प्रणय रॉय, आप हमें माफ ही कर दें!

आलोक तोमरडॉक्टर प्रणय रॉय और उनकी धर्म पत्नी राधिका ने नोटिस भिजवाया है। इनकी कंपनी एनडीटीवी की तरफ से ये नोटिस भिजवाया गया है। एनडीटीवी ने ऐसे कामों के लिए एक भारी भरकम कॉरपोरेट कानूनी कंपनी की सेवाएं ले रखी हैं। एनडीटीवी की ओर से लीगल नोटिस मुझे, यशवंत को, एमजे अकबर को, डेटलाइन इंडिया को, भड़ास4मीडिया को, दी संडे गार्जियन को थमाया गया है, मेल के जरिए भी और डाक से भेजकर भी।

एनडीटीवी ने कानूनी नोटिस भेज कर कहा है कि कंपनी के शेयरों की हेराफेरी में प्रणय रॉय की तुलना केतन पारिख से करने को ले कर हम सभी लोग माफी मांगें और उस माफी को धूम धड़ाके के साथ अपने-अपने पोर्टलों-साइटों पर प्रकाशित करें। अब जो बरखा दत्त मनमोहन सिंह को भी आदेश दे सकती है कि राजा को मंत्री बना लीजिए और राजा मंत्री बन भी जाते हैं ऐसी बरखा के बादलों यानी बॉस प्रणय रॉय का हम क्या बिगाड़ सकते हैं इसलिए लीजिए धूम धड़ाके से माफी पेश है। श्री प्रणय रॉय, हमे अफसोस है और हम शर्मिंदा हैं कि हमने आपके सिर्फ एक पक्ष के बारे में लिखा। कहानियां तो दिल्ली स्कूल ऑफ इकॉनामिक्स के जमाने से चलती आ रही हैं और स्टार वाले मर्डोक से भी सुना है कि एनडीटीवी ने स्टार के ठेके पर बनाए गए हर शो का कॉपीराइट हड़प करने की कैसे कोशिश की थी। लेकिन हमे लगा कि गंदा है लेकिन धंधा है। हम आपको रोजी रोटी के मामले में जलील क्यों करें? मगर बात आपने ही छेड़ी है तो जवाब भी सुन लीजिए।

आप कितनी रकम लेकर टीवी की दुनिया में आए थे और आज हजारों करोड़ का जो कारोबार बिखेर रखा है इसके पीछे का सच क्या है? क्या सच यह नहीं है कि करोड़ की पहली रकम आपने दूरदर्शन के फुटेज उसी को बेच कर कमाई थी और इस मामले में आपके और दूरदर्शन के कई बड़े अफसरों के खिलाफ बाकायदा सीबीआई में मुकदमा दर्ज हुआ था। अभी इसी साल यानी 2010 में सीबीआई ने लगभग उसी तरह यह मुकदमा वापस ले लिया जैसे महाठग और पद्मभूषण संत सिंह चटवाल का मुकदमा वापस लिया था। पद्म विभूषण तो आप भी हैं। पद्म सम्मानों और आर्थिक अपराधों का क्या आपस में कोई रिश्ता होता है?

एनडीटीवी पहले सिर्फ दूरदर्शन के लिए साप्ताहिक और बजट समीक्षा के कार्यक्रम बनाती थी। आप श्री प्रणय रॉय उस समय एक कमरे से चलने वाली इस कंपनी के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन थे। आप पर और आपकी कंपनी पर दूरदर्शन को तीन करोड़ बावन लाख रुपए का नुकसान पहुंचाने और सरकारी अफसरों को रिश्वत देने के मामले में साजिश या धारा 120 बी और प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत मामले दर्ज हुए थे।

