मसार बताया।

किसी ने भी मौके के मुताबिक उदयन शर्मा की तरह मीडिया की जिम्मेदारी को बेहतर तरीके से आगे बढाने का संकल्प नहीं दोहराया। मीडिया भ्रष्टाचार के मुद्दा को लेकर ज्यादा बेहतर तरीके से लोगों के सामने कैसे आए इसकी तैयारी या योजना पर किसी ने बात नहीं की। संतोष भारतीय ने जरूर फोलोअप स्टोरी की खत्म होती परंपरा को फिर शुरू कर हालात के बदलने के लिए हस्तक्षेप को जरूरी बताया। लेकिन गिरेबान में झांकने की दुहाई देकर पंकज पचौरी ने तो बोलते वक्त हद ही कर दी। इंटरनेट से निकाल लाए कुछ गौण रिपोर्ट्स के हवाले से मीडिया पर नीर- क्षीर-विवेक खत्म हो जाने का लांछन लगा दिया। जानकारियों के हवाले से दर्शकों को सन्न करने की पचौरी ने जो कोशिश की उसमें पत्रकारिता की खिंचाई कम,  सरकार की चाटुकारिता ज्यादा नजर आई।

पंकज पचौरी ने अन्ना हजारे के आंदोलन को जरूरत से ज्यादा कवरेज देकर पार्टी बन जाने का आरोप लगाया। मीडिया समूहों के कारपोरेट जगत से नापाक रिश्ते का हवाला दिया और पत्रकारों को नसीहत दे डाला कि या तो विरोध की खबरों को प्रमुखता देने के बजाय वो खुलेआम विपक्षी राजनीतिक दल को ज्वाईन कर लें। उनको सरकार में कोई कोरकसर नजर नहीं आया। पंकज ने बगल में बैठी सूचना व प्रसारण मंत्री से मुखातिब होते हुए सभागार में घबराने वाली तस्वीर पैदा कर दी कि अगर हम नहीं सुधरे तो जंतर मंतर पर लोकजन टोपी-टप्पर और बैनर-पट्टी लेकर मीडिया के खिलाफ प्रदर्शन को तैयार बैठे हैं।

पचौरी की खिंची तस्वीर ने बतौर मुख्य अतिथि बोलने आईं अंबिका सोनी के लिए मुफीद माहौल बना दिया। वो खुद को सरकार के प्रतिनिधि से ज्यादा आम नागरिक की भावना का हवाला देते हुए टीवी पर जो दिखाया जा रहा है उसके प्रति असंतोष जताया। साथ ही बेबसी जाहिर की कि वो कुछ नहीं कर सकती क्योंकि निजी तौर पर वह सेल्फ रेगुलेशन की पक्षधर हैं। मंत्री के तौर पर उन्होंने जरूर बताया कि अगस्त से सरकार प्रशिक्षित पत्रकारों की टोली खड़ी करने के लिए इंडियन इंस्टीच्यूट ऑफ मास काम्युनिकेशन (आईआईएमसी) के चार नए केंद्र पूर्वोत्तर के मिजोरम, केरल, विदर्भ और जम्मू कश्मीर में शुरू करने जा रही है।

तकरीबन डेढ घंटे तक पत्रकारों, स्वर्गीय उदयन शर्मा के जानकार नेताओं और जानने वालों से खचाखच भरे सभागार में मीडिया आत्मग्लानि से प्लावित होती रही। अंबिका सोनी के बोलने के बाद मंत्रमुग्ध श्रोताओं को नींद से जगाने के लिए भडास4मीडिया के संपादक यशवंत सिंह ने एक सवाल दागा। पूछा- मंत्री महोदया, देश भर के स्ट्रिंगरों की हालत खराब है, उन्हें पैसे नहीं दिए जाते, उन्हें उनका चैनल व संपादक पैसे न देकर ब्लैकमेलिंग कर जीवन चलाने के लिए मजबूर करता है जबकि यहां बैठे संपादक लोग महीने में ग्यारह ग्यारह लाख रुपये तनख्वाह लेते हैं, क्या यह करप्शन नहीं है, क्या कभी आपका मंत्रालय पत्रकारिता करने वाले इन स्ट्रिंगरों की सुध लेगा? मंत्री ने गोलमटोल जवाब देकर सिर्फ इतना ही बताया कि स्ट्रिंगरों की दुर्दशा से वो वाकिफ हैं और वो प्रो-स्ट्रिंगर हैं।

