पुलिस बर्बरता का शिकार पत्रकारिता का छात्र

: आंख में गंभीर चोट, पांच टांके लगे : दरोगा का बेटा होने के बावजूद नहीं बख्शा : देहरादून। मित्रता, सेवा, सुरक्षा को अपना मूल ध्येय और खुद को जन मित्र होने का दावा करने वाली उत्तराखंड पुलिस ने मंगलवार को इन वाक्यों के ठीक विपरीत आचरण करते हुए पत्रकारिता के एक छात्र के साथ जमकर बदसलूकी। एसपी सिटी देहरादून की गाडी पर सवार पुलिसकर्मियों ने उसे बेवजह रोक कर बेरहमी से पीटा। उसकी आंख पर गंभीर चोट आई और पांच टांके लगे हैं।  युवक का नाम संदीप सिंह धारीवाल है और वह राजधानी के मोहिनी रोड क्षेत्र का निवासी है। संदीप ने पुलिस कर्मियों पर आरोप लगाते हुए बताया कि पुलिस ने उसकी सोने की चेन और कुछ नगदी भी छीन ली। जब उसने घटना की सूचना अपने परिजनों को देने कि कोशिश की तो उसका मोबाइल भी छीनकर तोड़ दिया गया।

मॉसकॉम का छात्र संदीप देर रात कहीं से लौट रहा था। जब वह राजधानी के राजीव नगर पहुंचा तो सफेद रंग की बुलेरो सवार पुलिसकर्मियों ने उसे रोक लिया और उसके बुलेट मोटरसाईकिल की चाभी छीन ली और जब उसने इसका कारण जानना चाहा तो उससे मारपीट की गई। संदीप के अनुसार पुलिसकर्मियों की संख्या चार से पांच थी और इनमें बगैर वर्दी वालों ने उसकी पिटाई की, जिनमें वह नेहरू कॉलोनी थाने में तैनात एक कांस्टेबल को पहचानता है।

पिटाई करने के बाद पुलिस वालों ने उसे वहां से भगा दिया। सुबह जब संदीप के घरवालों ने देखा तो उसे नजदीकी अस्पताल पहुंचाया जहां उसकी दांयी आंख के नीचे पांच टांके चले है। सूत्रों के अनुसार संदीप के पिता खुद पुलिस विभाग में हैं और इस समय हरिद्वार जनपद के मंलौर थाने में बतौर दरोगा तैनात हैं। संदीप ने मामले की लिखित तहरीर दी है और पुलिस मामले की जांच का आश्वासन दे रही है। इस मामले पर एसपी सिटी अजय जोशी का कहना है कि संभव है कि रात में पुलिस लाइन से उनकी कार को पुलिसकर्मी खाने के लिए ले गए हों। पर सबसे ये है कि क्या कोई पुलिसकर्मी किसी उच्चाधिकारी की कार से कोई अपराध कर दे तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। बहरहाल इस घटना ने मानवाधिकारों की मुखर वकालत करने वाले प्रदेश के पुलिस प्रमुख ज्योति स्वरूप पांडे के दावे को पलीता लगाने का काम किया है।

देहरादून से धीरेन्द्र प्रताप सिंह की रिपोर्ट

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Comments on “पुलिस बर्बरता का शिकार पत्रकारिता का छात्र

  • shailendra parashar says:

    a to polis walo ki liye aam baat hai aj hm ap pad likh gaye h to apni baat janta tak or sikayat bagira kar dete h lekian a such h ki apolis ko to moti kamai chaiye chahe wo jaise bhi ho,
    student of makhanlal chaturvedi rastiye patrkarta

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