उस समय दूरदर्शन से निकल कर बाद में स्टार टीवी में चले गए रतिकांत बसु के खिलाफ भी सीबीआई ने जांच शुरू की थी और इस बारे में उस समय के पर्सनल विभाग के अतिरिक्त सचिव वी लक्ष्मी रतन के हाथ की लिखी फाइल मौजूद है। इस मामले में रिश्वत देने वाले प्रणय रॉय थे और लेने वाले बसु। अगर मेरी जानकारी गलत हो तो लुथराओं से कहिए कि एक और नोटिस भेज दें। उसका भी जवाब अपने पास है। हमें मालूम है कि वे क्या लिखेंगे। हमे मालूम है कि आपके दामन में कितने छेद हैं।

सीबीआई ने जांच की शुरुआत के वक्त दो आरोपों पर ध्यान दिया था। रतिकांत बसु ने दूरदर्शन के महानिदेशक की हैसियत से प्रणय रॉय के एनडीटीवी द्वारा बनाए गए समाचार कार्यक्रम ‘दी वर्ल्ड स्पीक’ को प्रायोजकों से ज्यादा पैसे वसूलने के लिए ए वर्ग में रखा था। यह पहला और आखिरी समाचार कार्यक्रम था जो इस वर्ग में तब तक रखा गया था। संसद की लोकलेखा समिति तक ने इस घपले की आलोचना की थी। प्रणय बाबू आप किस दुनिया में रहते हैं? कोई आश्चर्य की बात नहीं कि जब एनडीटीवी और स्टार टीवी का गठबंधन हुआ तो रतिकांत बसु को सरकारी नौकरी से रिटायर होने के सिर्फ तीसरे दिन सारे नियम तोड़ कर 15 लाख रुपए प्रति माह के वेतन पर स्टार का सीईओ बना दिया गया। यह रकम बसु को बीस साल पहले मिलती थी। इसीलिए उस समय बसु ने कहा कि लोग मेरी तरक्की से जलते हैं इसलिए मामला बनाया जा रहा है।

स्टार टीवी जब भारत में आया था तो हमारे यहां प्रसारण का लाइसेंस पाने के लिए कई कड़ी शर्ते थीं। तब तक भारत सरकार मनमोहन सिंह के निवेश करो और जूते मारो वाले मंत्र की पूरी तरह भेंट नहीं चढ़ चुकी थी। किसी भी प्रकाशन या प्रसारण संस्था के लिए जरूरी था कि उसमें बहुसंख्यक शेयर्स भारतीय नागरिको के हों। इसीलिए स्टार ने एक फर्जी कंपनी बनाई जो आज भी स्टार न्यूज को चलाती है और उसकी पूंजी कुल मिला कर इतनी नहीं है कि अपने किसी बड़े अधिकारी का एक महीने का वेतन भी दे सके। इसके पहले स्टार ने जी न्यूज के साथ मिल कर धंधा शुरू करने की पहल की थी मगर जी न्यूज ने इरादे समझे और रिश्ता तोड़ लिया। स्टार को हेराफेरी के सारे तरीके बसु ने ही सिखाए थे।

जब स्टार का डीटीएच लाइसेंस प्रतिबंधित कर दिया गया था तो रतिकांत बसु, प्रणय रॉय और उस समय बहती गंगा में हाथ धोने की कोशिश कर रहे रतज शर्मा सीधे तत्कालीन प्रधानमंत्री के पास भागे थे और प्रधानमंत्री ने उस समय के कैबिनेट सचिव टी एस आर सुब्रमण्यम, संचार सचिव वी के गोकाक और सूचना और प्रसारण सचिव एन पी नवानी को इस बात के लिए झाड़ा था कि बगैर प्रधानमंत्री कार्यालय को बताए इतना महत्वपूर्ण फैसला कैसे कर लिया गया। पूरी अफसरशाही बसु और प्रणय रॉय के खिलाफ हो गई थी। बसु पर हर तरफ से हमले हो रहे थे। उन्होंने 15 दिन में इस्तीफा देने की घोषणा कर दी थी। रुपर्ट मर्डोक से ज्यादा बड़ा मीडिया नटवरलाल आज तक दुनिया में पैदा नहीं हुआ। मर्डोक ने अपने बड़े अधिकारी गैरी डेवी को एक सप्ताह में दो बार दिल्ली भेजा, खुद हांगकांग में आ कर बैठ गए। रतिकांत बसु और प्रणय रॉय दिन रात सौदा बचाने की कोशिश कर रहे थे।