अंबिका सोनी जाने को हुईं, तो दर्शकदीर्घा में सभागार छोड़ जाने की हलचल पैदा हुई संचालक कुरआन अली ने पुण्य प्रसून वाजपेयी को आवाज दी। अंबिका ने भी तुरंत रुख्सती का फैसला मुल्तवी कर दिया। पुण्य से अंबिका ने कहा कि वो उनको रोज रात में चाव से सुनती हैं। इसलिए आज भी सुनकर जाएंगी। प्रसून बोलने लगे तो उन्होंने पूरी फिजा ही बदल दी। माहौल पर यह करते हुए पहला चोट मारा कि सभा को जिस दिशा में ले जाया जा रहा है, उसमें समझदार पत्रकार को पलभर भी नहीं टिकना चाहिए था। फिर जो बात किसी ने नहीं कही उसे पूरी तल्खी से उन्होंने कह दिया, ‘प्रधानमंत्री इमानदार नहीं हैं। अगर यकीन नहीं तो उनसे मिलने वालों का रोजनामचा मंगाकर देख लीजिए। सात रेसकोर्स रोड में वो लोग धड़ल्ले से आ जा रहे हैं जिन पर राजीव गांधी के जमाने में भी प्रधानमंत्री से मिल पाने पर पाबंदी थी।’

पुण्य का इशारा राजीव गांधी के शुरुआती दिनों में धीरूभाई अंबानी पर प्रधानमंत्री से मिलने पर लगी पाबंदी की तरफ था। जिसे बाद में मौजूदा वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने तीन तिकड़म करके ठीक करा लिया। मतलब प्रधानमंत्री राजीव गांधी से धीरुभाई की मुलाकात हो गई थी। पत्रकारिता के ओज का मयार खींचते हुए पुण्य प्रसून ने कहा कि औद्योगिक घराने के शीर्षस्थ ना सिर्फ प्रधानमंत्री से मिलते हैं बल्कि पूरी नीति को कार्पोरेट के पक्ष में उलटते पलटे रहते हैं। इससे दो भारत की तस्वीर बन गई है। एक जो नर्मदा-गंगा के मैदान के किनारे बसती है और इन नदियों से बनी उर्वरता के सहारे जीती है। पूछ लीजिए तो देश की इस विशाल आबादी से तो ये ना तो वित्त मंत्री का नाम जानते हैं और न ही वित्त मंत्री या प्रधानमंत्री के आसरे जी रहे हैं। क्या प्रधानमंत्री को इन लोगों का ख्याल है।

प्रसून ने संकेतों में बता दिया कि सरकार का जनता से सरोकार खत्म हो रहा है और पत्रकारिता के लिए मुफीद वक्त है। मंच पर मौजूद संचार मंत्री अंबिका सोनी तक को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उन लोगों को दनादन चैनलों के लाइसेंस की रेवड़ियां बांटी गई हैं जो जनता के बीच संदिग्ध कारोबार कर रहे हैं। पहले बोलकर अपने अंदाज में वाहवाही लूट गईं अंबिका सोनी के लिए मंच पर टिके रहना भारी पड़ता रहा। प्रसून ने कारपोरेट जगत के लिए काम कर रहे पत्रकारों को भी नहीं छोडा। प्रधानमंत्री से मिल आए पांच संपादकों पर मैनेज हो जाने का आरोप मढा। रंग में भंग घुलने पर अफसोस जताते हुए कहा कि अब सुधीन्द्र कुलकर्णी जैसे भी रिलायंस के लिए काम कर रहे हैं।