आखिरकार जब पूरा खेल उजागर हुआ सीबीआई ने प्रणय रॉय, बसु और दूरदर्शन के पांच और बड़े अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया। सीबीआई के विशेष जज अजित भरिहोक की अदालत में जो चार्जशीट दी गई उसमें साफ कहा गया था कि प्रणय रॉय ने आपराधिक षडयंत्र किया है और दूरदर्शन के अधिकारियों ने इसमें मदद की है। खुद प्रणय रॉय ने एनडीटीवी की वार्षिक रपट में 2004 में जा कर इस मामले का वर्णन किया। कुछ लोग कहते हैं कि सुषमा स्वराज ने एनडीए सरकार के दौरान यह मामला दर्ज करवाया था। मगर बात इतनी आसान नहीं है। सुषमा स्वराज मर्डोक से निपटना चाहती थी और एनडीटीवी वगैरह उनके लिए इतने बडे़ नहीं हुए थे।

श्री प्रणय रॉय ने शायद 20 जनवरी 1998 का इंडियन एक्सप्रेस पढ़ा होगा। एक जमाने में राधिका रॉय इसी अखबार की समाचार संपादक हुआ करती थी। इसी अखबार में लिखा है कि सीबीआई ने आपराधिक साजिश का जो मामला एनडीटीवी के प्रबंध निदेशक प्रणय रॉय और सीईओ रतिकांत बसु के खिलाफ दर्ज किया है उसमें शिव शर्मा, हरीश अवस्थी, अशोक मनुसुखानी, एस कपूर और एस कृष्णा भी शामिल थे। हर छोटे छोटे मामले पर खबरें बनाने वाले और देश में बाघों को बचाने की मुहिम चलाने वाले एनडीटीवी की सीबीआई के एक मामले के प्रति खामोशी समझ में नहीं आई। सीबीआई के रिकॉर्ड में दर्ज है कि एनडीटीवी को विशेष तौर पर माइक्रोवेव और उपग्रह अपलिंकिंग सुविधाएं बिना उचित रिस्क के दी गई थी और मुंबई स्टूडियो में आने वाले दुनिया भर के फुटेज को वे इस्तेमाल भी कर सकते थे। विमला भल्ला नाम की एक अधिकारी मदद करती थी और प्रणय रॉय दिन रात और साप्ताहिक शो में भी इन दृश्यों का इस्तेमाल करके इनकी कीमत दूरदर्शन से ही वसूल करते थे।

असली खेल तो यह था कि प्रणय रॉय के शो की कीमत दूरदर्शन की कॉस्टिंग कमेटी ने पचास हजार रुपए प्रति एपिसोड तय की थी मगर एनडीटीवी ने 81 हजार रुपए प्रति एपिसोड का बिल दिया था और विमला भल्ला ने ओएसडी न्यूज के नाते इसे फौरन मंजूर कर लिया था। यह मामला काल के शून्य में चला गया। रही बात एनडीटीवी के शेयर घोटाले की तो प्रणय रॉय ने बहुत चतुर रास्ता खोजा। बहुत सारी कंपनियां विदेश में बनाई और भारत में सौ रुपए में भी नहीं बिक रहे शेयर को वहां पांच सौ रुपए के आसपास बेच कर नीदरलैंड और लंदन तक से लगभग एक हजार करोड़ रुपए वसूल लिए। आखिर दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में बहुत सारे बंगले और अर्चना सिनेमा जैसे महंगे कॉम्पलेक्स ऐसे ही नहीं खरीद लिए जाते। संपत्ति हड़पने की अलग कहानी है।

प्रणय रॉय आपको याद होगा कि आपके चैनल ने गैर समाचार श्रेणी का जो पहला और आखिरी कार्यक्रम ‘जी मंत्री जी’ बनाया था और जो स्टार प्लस पर प्रसारित हुआ था, उसे मैंने ही लिखा था। हिंदी न जानने वाली एक ताड़का इसकी प्रोड्यूसर थी और उनके सौभाग्य से लंदन में बीबीसी में बैठे परवेज आलम हर पटकथा की जांच कर के अगर जरूरी होता था तो मुझे संशोधन की सलाह देते थे। जब आपकी इतनी खिंचाई कर ली तो थोड़ा बहुत अपनी तारीफ करने का हक भी बनता है। ‘जी मंत्री जी’ प्रसारित हुआ और काफी चर्चित हुआ। पेंग्विन ने इसकी पटकथा पर किताब भी छापी। लेकिन ‘जी प्रधानमंत्री जी’ मैंने नहीं लिखा था और उसे स्टार ने प्रसारण लायक भी नहीं समझा। इस कहानी से शिक्षा मिलती है कि सब कुछ हेराफेरी से नहीं हो जाता। थोड़ी बुद्वि, थोड़ी प्रतिभा और थोड़ी ईमानदारी चाहिए होती है।

मैं वाकई आपका प्रशंसक रहा हूं और मुझे यहां जो लिखा गया है वह लिखते हुए प्रसन्नता नहीं हो रही। लेकिन एक मुद्दा था जो उठाया गया था जिसे आपने वकीलों को मोटी फीस दे कर झूठा करार दिया था। सच को पूरे संदर्भों के साथ सच की तरह देखा जाए इसलिए यह लिखा गया है। अगर बुरा लगे तो माफ कर दीजिएगा और ध्यान रखिएगा कि यह मेरी आखिरी माफी है। अदालत जाना हो तो चलते हैं, वहां भी मिल लेंगे।

लेखक आलोक तोमर देश के जाने-माने पत्रकार हैं.

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Comments on “प्रणय रॉय, आप हमें माफ ही कर दें!

  • खबरी says:

    इसे कहते हैं कि आ बैल मुझे जोर से मार। प्रणव राय जी काहे को आलोक तोमर जी से उलझ पड़े। वाह आलोक जी आप का भी जवाब नहीं।

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  • कमल शर्मा says:

    बधाई आलोक जी। ताल ठोंककर जवाब दिया है। शर्म होगी तो मामला वापस ले ही लेंगे। बेहद उम्‍दा जवाब लिखा जिसे देश का तगड़े से तगड़ा वकील भी नहीं लिख सकता।

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  • Aalok ji aapne ki mafi ndtv ke baboo ko samajhh mein aa gayi hogi aakhir paala aapse pada hain to uska ahsas to hona chahiye. main suna hai ki aapki tabiyat abhi kharab chal rahi abhi aap in gadhon ke chakkar mein na padiye aap swasth ho jaiye aise gadhon se baad mein nipat lijiyega. meri Ishwar se yahi prasthna hain ki aap jald swasth ho jayein. taaki in chor uchchakon ne desh ki janta ke saath jo ghor mazaak karte hain uski pol khulti rahe.
    aapka subhchintak AmitVirat

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  • mahandra singh rathore says:

    alok tomar ji ne notice ka jawab bhi de diya, mafi bhi mang li or khari khari batten bhi keh di. bhauht acchi bhasha ka istemal kiya gaya hai. pehle parvay ray ke bere mai jo likh gaya tha wo maryadit bhasha nahi thi alok ji. aap hindi ke jane mana patrakar hain. yah nahi bhulna chahiye ki shri prabash joshi se aap parbhavit rehe hain or wo aapke iedal bhi rehe hain. yah baat kya kabhi unki lekh mai dekhi hai.yeh digar baat hai ki kuch mamalon mai aap unse alag ray bhi rekhte the. jansatta ki paripati ko kayam rekhen. dhanywad.