सभा की अध्यक्षता राहुल देव ने की और अंबिका सोनी के जाते ही सभागार और मंच खाली सा हो गया। आशुतोष को भी बोलना था पर वो मौजूद नहीं थे। विनोद अग्निहोत्री बाद के वक्ताओं में शामिल रहे। तब तक सभा में सिर्फ वो ही लोग मौजूद रहे जिनका स्वर्गीय उदयन शर्मा की धर्मपत्नी नीलिमा जी से व्यक्तिगत रिश्ता था। किसी ने भी मौके के मुताबिक रोने के बजाय उदयन शर्मा की तरह मीडिया की जिम्मेदारी को बेहतर तरीके से आगे बढाने का संकल्प नहीं दोहराया। चार का रिश्ता था। कुरबान अली बेहतरीन संचालन करते रहे। वक्त वक्त पर उदयन शर्मा फाउंडेशन की तरफ से लोगों के बीच साल भर किए जाने वाले कामों का हवाला देते रहे।

संवाद स्थल कांस्टीच्यूशन कल्ब की गेट पर स्वर्गीय पंडित जी के पुत्र और पत्रकार कार्तिकेय शर्मा अभिवादन के लिए मौजूद थे। संतोष नायर ने फाउंडेशन के कार्यक्रम की सफलता के आलोक कुमारलिए अथक मेहनत की थी। उन जैसे समर्पितों की वजह से ही शीर्ष पत्रकार स्वर्गीय उदयन शर्मा की याद में आयोजन शानदार सरोकार की सभा में तब्दील हो गई।

लेखक आलोक कुमार ने कई अखबारों और न्यूज चैनलों में वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके हैं. उन्होंने ‘आज’, ‘देशप्राण’, ‘स्पेक्टिक्स इंडिया’, ‘करंट न्यूज’, होम टीवी, ‘माया’, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज, आजतक, सहारा समय, न्यूज़ 24, दैनिक भास्कर, नेपाल वन टीवी में अपनी सेवाएं दी हैं.  झारखंड के पहले मुख्यमंत्री के दिल्ली में मीडिया सलाहकार रहे. कुल तेरह नौकरियां करने के बाद आलोक इन दिनों मुक्त पत्रकारिता की राह पर हैं.

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Comments on “पुण्य प्रसून का ओजस्वी भाषण, यशवंत का मंत्री से दमदार सवाल

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    अब न्यूज चैनल का लाइसेंस देने के पहले सरकार इस बात की जांच करेगी कि जिसने चैनल के लिए आवेदन किया है, उसके साथ जुड़ने वाले लोगों के पास अनुभव कितना है। मीडिया के क्षेत्र में उनकी साख कैसी है। साथ ही सूचना और प्रसारण मंत्रालय इस बात की भी तस्दीक करेगा कि आवेदन करने वाली कंपनी की कुल नेटवर्थ कितनी है। नए आवेदित चैनलों के लाइसेंसिंग प्रक्रिया से जुड़ी यह बातें सूचना और प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने स्व. उदयन शर्मा के 63वें जन्मदिन पर आयोजित परिचर्चा के दौरान कहीं। अंबिका सोनी ने कहा कि अब ऐसा नहीं होगा कि किसी ने अपने खेत बेच कर पैसे कुछ पैसे इकठ्ठा कर लिए और नए चैनल के लिए आवेदन कर दिया। मंत्रालय अब इस बात की भी जांच करेगा कि उस कंपनी की मार्केट साख क्या है, और नेटवर्थ क्या है? चैनलों के कंटेंट को लेकर उन्होंने कहा कि लगातार एक रेगुलेट्री बॉडी की स्थापना की बात की जा रही है, लेकिन मैं अब भी इस बात के पक्ष में हूं कि यह रेगुलेशन आपके भीतर ही पैदा हो। इस परिचर्चा के विषय भ्रष्टाचार का मुद्दा और मीडिया की भूमिका विषय पर कई वरिष्ठ संपादकों ने अपनी राय रखी। जिनमें चौथी दुनिया के प्रधान संपादक संतोष भारतीय, हिंदुस्तान के प्रधान संपादक शशि शेखर, जी न्यूज के संपादक सतीश के सिंह, एनडीटीवी के प्रबंध संपादक पंकज पचौरी, जी न्यूज के सलाहकार संपादक पुण्य प्रसून वाजपेयी, और नई दुनिया के राजनीतिक संपादक विनोद अग्निहोत्री प्रमुख थे। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी थीं और बतौर विशिष्ट अतिथि स्टार इंडिया के सीईओ उदय शंकर मौजूद थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार व आज समाज के संपादक राहुल देव ने की, जबकि मंच का संचालन इंडिया न्यूज के प्रबंध संपादक कुर्बान अली के जिम्मे था।

    उन्होंने कहा कि सरकार नहीं चाहती कि मीडिया पर किसी तरह का नियंत्रण हो। केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने साफ किया कि चैनलों को यह सोचना चाहिए कि वे किस तरह से आत्म नियंत्रण रखते हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष सरकार आईआईएमसी की चार और शाखाएं मिजोरम, केरल, जन्मू व कश्मीर और विदर्भ में शुरू कर रही है ताकि देश भर में पत्रकारिता के प्रशिक्षण की बेहतर व्यवस्था हो सके।

    सेमिनार को संबोधित करते हुए स्टार टीवी के सीईओ उदय शंकर ने कहा कि सत्य, निष्पक्षता और न्याय पत्रकारिता के मूल मंत्र व उसूल हैं और इसकी स्थापना के लिये पत्रकार हर रोज संघर्ष करते रहते हैं। दैनिक हिन्दुस्तान के प्रधान संपादक शशि शेखर ने अपने कहा कि आज पत्रकारों के सामने कई बड़ी चुनौतियां है। पत्रकारिता में तमाम तरह के दबाव काम करते हैं लेकिन हमें पहले अपने घर को ठीक करना होगा, तभी हम दूसरों पर अंगुली उठा सकते हैं। एनडीटीवी के पंकज पचैरी ने मीडिया के अंदर फैले भ्रष्टाचार को उजागर करने की अपील की। जी न्यूज के पुण्य प्रसून वाजपेयी ने भ्रष्टाचार के लिए सरकार और मीडिया दोनों की दोषी ठहराते हुए जमकर प्रहार किया। चौथी दुनिया के संतोष भारतीय ने उदयन शर्मा के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की अध्यक्षता आज समाज के संपादक राहुल देव ने की। मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी, नई दुनिया के विनोद अग्निहोत्री, वरिष्ठ पत्रकार कुर्बान अली, सतीश के सिंह सहित अन्य गणमान्य लोगों ने भी अपने विचार रखे।

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  • one more news says:

    : मीडिया पर नियंत्रण नहीं चाहती सरकार : केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने कहा है कि सरकार नए चैनलों को स्वीकृति देने से पहले यह जांच करेगी कि चैनल-स्वामी सचमुच किस हैसियत का है और जो लोग चैनल का काम देख रहे हैं, उनकी योग्यता और अनुभव क्या है। यह नहीं होगा कि कोई भी व्यक्ति दो प्लाट बेच कर चैनल चलाने लगे। श्रीमती अंबिका सोनी सोमवार को नई दिल्ली में उदयन शर्मा के जन्मदिन पर आयोजित एक सेमिनार में बोल रही थीं।

    उन्होंने कहा कि सरकार नहीं चाहती कि मीडिया पर किसी तरह का नियंत्रण हो। केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने साफ किया कि चैनलों को यह सोचना चाहिए कि वे किस तरह से आत्म नियंत्रण रखते हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष सरकार आईआईएमसी की चार और शाखाएं मिजोरम, केरल, जन्मू व कश्मीर और विदर्भ में शुरू कर रही है ताकि देश भर में पत्रकारिता के प्रशिक्षण की बेहतर व्यवस्था हो सके।

    सेमिनार को संबोधित करते हुए स्टार टीवी के सीईओ उदय शंकर ने कहा कि सत्य, निष्पक्षता और न्याय पत्रकारिता के मूल मंत्र व उसूल हैं और इसकी स्थापना के लिये पत्रकार हर रोज संघर्ष करते रहते हैं। दैनिक हिन्दुस्तान के प्रधान संपादक शशि शेखर ने अपने कहा कि आज पत्रकारों के सामने कई बड़ी चुनौतियां है। पत्रकारिता में तमाम तरह के दबाव काम करते हैं लेकिन हमें पहले अपने घर को ठीक करना होगा, तभी हम दूसरों पर अंगुली उठा सकते हैं। एनडीटीवी के पंकज पचैरी ने मीडिया के अंदर फैले भ्रष्टाचार को उजागर करने की अपील की। जी न्यूज के पुण्य प्रसून वाजपेयी ने भ्रष्टाचार के लिए सरकार और मीडिया दोनों की दोषी ठहराते हुए जमकर प्रहार किया। चौथी दुनिया के संतोष भारतीय ने उदयन शर्मा के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की अध्यक्षता आज समाज के संपादक राहुल देव ने की। मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी, नई दुनिया के विनोद अग्निहोत्री, वरिष्ठ पत्रकार कुर्बान अली, सतीश के सिंह सहित अन्य गणमान्य लोगों ने भी अपने विचार रखे।