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  • ravindra pancholi says:

    आलोक जी,चाटुकरिता और भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुके पत्रकारों की भीड़ में आप जैसे हिम्मती पत्रकार को मेरा शत शत नमन है.

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  • qamaruddin farooqui says:

    आलोक जी को आदाब अर्ज़ हे , आलोक जी आज आपने जिस तरह से राये साहब को जवाब दिया हे उसे पड़कर लगता हे कि राये साहब अपने आप को कोस रहे होंगे कि उन्होंने कियूं आपसे पंगा लिया . कियुनकी आपके जवाब को पड़कर वो सौच रहे होंगे कि ” हे भगवान् में इतना बड़ा बेईमान हूँ , मेने इतने बड़े बड़े कारनामे किये हें ” …. कियूं कि कामयाबी के नशे में वो ये भूल गए होंगे कि इस कामयाबी के लिए उन्होंने जो रास्ता अपनाया वो अपराधिक, षड्यंत्रकारी और धोके बाज़ी से होकर गुज़रा हे , आज वो अपने आप में श्री पर्णव राये जी हें , लेकिन आपने उन्हें याद दिलाया हे कि वो असल में किया हें , खेर में जियादा कुछ कह नहीं सकता , जो आपने लिखा और मेने समझा उसका लब्बो लुआब ये हे कि आपके पास जानकारिओं का खजाना हे , और जिसे आप समय समय पर हम जेसे कंगालों पर लुटाते रहते हें , आपकी बेबाकी और खुद्दारी को तहे दिल से सलाम !

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  • Ek Subhekshak says:

    Dear Alok Bhai ,
    Bahut shandaar aur garima se jawab diya hai aapne .
    Aap jald swasthya ho inhi kamnao k saath….

    Regards,

    Reply
  • RAKESH SHARMA says:

    आलोक जी,
    नमस्कार।
    बड़े भाई पहले तो आपके स्वास्थ्य के लिए मंगलकामना है। आपने बड़े ही बेहतर ढंग से माफी मांगी है। इससे बेहतर कुछ हो ही नहीं सकता था। वैसे स्पष्ट भाषा में कहूं तो पूरा ही निपटा दिया। इस पर भी शर्म नहीं आई तो मां गंगा से प्रार्थना करूंगा कि ऐसे लोगों के पाप कर्मों को माफ करने के लिए कोई विशेष व्यवस्था कर लें। इस तरह की बहुत सी गंदगी से भविष्य में पत्रकारिता जगत को छुटकारा पाना है। रही बात जनता की तो उसकी नजर में इन लोगों की कीमत दो कोड़ी की भी नहीं रह गई है। मुझे तो फिक्र होने लगी है कि आने वाले समय में ये बड़े नाम वाले लोग सार्वजनिक कार्यक्रमों में जनता के हाथों से पिटने ही ना लग जाएं। अब जरा दम है तो जनता के बीच जाकर दिखाएं।

    आपका,
    राकेश शर्मा,
    कुरुक्षेत्र।

    Reply
  • waah, alok ji.pranav babu ka kachcha chitta shaleenta se khol diya. sharam hogi to court nahi jayenge….nahi to waha bhii nipat jayenge …… khushi is baat kii hai ki aaj aap jaise log to hai jo sach ko kehne ka sahas apni lekhi me rakhte hai…. prabhash joshi ke baad aap hi aise bache hai jo kisi bat ko bebaki se rakhte hai…..baki sare patrakar bik chuke hai………. hamam mai saare nange hai……… kya rajdeep kya pranav…. kya barkha. kya chawla…… etc

    Reply
  • कुमार गौरव says:

    प्रणब राय की किरकिरी हो गयी … [b]भड़ास फॉर मीडिया में प्रणब राय की भद पीट गयी[/b] ..
    मेरे विचार से प्रणब राय एक बार फिर आलोक जी को टार्गेट कर कानूनी नोटिस भेजेंगे क्योंकि ” खिसियानी बिल्ली खम्बा नोचे ”
    वैसे उनके पास कानूनी नोटिस भेजने के सिवाय उपाय क्या है .. ?
    अगर उनके द्वारा क़ानूनी नोटिस नहीं भेजा जाएगा तो वे हाई -सोसाईटी में क्या मुह दिखायेंगे …और अगर भेजते हैं तो आलोक जी उनकी रही सही इज्ज़त भी उतर देंगे हल्के से ..
    कुमार गौरव , जमशेदपुर

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  • are bhaia ye prav roy urf bangali baabu to bada chor hai. ise nanga karne ki zarurat hai. aalok ji sunder sunder..likhte rahie..ranav jaise logon ka chehra benkaab hona chaahie..

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  • Ravi Shukla Bilaspur Chhattishgarh says:

    alok ji ise kahte hai jor ka jhataka dhere se barkha bhi NDTV ki hi hai na uske karnaame se andaja lagaya ja sakta hai uska boss kaisa hoga likhte chale aur sehat ka bi dhayan rakhe lokho logo ki duwa aap ke saath hai

    Reply
  • आलोक जी
    भाई अजब सी हिम्मत है आप में। कैंसर से पीड़ित एक वायक्ति इतनी हिम्मत कैसे कर सकता है समझ से बाहर है। दुआ करता हूँ आप जल्दी से ठीक हो जाएँ और इसी ईमानदारी से लिखते रहें।

    Reply
  • संजय कुमार सिंह says:

    आलोक भाई
    प्रणय राय कोर्ट में आपसे मुकाबला करना चाहें या न चाहें उनकी लॉ फर्म जरूर चाहेगी कि वे ऐसा करें ताकि उसे फीस मिलती रहे। ऐसे मामलों में अदालत से यह अपील भी की जाती है कि अपमान जनक खबरों के प्रकाशन पर रोक लगाने का आदेश दे। प्रणय राय और उनकी लॉ फर्म ऐसी खबरों से परेशान होकर यही करने वाली है। इसलिए अच्छा होगा कि आप जो और जितना लिख सकते हैं लिख दें। वैसे भी, अपमान एक बार करें या सौ बार सजा एक ही होगी !!

    Reply
  • MUDIT MATHUR says:

    Alok Tomar deserves lot of applause for digging out truth. I wish him speedy recovery from his ailment to serve our Nation in best possible ways.

    Reply
  • आलोक तोमर says:

    [b]शिबली जी,
    मेरे स्वास्थ्य की चिंता करने के लिए शुक्रिया. आपसे और सभी मित्रों से निवेदन है कि मेरे और मेरे अभिव्यक्ति के बीच बेचारे केंसर को ना लायें. मैं गोली से मर सकता हूँ, जहाज़ गिरने से मर सकता हूँ यहाँ तक कि कोई सुन्दर द्वीप मिल जाए तो उसकी सुन्दरता पर निहाल होकर मर सकता हूँ, मगर केंसर से नहीं मरूंगा . ये मरने का उचित और सार्थक तरीका नहीं है.
    एक प्रोफेशनल के तौर पर प्रणय रॉय की सदा बहुत इज्ज़त की है मगर जब जो लिखना होता है वह लिखना अपने गुरु प्रभाष जोशी से सीखा है. क्षमा सोहती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो..
    मुझ पर दया नहीं करें, मेरा साथ दें और मेरी डेटलाइन इंडिया देखते रहें, बस इतनी दोस्ती निभा दीजिये. बाकी से मैं निपट लूँगा. ” मेरी हालत पे तरस खाने वालो मुझे मुआफ करो, मैं अभी ज़िंदा हूँ, औरों से जियादा ज़िंदा.”
    शुभकामनाएं
    आलोक तोमर [/b]

    Reply
  • आलोक तोमर says:

    जो आज्ञा संजय.
    लेकिन सिर्फ लिखने के लिए ही लिखना है? प्रणय ने माफी चाही थी सो ”मांग ली”. अब उनकी अदालती फर्म चाहे जो करे. मगर प्रणय रॉय कोई मेरी भैंस थोड़े ही खोल ले गए हैं कि नींद में भी बडबडाता रहूँ. जब अदालत में सामना होगा तो बोलती बंद कर दूंगा, विश्वास रखो. जबरन क्या उलझना! उम्र में बड़े हैं, उनके लिए फिलहाल इतनी ही डोज काफी है. इशारा समझेंगे तो चुपचाप धंधा करते रहेंगे. उलझेंगे तो देखा जाएगा. ठीक है ना ?[b][/b]

    Reply
  • आलोक जी, भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुके पत्रकारों की भीड़ में आप जैसे हिम्मती पत्रकार को मेरा शत शत नमन है.

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  • भारतीय़ नागरिक says:

    आलोक जी, आपका स्वास्थ्य जल्दी से सुधरे… इसकी प्रार्थना करते हैं… प्रणव राय जी से बिल्कुल सही माफी मांगी है.

    Reply
  • neeraj mahere says:

    परम आदरणीय
    आलोक तोमर जी
    में बहुत छोटा पत्रिकारिता का सिपाही हूँ पर में एक बात जरुर जनता हूँ जो बात आपने कही है उसको पड़ने के बाद उन लोगों को एक बात समझ लेनी चाहिये शेर जैसा कलेजा बाजार में नहीं मिलता और शेर चम्बल में पैदा होते हैं मुंबई और दिल्ली में नहीं | जो लोग आपको बीमार बता रहे हैं उससे लगता है के बे अपनी बीमारी छुपा रहे हैं और उनको जो बीमारी है बो छूने और उससे भी फैलती है …………होशियार …होशियार |
    आपका शिष्य और सिपाही
    नीरज महेरे
    नई दुनिया
    इटावा उत्तर प्रदेश

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  • दिनेश says:

    आलोक जी,
    अपन भी प्रणय राय के प्रशंसक हैं व आपके घनघोर प्रशंसक। प्रणय राय व एनडीटीवी के बारे में, यह सब पढ़ना-सुनना सचमुच बुरा लग रहा हैं। कुछ वैसा ही जैसे किसी पर आस्था हो और वह खण्डित हो जाये। पर बात जब निकल ही गयी है तो उसे दूर तलक तो जाना ही है। माफी मांगने की आपकी यह शैली बिल्कुल नयी है, अनूठा शिल्प है। काश कि इसे पढ़ते हुए प्रणय राये के चेहरे के भाव लाइव देखा जा सकता !

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  • वाह भाई वाह….करारा थप्पड़ मारा है प्रणय को…मज़ा आ गया…तमाम भ्रष्टों और उनके रहनुमाओं को ऐसे ही चटकाते रहें…अल्लाह आपको इतनी उम्र बख्शे कि ऐसे नामुरादों का आप सफाया कर सकें…

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  • naman hai aapko . or jab sab aaj patrakaaron ko gaali dete hain, aapki kalam k saaye me parakaar hone par fakr hota hai . jab tak aap jaise sacche patrakar hain , patrakaarita hai . shri prabhash je se ek baar milna hua tha .. unka vyaktitv bhut prabhavit kar gaya tha.. durbhagya hamara ki ab unse dubara milna nahi ho paaega.. aaap he apni shishya bana lijie .

    Reply
  • param aadarneeya alok sir ,

    patrakaarita aaj aapke kaaran ujjwal hai .shri prabhash joshi je se ek baar milne ka subhagya hua tha ..lekin ab unki chaya nahi rahi..ab aapko he patrakarita me Guru manne ki iccha hoti hai ..mera saubhagya hoga agar aap deeksha denge.

    Reply
  • .आलोक तोम को और बधाई भड़ास को जिसने इतनी बेबाकी दिखाई और बिना लाग लपेट के पाठको को बताया की स्वस्थ पत्रकारिता किसे कहते है..
    मधुप वशिस्थ
    बीकानेर

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