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  • सोनू उपाध्‍याय says:

    प्रभाषजी अपनी बेबाकी के लिए माने जाते रहे.. उनके पीछे की पट्टी सूनी रही.. प्रसून जी पर भरोसा रहा है.. उन्‍होंने बनाए रखा है.. प्रसून जी हमारी ओर से चार बातें मीडिया की नियंता को सुनाने के लिए बधाइयां.. और बहुत बहुत अच्‍छा लगा यशवंत जी पत्रकारों की जिंदगी के सच को भरे मंच पर मंत्री महोदया जी के सामने रखने के लिए..
    वाह उम्‍दा बहुत उम्‍दा..
    प्रसून बोलने लगे तो उन्होंने पूरी फिजा ही बदल दी। माहौल पर यह करते हुए पहला चोट मारा कि सभा को जिस दिशा में ले जाया जा रहा है, उसमें समझदार पत्रकार को पलभर भी नहीं टिकना चाहिए था। फिर जो बात किसी ने नहीं कही उसे पूरी तल्खी से उन्होंने कह दिया, ‘प्रधानमंत्री इमानदार नहीं हैं। अगर यकीन नहीं तो उनसे मिलने वालों का रोजनामचा मंगाकर देख लीजिए। सात रेसकोर्स रोड में वो लोग धड़ल्ले से आ जा रहे हैं जिन पर राजीव गांधी के जमाने में भी प्रधानमंत्री से मिल पाने पर पाबंदी थी।’
    मंच पर मौजूद संचार मंत्री अंबिका सोनी तक को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उन लोगों को दनादन चैनलों के लाइसेंस की रेवड़ियां बांटी गई हैं जो जनता के बीच संदिग्ध कारोबार कर रहे हैं।

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  • pramod kumar.muz.bihar says:

    mukhyachunav aaukt badhayee ke patra hain jo unhone swikar kiya ki chunav me midiya ki aham bhumika hai.yah dardnak sach hai ki koi muffasil star ka patrakar jan par khellkar chunav me garbari karane wale ke virudha khabar likhata hai to use 5 varson tak sasankit rahana parta hai.in patrakaron ki surakcha ke liye ek kalam hi rahati hai. chaliye param adarniye udyan sarma ji ki yad me hamare agraj sampadak bhaiyon ne kuch achha karane ke liye socha hai to use amali jama jarur pahnayenge.ek vinamra nivedan hai sabhi bare patrakar aapane apane gaon par kuch jarur likhe.dekhiye kaise bat ban jati hai.aap likhenge to rapt chapegi aur hukamrano ka dhayan us or jayega. ant me udyan sarma ji ko hardik sardhanjali.

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  • Hariom garg says:

    भाई यशवंत जी ,
    स्व.उदयन जी के 63 वें जन्म दिन पर आयोजित कार्यक्रम की आलोक जी की रिपोर्ट को पढ़कर अब यह पक्का हो गया है क़ि पत्रकार जगत में प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया के ऊंचे ओहदों पर बैठे कई स्वनामधन्य लोग इस बिरादरी की काली भेड़ें हैं .जिनका काम ही सरकार में बैठे लोगों की चाटुकारिता करना रहगया है .NDTV को वैसे भी “सरकारी भांड “ही माना जाता है और यह बात पंकज पचोरी के उद्भोदन के बाद पूरी तरह सही साबित होती लग रही है | अन्ना हजारे के आन्दोलन को जरूरत से ज्यादा कवरेज देने की बात से उनका आशय क्या था?यदि उन्हें लगता है क़ि अन्ना के मुद्दे को कवरेज देना गलत है तो उन्हें अपने NDTV से उसका बयकोट करवा देना चाहिए तब उन्हें खुद इस बात का पता चल जाएगा क़ि क्या गलत और क्या सही है ?,सरकार की चम्पी -मालिश करके उनका क्या इरादा है ,यह तो वे ही जाने पर शायद कोई उम्मीद लगाए बैठे हों ?
    संतोष भारतीय जी ने बहुत सही कहा कि किसी भी स्टोरी के फोल्लोअप की बात को अब भुलाया जाचुका है .जबक़ि इसकी जरूरत है |
    TV और अखबारों के स्ट्रिंगरों की पीड़ा का मुद्दा उठाकर आपने गरीब और मेहनतकश पत्रकारों के हिमायत हासिल की है , बहुत -बहुत धन्यवाद |
    हरिओम गर्ग (पूर्व संवाददाता ) पंजाब केसरी ,बीकानेर

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  • pashyanti Shukla says:

    Zee mei kaam krne valey hum sab prasoon ji ko baba kehtey hai….
    vo apney is sambodhan ko humesha hi sarthak krtey rhey hai.. jise issey fark ni padta ki doosron ko kya fark pad raha hai..jo such hai vo vahi boltey hai…
    maine hindi bhawan mei pehli baar unhey suna tha..hindi divas par, aur ye dekha tha jab unhey sunney k liye dono darwazo ke bahar tak na janey kaha kaha se log umad aye the…he is A Real Journalist. I adore him Always.

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  • ravi kumer says:

    भा्ई यशवंत जी..ये पुण्य प्रसून वाजपेयी कौन है..वही जो सहारा को चलाते-चलाते वहां से निकाल दिया गया।मैं जानता हूं इस अहंकारी शख्स को।जब सहारा में ये 7 लाख लेता था तब सहारा की गुलामी करता था।सहारा के कॉर्पोरेट कल्चर को फॉलो करता था।इसने वहां कई पत्रकारों को इतना तंग किया कि बेचारे नौकरी छोड़ गए।अपनी बिरादरी के विरोधी इस इंसान को पत्रकारिता के बारे में बोलने का हक किसने दिया है।आज जब जी न्यूज में एक बुलेटिन करता है तो पत्रकारिता और उसके सरोकारों के बारे में बोलता है।किसने दी इसको इजाजत।मैं तो हैरान हूं कि इस घमंडी इंसान को सेमिनार में बुलाया किसने और क्यों।ये इंसान तो पहले बी बेपर्दा हो चुका है।दिक्कत ये है यशवंत जी..चाहे शशिशेखर हो..उदय शंकर हो या प्रसून वाजपेयी..इन तीनों में समानता है।अपनी सहयोगियों के साथ इनका व्यवहार बेहद शर्मनाक रहा है।प्रसून तो अपने सामने सभी को बेवकूफ समझता है।प्रसून जैसों को समझना चाहिए कि खुद को उस्ताद समझना ठीक है,लेकिन दूसरे को बेवकूफ नहीं समझना चाहिए।पत्रकार बिरादरी में उनकी क्या इज्जत है,ये बताने की जरूरत नहीं।आदमी को पहले एक बेहतर इंसान होना चाहिए..

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  • ravi kumer says:

    पश्यन्ती प्रसून की खुशामद अल्फाजों के ज़रिए मत करो..इतना कमज़र्फ है कि अल्फाज़ भी शर्मा जाएं..जिन्होंने उसे भुगता है..उनसे पूछो।मंच पर लंबी चौड़ी बातें करने वाले पत्रकार बहुत हैं।कुछ खुलेआम बेइमान हैं तो कुछ ने ईमानदारी का चोला पहन रखा है।रही बात नॉलेज की..बोलने की सलाहियत की तो मैं आपको दुरुस्त कर दूं..कि आजतक में ये रिसर्च मैं तैनात था..वहीं से थोड़ा पढ़कर बाहर निकला है और मंचों पर और टीवी स्क्रीन पर ज्ञान बघारता है।हिन्दी शुद्ध बोलनी इसे आती नहीं..उर्दू तो छोड़ ही दीजिए।निहायत खराब तलफ्फुस है इसका..।हिन्दी दिवस पर क्या बोला होगा इसने..

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